जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जियो टैग पर मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर! आखिर किसके इशारे पर कई दिनों से सरकारी धन का खेल चल रहा है? वाह रे सिस्टम! वाह रे मनरेगा की निगरानी! कागजों में 75 मजदूर रोज फावड़ा चला रहे हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही मजदूर ऐसे गायब कि जैसे कभी थे ही नहीं! और तो और, जिस जगह सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों के पसीने से विकास होने का दावा किया जा रहा है, वहां मौके पर नाला पानी से लबालब और खेत में जानवरों के लिए कर्बी खड़ी दिखाई दे रही है। मामला है विकासखंड कदौरा की ग्राम पंचायत बरदौली का, जहां संतराम के खेत से स्वामीदीन के खेत तक नाला खुदाई कार्य मनरेगा के तहत बताया जा रहा है। कार्य का वर्क कोड 3138009010... और मस्टर रोल संख्या 1291 बताई गई है। आरोप है कि 9 सितंबर से लगातार करीब 75 मजदूरों की NMMS हाजिरी दर्ज की जा रही है। सवाल यह है कि आखिर ये 75 मजदूर हैं कहां? 13 सितंबर को मौके पर पहुंचे तो एक भी मजदूर दिखाई नहीं दिया। नाला पानी से भरा हुआ है। मौके पर मजदूरों की जगह दिखाई दे रही है तो सिर्फ जानवरों के लिए खड़ी कर्बी! वाह रे जियो टैग! कैमरे में कुछ और, जमीन पर कुछ और! अब जरा मनरेगा की डिजिटल व्यवस्था पर भी सवाल उठाइए। अगर 75 मजदूर प्रतिदिन काम कर रहे हैं तो उनकी जियो टैग फोटो कहां है? फोटो में कितने मजदूर दिखाई दे रहे हैं? क्या फोटो उसी स्थान की है जहां वास्तव में काम होना है? क्या NMMS की हाजिरी लगाने से पहले जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं या मोबाइल से ही सरकारी खजाने का हिसाब-किताब चल रहा है? कैमरा अगर मजदूरों की मौजूदगी नहीं दिखा रहा और मौके पर भी मजदूर नहीं मिल रहे, तो फिर कागजों में 75 मजदूरों का पसीना आखिर किसके भरोसे बह रहा है? गरीबों के नाम पर सरकारी धन का खेल? मनरेगा गरीब परिवारों को रोजगार देने की योजना है। गरीब मजदूरों के हाथ में काम और मजदूरी पहुंचनी चाहिए, लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं और कागजों में मजदूर दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है तो यह गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। सवाल बड़ा है—क्या बिना मौके पर मजदूरों की मौजूदगी के मस्टर रोल सत्यापित हो सकता है? रोजगार सेवक क्या कर रहे थे? ग्राम पंचायत सचिव ने क्या सत्यापन किया? तकनीकी सहायक ने कार्यस्थल देखा या नहीं? कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ने क्या जांच की? BDO कदौरा की निगरानी कहां थी? और जिला स्तर पर CDO जालौन तथा जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा की मॉनिटरिंग व्यवस्था आखिर किस काम की है? अब जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल! अब जरूरत है कि मस्टर रोल संख्या 1291, NMMS की प्रत्येक दिन की हाजिरी, जियो टैग फोटो, मजदूरों के नाम, भुगतान विवरण और मौके पर कराए गए कार्य का तत्काल मिलान कराया जाए। अगर रिकॉर्ड में 75 मजदूर हैं तो जांच के दौरान उन मजदूरों से भी पूछा जाए कि उन्होंने किस दिन, किस समय और किस स्थान पर काम किया। अगर मजदूर वास्तव में काम कर रहे थे तो 13 सितंबर को मौके पर एक भी मजदूर क्यों नहीं मिला? और अगर काम नहीं हो रहा था तो फिर हाजिरी कैसे लगी? वाह रे इंसान! आखिर इतनी हिम्मत आपको कौन दे रहा है? कई दिनों से अगर कागजों पर मजदूर दिखाकर सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा है तो यह सिर्फ फाइलों का मामला नहीं है। यह उस गरीब मजदूर के अधिकार का सवाल है जिसके नाम पर मनरेगा बनाई गई है। याद रखिए—अगर जांच में सरकारी धन की अनियमित निकासी या फर्जी हाजिरी साबित हुई तो जिम्मेदार लोगों से रिकवरी भी होनी चाहिए और नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी। वायरल वीडियो ने खोली जमीनी हकीकत? मौके से सामने आए वायरल वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस वायरल वीडियो को सिर्फ वीडियो मानकर छोड़ते हैं या फिर इसे जांच का आधार बनाकर मौके पर पहुंचते हैं। सरकार का पैसा जनता का पैसा है। गरीबों का हक कोई जेब में रखकर नहीं जा सकता। अब सवाल सिर्फ बरदौली का नहीं—सवाल यह है कि क्या कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में भी NMMS हाजिरी और जमीनी हकीकत का मिलान कराया जाएगा? फैसला अब जांच करेगी—कागजों में 75 मजदूर थे या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में? नोट: यह रिपोर्ट मौके से प्राप्त जानकारी, उपलब्ध रिकॉर्ड के दावों तथा वायरल वीडियो/तस्वीरों के आधार पर है। लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जियो टैग पर मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर! आखिर किसके इशारे पर कई दिनों से सरकारी धन का खेल चल रहा है? वाह रे सिस्टम! वाह रे मनरेगा की निगरानी! कागजों में 75 मजदूर रोज फावड़ा चला रहे हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही मजदूर ऐसे गायब कि जैसे कभी थे ही नहीं! और तो और, जिस जगह सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों के पसीने से विकास होने का दावा किया जा रहा है, वहां मौके पर नाला पानी से लबालब और खेत में जानवरों के लिए कर्बी खड़ी दिखाई दे रही है। मामला है विकासखंड कदौरा की ग्राम पंचायत बरदौली का, जहां संतराम के खेत से स्वामीदीन के खेत तक नाला खुदाई कार्य मनरेगा के तहत बताया जा रहा है। कार्य का वर्क कोड 3138009010... और मस्टर रोल संख्या 1291 बताई गई है। आरोप है कि 9 सितंबर से लगातार करीब 75 मजदूरों की NMMS हाजिरी दर्ज की जा रही है। सवाल यह है कि आखिर ये 75 मजदूर हैं कहां? 13 सितंबर को मौके पर पहुंचे तो एक भी मजदूर दिखाई नहीं दिया। नाला पानी से भरा हुआ है। मौके पर मजदूरों की जगह दिखाई दे रही है तो सिर्फ जानवरों के लिए खड़ी कर्बी! वाह रे जियो टैग! कैमरे में कुछ और, जमीन पर कुछ और! अब जरा मनरेगा की डिजिटल व्यवस्था पर भी सवाल उठाइए। अगर 75 मजदूर प्रतिदिन काम कर रहे हैं तो उनकी जियो टैग फोटो कहां है? फोटो में कितने मजदूर दिखाई दे रहे हैं? क्या फोटो उसी स्थान की है जहां वास्तव में काम होना है? क्या NMMS की हाजिरी लगाने से पहले जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं या मोबाइल से ही सरकारी खजाने का हिसाब-किताब चल रहा है? कैमरा अगर मजदूरों की मौजूदगी नहीं दिखा रहा और मौके पर भी मजदूर नहीं मिल रहे, तो फिर कागजों में 75 मजदूरों का पसीना आखिर किसके भरोसे बह रहा है? गरीबों के नाम पर सरकारी धन का खेल? मनरेगा गरीब परिवारों को रोजगार देने की योजना है। गरीब मजदूरों के हाथ में काम और मजदूरी पहुंचनी चाहिए, लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं और कागजों में मजदूर दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है तो यह गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। सवाल बड़ा है—क्या बिना मौके पर मजदूरों की मौजूदगी के मस्टर रोल सत्यापित हो सकता है? रोजगार सेवक क्या कर रहे थे? ग्राम पंचायत सचिव ने क्या सत्यापन किया? तकनीकी सहायक ने कार्यस्थल देखा या नहीं? कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ने क्या जांच की? BDO कदौरा की निगरानी कहां थी? और जिला स्तर पर CDO जालौन तथा जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा की मॉनिटरिंग व्यवस्था आखिर किस काम की है? अब जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल! अब जरूरत है कि मस्टर रोल संख्या 1291, NMMS की प्रत्येक दिन की हाजिरी, जियो टैग फोटो, मजदूरों के नाम, भुगतान विवरण और मौके पर कराए गए कार्य का तत्काल मिलान कराया