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झारखंड के पाकुड़ में बिजली और पानी की किल्लत से परेशान होकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने बड़ा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार से इन समस्याओं का तुरंत समाधान निकालने की मांग की, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
Jitendra Das
झारखंड के पाकुड़ में बिजली और पानी की किल्लत से परेशान होकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने बड़ा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार से इन समस्याओं का तुरंत समाधान निकालने की मांग की, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
- Sakal Murmuमहेशपुर, पाकुड़, झारखंडथोड़ा सा bjp sarkar ka wada par bhi khayal ya dhayan do tabhi to humlog ka kuchh ho sakta haion 15 May
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- मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से पाकुड़ पुलिस ने जिले भर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है। पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह के निर्देश पर सभी संवेदनशील स्थानों, मस्जिदों, ताजिया जुलूस मार्गों तथा प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई है। पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 25 जून को मुहर्रम की नवमी के अवसर पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में 14 लाइसेंसी एवं 10 गैर-लाइसेंसी सहित कुल 24 ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए थे। इन सभी जुलूसों में पर्याप्त संख्या में पुलिस पदाधिकारी एवं जवानों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। वहीं, 26 जून को मुहर्रम की दशमी पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में 19 लाइसेंसी एवं 21 गैर-लाइसेंसी सहित कुल 40 ताजिया जुलूस निकाले जाने हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और भी सुदृढ़ की गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले के सभी थाना एवं ओपी क्षेत्रों में कुल 15 क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) बलों को दंगारोधी उपकरणों जैसे लाठी, हेलमेट, बॉडी प्रोटेक्टर और टीजी गन के साथ तैनात किया गया है। इसके अलावा, प्रत्येक ताजिया जुलूस पर ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी एवं वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाएगी। पाकुड़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि असामाजिक तत्वों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था पूरी तरह बनी रहे।2
- Post by Topesh Kumar1
- यह संदेश उन अनकहे ज़ख्मों और दर्दों को बयां करता है जो सीधे शरीर पर नहीं, बल्कि भविष्य पर पड़ते हैं; जिनका इज़हार शब्दों से नहीं, बल्कि आँखों से बहते आँसुओं से होता है। यह सिर्फ एक ख़बर नहीं, बल्कि लाखों टूटते सपनों की चीख, बिखरते भविष्य की गवाही और एक पूरी पीढ़ी द्वारा महसूस की जा रही गहरी पीड़ा का मार्मिक चित्रण है।1
- बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद डरावनी और असंवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर पर न सिर्फ तड़पते मरीज की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है, बल्कि मरीज के हक में आवाज उठाने वाले एक युवक के साथ सरेआम हाथापाई और बदसलूकी करने का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने डॉक्टरों को 'धरती का दूसरा भगवान' कहे जाने वाले जुमले को तार-तार कर दिया है। जानकारी के अनुसार, बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज तेज पेट दर्द से तड़प रहा था और बार-बार बेहोश हो रहा था। इसी दौरान अपने किसी परिचित को दिखाने पहुंचे ऋषभ मिश्रा नामक युवक ने उस लाचार मरीज पर ध्यान दिया और वहां मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से उसे तुरंत देखने व प्राथमिक उपचार शुरू करने की गुहार लगाई। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को देखने के बजाय संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं और उसे ओपीडी में ले जाने की बात पर अड़ गए, जबकि ओपीडी का निर्धारित समय पहले ही समाप्त हो चुका था। जब बार-बार अनुरोध करने पर भी डॉक्टर का दिल नहीं पघला, तो ऋषभ मिश्रा ने अस्पताल की इस अव्यवस्था और लापरवाही की जानकारी सीधे जिले के सिविल सर्जन को फोन पर दी। जैसे ही डॉक्टर को इस शिकायत का पता चला, वे आगबबूला हो गए और उन्होंने ऋषभ मिश्रा से तीखी बहस शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर युवक के साथ बदतमीजी करने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों (कमांडो/गार्ड्स) और डॉक्टर ने मिलकर युवक के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। वायरल वीडियो में लाल चेक शर्ट पहने दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान बांका सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ. दिनकर झा के रूप में हुई है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले एक नागरिक को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी मरीज के परिजनों और ऋषभ मिश्रा को जबरन घसीटते और उनके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं, जबकि वहां मौजूद अन्य लोग घटना का वीडियो बनाते रहे, जिसे रोकने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने बांका की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की नैतिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक चिकित्सक का पहला कर्तव्य इमरजेंसी में तड़पते मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता देना नहीं था, और यदि ओपीडी का समय समाप्त हो चुका था, तो मरीज को जानबूझकर ओपीडी में भेजने की जिद क्यों की जा रही थी, जो सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। साथ ही, यह भी प्रश्न उठाया गया है कि क्या डॉक्टरों को मिली सुरक्षाकर्मी इलाज मांगने आने वाले आम नागरिकों पर रौब झाड़ने और उन्हें पीटने के लिए रखे गए हैं, और क्या एक जागरूक नागरिक द्वारा सिविल सर्जन से शिकायत करने पर अस्पताल प्रशासन को उसके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करने का अधिकार मिल जाता है। डॉक्टरों का काम जिंदगी बचाना होता है, लेकिन बांका सदर अस्पताल का यह नजारा किसी 'गुंडागर्दी के अड्डे' से कम नहीं लग रहा था। यह वीडियो उन सभी दावों की पोल खोलता है जो बांका सदर अस्पताल को बेहतर बताने के लिए किए जाते हैं। अब यह देखना बाकी है कि इस वायरल वीडियो और डॉ. दिनकर झा के इस शर्मनाक व संवेदनहीन व्यवहार पर बांका के सिविल सर्जन और जिला प्रशासन द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।1
- बाराहाट थाना क्षेत्र के लीलावरण, महाराणा, सबलपुर और सोन डीहा दक्षिणी सहित कई स्थानों पर मुहर्रम पर्व का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह पर्व आस्था, परंपरा और उत्साह के साथ मनाया गया।1
- Post by Topesh Kumar1
- यह संदेश उस असहनीय पीड़ा को व्यक्त करता है जो शरीर पर नहीं बल्कि सीधे भविष्य पर गहरे ज़ख्म लगाती है। यह ऐसा दर्द है जो शब्दों में समा नहीं पाता, बल्कि केवल आँखों से आँसुओं के रूप में बह निकलता है। यह वस्तुतः लाखों टूटते सपनों की चीख है, उनकी गवाही है, और एक पूरी पीढ़ी की गहरी वेदना का प्रतीक है।1
- चंदौली में एक चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करते समय एक महिला का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के नीचे जा गिरी, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ गई। यात्रियों ने तुरंत शोर मचाकर आपातकाल की सूचना दी, जिसके बाद लोको पायलट ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। लोको पायलट की इस त्वरित सतर्कता के कारण महिला की जान बच गई, हालांकि इस हादसे में उसके पैर में चोटें आई हैं।1