गाजीपुर की अदालत ने अपने 4 साल के भांजे दानियाल खान का गला काटकर हत्या करने वाले मामा अमजद खान को फांसी की सजा सुनाई है। गुरुवार को फैसला सुनाने से पहले जज शक्ति सिंह ने हत्यारे अमजद खान से सीधा सवाल किया कि अगर उसे छोड़ दिया गया तो वह क्या करेगा। इस पर दोषी ने बेखौफ जवाब दिया कि अगर कोई उससे उलझेगा तो वह उसकी भी हत्या कर देगा। जज के यह पूछने पर कि क्या उसे अपने किए पर कोई पछतावा है, अमजद ने 'बिल्कुल नहीं' कहकर अपना अपराध स्वीकारने से इनकार कर दिया। अमजद का यह जवाब सुनकर जज शक्ति सिंह हैरान रह गए और उन्होंने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि इसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक इसकी मौत न हो जाए। फैसला सुनाने के बाद जज ने अपने पेन की निब भी तोड़ दी। जज शक्ति सिंह ने टिप्पणी की कि बच्चे की उम्र महज 4 साल थी और वह दुनिया की भलाई-बुराई के बारे में कुछ नहीं जानता था। उन्होंने कहा कि बच्चे की हत्या करते समय क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई थीं और मां ने अपने भाई के हाथों ही अपने बच्चे की हत्या होते देखी, जिसके दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अदालत के फैसले के बाद जब पुलिस अमजद को जेल ले गई, तब भी उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था और वह शातिर अपराधी की तरह लोगों को घूरता रहा। पीड़ित पक्ष के वकील अखिलेश सिंह ने बताया कि अमजद ने अपने 4 साल के भांजे की गला काटकर हत्या की थी, जिसमें उसका सिर गर्दन से महज 4 इंच ही जुड़ा हुआ था। यह घटना 21 अक्टूबर 2021 की है, जब दानियाल खान अपनी मां शबाना नाज के साथ गहमर कोतवाली क्षेत्र के बारा गांव स्थित ननिहाल आया था। इसी दौरान आरोपी अमजद खान का अपनी बड़ी बहन से किसी बात को लेकर मामूली विवाद हो गया। गुस्से में अमजद ने मासूम भांजे दानियाल की गर्दन चाकू से काट दी थी, और बच्चे की मां मौके पर ही मौजूद थी। दानियाल के चाचा अरबाज खान ने गहमर थाने में धारा 302 के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। मुकदमे के दौरान कुल 9 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें आरोपी की तीन सगी बहनें और एक भाई भी शामिल थे। सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने अमजद खान को दोषी करार दिया।
गाजीपुर की अदालत ने अपने 4 साल के भांजे दानियाल खान का गला काटकर हत्या करने वाले मामा अमजद खान को फांसी की सजा सुनाई है। गुरुवार को फैसला सुनाने से पहले जज शक्ति सिंह ने हत्यारे अमजद खान से सीधा सवाल किया कि अगर उसे छोड़ दिया गया तो वह क्या करेगा। इस पर दोषी ने बेखौफ जवाब दिया कि अगर कोई उससे उलझेगा तो वह उसकी भी हत्या कर देगा। जज के यह पूछने पर कि क्या उसे अपने किए पर कोई पछतावा है, अमजद ने 'बिल्कुल नहीं' कहकर अपना अपराध स्वीकारने से इनकार कर दिया। अमजद का यह जवाब सुनकर जज शक्ति सिंह हैरान रह गए और उन्होंने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि इसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक इसकी मौत न हो जाए। फैसला
सुनाने के बाद जज ने अपने पेन की निब भी तोड़ दी। जज शक्ति सिंह ने टिप्पणी की कि बच्चे की उम्र महज 4 साल थी और वह दुनिया की भलाई-बुराई के बारे में कुछ नहीं जानता था। उन्होंने कहा कि बच्चे की हत्या करते समय क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई थीं और मां ने अपने भाई के हाथों ही अपने बच्चे की हत्या होते देखी, जिसके दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अदालत के फैसले के बाद जब पुलिस अमजद को जेल ले गई, तब भी उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था और वह शातिर अपराधी की तरह लोगों को घूरता रहा। पीड़ित पक्ष के वकील अखिलेश सिंह ने बताया कि अमजद ने अपने 4 साल के भांजे की गला काटकर हत्या की थी, जिसमें
