झालावाड़ शहर में नेशनल हाईवे-52 पर कृषि विज्ञान केंद्र से सहकार भवन, झालरापाटन रोड तक सड़क किनारे बने नालों की टूटी और खुली स्लैबें राहगीरों के लिए लगातार गंभीर खतरा बनी हुई हैं। कई स्थानों पर स्लैब अपनी जगह से खिसकी हुई हैं, जिससे नाले का बड़ा हिस्सा खुला पड़ा है और किसी भी वक्त गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिमपूर्ण है, खासकर यह देखते हुए कि यह मार्ग शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में से एक है जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। शहर के निर्भय सिंह सर्किल पर इसी तरह के एक खुले नाले के कारण कुछ वर्ष पहले एक युवक की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर घटना के बावजूद, समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हादसे के बाद भी संबंधित विभाग ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे कई स्थानों पर अभी भी सीमेंट की स्लैब टूटकर झुक गई हैं और नाले का हिस्सा पूरी तरह खुला है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि खुले नालों की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो फिर कोई और हादसा हो सकता है। इसे देखते हुए, लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नगर परिषद और अन्य संबंधित विभागों से तत्काल मांग की है कि इन खुले नालों की मरम्मत कर मजबूत स्लैब लगाई जाएं, साथ ही चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए जाएं।
झालावाड़ शहर में नेशनल हाईवे-52 पर कृषि विज्ञान केंद्र से सहकार भवन, झालरापाटन रोड तक सड़क किनारे बने नालों की टूटी और खुली स्लैबें राहगीरों के लिए लगातार गंभीर खतरा बनी हुई हैं। कई स्थानों पर स्लैब अपनी जगह से खिसकी हुई हैं, जिससे नाले का बड़ा हिस्सा खुला पड़ा है और किसी भी वक्त गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिमपूर्ण है, खासकर यह देखते हुए कि यह मार्ग शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में से एक है जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। शहर के निर्भय सिंह सर्किल पर इसी तरह के एक खुले नाले के कारण कुछ वर्ष पहले एक युवक की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर घटना के बावजूद, समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हादसे के बाद भी संबंधित विभाग ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे कई स्थानों पर अभी भी सीमेंट की स्लैब टूटकर झुक गई हैं और नाले का हिस्सा पूरी तरह खुला है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि खुले नालों की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो फिर कोई और हादसा हो सकता है। इसे देखते हुए, लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नगर परिषद और अन्य संबंधित विभागों से तत्काल मांग की है कि इन खुले नालों की मरम्मत कर मजबूत स्लैब लगाई जाएं, साथ ही चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए जाएं।
- झालावाड़ में 102 वर्षीय वृद्ध उदा बेरवा को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से तत्काल मानवीय सहायता मिली, जब वे मंगलवार को अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुँचे। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और आमजन के प्रति मानवीय सरोकारों का यह एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। झालावाड़ जिले के किशनपुरा बारा, पाटलिया कुल्मी निवासी उदा बेरवा ने कलेक्टर को बताया कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित थे, जिसके कारण उन्हें दैनिक जीवन-यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने भावुक होकर अपनी यह परेशानी कलेक्टर के समक्ष रखी और सहायता की गुहार लगाई। वृद्ध की व्यथा सुनते ही जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल रसद विभाग के अधिकारी को निर्देश दिए। इन निर्देशों में परिवादी का आवश्यक दस्तावेजी कार्य पूर्ण कराने, जनआधार पंजीयन करवाने और उन्हें शीघ्र खाद्य सुरक्षा योजना में लाभान्वित करने की बात कही गई। इन निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। इतना ही नहीं, वृद्ध की आयु को देखते हुए जिला कलेक्टर ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी निर्देश दिए। उन्होंने वृद्ध को सुरक्षित उनके घर तक पहुँचाने की व्यवस्था करने का आदेश दिया, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने एम्बुलेंस उपलब्ध कराई। इसके फलस्वरूप, वृद्ध उदा बेरवा को उनके गाँव स्थित घर तक सकुशल पहुँचाया गया। जिला प्रशासन की इस आत्मीय पहल से उदा बेरवा अभिभूत हो गए। उनकी आँखों में राहत और संतोष स्पष्ट झलक रहा था, और उन्होंने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतनी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ समाधान होगा।2
- राजस्थान के कोटा जिले के खैराबाद स्थित कुरैशी मोहल्ले में, मोहर्रम के पवित्र महीने के अवसर पर दलीम तैयार कर उसका वितरण किया गया।1
- झालावाड़ जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने आमजन से 'झगड़ा प्रथा' के दुष्परिणामों को लेकर एक विशेष अपील की है। इस अपील के माध्यम से उन्होंने इस प्रथा के नकारात्मक प्रभावों के प्रति लोगों को सचेत करने का प्रयास किया है।1
- आचार्य प्रशांत द्वारा यह विषय प्रस्तुत किया गया है कि हम कैसे अंत की ओर जा रहे हैं। श्रोताओं को इस संबंध में उनके विचारों को सुनने के लिए आमंत्रित किया गया है।1