जाए। अगर रिकॉर्ड में 75 मजदूर हैं तो जांच के दौरान उन मजदूरों से भी पूछा जाए कि उन्होंने किस दिन, किस समय और किस स्थान पर काम किया। अगर मजदूर वास्तव में काम कर रहे थे तो 13 सितंबर को मौके पर एक भी मजदूर क्यों नहीं मिला? और अगर काम नहीं हो रहा था तो फिर हाजिरी कैसे लगी? वाह रे इंसान! आखिर इतनी हिम्मत आपको कौन दे रहा है? कई दिनों से अगर कागजों पर मजदूर दिखाकर सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा है तो यह सिर्फ फाइलों का मामला नहीं है। यह उस गरीब मजदूर के अधिकार का सवाल है जिसके नाम पर मनरेगा बनाई गई है। याद रखिए—अगर जांच में सरकारी धन की अनियमित निकासी या फर्जी हाजिरी साबित हुई तो जिम्मेदार लोगों से रिकवरी भी होनी चाहिए और नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी। वायरल वीडियो ने खोली जमीनी हकीकत? मौके से सामने आए वायरल वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस वायरल वीडियो को सिर्फ वीडियो मानकर छोड़ते हैं या फिर इसे जांच का आधार बनाकर मौके पर पहुंचते हैं। सरकार का पैसा जनता का पैसा है। गरीबों का हक कोई जेब में रखकर नहीं जा सकता। अब सवाल सिर्फ बरदौली का नहीं—सवाल यह है कि क्या कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में भी NMMS हाजिरी और जमीनी हकीकत का मिलान कराया जाएगा? फैसला अब जांच करेगी—कागजों में 75 मजदूर थे या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में? नोट: यह रिपोर्ट मौके से प्राप्त जानकारी, उपलब्ध रिकॉर्ड के दावों तथा वायरल वीडियो/तस्वीरों के आधार पर है। लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
- जालौन के उरई में अजनारी बायपास गोलीकांड मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली जालौन के उरई में अजनारी बायपास गोलीकांड मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। उरई कोतवाली पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी अजय सिंह ठाकुर और रामजी सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से तमंचा, कारतूस और चाकू बरामद हुआ है। बता दें कि मोहित यादव निवासी रामनगर पर चाकुओं से हमला कर गोली मारकर हत्या के प्रयास का आरोप है। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है2
- जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जियो टैग पर मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर! आखिर किसके इशारे पर कई दिनों से सरकारी धन का खेल चल रहा है? वाह रे सिस्टम! वाह रे मनरेगा की निगरानी! कागजों में 75 मजदूर रोज फावड़ा चला रहे हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही मजदूर ऐसे गायब कि जैसे कभी थे ही नहीं! और तो और, जिस जगह सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों के पसीने से विकास होने का दावा किया जा रहा है, वहां मौके पर नाला पानी से लबालब और खेत में जानवरों के लिए कर्बी खड़ी दिखाई दे रही है। मामला है विकासखंड कदौरा की ग्राम पंचायत बरदौली का, जहां संतराम के खेत से स्वामीदीन के खेत तक नाला खुदाई कार्य मनरेगा के तहत बताया जा रहा है। कार्य का वर्क कोड 3138009010... और मस्टर रोल संख्या 1291 बताई गई है। आरोप है कि 9 सितंबर से लगातार करीब 75 मजदूरों की NMMS हाजिरी दर्ज की जा रही है। सवाल यह है कि आखिर ये 75 मजदूर हैं कहां? 