राजधानी लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र में नूरानी मस्जिद के पास नाले के आसपास वर्षों से गंदा पानी जमा होने के कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस जलभराव के चलते मस्जिद में नमाज़ अदा करने आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती है, वहीं मदरसा और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी रोज़ाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के पार्षद और विधायक से कई बार इस समस्या की शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सड़क पर भरे इस गंदे पानी के कारण बैटरी रिक्शे भी कई बार पलट जाते हैं, जिससे यात्रियों और चालकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है। क्षेत्रवासियों ने नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल मांग की है कि इस जलभराव की समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान किया जाए। उनकी अपेक्षा है कि इससे लोगों को राहत मिलेगी और किसी बड़ी दुर्घटना से भी बचा जा सकेगा।
राजधानी लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र में नूरानी मस्जिद के पास नाले के आसपास वर्षों से गंदा पानी जमा होने के कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस जलभराव के चलते मस्जिद में नमाज़ अदा करने आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती है, वहीं मदरसा और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी रोज़ाना इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के पार्षद और विधायक से कई बार इस समस्या की शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सड़क पर भरे इस गंदे पानी के कारण बैटरी रिक्शे भी कई बार पलट जाते हैं, जिससे यात्रियों और चालकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है। क्षेत्रवासियों ने नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल मांग की है कि इस जलभराव की समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान किया जाए। उनकी अपेक्षा है कि इससे लोगों को राहत मिलेगी और किसी बड़ी दुर्घटना से भी बचा जा सकेगा।
- लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान विवाद खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उन पर कार्रवाई की बात कही गई। इस दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने के लिए कहा गया, जिसके कारण एक तीखी बहस छिड़ गई। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में 'डग्गामार' यानी अवैध वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी ऐसी मांग उठी है कि यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि ये आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की यह अपेक्षा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसका उद्देश्य कानून का राज स्थापित करना और जनता का विश्वास बनाए रखना है, विशेषकर अवैध वाहनों के संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के मद्देनजर।1
- लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान एक विवाद उत्पन्न हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जाँच की गई और कार्रवाई की बात कही गई। इसी दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने को कहा गया, जिससे बहस की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में डग्गामार (अवैध) वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले पर, यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं, तो भी जाँच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की अपेक्षा है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए, जिससे कानून का राज और जनता का विश्वास दोनों कायम रहें।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा में सोशल मीडिया पर एक लड़की का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने इस मामले में होटल पर कार्रवाई की मांग करते हुए एक वीडियो जारी किया, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया। यह आपत्तिजनक वीडियो मंटोला थाना क्षेत्र के दर्शन स्थित एक होटल का बताया जा रहा है, और पुलिस ने इसमें तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस घटनाक्रम के बीच, मीरा राठौर को कल शाम से ही ताजगंज थाना और मंटोला पुलिस द्वारा उनके घर पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है। हिंदू महासभा की मांग है कि यह केवल वीडियो वायरल करने का मुकदमा नहीं है, बल्कि इसे सामूहिक बलात्कार का मामला मानते हुए कार्रवाई की जाए। संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि जिस होटल में यह घटना हुई, उसके मालिक को भी मुकदमे में शामिल किया जाए और होटल को सील करने की कार्रवाई की जाए। इन्हीं मांगों को लेकर हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने होटल लालस इन पर जबरदस्त प्रदर्शन किया, जिसके चलते भारी पुलिस बल ने होटल को छावनी में बदल दिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ हिंदू नेत्री मीना दिवाकर और वरिष्ठ नेता मनीष पंडित ने किया। प्रदर्शन के पश्चात, सभी कार्यकर्ता मीरा राठौर के निवास ताजगंज पर पहुंचे, जिसकी जानकारी होते ही पुलिस प्रशासन में फिर हड़कंप मच गया और भारी पुलिस बल उनके आवास पर पहुंच गया। इस मौके पर मीरा राठौर एवं महानगर उपाध्यक्ष संगीता कुलश्रेष्ठ ने चेतावनी दी कि अगर बालिका को न्याय नहीं मिला तो 48 घंटे बाद भूख हड़ताल पर बैठकर आंदोलन किया जाएगा। हिंदू महासभा ने थाना इंस्पेक्टर मंटोला को एक मांग पत्र भी सौंपा है, जिसमें गंभीर धाराओं एवं गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। इस कार्यक्रम में मीना दिवाकर, मनीष पंडित, निशा ठाकुर, संगीता सक्सेना, श्रीमती बंटी बाबू भाई, नंदू भाई, ओमप्रकाश जी, विपिन राठौर, अवतार सिंह गिल, बबलू निषाद, मनीष कुमार, शीला देवी, प्रेम देवी, कुसुम रागिनी शर्मा और मंजू देवी सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।4
- राम मंदिर आंदोलन से जुड़े एक चर्चित पूर्व कारसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दुबे को विशेष रूप से 1992 के बाबरी विध्वंस में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है। उनका परिचय किसी का मोहताज नहीं है। संतोष दुबे मात्र 16 वर्ष की आयु से ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गए थे। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराने वाले कारसेवकों में वह शामिल थे, जिसमें उन्हें काफी चोटें आई थीं और रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी 17 जगहों की हड्डियां टूट गई थीं। आंदोलन के दौरान संतोष दुबे को कई बार जेल जाना पड़ा था, और उन पर 1994 तथा 2000 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई हुई थी। उन्हें आंदोलन के दौरान कई गोलियां भी लगी थीं। उन्होंने यह संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर नहीं बन जाता और रामलला वहां विराजमान नहीं हो जाते, तब तक वे अपने घर का निर्माण नहीं करवाएंगे। हाल के दिनों में, संतोष दुबे अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में हैं। वे राम मंदिर में चढ़ावे (दान) में कथित हेराफेरी और गबन के मामलों को लेकर काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए राम जन्मभूमि थाने में तहरीर दी है और आरोपियों के 'पॉलीग्राफ टेस्ट' की मांग की है। वर्तमान में, वे 'हिन्दू धर्म सेना' के प्रमुख के रूप में अपनी बात रखते हैं और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों, जैसे चंपत राय, पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। संक्षेप में, संतोष दुबे ने राम मंदिर आंदोलन में एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाई है और अब वे मंदिर के प्रबंधन और चंदे में पारदर्शिता को लेकर एक मुखर आवाज के रूप में देखे जा रहे हैं।1
- लखनऊ में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के आवास पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुँचे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद भी वहाँ मौजूद रहे। साथ ही, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष और प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ उपस्थित थे।1
- बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील में उपजिलाधिकारी के विरुद्ध अधिवक्ताओं का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को बीकेटी बार एसोसिएशन के बैनर तले वकीलों ने सामूहिक अवकाश लेकर काला फीता बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण की मांग को फिर से दोहराया। बार एसोसिएशन का आरोप है कि उपजिलाधिकारी के न्यायालय में बड़ी संख्या में पत्रावलियाँ लंबे समय से लंबित हैं, जिनका समय पर निस्तारण नहीं किया जा रहा है। अधिवक्ताओं के अनुसार, आदेशों और टिप्पणियों को लेकर भी आपत्ति है, और अनावश्यक टिप्पणियां लिखकर मामलों को लंबित रखा जा रहा है, जिससे वादकारियों को काफी परेशानी हो रही है। आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण सहित अन्य राजस्व मामलों का भी समय पर समाधान नहीं हो रहा है, और आम लोगों से मिलने में भी उपजिलाधिकारी द्वारा उदासीनता बरती जा रही है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष कुमार सिंह ने बताया कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आमसभा में लिए गए निर्णय के तहत अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी के न्यायालय का बहिष्कार शुरू कर दिया है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपजिलाधिकारी साहिल कुमार का बख्शी का तालाब तहसील से स्थानांतरण नहीं किया जाता, तब तक अधिवक्ता सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और न्यायालय का कार्य नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर वे उच्च अधिकारियों से मिलकर दोबारा ज्ञापन सौंपेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।3