- नाभि जटका प्रयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बंजारी और अमलावदा आली में सोमवार को ग्रामीण सेवा शिविर 2026 का सफल आयोजन किया गया। सरकार की जनकल्याणकारी और फ्लैगशिप योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से हुए इस शिविर में अधिकारियों ने आमजन को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, मौके पर ही परिवेदनाओं का निस्तारण किया और लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया। इस शिविर में राजस्व, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायती राज, आयोजना, ग्रामीण विकास, पशुपालन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल, श्रम, कृषि, आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति, जनजाति क्षेत्रीय विकास, शिक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक निर्माण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, सहकारिता, सैनिक कल्याण, वन, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण तथा परिवहन विभाग सहित कुल 22 विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। बंजारी पंचायत समिति छीपाबड़ौद में आयोजित शिविर के दौरान ग्राम गुराड़ी के कल्याण, डूंगरसिंह, महेंद्र और हैमराज सहित अन्य ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार राधेश्याम लवंशी को बताया कि उनके खेतों पर आने-जाने का रास्ता खसरा नंबर 49 से होकर गुजरता है, जिसे गाँव के कुछ लोगों ने 10-12 वर्षों से अतिक्रमण कर बंद कर रखा था। शिविर प्रभारी नायब तहसीलदार ने तत्काल कानूगो ललित शाक्यवाल और पटवारी शुभम क्षोत्रिय के नेतृत्व में एक राजस्व टीम मौके पर भेजी। राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे के आधार पर खसरा 49 की पैमाइश की गई और रास्ते में की गई अवैध बाड़बंदी तथा कब्जों को जेसीबी की मदद से शांतिपूर्ण ढंग से हटवाया गया। इस कार्रवाई से अब किसानों को अपने खेतों तक आवागमन में सुविधा मिलेगी। वहीं, अमलावदा आली में हुए शिविर में ग्राम गुंदलाई निवासी शिवनाथ सिंह मीणा पुत्र रामचंद्र मीणा ने अपनी समस्या बताई। उन्होंने जानकारी दी कि ग्राम गुंदलाई और मौखमपुरा में उनके खाता संख्या 105, 9, 11, 6, 7, 8 में उनका नाम शिवनाथ सिंह के बजाय शिवनारायण सिंह, सोनाथ सिंह या श्योनाथ सिंह दर्ज हो गया था, जिसके कारण उन्हें बैंक, केसी और मुआवजे से संबंधित कार्यों में 20-22 साल से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शिविर प्रभारी के निर्देश पर राजस्व टीम ने आवश्यक दस्तावेजों की जाँच कर मौके पर ही खाते में नाम का संशोधन कर दिया, जिस पर किसान ने शिविर की व्यवस्था और त्वरित समाधान पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। अमलावदा आली शिविर में तहसीलदार सुरेंद्र सिंह गुर्जर, कानूगो दीपक मीणा, हर्षप्रताप सिंह, प्रशासक दिलीप मीणा और ग्राम विकास अधिकारी दिलीप सिंह भाटी उपस्थित रहे। जबकि बंजारी शिविर में नायब तहसीलदार राधेश्याम लवंशी, अतिरिक्त कानूगो जगदीश नामदेव, ललित शाक्यवाल, पटवारी शुभम क्षोत्रिय, ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र गुर्जर, किशनदास स्वामी और कंप्यूटर सहायक राकेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। इन सफल आयोजनों के बाद, मंगलवार 23.06.2026 को कचनारीयां कलां और मौखमपुरा में भी ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित किए जाएंगे।4
- रामगंजमंडी की चेचट तहसील के ग्राम फतेहपुर में कालबेलिया घुमंतु समाज ने रिको कंपनी के कर्मचारियों पर अपने पूर्वजों की समाधियों को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर समाज के लोगों ने पुलिस उप अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम फतेहपुर में कालबेलिया घुमंतु समाज के पूर्वजों की करीब 70 से 80 वर्ष पुरानी समाधियां मौजूद हैं। समाज का आरोप है कि रिको कंपनी के कर्मचारी जेसीबी मशीन चलाकर इन प्राचीन समाधियों की खुदाई कर रहे हैं और उन्हें तोड़-फोड़ कर क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। समाज ने स्पष्ट किया है कि ये समाधियां उनके पूर्वजों की स्मृति और आस्था का केंद्र हैं, और इन्हें नुकसान पहुँचाने से उनकी धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं को गहरा आघात पहुँच रहा है। इस घटना को लेकर कालबेलिया समाज में भारी रोष व्याप्त है। रिंकू धाकड और समाज के अन्य प्रतिनिधियों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इन समाधियों को यथास्थान सुरक्षित रखा जाए। साथ ही, उन्होंने रिको कंपनी के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी दोहराई। यह ज्ञापन समस्त कालबेलिया घुमंतु समाज, ग्राम फतेहपुर, तहसील चेचट, जिला कोटा की ओर से प्रस्तुत किया गया है।1
- झालावाड़ शहर में नेशनल हाईवे-52 पर कृषि विज्ञान केंद्र से सहकार भवन, झालरापाटन रोड तक सड़क किनारे बने नालों की टूटी और खुली स्लैबें राहगीरों के लिए लगातार गंभीर खतरा बनी हुई हैं। कई स्थानों पर स्लैब अपनी जगह से खिसकी हुई हैं, जिससे नाले का बड़ा हिस्सा खुला पड़ा है और किसी भी वक्त गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिमपूर्ण है, खासकर यह देखते हुए कि यह मार्ग शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में से एक है जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। शहर के निर्भय सिंह सर्किल पर इसी तरह के एक खुले नाले के कारण कुछ वर्ष पहले एक युवक की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर घटना के बावजूद, समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हादसे के बाद भी संबंधित विभाग ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे कई स्थानों पर अभी भी सीमेंट की स्लैब टूटकर झुक गई हैं और नाले का हिस्सा पूरी तरह खुला है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि खुले नालों की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो फिर कोई और हादसा हो सकता है। इसे देखते हुए, लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नगर परिषद और अन्य संबंधित विभागों से तत्काल मांग की है कि इन खुले नालों की मरम्मत कर मजबूत स्लैब लगाई जाएं, साथ ही चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए जाएं।1