तमिलनाडु में ऐतिहासिक फैसला: हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा तमिलनाडु में ऐतिहासिक फैसला: हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा चेन्नई: तमिलनाडु की एक विशेष अदालत ने हिरासत में हुई मौत के एक पुराने और जघन्य मामले में न्याय की मिसाल पेश करते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। भारतीय न्यायिक इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जहाँ एक साथ इतने पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा (Capital Punishment) दी गई है। क्या था पूरा मामला? यह मामला एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में हुई बर्बर पिटाई और उसके बाद हुई मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार:पीड़ित को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। हिरासत के दौरान उसके साथ अमानवीय व्यवहार और गंभीर मारपीट की गई। पुलिस ने सबूतों को मिटाने और मामले को प्राकृतिक मौत दिखाने की कोशिश की थी। अदालत की सख्त टिप्पणी फैसला सुनाते समय माननीय न्यायाधीश ने इसे 'रक्षक ही भक्षक' बनने वाला मामला करार दिया। अदालत ने कहा कि: जब कानून के रखवाले ही कानून को अपने हाथ में लेकर किसी नागरिक की जान लेते हैं, तो यह समाज में न्याय के प्रति विश्वास को खत्म करता है। यह अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी में आता है। सजा का विवरण अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर निम्नलिखित धाराओं के तहत सजा सुनाई: धारा 302 (हत्या): सभी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा। धारा 201 (सबूत मिटाना): कारावास और आर्थिक दंड। साजिश रचना: आपराधिक षड्यंत्र के लिए अतिरिक्त जुर्माना। मानवाधिकार संगठनों ने किया स्वागत इस फैसले का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक निर्णय से पुलिस प्रशासन में जवाबदेही तय होगी और भविष्य में 'कस्टोडियल टॉर्चर' (हिरासत में प्रताड़ना) की घटनाओं पर लगाम लगेगी। नोट: दोषी पाए गए पुलिसकर्मी इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील कर सकते हैं।
तमिलनाडु में ऐतिहासिक फैसला: हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा तमिलनाडु में ऐतिहासिक फैसला: हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा चेन्नई: तमिलनाडु की एक विशेष अदालत ने हिरासत में हुई मौत के एक पुराने और जघन्य मामले में न्याय की मिसाल पेश करते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। भारतीय न्यायिक इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जहाँ एक साथ इतने पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा (Capital Punishment) दी गई है। क्या था पूरा मामला? यह मामला एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में हुई बर्बर पिटाई और उसके बाद हुई मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार:पीड़ित को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। हिरासत के दौरान उसके साथ अमानवीय व्यवहार और गंभीर मारपीट की गई। पुलिस ने सबूतों को मिटाने और मामले को प्राकृतिक मौत दिखाने की कोशिश की थी। अदालत की सख्त टिप्पणी फैसला सुनाते समय माननीय न्यायाधीश ने इसे 'रक्षक ही भक्षक' बनने वाला मामला करार दिया। अदालत ने कहा कि: जब कानून के रखवाले ही कानून को अपने हाथ में लेकर किसी नागरिक की जान लेते हैं, तो यह समाज में न्याय के प्रति विश्वास को खत्म करता है। यह अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी में आता है। सजा का विवरण अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर निम्नलिखित धाराओं के तहत सजा सुनाई: धारा 302 (हत्या): सभी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा। धारा 201 (सबूत मिटाना): कारावास और आर्थिक दंड। साजिश रचना: आपराधिक षड्यंत्र के लिए अतिरिक्त जुर्माना। मानवाधिकार संगठनों ने किया स्वागत इस फैसले का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक निर्णय से पुलिस प्रशासन में जवाबदेही तय होगी और भविष्य में 'कस्टोडियल टॉर्चर' (हिरासत में प्रताड़ना) की घटनाओं पर लगाम लगेगी। नोट: दोषी पाए गए पुलिसकर्मी इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील कर सकते हैं।
- तमिलनाडु में ऐतिहासिक फैसला: हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा चेन्नई: तमिलनाडु की एक विशेष अदालत ने हिरासत में हुई मौत के एक पुराने और जघन्य मामले में न्याय की मिसाल पेश करते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। भारतीय न्यायिक इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जहाँ एक साथ इतने पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा (Capital Punishment) दी गई है। क्या था पूरा मामला? यह मामला एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में हुई बर्बर पिटाई और उसके बाद हुई मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार:पीड़ित को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। हिरासत के दौरान उसके साथ अमानवीय व्यवहार और गंभीर मारपीट की गई। पुलिस ने सबूतों को मिटाने और मामले को प्राकृतिक मौत दिखाने की कोशिश की थी। अदालत की सख्त टिप्पणी फैसला सुनाते समय माननीय न्यायाधीश ने इसे 'रक्षक ही भक्षक' बनने वाला मामला करार दिया। अदालत ने कहा कि: जब कानून के रखवाले ही कानून को अपने हाथ में लेकर किसी नागरिक की जान लेते हैं, तो यह समाज में