10 दिवसीय मेकअप कार्यशाला का भव्य समापन, प्रतिभाओं को डॉ. संदीप ने किया सम्मानित झाँसी। आर्यन मेकअप मंत्रा, ग्वालियर रोड, झांसी एवं आदर्श पब्लिक इंटर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय मेकअप कार्यशाला का समापन समारोह गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सौंदर्य कला, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. संदीप सरावगी तथा विशिष्ट अतिथि दीपमाला कुशवाहा ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि मेकअप केवल सौंदर्य संवर्धन का माध्यम नहीं, बल्कि सृजनात्मक अभिव्यक्ति और आत्मनिर्भरता का सशक्त साधन भी है। उन्होंने प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए निरंतर अभ्यास एवं नवाचार पर बल दिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने अपने-अपने मॉडलों पर आधुनिक मेकअप तकनीकों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रत्येक प्रस्तुति में कलात्मक सौंदर्य, तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिया। प्रतिभागियों की उत्कृष्ट प्रतिभा के कारण निर्णायक मंडल के लिए विजेताओं का चयन अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा। सूक्ष्म तकनीकी मूल्यांकन के उपरांत कृष्ण यादव को प्रथम, खुशबू कुशवाहा को द्वितीय तथा मोहिनी अहिरवार को तृतीय स्थान प्रदान किया गया। समारोह के अंत में हेमंत कुशवाह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रेरित करती हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आर्यन मेकअप मंत्रा के निदेशक संजीव कुमार विश्वकर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर रिंकी कुशवाहा, सचिन कुशवाहा, राहुल परिहार, आकाश, बबली, प्रथम, अनिकेत, मोहिनी, नैंसी एवं सीमा सहित संस्थान का समस्त स्टाफ एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
10 दिवसीय मेकअप कार्यशाला का भव्य समापन, प्रतिभाओं को डॉ. संदीप ने किया सम्मानित झाँसी। आर्यन मेकअप मंत्रा, ग्वालियर रोड, झांसी एवं आदर्श पब्लिक इंटर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय मेकअप कार्यशाला का समापन समारोह गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सौंदर्य कला, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. संदीप सरावगी
तथा विशिष्ट अतिथि दीपमाला कुशवाहा ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि मेकअप केवल सौंदर्य संवर्धन का माध्यम नहीं, बल्कि सृजनात्मक अभिव्यक्ति और आत्मनिर्भरता का सशक्त साधन भी है। उन्होंने प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए निरंतर अभ्यास एवं नवाचार पर बल दिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने अपने-अपने मॉडलों पर आधुनिक मेकअप तकनीकों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रत्येक प्रस्तुति में कलात्मक सौंदर्य, तकनीकी दक्षता
और रचनात्मक सोच का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिया। प्रतिभागियों की उत्कृष्ट प्रतिभा के कारण निर्णायक मंडल के लिए विजेताओं का चयन अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा। सूक्ष्म तकनीकी मूल्यांकन के उपरांत कृष्ण यादव को प्रथम, खुशबू कुशवाहा को द्वितीय तथा मोहिनी अहिरवार को तृतीय स्थान प्रदान किया गया। समारोह के अंत में हेमंत कुशवाह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार
