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जिले की चार विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अनमैपड मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है। इनकी 2003 की सूची मे मैपिंग नहीं हुई है । इन मतदाताओं के माता-पिता या दादा-दादी का नाम ही नहीं था। प्रारंभिक प्रकाशन में बचे मतदाताओं के हिसाब से जिले में विभिन्न वोटर्स को नोटिस जारी किया गया है। अब इन मतदाताओं को मान्य 11 में से कोई भी एक दस्तावेज देना होगा। तहसीलों में एआरओ सुनवाई भी कर रहे हैं। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नाम मतदाता सूची से कटने का डर है। एसआईआर की प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन 23 दिसंबर को हो चुका है।
KARTALA TIMES
जिले की चार विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अनमैपड मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है। इनकी 2003 की सूची मे मैपिंग नहीं हुई है । इन मतदाताओं के माता-पिता या दादा-दादी का नाम ही नहीं था। प्रारंभिक प्रकाशन में बचे मतदाताओं के हिसाब से जिले में विभिन्न वोटर्स को नोटिस जारी किया गया है। अब इन मतदाताओं को मान्य 11 में से कोई भी एक दस्तावेज देना होगा। तहसीलों में एआरओ सुनवाई भी कर रहे हैं। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नाम मतदाता सूची से कटने का डर है। एसआईआर की प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन 23 दिसंबर को हो चुका है।
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- जिले की चार विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अनमैपड मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है। इनकी 2003 की सूची मे मैपिंग नहीं हुई है । इन मतदाताओं के माता-पिता या दादा-दादी का नाम ही नहीं था। प्रारंभिक प्रकाशन में बचे मतदाताओं के हिसाब से जिले में विभिन्न वोटर्स को नोटिस जारी किया गया है। अब इन मतदाताओं को मान्य 11 में से कोई भी एक दस्तावेज देना होगा। तहसीलों में एआरओ सुनवाई भी कर रहे हैं। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नाम मतदाता सूची से कटने का डर है। एसआईआर की प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन 23 दिसंबर को हो चुका है।1
- Post by Gautam karsh1
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- स्कूल जाने को निकली 17 वर्ष 3 दिन की नाबालिक बालिका बिन बताएं हुई लापता परिजनों ने थाना चकरभाठा में दर्ज कराई रिपोर्ट आज शनिवार की रात 10:00 बजे चकरभाठा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आज शनिवार की दोपहर 1:00 बजे चकरभाठा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक 48 वर्षीय पिता ने थाना चकरभाठा में उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई है की में चकरभाठा थाना छेत्र में रहता हूँ ई रिक्शा चलाता हूँ कि मेरी 17 साल 03 दिन मेरी छोटी लडकी है जो चकरभाठा केम्प के एक स्कूल में कक्षा 12 वी में पढ़ाई करती है जो दिनांक 09/01/2026 के सुबह करीबन 11:00 बजे अपने स्कूल जाने के लिये निकली थी साम को 5 बजे छुट्टी होने के बाद घर नहीं पहुंची तो उसके स्कूल जा कर पता किये वहा बताये की ओ सुबह स्कूल ही नहीं आई है जिसकी आसपास एवं रिस्तेदारों मे पता तलाश किया पता नहीं चली है सुरु मे लगा कही चली गई होंगी लेकिन वापस नहीं आई तो आज रिपोर्ट करने आया हु मुझे सक है की मेरी नाबालिक लड़की को कोई अज्ञात व्यक्ति के द्वारा बहला फुसला कर अपहरण कर ले गया है मुझे शंका है कि मेरी लड़की को इस मोबाईल नंबर के चालक लड़के द्वारा अपहरण कर ले गया होगा क्योंकि इस मोबाइल नंबर वाले से मेरी लड़की मोबाइल मे बात करती थी प्रॉर्थी की रिपोर्ट पर चकरभाठा पुलिस ने अपराध धारा धारा 137(2) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मामले की विवेचना जारी है इस घटना से एक चीज तो