न्याय के प्रति विश्वास को खत्म करता है। यह अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी में आता है। सजा का विवरण अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर निम्नलिखित धाराओं के तहत सजा सुनाई: धारा 302 (हत्या): सभी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा। धारा 201 (सबूत मिटाना): कारावास और आर्थिक दंड। साजिश रचना: आपराधिक षड्यंत्र के लिए अतिरिक्त जुर्माना। मानवाधिकार संगठनों ने किया स्वागत इस फैसले का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक निर्णय से पुलिस प्रशासन में जवाबदेही तय होगी और भविष्य में 'कस्टोडियल टॉर्चर' (हिरासत में प्रताड़ना) की घटनाओं पर लगाम लगेगी। नोट: दोषी पाए गए पुलिसकर्मी इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में अपील कर सकते हैं।1
- Post by संदीप कुमार शर्मा1
- पलिया नगर में रोडवेज बस अड्डा न होने की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बसों के लिए निर्धारित स्थान न होने के कारण सारी रोडवेज बसें पुलिस चौकी के पास मुख्य सड़क पर ही खड़ी होती हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों व व्यापारियों का कहना है कि सड़क पर बसें खड़ी होने से जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर भीड़भाड़ के समय हालात और भी विकट हो जाते हैं। व्यापारियों ने यह भी बताया कि पलिया जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में, जहां एक ओर दुधवा नेशनल पार्क स्थित है और दूसरी ओर हवाई पट्टी भी मौजूद है, वहां अब तक रोडवेज बसड्डे का न होना शासन-प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है। समस्या के समाधान को लेकर व्यापार मंडल अध्यक्ष गौरव गुप्ता के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी तहसील पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम डाॅ अवनीश कुमार को सौंपते हुए नगर में शीघ्र रोडवेज बसड्डा बनवाने की मांग की। व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो व्यापारी वर्ग आंदोलन करने को बाध्य होगा।1
- सीतापुर मिश्रिख,नैमिषारण्य नगर पालिका में शपथ समारोह का कार्यक्रम चल रहा था मिश्रिख एसडीएम अभिनव यादव एक इकलौते सभासद को खड़ा करके नामित सभासदो को दिला रहे थे शपथ शासन से पांच लोगों को नामित सभासद चयनित किया गया था चार सभासद अपनी कुर्सी पर बैठकर शपथ ले रहे थे शपथ समारोह में मिश्रिख विधायक रामकृष्ण भार्गव, मिश्रिख सांसद प्रतिनिधि राजकुमार सोनी,ब्लॉक प्रमुख विजय भार्गव, मिश्रिख नगर पालिका अध्यक्ष सीमा भार्गव, अधिशासी अधिकारी विध्यांचल शामिल थे सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल2
- इस व्यक्ति को जल्द से जल्द जेल में डालना चाहिए। अपने बगीचे से अमरूद चुराने के लिए एक बच्ची को बेरहमी से बांधकर पीटना?, इस व्यक्ति को जल्द से जल्द जेल में डालना चाहिए। अपने बगीचे से अमरूद चुराने के लिए एक बच्ची को बेरहमी से बांधकर पीटना ? लोगों को आखिर क्या हो गया है? ज़रा सोचिए, उस बच्ची पर कितना गहरा सदमा लगेगा।1
- Post by खीरी न्यूज़ अपडेट1
- विधवा होने के बाद एक महिला गोरखपुर बिस्कुट फैक्ट्री में काम करती थी. उसकी कमलेश से दोस्ती हुई दोस्ती लिव-इन बन गयी और शादी का वायदा हुआ कमलेश ने महिला को हथियार बनाया और होटल मालिक जितेन्द्र को नौकरी के नाम पर सौंप दिया जितेन्द्र ने भी यौनशोषण किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता रहा पीड़िता को जान का खतरा है पुलिस ने अभी केस दर्ज नही किया है1
- Post by संदीप कुमार शर्मा1
- पलिया नगर में गोल्ड नीलामी के नाम पर दर्जनों लोगों से करोड़ों रुपयों की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपित की पहचान मझगईं थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद आदेश शेख के रूप में हुई है, जो पलिया स्थित एक्सिस बैंक में गोल्ड लोन से जुड़ा काम देखता था। बताया जाता है कि आरोपित ने लोगों को सस्ते में नीलामी का सोना दिलाने का झांसा देकर बड़ी रकम ऐंठ ली। लंबे समय तक मामला दबा रहा, लेकिन जब पीड़ितों को न तो सोना मिला और न ही पैसा वापस हुआ, तब ठगी का पर्दाफाश हुआ। मामले में पीड़ित राज गुप्ता को आरोपित ने एक करोड़ 12 लाख रुपये के अलग-अलग चेक दिए, लेकिन बैंक में लगाने पर सभी चेक बाउंस हो गए। इससे पीड़ितों में हड़कंप मच गया। राज गुप्ता ने पलिया कोतवाली पहुंचकर पुलिस को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया और कार्रवाई करते हुए रकम वापस दिलाने की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है और ‘आजकल’ कहकर टालमटोल कर रही है। वहीं, इस संबंध में थानाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी ने बताया कि ठगी करने वाले मोहम्मद आदेश शेख की तलाश की जा रही है। उसका सुराग लगते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं एक्सिस बैंक के शाखा प्रबन्धक सौरभ मिश्रा ने बताया कि आदेश शेख हमारी शाखा के गोल्डलोन अधिकारी थे। उन्होंने जो भी लेनदेन किया है वो सब बैंक के बाहर किया है। कुछ लोगों से बैंक शाखा के अन्दर लेनदेन किया था। शिकायत मिलने पर उसका सीसीटीवी फुटेज निकलवाया गया और उसे शार्टआउट करा दिया गया था। उन्होंने बताया कि शिकायतों के आधार पर आदेश शेख को बैंक से निलम्बित किया जा चुका है और बैंक की ओर मामले की जांच जारी है। बता दें कि इस घटना से क्षेत्र में रोष व्याप्त है और लोग जल्द से जल्द ठग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1