की कार्यशालाएं युवाओं की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रेरित करती हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आर्यन मेकअप मंत्रा के निदेशक संजीव कुमार विश्वकर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर रिंकी कुशवाहा, सचिन कुशवाहा, राहुल परिहार, आकाश, बबली, प्रथम, अनिकेत, मोहिनी, नैंसी एवं सीमा सहित संस्थान का समस्त स्टाफ एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
- झाँसी पुलिस की बड़ी कामयाबी: सीपरी बाजार में अंतर्राज्यीय चोर गिरोह के 3 शातिर गिरफ्तार! झाँसी दिनांक 07 अगस्त 2026 को थाना सीपरी बाजार पुलिस द्वारा चोरी की घटना की योजना बनाते हुए 03 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में ज्ञात हुआ कि तीनों अभियुक्त राजस्थान के निवासी हैं तथा एक अंतर्राज्यीय चोरी गिरोह के सदस्य हैं। अभियुक्तगण बंद पड़े मकानों की रेकी कर सब्बल व सरिया से ताला एवं दरवाजे तोड़कर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। इनके द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर जनपद झाँसी में भी चोरी की घटनाएं कारित की गई हैं। अभियुक्तों के कब्जे से अवैध शस्त्र, कारतूस, चोरी की नकदी, जेवरात तथा चोरी में प्रयुक्त सब्बल व सरिया बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास भी प्रकाश में आया है। प्रकरण में की जा रही अग्रेतर कार्यवाही के संबंध में पुलिस अधीक्षक नगर की वीडियो बाइट2
- पूर्व कैंट बोर्ड सीईओ बबीना...📍 // शंकर बाबू रेड्डी जी ने किया बबीना आकर मोती तालाब का निरीक्षण बुंदेलखंड क्षेत्र बबीना की ऐतिहासिक धरोहर 'मोती तालाब' पर आज एक विशेष पल देखने को मिला। आज पूर्व सीईओ, कैंट बोर्ड बबीना श्री शंकर बाबू रेड्डी साहब मोती तालाब पहुंचे। यह वही अधिकारी हैं, जिनके कार्यकाल में वर्षों पहले इस ऐतिहासिक तालाब का सौंदर्यीकरण कराया गया था और इसे एक नई पहचान मिली थी। लेकिन उनके बबीना से स्थानांतरण के बाद लंबे समय तक इस धरोहर की ओर किसी ने विशेष ध्यान नहीं दिया। समय के साथ तालाब अपनी चमक खोता चला गया।4
- झांसी भाई अबान की मौत की खबर सुनकर झांसी जेल में रातभर रोया अली, अली व उमर को मिली पैरोल, ले जाया जाएगा प्रयागराज। झांसी भाई अबान की मौत की खबर सुनकर झांसी जेल में रातभर रोया अली, अली व उमर को मिली पैरोल, ले जाया जाएगा प्रयागराज। क्या अब बुर्के में छिपकर अपने बेटे अबान को अंतिम विदाई देने आ सकती है मां शाइस्ता परवीन? जो 2023 से है फरार, 1 लाख का इनाम है घोषित। झांसी में बेटे असद के एनकाउंटर में मारे जाने, व पति अतीक अहमद की हत्या के बाद भी नहीं पहुंची थी शाइस्ता। पुलिस की उस पर रहेगी पैनी नजर।2
- धौलपुर (एक्स.)–ग्वालियर जंक्शन सेक्शन में ‘मानक कवच’ की पहली सफल कमीशनिंग 68.5 रूट किलोमीटर सेक्शन में 1036 RFID टैग लगाए गए झांसी, 07 अगस्त 2026: उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में रेल यात्रियों की सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए धौलपुर (एक्स.)–ग्वालियर जंक्शन (इंक्लूसिव) सेक्शन में 68.5 रूट किलोमीटर की दूरी पर ‘मानक कवच’ प्रणाली की पहली सफल कमीशनिंग आज दिनांक 07 अगस्त 2026 को की गई। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मंडल रेल प्रबंधक श्री अनिरुद्ध कुमार, उत्तर मध्य रेलवे के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में परियोजना इकाई, झाँसी के द्वारा हासिल की गई। इस परियोजना के अंतर्गत धौलपुर से ग्वालियर तक कुल 68.5 किलोमीटर रेलखंड में 1036 RFID टैग लगाए गए हैं। ये RFID टैग ट्रेन की स्थिति एवं पहचान से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में कवच प्रणाली की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। ‘मानक कवच’ एक स्वदेशी Automatic Train Protection (ATP) प्रणाली है, जिसका उद्देश्य मानवीय त्रुटियों की स्थिति में ट्रेन परिचालन की सुरक्षा को बढ़ाना है। यह प्रणाली लोको पायलट को आवश्यक सुरक्षा सहायता प्रदान करते हुए विभिन्न परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने में सक्षम है। मानक कवच के प्रमुख सुरक्षा लाभों में शामिल हैं: *सामने से होने वाली टक्कर (Head-on Collision) से सुरक्षा* *पीछे से होने वाली टक्कर (Rear-end Collision) से सुरक्षा* *रोल-अवे (Roll away) से सुरक्षा* *स्टैंडस्टिल (Standstill) सुरक्षा* *लोको पायलट को सिग्नल एवं परिचालन संबंधी आवश्यक सुरक्षा सहायता* धौलपुर–ग्वालियर सेक्शन में मानक कवच की कमीशनिंग से इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर ट्रेन परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता में और वृद्धि होगी। धौलपुर (एक्स.)–ग्वालियर जंक्शन सेक्शन में मानक कवच की यह कमीशनिंग झांसी मंडल में मानक कवच प्रणाली की पहली कमीशनिंग है। यह उपलब्धि उत्तर मध्य रेलवे द्वारा आधुनिक स्वदेशी सुरक्षा तकनीक को अपनाने और रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने में सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग, परियोजना इकाई झांसी तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। टीम के समन्वित प्रयासों से निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप मानक कवच प्रणाली को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया। इस परियोजना को अपर मंडल रेल प्रबंधक इंफ्रा श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, अपर मंडल रेल प्रबंधक परिचालन श्री नंदीश शुक्ला, मंडल प्रबंधक परिचाल प्रबंधक श्रीमती उर्वशी , वरिष्ठ मंडल इंजीनियर ( Co.) श्री आशुतोष चौरसिया , वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार अभियंता (Co) श्री नरेंद्र सिंह , डिप्टी चीफ सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (प्रोजेक्ट ) श्री मयंक अग्रवाल एवं समस्त डिवीज़न की टीम के सक्रिय सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।1
- श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।1
- उत्तर मध्य रेलवे के झांसी वैगन मरम्मत कारखाना ने ओपन माल वैगनों के लिए लॉकिंग एवं गाइडिंग तंत्र सहित डिटेचेबल ऊपरी बॉडी प्रणाली विकसित की उत्तर मध्य रेलवे के वैगन मरम्मत कारखाना , झांसी ने रेलवे माल वैगनों के लिए एक ऐसा अभिनव नवाचार विकसित किया है, जो विशेष रूप से ओपन माल वैगनों की संरचना से संबंधित है। इस नवाचार के अंतर्गत एक वियोज्य (डिटेचेबल) ऊपरी बॉडी विकसित की गई है, जिसे विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए लॉकिंग एवं गाइडिंग तंत्र की सहायता से वैगन के अंडरफ्रेम से