रानेश्वर प्रखंड में रविवार शाम को लगभग 15-20 मिनट तक हुई बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली। हालांकि, स्थानीय लोग बिजली की आंखमिचौली के खेल से लगातार परेशान हैं। वर्तमान में गर्मी अपने चरम पर है, जहां दिन में 11 बजे के बाद लोगों का घर से बाहर निकलना असंभव हो रहा है। अत्यधिक गर्मी के कारण शिक्षा विभाग ने स्कूलों में लगभग 19 दिनों की छुट्टी घोषित कर दी है। मौसम का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा था, जिससे दोपहर में लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल हो गया था। लोगों के अनुसार, बीते एक सप्ताह से बिजली का यह आंखमिचौली का खेल जारी है। विद्युत आपूर्ति कुछ समय के लिए कट-कट कर हो रही है, जिससे गर्मी से राहत देने वाले उपकरण केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। विद्युत आपूर्ति में इस लापरवाही को लेकर लोग काफी नाराज हैं। बारिश होने के बाद, समाचार लिखे जाने तक यानी शाम 6 बजकर 9 मिनट पर, मौसम का तापमान गिरकर 34 डिग्री सेल्सियस हो गया था और मौसम काफी सुहाना बन गया था। इसके बावजूद, बिजली की अनियमित आपूर्ति की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
रानेश्वर प्रखंड में रविवार शाम को लगभग 15-20 मिनट तक हुई बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली। हालांकि, स्थानीय लोग बिजली की आंखमिचौली के खेल से लगातार परेशान हैं। वर्तमान में गर्मी अपने चरम पर है, जहां दिन में 11 बजे के बाद लोगों का घर से बाहर निकलना असंभव हो रहा है। अत्यधिक गर्मी के कारण शिक्षा विभाग ने स्कूलों में लगभग 19 दिनों की छुट्टी घोषित कर दी है। मौसम का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा था, जिससे दोपहर में लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल हो गया था। लोगों के अनुसार, बीते एक सप्ताह से बिजली का यह आंखमिचौली का खेल जारी है। विद्युत आपूर्ति कुछ समय के लिए कट-कट कर हो रही है, जिससे गर्मी से राहत देने वाले उपकरण केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। विद्युत आपूर्ति में इस लापरवाही को लेकर लोग काफी नाराज हैं। बारिश होने के बाद, समाचार लिखे जाने तक यानी शाम 6 बजकर 9 मिनट पर, मौसम का तापमान गिरकर 34 डिग्री सेल्सियस हो गया था और मौसम काफी सुहाना बन गया था। इसके बावजूद, बिजली की अनियमित आपूर्ति की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
- झारखंड के दुमका जिले में एक पथ (रास्ता) बेहद जर्जर अवस्था में है। इस खराब हालत के कारण लोगों को उस पर चलने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।1
- दुमका के जामा थाना परिसर में बकरीद पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने के लिए शांति समिति की बैठक हुई। प्रशासन ने प्रतिबंधित पशुओं की बलि पर पूर्ण रोक लगाई और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। सभी समुदायों से आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई।1
- धनबाद जिले के मैथन-शंकर टॉकिज मार्ग पर झिलिया के पास निर्माणाधीन पुल का काम अचानक रोक दिया गया है। शिवलीबाड़ी उत्तर पंचायत की मुखिया मलका मेहर निगार ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर कार्यस्थल पर मोर्चा खोल दिया, जिसके बाद मैथन मोड से मैथन जाने वाले मुख्य मार्ग पर चल रहा यह निर्माण कार्य ठप हो गया। मुखिया और ग्रामीण एप्रोच सड़क पर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह कदम इलाके में व्याप्त गंभीर जल संकट की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए उठाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी पंचायत लंबे समय से भीषण पेयजल समस्या से जूझ रही है, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि जब तक उनकी पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक न तो निर्माण कार्य को फिर से शुरू होने दिया जाएगा और न ही एप्रोच सड़क को आवागमन के लिए खोला जाएगा।6
- धनबाद के निरसा स्थित कुमारधुबी में एक गाड़ी के दुकान के चूल्हे से टकराने के बाद दो गुटों में तीखी झड़प हो गई। इस हिंसक भिड़ंत में कम से कम 4 लोग घायल हुए हैं।1
- तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बीजेपी का साथ देने का गंभीर आरोप लगाया है। उनके इस बड़े दावे ने राष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है और विवाद खड़ा हो गया है।1
- बकरीद पर्व के संबंध में बलबड्डा में एक शांति समिति की बैठक संपन्न हो गई है। यह बैठक शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।1
- पश्चिम बंगाल में 'अतीक अहमद' कहे जा रहे एक व्यक्ति के 'काले साम्राज्य' के राज अब उजागर होने लगे हैं। यह महत्वपूर्ण खुलासा सुबेन्दु पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के परिणामस्वरूप सामने आ रहा है।1
- देश की पवित्र यमुना नदी को बचाने के लिए कई लोगों ने 'कॉकरोच' का रूप धारण कर एक अनोखे सफाई अभियान में हिस्सा लिया। नदी के गंभीर प्रदूषण और पारंपरिक तरीकों की विफलता ने उन्हें यह अनूठा तरीका अपनाने पर मजबूर किया। यह कदम सरकारी उदासीनता के खिलाफ जनभागीदारी और विरोध का प्रतीक बन गया है।1