उसका सिर गर्दन से महज 4 इंच ही जुड़ा हुआ था। यह घटना 21 अक्टूबर 2021 की है, जब दानियाल खान अपनी मां शबाना नाज के साथ गहमर कोतवाली क्षेत्र के बारा गांव स्थित ननिहाल आया था। इसी दौरान आरोपी अमजद खान का अपनी बड़ी बहन से किसी बात को लेकर मामूली विवाद हो गया। गुस्से में अमजद ने मासूम भांजे दानियाल की गर्दन चाकू से काट दी थी, और बच्चे की मां मौके पर ही मौजूद थी। दानियाल के चाचा अरबाज खान ने गहमर थाने में धारा 302 के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। मुकदमे के दौरान कुल 9 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें आरोपी की तीन सगी बहनें और एक भाई भी शामिल थे। सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने अमजद खान को दोषी करार दिया।
- बाराबंकी के रामनगर तहसील क्षेत्र में लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजय क्षेत्र के पास बनाए गए पीपा पुल को हटाने का काम शुरू हो गया है। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की देखरेख में इस पीपा पुल के आठ पीपों को क्रेन की मदद से बड़े वाहनों पर लादकर प्रयागराज (इलाहाबाद) भेज दिया गया। लगभग ₹6 करोड़ 18 लाख की लागत से तैयार किया गया यह पीपा पुल नदी पर आवागमन को सुचारु रखने के लिए बनाया गया था। अब संजय सेतु का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के कारण इस पीपा पुल की उपयोगिता समाप्त हो गई है, जिसके चलते विभाग ने इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की है। लोधेश्वर क्रेन सर्विस की मदद से नदी किनारे पड़े पीपों को उठाकर सुरक्षित तरीके से प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। इस कार्य की निगरानी तिलक राम लोधी और रामशंकर लोधी ने की। लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर सद्दाम ने बताया कि संजय सेतु का निर्माण अब पूरा हो चुका है और छोटे वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बड़े वाहनों के संचालन के लिए भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और 15 जून तक संजय सेतु को सभी वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। पीपा पुल हटाए जाने से स्थायी पुल के संचालन की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। संजय सेतु के पूरी तरह चालू होने के बाद क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी।1
- ओमान के तट के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर की गई सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है। इस घटना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है, और भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मारे गए भारतीय नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में हुई है, जिनकी मौत 'एमटी सेत्तेबेल्लो' नामक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में हुई थी। पिछले कुछ दिनों में ओमान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन अलग-अलग वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। इनमें 8 जून को 'एमटी मारिवेक्स' पर भी अमेरिकी बल द्वारा कार्रवाई की गई थी, जिसमें सवार सभी 24 भारतीय नाविक सुरक्षित बचा लिए गए थे। इसके अलावा, 11 जून को 'एमटी जलवीर' पर भी हमले की खबर आई, जिसमें सवार 20 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन हमलों पर अपनी गहरी चिंता और कड़ा विरोध व्यक्त करने के लिए इस सप्ताह दो बार अमेरिकी 'चार्ज डी अफेयर्स' को तलब किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाने वाली ये कार्रवाई तुरंत बंद होनी चाहिए। भारत सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। 'सीमैन वेलफेयर फंड सोसाइटी' को प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया गया है।1
- सिरौलीगौसपुर के बदोसराय थाना क्षेत्र के बरदरी मरकामऊ गांव में शुक्रवार सुबह एक 25 वर्षीय युवक का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान मोहियाद्दीन के पुत्र चाँद बाबू (उम्र करीब 25 वर्ष) के रूप में हुई है। यह घटना सुबह लगभग 9 बजे सामने आई, जब घर में मौजूद चाँद बाबू की वृद्ध दादी और दो छोटी बहनें (8 और 5 वर्ष) ने चीख-पुकार सुनकर शव को फंदे से नीचे उतारा। सूचना मिलने पर बदोसराय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचायत नामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने आगे की जांच के लिए मृतक का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया है। परिजनों ने बताया कि चाँद बाबू के पिता का लगभग एक साल पहले बीमारी से निधन हो गया था। वह परिवार का इकलौता बेटा था और अविवाहित था, जिस पर अपनी दो छोटी बहनों की जिम्मेदारी थी। उसकी विधवा मां रोजगार के लिए लखनऊ में रहती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, चाँद बाबू मिलनसार स्वभाव का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद से वह गुमसुम रहने लगा था। गांव में इस घटना को लेकर प्रेम प्रसंग सहित विभिन्न तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि आत्महत्या का वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। बदोसराय थाना के वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा।2
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के एक जवान ने पुलिस विभाग में पोस्टिंग को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। जवान के मुताबिक, विभाग में 'जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग' का चलन है, यानी पोस्टिंग के लिए पैसे देना अनिवार्य है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 'साहब' को रिश्वत नहीं दी जाती, तो उन्हें बाथरूम धोने जैसे अवांछित काम करने पड़ते हैं। यह बयान पुलिस अधिकारियों के रवैये पर सीधा सवाल उठाता है और पूछ रहा है कि क्या वे वाकई 'काले अंग्रेज' हैं।1
- लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के शिवधारा गांव में शनिवार को प्लॉटिंग एरिया में चोरी के आरोप में ग्रामीणों ने एक युवक को पकड़ लिया। पकड़े गए युवक की पहचान निजामपुर मझगवां थाना गोल्फ सिटी निवासी जगदीश के पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। उसके पास से एक साइकिल और आरी ब्लेड भी बरामद हुआ है, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार हो गए। ग्रामीणों के अनुसार, मनीष अपने दो अन्य साथियों के साथ चोरी की नीयत से प्लॉटिंग एरिया में आया था। ग्रामीणों के इकट्ठा होने पर दो आरोपी भाग निकले, लेकिन मनीष को पकड़ लिया गया और सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची मोहनलालगंज पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस पकड़े गए युवक से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस ने बताया है कि तहरीर मिलने पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, साथ ही चोरी के प्रयास में क्या सामान निशाने पर था, इसकी भी जांच की जा रही है।1
- बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं, जब उत्सर्ग एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में पति की मौत हो गई और पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद, दंपति के तीन मासूम बच्चे अपने माता-पिता को पुकारते हुए बिलखते रहे, जिससे मौके पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। लखनऊ के गोमती नगर में एक निजी कंपनी में कार्यरत मनोज कुमार (32) और उनकी पत्नी वंदना (28), अपने तीन बच्चों - हिमांशी (7), स्नेहा (4) और छह माह के आंशिक - के साथ आजमगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव मुहम्मदपुर, पोस्ट तरौका, थाना लाटघाट जा रहे थे। लखनऊ में ट्रेन न मिलने पर वे बस से बाराबंकी पहुंचे थे और वहां से ट्रेन संख्या 15084 उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार होने का प्रयास कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दंपति ने सबसे पहले अपने बच्चों को ट्रेन में चढ़ाया। इसके बाद मनोज ने अपनी पत्नी वंदना को ट्रेन में चढ़ने में मदद की और जब वह खुद चढ़ने लगे, तो उनका पैर फिसल गया और वे ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच जा गिरे। पति को बचाने की कोशिश में वंदना ने उनका हाथ पकड़ा, लेकिन इस प्रयास में वह भी असंतुलित होकर नीचे गिर गईं। यह हादसा इतना भयावह था कि आसपास के यात्री भी दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही जीआरपी और रेलवे पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने मनोज कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल वंदना को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद तीनों मासूम बच्चे लगातार अपने माता-पिता को पुकारते रहे, उनकी बेबसी देख प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। इस दुखद घटना के बाद हर किसी के मन में यह सवाल था कि आखिर इन बच्चों का भविष्य अब किसके सहारे होगा।3
- बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार रात एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया। आजमगढ़ निवासी मनोज (32 वर्ष) अपनी पत्नी वंदना (28 वर्ष) और तीन मासूम बच्चों हिमांशी (7 वर्ष), स्नेहा (4 वर्ष) तथा छह माह के दुधमुंहे आंशिक के साथ उत्सर्ग एक्सप्रेस पकड़ने स्टेशन पहुंचे थे, तभी ट्रेन में चढ़ते समय उनका पैर फिसल गया। इस हृदय विदारक दुर्घटना में मनोज की तत्काल मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी वंदना गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है, जहाँ वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। यह घटना एक खुशहाल परिवार के लिए मातम में बदल गई, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। हादसे के बाद स्टेशन पर सबसे मार्मिक दृश्य सामने आया, जब तीन मासूम बच्चे अपने माता-पिता के बिना बेसहारा होकर बिलख रहे थे। सात साल की हिमांशी और चार साल की स्नेहा अपने माता-पिता को खोजते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, वहीं छह माह का मासूम आंशिक अपनी माँ की गोद के लिए तड़प रहा था। बच्चों की चीखों और सिसकियों ने वहाँ मौजूद लोगों का कलेजा कंपा दिया और कई लोगों की आँखें नम हो गईं। मौके पर पहुँचे जीआरपी थानाध्यक्ष चंद्रमणि पांडेय, हेड कांस्टेबल रेखा सैनी और उषा कुमारी भी बच्चों की हालत देखकर भावुक हो गईं। पुलिसकर्मियों ने बच्चों को दुलारा, उन्हें चुप कराने की कोशिश की और सुरक्षित अपनी देखरेख में ले लिया। बताया गया कि मनोज लखनऊ के गोमती नगर में निजी नौकरी करते थे और पूरे परिवार के एकमात्र सहारा थे। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। मनोज के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में रखते हुए उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार की बिखरती दुनिया की कहानी बन गई है, जिसे देखकर हर आँख नम और हर दिल भारी हो गया।4
- जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर क्षेत्र के भवानी पैलेस में शनिवार को आयोजित सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कार्यक्रम के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर ने फेफड़ों की गंभीर बीमारी से पीड़ित छेदू पुत्र रामप्रसाद से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित का हाल-चाल जाना और इलाज के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। डॉ. राजभर को रामनगर विधानसभा क्षेत्र-267 के कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान ग्राम पंचायत बेहटा निवासी छेदू की बीमारी की जानकारी मिली थी। छेदू लंबे समय से फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और वर्तमान में उन्हें ऑक्सीजन के सहारे रखा जा रहा है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज करा रहा है और बेहतर उपचार के लिए प्रयासरत है। पीड़ित की स्थिति को देखते हुए डॉ. अरविंद राजभर ने मौके पर ही आर्थिक सहायता प्रदान की और परिवार को भरोसा दिलाया कि इलाज में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। डॉ. अरविंद राजभर ने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर छेदू को बड़े अस्पताल में भर्ती कराकर बेहतर उपचार कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सरकार स्तर से भी इलाज में हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिया और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही। सहायता मिलने पर पीड़ित परिवार के सदस्यों ने डॉ. राजभर का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि उपचार के लिए आगे भी सहयोग मिलता रहेगा। स्थानीय लोगों ने भी डॉ. अरविंद राजभर द्वारा पीड़ित की मदद किए जाने के प्रयास की सराहना की, यह कहते हुए कि जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिलना उनके इलाज और जीवन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।1