अलग किया जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर पुनः आसानी से जोड़ा जा सकता है। यह नवाचार वैगन की साइड वॉल, एंड वॉल तथा फ्लोर संरचना (ऊपरी बॉडी) को बड़े स्तर के मरम्मत कार्य के दौरान अंडरफ्रेम से अलग करने की सुविधा प्रदान करता है। इस दौरान अंडरफ्रेम पर तुरंत एक अन्य उपयोग योग्य ऊपरी बॉडी लगाकर वैगन को पुनः परिचालन में लाया जा सकता है, जिससे वैगनों के मरम्मत हेतु रुकने (डिटेंशन) का समय उल्लेखनीय रूप से कम हो जाता है। यह नवाचार विशेष रूप से वैगन मरम्मत कारखानों, दुर्घटना बहाली (एक्सीडेंट रेस्टोरेशन) स्थलों, माल ढुलाई टर्मिनलों तथा अनुरक्षण डिपो में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा, जहाँ वैगनों की शीघ्र बहाली एवं उनकी उपलब्धता बढ़ाना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। *1. वर्तमान प्रौद्योगिकी* वर्तमान में भारतीय रेलवे के माल वैगनों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनकी बॉडी स्थायी रूप से अंडरफ्रेम से वेल्डेड रहती है। जब वैगन की साइड पैनल, फ्लोर प्लेट, एंड वॉल, स्टैंचियन अथवा अन्य संरचनात्मक अवयवों के प्रतिस्थापन जैसी बड़ी मरम्मत की आवश्यकता होती है, तब पूरे वैगन को परिचालन से हटाकर मरम्मत कारखाना भेजना पड़ता है। यद्यपि अधिकांश मामलों में वैगन का अंडरफ्रेम संरचनात्मक रूप से पूरी तरह सुरक्षित एवं उपयोग योग्य रहता है, फिर भी बॉडी के उससे स्थायी रूप से जुड़े होने के कारण उसका स्वतंत्र रूप से उपयोग संभव नहीं हो पाता। इसी प्रकार, दुर्घटना की स्थिति में क्षतिग्रस्त वैगनों को हटाने के लिए संपूर्ण वैगन को क्रेन अथवा अन्य दुर्घटना बहाली उपकरणों की सहायता से हटाना पड़ता है, जिससे रेल मार्ग लंबे समय तक अवरुद्ध रहता है और रेल यातायात प्रभावित होता है। भारी बॉडी मरम्मत वाले माल वैगनों का औसत मरम्मत चक्र लगभग 6 दिन का होता है। इसके परिणामस्वरूप वैगनों की उपलब्धता कम हो जाती है तथा माल परिवहन से होने वाली संभावित राजस्व प्राप्ति भी प्रभावित होती है। *2. वर्तमान प्रौद्योगिकी की कमियाँ / समस्याएँ / चुनौतियाँ* वर्तमान वैगन संरचना में निम्नलिखित प्रमुख सीमाएँ एवं चुनौतियाँ विद्यमान हैं— • वैगन की बॉडी अंडरफ्रेम से स्थायी रूप से जुड़ी (वेल्डेड) रहती है। • केवल बॉडी के क्षतिग्रस्त होने पर भी पूरा वैगन अनुपयोगी हो जाता है। • मरम्मत में औसतन लगभग 6 दिन का समय लगता है। • वैगनों को अधिक समय तक कारखानों में रखना पड़ता है। • अधिक जनशक्ति की आवश्यकता होती है। • माल वैगनों की उपलब्धता में कमी आती है। • रेलवे दुर्घटनाओं के दौरान क्षतिग्रस्त वैगनों की बहाली में विलंब होता है। इन चुनौतियों को देखते हुए ऐसी वैगन संरचना की आवश्यकता थी, जिसमें क्षतिग्रस्त बॉडी को स्वतंत्र रूप से बदला जा सके तथा उपयोग योग्य अंडरफ्रेम को बिना विलंब पुनः परिचालन में लाया जा सके। *3. कारखाना द्वारा विकसित नवाचार* झांसी वैगन मरम्मत कारखाना द्वारा विकसित इस नवाचार के अंतर्गत ओपन माल वैगन के लिए पूर्णतः वियोज्य (डिटेचेबल) ऊपरी बॉडी प्रणाली विकसित की गई है। इस डिटैचेबेल ऊपरी बॉडी में निम्नलिखित भाग सम्मिलित हैं— • साइड वॉल (पार्श्व दीवारें) • एंड वॉल (अंतिम दीवारें) • फ्लोर असेंबली (फर्श संरचना) इस ऊपरी बॉडी को अंडरफ्रेम पर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए छह लॉकिंग तंत्रों के माध्यम से स्थापित किया जाता है, जिनमें प्रत्येक ओर तीन-तीन लॉकिंग तंत्र लगाए गए हैं। स्थापना के दौरान ऊपरी बॉडी का सटीक संरेखण सुनिश्चित करने के लिए वैगन के दोनों सिरों पर गाइडिंग पोस्ट प्रदान किए गए हैं। जब भी वैगन की बॉडी में व्यापक मरम्मत की आवश्यकता होती है, लॉकिंग तंत्र को खोलकर क्रेन की सहायता से पूरी ऊपरी बॉडी को अंडरफ्रेम से अलग कर लिया जाता है। इसके पश्चात मरम्मत की गई अथवा पहले से उपलब्ध उपयोग योग्य ऊपरी बॉडी को उसी अंडरफ्रेम पर गाइडिंग पोस्ट की सहायता से सटीक रूप से स्थापित कर पुनः लॉकिंग तंत्र द्वारा सुरक्षित कर दिया जाता है। इस प्रकार, अंडरफ्रेम को बॉडी की मरम्मत पूर्ण होने की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत पुनः परिचालन में लाया जा सकता है, जिससे वैगनों की उपलब्धता बढ़ती है तथा मरम्मत में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम हो जाता है। *4. प्रस्तावित नवाचार का सारांश* यह नवाचार एक मॉड्यूलर माल वैगन संरचना प्रस्तुत करता है, जिसमें वैगन की ऊपरी बॉडी को अंडरफ्रेम से आसानी से अलग किया जा सकता है। इस प्रणाली में संपूर्ण वैगन की मरम्मत करने के स्थान पर केवल क्षतिग्रस्त ऊपरी बॉडी को हटाकर उसके स्थान पर पहले से उपलब्ध अथवा मरम्मत की गई उपयोग योग्य ऊपरी बॉडी स्थापित कर दी जाती है। यह नवाचार मरम्मत में लगने वाले समय को उल्लेखनीय रूप से कम करता है, वैगनों की उपलब्धता बढ़ाता है, कारखानों में होने वाले कंजेशन को कम करता है तथा रेलवे दुर्घटनाओं के दौरान वैगनों की बहाली को अधिक तेज एवं प्रभावी बनाता है। यह प्रणाली पूर्णतः यांत्रिक है तथा इसका निर्माण पारंपरिक फैब्रिकेशन तकनीकों का उपयोग करके आसानी से किया जा सकता है। कार्य सिद्धांत *सामान्य परिचालन* सामान्य परिचालन के दौरान डिटैचेबल ऊपरी बॉडी को छह विशेष लॉकिंग असेंबली के माध्यम से अंडरफ्रेम पर सुरक्षित रूप से लॉक किया जाता है। दोनों ओर लगाए गए लॉकिंग तंत्र संयुक्त रूप से कार्य करते हुए ऊपरी बॉडी और अंडरफ्रेम को एकीकृत संरचना के रूप में मजबूती प्रदान करते हैं, जिससे वैगन का संचालन पारंपरिक (कन्वेंशनल) माल वैगन की भाँति सुरक्षित एवं सुचारु रूप से होता है। *मरम्मत के दौरान* जब वैगन की बॉडी में व्यापक मरम्मत की आवश्यकता होती है, तब निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है— • लॉकिंग तंत्र को खोला जाता है। • ओवरहेड क्रेन की सहायता से पूरी ऊपरी बॉडी को उठाकर अलग कर दिया जाता है। • अंडरफ्रेम तुरंत पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाता है। • उसके स्थान पर पहले से उपलब्ध उपयोग योग्य (स्पेयर) ऊपरी बॉडी स्थापित की जाती है। • गाइडिंग पोस्ट ऊपरी बॉडी के सटीक संरेखण को सुनिश्चित करते हैं। • लॉकिंग तंत्र को पुनः सक्रिय कर ऊपरी बॉडी को सुरक्षित रूप से अंडरफ्रेम से जोड़ दिया जाता है। • इसके बाद वैगन को तुरंत पुनः परिचालन के लिए उपलब्ध करा दिया जाता है। दुर्घटना बहाली *रेलवे दुर्घटना की स्थिति में—* • केवल क्षतिग्रस्त ऊपरी बॉडी को हटाया जाता है। • आवश्यक निरीक्षण के उपरांत उपयोग योग्य पाए जाने पर अंडरफ्रेम का पुनः उपयोग किया जा सकता है। इस नवाचार से दुर्घटना बहाली में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम हो जाता है तथा रेल मार्ग के अवरुद्ध रहने की अवधि भी काफी घट जाती है, जिससे रेल यातायात शीघ्र सामान्य किया जा सकता है। 