उत्तर प्रदेश के आगरा में एमजी रोड पर स्थित एक विवादित मजार को प्रशासन द्वारा हटाया जा रहा है। आगरा कॉलेज के ठीक सामने, सड़क के बीच बनी इस मजार को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कार्रवाई के मद्देनजर एमजी रोड पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसके चलते रास्ते को यातायात के लिए अवरुद्ध कर दिया गया है। यह मजार लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई थी, जिससे यातायात में लगातार बाधा आती थी और सड़क हादसों का जोखिम बना रहता था। इस संबंध में एक हिंदूवादी नेता द्वारा न्यायालय में वाद भी दायर किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह स्थानांतरण मुस्लिम पक्ष से बातचीत और उनकी सहमति के बाद ही किया जा रहा है। विवादित मजार को मौके पर बुलडोजर की सहायता से स्थानांतरित किया गया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी में हो रही है, और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मौके पर किए गए हैं। एआईएन नेटवर्क से संपादक अनुज रावत ने 16 जून, 26 को इस घटना से संबंधित अद्यतन जानकारी प्रदान की।
उत्तर प्रदेश के आगरा में एमजी रोड पर स्थित एक विवादित मजार को प्रशासन द्वारा हटाया जा रहा है। आगरा कॉलेज के ठीक सामने, सड़क के बीच बनी इस मजार को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कार्रवाई के मद्देनजर एमजी रोड पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसके चलते रास्ते को यातायात के लिए अवरुद्ध कर दिया गया है। यह मजार लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई थी, जिससे यातायात में लगातार बाधा आती थी और सड़क हादसों का जोखिम बना रहता था। इस संबंध में एक हिंदूवादी नेता द्वारा न्यायालय में वाद भी दायर किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह स्थानांतरण मुस्लिम पक्ष से बातचीत और उनकी सहमति के बाद ही किया जा रहा है। विवादित मजार को मौके पर बुलडोजर की सहायता से स्थानांतरित किया गया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी में हो रही है, और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मौके पर किए गए हैं। एआईएन नेटवर्क से संपादक अनुज रावत ने 16 जून, 26 को इस घटना से संबंधित अद्यतन जानकारी प्रदान की।
- उत्तर प्रदेश के आगरा में एमजी रोड पर स्थित एक विवादित मजार को प्रशासन द्वारा हटाया जा रहा है। आगरा कॉलेज के ठीक सामने, सड़क के बीच बनी इस मजार को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कार्रवाई के मद्देनजर एमजी रोड पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसके चलते रास्ते को यातायात के लिए अवरुद्ध कर दिया गया है। यह मजार लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई थी, जिससे यातायात में लगातार बाधा आती थी और सड़क हादसों का जोखिम बना रहता था। इस संबंध में एक हिंदूवादी नेता द्वारा न्यायालय में वाद भी दायर किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह स्थानांतरण मुस्लिम पक्ष से बातचीत और उनकी सहमति के बाद ही किया जा रहा है। विवादित मजार को मौके पर बुलडोजर की सहायता से स्थानांतरित किया गया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी में हो रही है, और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मौके पर किए गए हैं। एआईएन नेटवर्क से संपादक अनुज रावत ने 16 जून, 26 को इस घटना से संबंधित अद्यतन जानकारी प्रदान की।1
- आगरा के थाना फतेहाबाद क्षेत्र में एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद इलाके में बवाल हो गया। इस दौरान, पुलिस पर पथराव किया गया और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ भी की गई। घटना के बाद, पुलिस ने कार्यवाही शुरू करते हुए अब तक चार उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। आगरा के सीपी दीपक कुमार ने बताया कि पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य बवालियों की पहचान कर रही है और सभी अराजक तत्वों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।3
- आगरा के बाह क्षेत्र में 16 वर्षीय ध्रुव सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। मृतक के परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से साफ इनकार कर दिया है और हत्या तथा आपराधिक साजिश की आशंका जताई है। परिवार ने प्रशासन को एक प्रार्थना पत्र देकर मामले में निष्पक्ष जांच और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल के हालात सामान्य आत्महत्या की घटना से मेल नहीं खाते और कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका दावा है कि इस मामले को जल्दबाजी में आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। परिवार ने पुलिस पर FIR दर्ज करने में देरी करने और जांच में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इसी के साथ उन्होंने मृतक और संदिग्ध व्यक्तियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) व लोकेशन की जांच के साथ-साथ मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले पर पुलिस का कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इस घटना को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चाएं जारी हैं और ध्रुव सिंह के परिजन अपने लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।1