13 सितंबर को मौके पर पहुंचे तो एक भी मजदूर दिखाई नहीं दिया। नाला पानी से भरा हुआ है। मौके पर मजदूरों की जगह दिखाई दे रही है तो सिर्फ जानवरों के लिए खड़ी कर्बी! वाह रे जियो टैग! कैमरे में कुछ और, जमीन पर कुछ और! अब जरा मनरेगा की डिजिटल व्यवस्था पर भी सवाल उठाइए। अगर 75 मजदूर प्रतिदिन काम कर रहे हैं तो उनकी जियो टैग फोटो कहां है? फोटो में कितने मजदूर दिखाई दे रहे हैं? क्या फोटो उसी स्थान की है जहां वास्तव में काम होना है? क्या NMMS की हाजिरी लगाने से पहले जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं या मोबाइल से ही सरकारी खजाने का हिसाब-किताब चल रहा है? कैमरा अगर मजदूरों की मौजूदगी नहीं दिखा रहा और मौके पर भी मजदूर नहीं मिल रहे, तो फिर कागजों में 75 मजदूरों का पसीना आखिर किसके भरोसे बह रहा है? गरीबों के नाम पर सरकारी धन का खेल? मनरेगा गरीब परिवारों को रोजगार देने की योजना है। गरीब मजदूरों के हाथ में काम और मजदूरी पहुंचनी चाहिए, लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं और कागजों में मजदूर दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है तो यह गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। सवाल बड़ा है—क्या बिना मौके पर मजदूरों की मौजूदगी के मस्टर रोल सत्यापित हो सकता है? रोजगार सेवक क्या कर रहे थे? ग्राम पंचायत सचिव ने क्या सत्यापन किया? तकनीकी सहायक ने कार्यस्थल देखा या नहीं? कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ने क्या जांच की? BDO कदौरा की निगरानी कहां थी? और जिला स्तर पर CDO जालौन तथा जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा की मॉनिटरिंग व्यवस्था आखिर किस काम की है? अब जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल! अब जरूरत है कि मस्टर रोल संख्या 1291, NMMS की प्रत्येक दिन की हाजिरी, जियो टैग फोटो, मजदूरों के नाम, भुगतान विवरण और मौके पर कराए गए कार्य का तत्काल मिलान कराया जाए। अगर रिकॉर्ड में 75 मजदूर हैं तो जांच के दौरान उन मजदूरों से भी पूछा जाए कि उन्होंने किस दिन, किस समय और किस स्थान पर काम किया। अगर मजदूर वास्तव में काम कर रहे थे तो 13 सितंबर को मौके पर एक भी मजदूर क्यों नहीं मिला? और अगर काम नहीं हो रहा था तो फिर हाजिरी कैसे लगी? वाह रे इंसान! आखिर इतनी हिम्मत आपको कौन दे रहा है? कई दिनों से अगर कागजों पर मजदूर दिखाकर सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा है तो यह सिर्फ फाइलों का मामला नहीं है। यह उस गरीब मजदूर के अधिकार का सवाल है जिसके नाम पर मनरेगा बनाई गई है। याद रखिए—अगर जांच में सरकारी धन की अनियमित निकासी या फर्जी हाजिरी साबित हुई तो जिम्मेदार लोगों से रिकवरी भी होनी चाहिए और नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी। वायरल वीडियो ने खोली जमीनी हकीकत? मौके से सामने आए वायरल वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस वायरल वीडियो को सिर्फ वीडियो मानकर छोड़ते हैं या फिर इसे जांच का आधार बनाकर मौके पर पहुंचते हैं। सरकार का पैसा जनता का पैसा है। गरीबों का हक कोई जेब में रखकर नहीं जा सकता। अब सवाल सिर्फ बरदौली का नहीं—सवाल यह है कि क्या कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में भी NMMS हाजिरी और जमीनी हकीकत का मिलान कराया जाएगा? फैसला अब जांच करेगी—कागजों में 75 मजदूर थे या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में? नोट: यह रिपोर्ट मौके से प्राप्त जानकारी, उपलब्ध रिकॉर्ड के दावों तथा वायरल वीडियो/तस्वीरों के आधार पर है। लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।1
- जिला जालौन की कालपी में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की कालपी। नगर स्थित तहसील परिसर के पास राजस्व भूमि पर निर्माण एवं अतिक्रमण की सूचना के बाद प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। राजस्व विभाग की टीम की मौजूदगी में बुलडोजर की मदद से निर्माण एवं अतिक्रमण को हटाया गया। मामला मौजा अहमदपुर दिवारा से संबंधित बताया जा रहा है। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या-7 का रकबा 1.343 हेक्टेयर दर्ज है, जिसमें श्री रघुनाथ जी विराजमान मंदिर, तारीबुल्दा कालपी का नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अभिलेख में मुहातिम के रूप में योगेश कुमार शुक्ला और रमेश चंद्र शुक्ला के नाम का भी उल्लेख है। बताया गया कि गाटा संख्या-8 के आसपास हुए निर्माण को लेकर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माण एवं अतिक्रमण को हटाया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल, कानूनगो सहित राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद मौके पर स्थिति सामान्य रही। मामले से जुड़े अन्य तथ्य राजस्व अभिलेखों एवं प्रशासनिक कार्रवाई के आधार पर स्पष्ट होंगे। खबर उपलब्ध राजस्व अभिलेखों एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।3
- यातायात और थाना पुलिस द्वारा संयुक्त टीम बनाकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान के तहत की गयी सख्त कार्यवाही जनपद में सुरक्षित यातायात एवं सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु एक विशेष चेकिंग अभियान संचालित किया गया। इस अभियान के तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों, मोडिफाई साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न हूटर, फाल्टी नंबर प्लेट व विशेषकर शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध यातायात पुलिस, थाना पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया।इसी क्रम में यातायात पुलिस, थाना पुलिस बल व परिवहन विभाग द्वारा अपने थाना क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। चेकिंग के दौरान पुलिस टीम द्वारा संदिग्ध वाहनों को रोककर ब्रीथ एनालाइजर के माध्यम से चालकों की सघन जांच की गई।अभियान के दौरान 44 वाहनों का चालान किया गया और उन्यासी हजार रुपए का शमन शुल्क वसूला गया।अभियान के दौरान नशे की हालत में वाहन चलाते हुए पाए गए चालकों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत वैधानिक कार्यवाही की गई।1
- खोजाफूल में सैलून संचालक से मारपीट और 15 हजार रुपये लूटने का आरोप, थाने में दी तहरीर खोजाफूल में सैलून संचालक से मारपीट और 15 हजार रुपये लूटने का आरोप, थाने में दी तहरीर कानपुर देहात। सिकंदरा थाना क्षेत्र के खोजाफूल गांव निवासी सैलून संचालक जीशान अली ने करीब 8-10 अज्ञात युवकों पर मारपीट, गाली-गलौज और दुकान में रखे रुपये छीनने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले में सिकंदरा थाना पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के मुताबिक, 13 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे वह खोजाफूल ग्राम स्थित अपनी सैलून की दुकान पर काम कर रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल से आए 8-10 अज्ञात युवकों ने उससे बाल काटने की बात कही। कुछ समय रुकने को कहने पर युवक कथित तौर पर उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज करने लगे। आरोप है कि युवकों ने दुकान की शीशे की शेल्फ भी तोड़ दी और गुल्लक में रखे 15 हजार रुपये तथा करीब 400 रुपये की दुकानदारी जबरन छीनकर भाग गए। पीड़ित का यह भी आरोप है कि जाते समय युवकों ने शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। जीशान अली ने सिकंदरा थाना पुलिस को तहरीर देकर मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। खबर कानपुर देहात | पत्रकार इकबाल अहमद3
- सिकंदरा में लापता व्यक्ति का नहर में मिला शव, मोटरसाइकिल भी बरामद सिकंदरा (कानपुर देहात)। अमराहट थाना क्षेत्र के ग्राम सिंगरौली निवासी करीब 45 वर्षीय सामंत सिकंदरा में लापता व्यक्ति का नहर में मिला शव, मोटरसाइकिल भी बरामद सिकंदरा (कानपुर देहात)। अमराहट थाना क्षेत्र के ग्राम सिंगरौली निवासी करीब 45 वर्षीय सामंत सिंह पुत्र शिवराम सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव शनिवार सुबह रामगंगा निचली नहर में मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक सामंत सिंह शुक्रवार शाम करीब 8 