5. प्रमुख लाभ प्रस्तावित नवाचार निम्नलिखित महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है— • पूर्णतः डिटेचेबल वैगन बॉडी की सुविधा। • मॉड्यूलर वैगन संरचना, जिससे रखरखाव एवं मरम्मत अधिक सरल और प्रभावी बनती है। • मरम्मत चक्र में उल्लेखनीय कमी, जो लगभग 6 दिनों से घटकर लगभग 3 दिन रह जाता है। • माल वैगनों की उपलब्धता में वृद्धि। • क्षतिग्रस्त बॉडी का त्वरित प्रतिस्थापन। • अनुरक्षण एवं मरम्मत प्रक्रिया का सरलीकरण। • रेलवे दुर्घटनाओं के दौरान तेज एवं प्रभावी बहाली। • माल परिवहन क्षमता में वृद्धि। • राजस्व हानि में उल्लेखनीय कमी तथा रेलवे के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की संभावित बचत। • उपलब्ध वैगन बेड़े का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग। • परिचालन दक्षता में वृद्धि। • वैगनों के संपूर्ण जीवनकाल में अनुरक्षण लागत में कमी। 6. औद्योगिक उपयोगिता यह नवाचार भारतीय रेलवे के सभी ओपन माल वैगनों में लागू किया जा सकता है। 7. राजस्व में संभावित बचत प्रस्तावित डिटेचेबलवैगन बॉडी प्रणाली के माध्यम से भारतीय रेलवे को राजस्व में उल्लेखनीय बचत होने की संभावना है। इसका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है— • अनुमानतः एक माल वैगन परिचालन में रहते हुए प्रतिदिन लगभग ₹12,600 का राजस्व अर्जित करता है। • वर्तमान में भारतीय रेलवे में प्रतिदिन लगभग 680 माल वैगनों को नियमित अनुरक्षण की आवश्यकता के कारण 'सिक' घोषित कर कारखानों में भेजा जाता है। • इनमें से लगभग 255 वैगन ऐसे होते हैं, जिनमें केवल बॉडी की मरम्मत की आवश्यकता होती है। • प्रस्तावित डिटेचेबल वैगन बॉडी प्रणाली लागू होने पर पूरे वैगन को कारखाना भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल ऊपरी बॉडी को मरम्मत हेतु अलग किया जाएगा, जबकि उपयोग योग्य अंडरफ्रेम पर तुरंत दूसरी फिट ऊपरी बॉडी लगाकर उसे पुनः परिचालन में लगाया जा सकेगा। इससे ओपन माल वैगनों के अनुपलब्ध रहने के कारण होने वाली दैनिक राजस्व हानि में उल्लेखनीय कमी आएगी। • साथ ही, मरम्मत अवधि वर्तमान के लगभग 6 दिनों से घटकर लगभग 3 दिन अथवा उससे भी कम हो जाएगी, जिससे मरम्मत चक्र कम होने के कारण अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्राप्त होगा। • वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, मरम्मत के दौरान वैगनों के डिटेंशन समय में कमी आने से भारतीय रेलवे की वार्षिक आय में लगभग ₹106.99 करोड़ की वृद्धि होने की संभावना है। • इसके अतिरिक्त, डिटेचेबल वैगन डिज़ाइन के कारण वैगनों के अनुपयोगी रहने से होने वाली संभावित राजस्व हानि में भी प्रतिवर्ष लगभग ₹77.748 करोड़ की कमी लाई जा सकती है। • *इस प्रकार, डिटेचेबल वैगन अवधारणा को अपनाने से भारतीय रेलवे को प्रतिवर्ष कुल लगभग ₹184.738 करोड़ की संभावित बचत एवं अतिरिक्त राजस्व लाभ प्राप्त हो सकता है।*1
- प्रयागराज से इस वक्त की बड़ी खबर......................... प्रयागराज: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबाँन का अंतिम संस्कार आज जुमे की नमाज़ के बाद किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर हटवा स्थित उनकी बुआ के घर पर रखा गया है, जहां लोगों की भीड़ जुट रही है।1