- फ़िरोज़ाबाद में जिलाधिकारी (डीएम) ने एक वृद्धाश्रम का दौरा किया। इस दौरान वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने डीएम के सामने अपने दिल का दर्द बयां किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें सिर्फ़ 'सम्मान और अपनापन' चाहिए।1
- समाजवादी पार्टी (सपा) ने ककरऊ कोठी में एक औचक निरीक्षण किया, जिसके बाद पार्टी का कहना है कि विकास के दावों की पोल खुल गई है। सपा की एक टीम ककरऊ कोठी पहुँची और वहाँ चल रही करोड़ों की परियोजना पर जवाबदेही मांगी। निरीक्षण के दौरान, टीम ने विशेष रूप से स्वच्छता और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस निरीक्षण के समापन पर, सपा नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि सरकारी दावों और वास्तविक धरातल की हकीकत में काफी बड़ा अंतर देखने को मिला है।1
- आगरा के एमजी रोड पर स्थित आगरा कॉलेज के पास की वर्षों पुरानी एक मजार को आज शांतिपूर्वक दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया है। इस मजार के कारण यातायात में अवरोध उत्पन्न हो रहा था। आगरा पुलिस आयुक्त वाईट ने इस संबंध में जानकारी दी है।1
- एमजी रोड स्थित आगरा कॉलेज के सामने सड़क के बीच बनी एक विवादित मजार को मंगलवार सुबह प्रशासन की निगरानी में हटाकर पास स्थित बड़ी मजार परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। इस दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। एडीसीपी हिमांशु गौरव ने बताया कि मजार के स्थानांतरण को लेकर दोनों पक्षों के साथ कई दौर की वार्ताएं हुई थीं, जिसके बाद आपसी सहमति बनी और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे तथा इस दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति नहीं बनी। यह मजार लंबे समय से एमजी रोड पर यातायात बाधित होने और जाम की समस्या का मुख्य कारण मानी जा रही थी। मामले को लेकर योगी यूथ बिग्रेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर द्वारा न्यायालय में वाद दायर किया गया था, जिसके बाद संबंधित विभागों और प्रशासन के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशासन का कहना है कि मजार हटने से एमजी रोड पर यातायात अधिक सुचारु होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। इस पूरी कार्रवाई में दोनों समुदायों के लोगों ने सहयोग किया, जिससे यह स्थानांतरण शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सका और आगरा में सौहार्द की एक मिसाल पेश हुई।1
- आगरा के फतेहाबाद स्थित ख्वासपुरा के एक युवक की हादसे में मौत के बाद सोमवार शाम 5.45 बजे जमकर बवाल हो गया। युवक का शव सड़क पर रखकर बैठे ग्रामीणों को हटाने के पुलिस के प्रयास पर, उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया और उन्हें दौड़ाया। यह पथराव करीब 15 मिनट तक चला, जिसमें 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद, कई थानों से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अब पथराव करने वाले ग्रामीणों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। बवाल शुरू होने से कुछ समय पहले, मत्स्य पालन मंत्री डॉ. संजय निषाद भी ग्रामीणों को समझाने पहुंचे थे, लेकिन उनके आग्रह के बावजूद लोग नहीं हटे, जिसके बाद वे वापस लौट गए।1
- आगरा के खंदौली थाना क्षेत्र के नगला अर्जुन गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव के दबंग और प्रभावशाली लोगों ने उनके घर में घुसकर महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ मारपीट की, लेकिन पुलिस कार्रवाई आरोपियों पर करने के बजाय पीड़ित पक्ष को ही प्रताड़ित कर रही है। शिकायतकर्ता सोबरन सिंह ने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए दिए गए पैसों को लेकर गांव में विवाद खड़ा कर दिया गया था। आरोप है कि पहले एक पंचायत में उन्हें धमकाया गया और बाद में कई लोगों ने एकजुट होकर उनके घर पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने सोबरन सिंह की पत्नी, भाई की पत्नी और नाबालिग बेटियों के साथ मारपीट की। परिवार का यह भी आरोप है कि बच्चियों को खींचकर बाड़े में ले जाया गया और उनके साथ अभद्रता की गई। यदि गांव के लोग मौके पर नहीं पहुंचते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवार का दावा है कि घटना की सूचना देने और मेडिकल कराने के बावजूद पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। घायल महिलाओं और बच्चियों का समुचित चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं कराया गया। परिवार का कहना है कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना कैद है, फिर भी पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है। यह आरोप सही होने पर यह एक बेहद गंभीर मामला है। पीड़ित परिवार ने पुलिस आयुक्त से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। इस घटना से सवाल उठता है कि आखिर पुलिस का डंडा केवल कमजोरों पर ही क्यों चलता है और क्या कानून गरीब व दबे-कुचले लोगों के लिए अलग है, जबकि रसूखदारों के लिए अलग?1