बजे अपनी पल्सर मोटरसाइकिल से कस्बा सिकंदरा से अपने घर के लिए निकले थे। देर रात तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसके बाद परिजनों ने रात में उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। शनिवार सुबह करीब 10 बजे परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस ने परिजनों और ग्रामीणों की मदद से सीसीटीवी कैमरों के जरिए हरिहरपुर चौराहे से अमराहट जाने वाले मार्ग पर तलाश शुरू की। करीब 11 बजे नसीरपुर क्षेत्र में हरिहरपुर-अमराहट रोड स्थित रामगंगा निचली नहर की पुलिया के पास मोटरसाइकिल के टायर के निशान मिले। निशानों के आधार पर नहर में तलाश की गई तो पुलिया के नीचे सामंत सिंह की मोटरसाइकिल फंसी हुई मिली। गोताखोरों की मदद से आगे तलाश करने पर पुलिया से करीब 200 मीटर दूर सामंत सिंह का शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार शव के सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए। परिजनों ने सामंत सिंह की मौत सड़क दुर्घटना में होने की आशंका जताई है। मामले की जांच के लिए जनपदीय फॉरेंसिक फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाया गया। टीम ने साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की। पुलिस ने पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया। मौके पर मृतक के परिजन मौजूद रहे।2
- 🚨 #Kanpurdehat हवासपुर CHC कांड पर धरना या सियासी मंच?दीक्षा यादव की सक्रियता पर उठे सवाल!🚨 🚨 BIG BREAKING | कानपुर देहात 🚨 #Kanpurdehat हवासपुर CHC कांड पर धरना या सियासी मंच?दीक्षा यादव की सक्रियता पर उठे सवाल!🚨 ➡️ डिलीवरी के दौरान महिला की मौत के बाद एक उम्मीद की राष्ट्रीय सचिव दीक्षा यादव के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं व ग्रामीणों ने DM कार्यालय पर धरना दिया। ➡️ प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए नर्स के निलंबन,CHC प्रभारी पर कार्रवाई और मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता की मांग की। ➡️ मामले में नर्स के निलंबन के साथ 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है। ❓लेकिन अब बड़ा सवाल यह भी—क्या इस मुद्दे को न्याय की मांग तक सीमित रखा गया या इसे राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश भी हुई? ❓जब सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों में कथित अनियमितताओं के मामले सामने आते हैं, तब ऐसी सक्रियता और भीड़ हर बार क्यों नजर नहीं आती? ➡️जनता का सवाल साफ है—मृतका को न्याय चाहिए या मुद्दे के बहाने राजनीतिक पहचान चमकाने की कोशिश? ➡️अंतिम सच जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा, लेकिन सवालों का जवाब जिम्मेदार लोगों को देना होगा।1
- जालौन जालौन में पुलिस टीम ने जुए के अड्डे पर दबिश देकर की छापेमारी, पुलिस ने छापेमारी के दौरान 8 जुआरियों को किया गिरफ्तार, पकड़े गए जुआरियों के कब्जे से 1 लाख 37 हजार 500 रुपए कैश बरामद, पुलिस ने जुआरियों के पास से 8 मोबाइल फोन भी किए बरामद, पकड़े गए जुआरी लाखों की हार-जीत की बाजी लगाकर हर रोज चल रहे थे जुए का अड्डा, पुलिस ने पकड़े गए जुआरियों के खिलाफ जुआ अधिनियम में मामला किया दर्ज, जालौन की उरई कोतवाली पुलिस ने श्रीराम पैलेस के पास से की गिरफ्तारी। जालौन जालौन में पुलिस टीम ने जुए के अड्डे पर दबिश देकर की छापेमारी, पुलिस ने छापेमारी के दौरान 8 जुआरियों को किया गिरफ्तार, पकड़े गए जुआरियों के कब्जे से 1 लाख 37 हजार 500 रुपए कैश बरामद, पुलिस ने जुआरियों के पास से 8 मोबाइल फोन भी किए बरामद, पकड़े गए जुआरी लाखों की हार-जीत की बाजी लगाकर हर रोज चल रहे थे जुए का अड्डा, पुलिस ने पकड़े गए जुआरियों के खिलाफ जुआ अधिनियम में मामला किया दर्ज, जालौन की उरई कोतवाली पुलिस ने श्रीराम पैलेस के पास से की गिरफ्तारी।1