पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत तीसीबार पंचायत भीषण गर्मी के बीच गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रही है। पंचायत भवन के आसपास पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण, प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण और राहगीर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पंचायत भवन परिसर में न तो कोई सार्वजनिक चापाकल है और न ही पेयजल की अन्य व्यवस्था, जबकि पास ही बना जलमीनार वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह जलमीनार चालू हो जाए, तो पंचायत भवन आने वाले लोगों के साथ-साथ बस और ऑटो का इंतजार करने वाले यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। तीसीबार पंचायत के मुख्य मार्ग पर स्थित होने के चलते यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कार्यों और यात्रा के लिए आते-जाते हैं। बस और ऑटो पकड़ने के लिए यहाँ लगातार भीड़ लगी रहती है, लेकिन गर्मी के इस मौसम में उन्हें पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। इतना ही नहीं, यात्रियों के बैठने की भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण लोगों को धूप और लू के बीच घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया है कि इस समस्या की ओर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराया गया है, फिर भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जो पंचायत भवन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर बुनियादी पेयजल सुविधा के अभाव को चिंताजनक बनाता है। इस स्थिति में, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पेयजल विभाग और जनप्रतिनिधियों से तुरंत बंद पड़े जलमीनार की मरम्मत कर उसे चालू कराने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पंचायत भवन परिसर में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने, बस एवं ऑटो यात्रियों के लिए बैठने हेतु शेड का निर्माण कराने तथा गर्मी के मौसम को देखते हुए तत्काल राहत उपाय सुनिश्चित करने की भी अपील की है। भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान लोगों की उम्मीदें अब प्रशासन की पहल पर टिकी हुई हैं।
पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत तीसीबार पंचायत भीषण गर्मी के बीच गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रही है। पंचायत भवन के आसपास पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण, प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण और राहगीर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पंचायत भवन परिसर में न तो कोई सार्वजनिक चापाकल है और न ही पेयजल की अन्य व्यवस्था, जबकि पास ही बना जलमीनार वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह जलमीनार चालू हो जाए, तो पंचायत भवन आने वाले लोगों के साथ-साथ बस और ऑटो का इंतजार करने वाले यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। तीसीबार पंचायत के मुख्य मार्ग पर स्थित होने के चलते यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कार्यों और यात्रा के लिए आते-जाते हैं। बस और ऑटो पकड़ने के लिए यहाँ लगातार भीड़ लगी रहती है, लेकिन गर्मी के इस मौसम में उन्हें पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। इतना ही नहीं, यात्रियों के बैठने की भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण लोगों को धूप और लू के बीच घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया है कि इस समस्या की ओर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराया गया है, फिर भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जो पंचायत भवन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर बुनियादी पेयजल सुविधा के अभाव को चिंताजनक बनाता है। इस स्थिति में, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पेयजल विभाग और जनप्रतिनिधियों से तुरंत बंद पड़े जलमीनार की मरम्मत कर उसे चालू कराने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पंचायत भवन परिसर में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने, बस एवं ऑटो यात्रियों के लिए बैठने हेतु शेड का निर्माण कराने तथा गर्मी के मौसम को देखते हुए तत्काल राहत उपाय सुनिश्चित करने की भी अपील की है। भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान लोगों की उम्मीदें अब प्रशासन की पहल पर टिकी हुई हैं।
- पलामू उपायुक्त के निर्देशानुसार, एक प्रशिक्षु झारखंड प्रशासनिक अधिकारी ने विश्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र की विधि व्यवस्था की जांच की।1
- पलामू पुलिस ने आज मेदिनीनगर शहर के छः मुहान चौक पर यातायात सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी पहल की। पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वाले गैर-जिम्मेदार चालकों को हेलमेट देकर उन्हें यातायात नियमों के प्रति समझाया गया। इस पहल में यातायात प्रभारी सतेंद्र दुबे और समाज सेवी सफीक अंसारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें यातायात जवान हरेंद्र कुमार, धर्मेंद्र कुमार और शीतल प्रजापति ने भी सहयोग किया। वहीं, जो चालक पहले से हेलमेट पहनकर वाहन चला रहे थे, उनका गुलाब का फूल देकर स्वागत किया गया। इस तरह से बिना हेलमेट चालकों को हेलमेट बांटने का यह शायद पहला अवसर था। पलामू पुलिस के इस सराहनीय कार्य की लोगों ने जमकर तारीफ की। मौके पर मौजूद राहगीरों और अन्य लोगों ने एक स्वर में कहा कि अगर हर पुलिसकर्मी की सोच ऐसी हो तो यह बहुत ही प्रशंसनीय होगा।1
- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड अंतर्गत चटनिया पंचायत में, पंचायत सचिव और मुखिया प्रतिनिधि द्वारा आंगनबाड़ी सेविकाओं को मईया योजना के सत्यापन की प्रक्रिया समझाई गई। इस दौरान, उपस्थित सभी लोगों को सत्यापन से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।1
- ग्रामीणों ने धूल, प्रदूषण और टूटी सड़कों को अपनी रोज़मर्रा की गंभीर समस्या बताया है। उनका कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसी निराशा के चलते, ग्रामीण संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी आवाज़ कब सुनी जाएगी।1
- रंका पंचायत भवन के समीप भीषण गर्मी के मद्देनजर एक पनशाला की शुरुआत की गई है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ती गर्मी से लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।1
- गढ़वा जिले के चिनिया थाना क्षेत्र के कई गांवों में जंगली हाथियों की संभावित मौजूदगी को लेकर वन विभाग ने शनिवार रात रेड अलर्ट जारी कर दिया है। यह चेतावनी शनिवार शाम चिनिया, चिरका, हेताड़कलां, तहले और रानीचेरी सहित आस-पास के क्षेत्रों में हाथियों को देखे जाने की सूचना मिलने के बाद, रात 8 बजे एहतियात के तौर पर घोषित की गई। प्रभारी वनपाल अनिमेष कुमार ने इस जानकारी की पुष्टि की है। वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है, जिसमें अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलना और रात के समय खेत, बगीचे या जंगल की ओर जाने से बचना शामिल है। विभाग ने बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखने तथा हाथियों के नजदीक जाने या उन्हें छेड़ने की कोशिश न करने की कड़ी हिदायत दी है। साथ ही, ग्रामीणों से किसी भी गांव या क्षेत्र में हाथी दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने का आग्रह किया गया है, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। विभाग ने चेतावनी दी है कि "हाथी कभी भी गांवों की ओर रुख कर सकते हैं। इसलिए सभी ग्रामीण पूरी सतर्कता बरतें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।" वन विभाग की टीम पूरी रात स्थिति पर पैनी नज़र बनाए हुए है और ग्रामीणों से लगातार सतर्क रहने की अपील कर रही है।1
- झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य और मीडिया पैनलिस्ट धीरज दुबे ने गढ़वा जिले में बढ़ते भूमि विवादों और भू-माफियाओं की सक्रियता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने जिला प्रशासन से इन मामलों का त्वरित और निष्पक्ष निपटारा करने की मांग करते हुए कहा कि भूमि विवाद अब केवल राजस्व संबंधी समस्या नहीं रहे, बल्कि ये कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। धीरज दुबे के अनुसार, गढ़वा जिले में भू-माफियाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो संगठित होकर और महिलाओं को आगे कर जमीन पर जबरन दावा करने या उसे विवादित बनाने का प्रयास करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वास्तविक भूमि मालिकों पर मानसिक और सामाजिक दबाव डालकर उनकी जमीन को कम कीमत पर खरीदना है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के नेतृत्व में भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना था। हालांकि, इस ऑनलाइनकरण के दौरान हुई तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियों के कारण कई भूमि विवाद उत्पन्न हो गए, जहां एक व्यक्ति की जमीन दूसरे के नाम दर्ज हो गई, जिससे वर्षों पुराने स्वामित्व विवाद खड़े हुए और कई जगहों पर तनाव व हिंसक घटनाएं भी सामने आईं। धीरज दुबे ने आरोप लगाया कि जिले में भूमि कारोबार अब एक संगठित व्यवसाय का रूप ले चुका है, जिसमें भूमि की बढ़ती कीमतों के कारण कई लोग अवैध तरीके से जमीन के सौदों में शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार, कुछ भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, क्योंकि पिछले चुनावों में कई भूमि कारोबारियों ने प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग दिया था और अब बदले में उन्हें संरक्षण मिलने की चर्चा आम है। ऐसे माहौल में आम नागरिकों के लिए न्याय प्राप्त करना कठिन हो गया है। उन्होंने विशेष रूप से गढ़वा नगर परिषद से सटे पंचायत क्षेत्रों में सबसे अधिक भूमि विवादों का जिक्र किया, जहां शहरीकरण और जमीन के बढ़ते बाजार मूल्य के कारण अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और स्वामित्व विवाद के मामले बढ़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मामलों का समय पर समाधान नहीं किया गया तो यह भविष्य में बड़े अपराधों और सामाजिक संघर्ष का कारण बन सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि भूमि विवादों के निपटारे के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए। इसके तहत विवादित जमीनों की जांच के लिए जरूरत के अनुसार विशेष शिविर लगाए जाएं और राजस्व, निबंधन तथा पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। धीरज दुबे ने कहा कि समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शी जांच से आम लोगों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा तथा भूमि विवादों को अपराध का रूप लेने से रोका जा सकेगा। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में गंभीर और प्रभावी पहल करने की अपील की।1
- रोहतास जिले के तिलौथू में, थाना चौक के पास एक भीषण घटना सामने आई है जहाँ एक डंपर ने एक युवक को दरिंदगी से मौत के घाट उतार दिया। सासाराम के तिलौथू स्थित इसी थाना चौक के पास हुए इस हादसे में युवक की जान चली गई।1