साफ है कि आज कल की कई नाबालिक बालिकाय लड़को के मीठी मीठी बातों के बहकावे में आकर अपने परिवार को छोड़कर कहीं चली जाती है जिससे परिवार वालों को काफी दुख और परेशानियों का सामना करना पड़ता है लड़कियों के ज्यादातर घर से भगाने के मामलों में देखा गया है कि जिन लड़कियों के घर की आर्थिक स्थिति खराब रहती है या जिनके माता-पिता नहीं रहते या फिर माता-पिता में हमेशा लड़ाई झगडा घर मे अशांति रहती हैं ऐसी घर की बालिकाये जल्दी से किसी लड़के के बातों के बहकावे में आकर घर परिवार को छोड़कर चली जाती है जिसका परिणाम है यह होता है की बालिका की उम्र नाबालिक होने के कारण पुलिस उन्हें ढूंढ ही निकलती है चाहे ओ नाबालिक बालिका किसी से शादी भी कर ले या फिर बच्चे हो जाए तो भी जिस दिन पुलिस के हत्या चढ़ते हैं तो युवक को जेल की हवा खानी पड़ती है एवं इस घटना में भी एक हस्ते खेलते परिवार की खुशियों को तबाह करने में मुख्य कारण मोबाइल को ही दोसी ठहराया गया है इस लिए बोला बोला भी जाता है की बेटों को बाइक और बेटियों को मोबाइल बहुत सोचा समझ कर देना चाहिए1
- धोखे से ‘गोद’ लिया या ममता का सौदा ? मैनपाट के मजदूर दंपति ने पड़ोसी व कोलकाता के अग्रवाल परिवार पर लगाया बच्चा छीनने का आरोप, सरगुजा एसपी से शिकायत… ₹100 के स्टांप पर दस्तखत कराकर 2 माह के मासूम को ले जाने का दावा; 1 लाख रुपये के लेनदेन की भी चर्चा सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के जामढ़ोढ़ी निवासी एक मजदूर दंपत्ति ने पुलिस अधीक्षक (SP) और पुलिस महानिरीक्षक (IG) को लिखित शिकायत सौंपकर अपने दो माह के मासूम बच्चे को साज़िश के तहत ‘गायब’ करने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ितों का दावा है कि उनकी गरीबी और अशिक्षा का लाभ उठाकर पड़ोसी और कोलकाता के एक दंपत्ति ने मिलकर उनके बच्चे को उनसे दूर कर दिया है। हालांकि, सच्चाई क्या है यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। शिकायत के अनुसार: भविष्य का झांसा देकर विश्वास में लिया प्रार्थी विजय कुमार और उनकी पत्नी बसंती मरावी ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वे मजदूरी कर अपने पांच बच्चों का भरण-पोषण करते हैं। उनके पड़ोसी दालू ने उन्हें विश्वास दिलाया कि कोलकाता निवासी गौतम कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी श्वेता दीवान बहुत संपन्न परिवार से हैं। प्रार्थी का आरोप है कि पड़ोसी ने उन्हें लालच दिया कि यदि वे अपने सबसे छोटे बच्चे ‘अयांश’ को उक्त दंपत्ति को सौंप देते हैं, तो वे उसका पालन-पोषण अपने पुत्र की तरह करेंगे। बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद में माता-पिता इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हो गए। न्यायालय परिसर में गोदनामे का खेल शिकायती पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 28 दिसंबर 2025 को आरोपियों ने पीड़ित दंपत्ति को अम्बिकापुर जिला न्यायालय परिसर बुलाया। यहाँ स्टाम्प वेंडर से 100 रुपए का स्टाम्प प्राप्त कर एक दस्तावेज तैयार कराया गया। पीड़ितों का आरोप है कि नोटरी के समक्ष उन पर विधि विरुद्ध तरीके से दबाव डाला गया और उनकी अनपढ़ता का फायदा उठाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ले लिए गए। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान जच्चा-बच्चा कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी आरोपियों ने अपने कब्जे में ले लिए। 1 लाख रुपये के लेनदेन का आरोप और मानव तस्करी की आशंका पीड़िता बसंती मरावी ने आवेदन में दावा किया है कि आरोपी गौतम कुमार अग्रवाल और श्वेता दीवान ने इस कथित समझौते के एवज में पड़ोसी दालू को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये का भुगतान किया है। प्रार्थी ने इसे मानव तस्करी से जोड़ते हुए आशंका जताई है कि उनके बच्चे को कहीं और विक्रय कर दिया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अब उन्हें बच्चे से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है। मामले में राउरकेला निवासी एक महिला पुष्पा अग्रवाल की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगी हकीकत कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल ‘कारा’ (CARA) के नियमों के तहत ही मान्य होती है, स्टाम्प पेपर पर ऐसा कोई भी समझौता विधिक रूप से शून्य है। फिलहाल, यह पूरा मामला केवल पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए ₹100 के स्टांप पर हुए कथित गोदनामा पर आधारित है। सच्चाई की पुष्टि के लिए पुलिस को आरोपियों का पक्ष और दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच करनी होगी। पीड़ित परिवार ने तत्काल FIR दर्ज करने और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी की मांग की है। स्टाम्प पर बच्चा गोद लेना या देना ‘सफेद झूठ’ और दंडनीय अपराध इस मामले में ₹100 के स्टाम्प पर जिस ‘गोदनामा’ की बात सामने आई है, कानूनन उसकी कोई मान्यता नहीं है। देश में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया बेहद सख्त है: CARA ही एकमात्र रास्ता: भारत में बच्चा गोद लेने के लिए ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी’ (CARA) के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण और अदालती आदेश अनिवार्य है। जेजे एक्ट का उल्लंघन: जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act), 2015 के अनुसार, बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चे का हस्तांतरण करना ‘चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) की श्रेणी में आ सकता है। इसमें दोषी को कड़ी जेल और जुर्माने का प्रावधान है। नोटरी की सीमा: कोई भी नोटरी या स्टाम्प वेंडर बच्चा गोद लेने का दस्तावेज प्रमाणित करने के लिए अधिकृत नहीं है। यदि ऐसा किया गया है, तो उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आती है। क्यों है यह अवैध?: बच्चे कोई वस्तु नहीं हैं जिनका सौदा स्टाम्प पेपर पर किया जा सके। बिना जिला बाल संरक्षण इकाई और सीडब्ल्यूसी (CWC) की जांच के किसी को भी बच्चा सौंपना बच्चे के जीवन को खतरे में डालना माना जाता है।1
- 7 करोड़ का धान खा गये चुहे छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिला से यह मामला सामने आया 26000 हजार कोंटल धान का घोटाला धान हो या किसानों का हक अधिकार किसने किया गायब कौन हैं जिम्मेदार शासन प्रशासन के अधिकारी है या कौन |1
- भोजपुरी टोल प्लाजा मे 37वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का आयोजन आज शनिवार की सुबह 11 बजे से साम 5 बजे तक बिल्हा :भोजपुरी टोल प्लाजा मे 37वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के उपलक्ष्य में, सड़क दुर्घटनाओं के वास्तविक और भयावह परिणामों को दर्शाने के लिए नकली दुर्घटनाओं के साथ वास्तविक प्रदर्शन आयोजित की जा रही है संदेश स्पष्ट और सशक्त है — “यातायात नियमों की अनदेखी करने पर यह किसी के साथ भी हो सकता है।” इस गतिविधि के माध्यम से, हमारा उद्देश्य जनता में यह जागरूकता पैदा करना है कि सड़क सुरक्षा कोई विकल्प नहीं है — यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जो जीवन बचाती है। सड़क सुरक्षा पर हालिया खबरें बताती हैं कि जनवरी 2026 में भारत भर में 'राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह' मनाया जा रहा है, जिसमें जागरूकता अभियान, डिजिटल प्रवर्तन (जैसे 'नो हेलमेट, नो फ्यूल'), और खराब सड़कों की मरम्मत पर जोर दिया जा रहा है; वहीं, दिल्ली जैसे राज्य 2030 तक दुर्घटनाएं 50% कम करने के लक्ष्य के साथ नई कार्ययोजनाएं बना रहे हैं, लेकिन हर साल हजारों मौतें (खासकर युवा दोपहिया सवारों की) एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिससे नियमों का पालन और जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है।1