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लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान विवाद खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उन पर कार्रवाई की बात कही गई। इस दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने के लिए कहा गया, जिसके कारण एक तीखी बहस छिड़ गई। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में 'डग्गामार' यानी अवैध वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी ऐसी मांग उठी है कि यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि ये आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की यह अपेक्षा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसका उद्देश्य कानून का राज स्थापित करना और जनता का विश्वास बनाए रखना है, विशेषकर अवैध वाहनों के संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के मद्देनजर।

2 hrs ago
user_Khabro Ki Paini Najar News New
Khabro Ki Paini Najar News New
Advertising agency बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान विवाद खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उन पर कार्रवाई की बात कही गई। इस दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने के लिए कहा गया, जिसके कारण एक तीखी बहस छिड़ गई। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में 'डग्गामार' यानी अवैध वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी ऐसी मांग उठी है कि यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि ये आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की यह अपेक्षा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसका उद्देश्य कानून का राज स्थापित करना और जनता का विश्वास बनाए रखना है, विशेषकर अवैध वाहनों के संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के मद्देनजर।

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  • लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान विवाद खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उन पर कार्रवाई की बात कही गई। इस दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने के लिए कहा गया, जिसके कारण एक तीखी बहस छिड़ गई। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में 'डग्गामार' यानी अवैध वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी ऐसी मांग उठी है कि यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि ये आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की यह अपेक्षा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसका उद्देश्य कानून का राज स्थापित करना और जनता का विश्वास बनाए रखना है, विशेषकर अवैध वाहनों के संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के मद्देनजर।
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    लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान विवाद खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उन पर कार्रवाई की बात कही गई। इस दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने के लिए कहा गया, जिसके कारण एक तीखी बहस छिड़ गई।

इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में 'डग्गामार' यानी अवैध वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी ऐसी मांग उठी है कि यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि ये आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की यह अपेक्षा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसका उद्देश्य कानून का राज स्थापित करना और जनता का विश्वास बनाए रखना है, विशेषकर अवैध वाहनों के संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के मद्देनजर।
    user_Khabro Ki Paini Najar News New
    Khabro Ki Paini Najar News New
    Advertising agency बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान एक विवाद उत्पन्न हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जाँच की गई और कार्रवाई की बात कही गई। इसी दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने को कहा गया, जिससे बहस की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में डग्गामार (अवैध) वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले पर, यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं, तो भी जाँच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की अपेक्षा है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए, जिससे कानून का राज और जनता का विश्वास दोनों कायम रहें।
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    लखनऊ के अहमामऊ क्षेत्र में रविवार सुबह ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान एक विवाद उत्पन्न हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ निजी वाहनों को रोककर उनके दस्तावेजों की जाँच की गई और कार्रवाई की बात कही गई। इसी दौरान, मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर उसे "सरकारी कार्य में बाधा न बनें" कहते हुए पुलिस चौकी चलने को कहा गया, जिससे बहस की स्थिति बन गई।

स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि अहमामऊ क्षेत्र से बड़ी संख्या में डग्गामार (अवैध) वाहन संचालित होते हैं। उनका दावा है कि इन वाहनों के संचालन में अनियमितताओं और कथित संरक्षण की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे मामले पर, यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं, तो भी जाँच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बयानों को देखते हुए, आमजन की अपेक्षा है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए, जिससे कानून का राज और जनता का विश्वास दोनों कायम रहें।
    user_आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    Voice of people Bakshi Ka Talab, Lucknow•
    4 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के आगरा में सोशल मीडिया पर एक लड़की का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने इस मामले में होटल पर कार्रवाई की मांग करते हुए एक वीडियो जारी किया, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया। यह आपत्तिजनक वीडियो मंटोला थाना क्षेत्र के दर्शन स्थित एक होटल का बताया जा रहा है, और पुलिस ने इसमें तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस घटनाक्रम के बीच, मीरा राठौर को कल शाम से ही ताजगंज थाना और मंटोला पुलिस द्वारा उनके घर पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है। हिंदू महासभा की मांग है कि यह केवल वीडियो वायरल करने का मुकदमा नहीं है, बल्कि इसे सामूहिक बलात्कार का मामला मानते हुए कार्रवाई की जाए। संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि जिस होटल में यह घटना हुई, उसके मालिक को भी मुकदमे में शामिल किया जाए और होटल को सील करने की कार्रवाई की जाए। इन्हीं मांगों को लेकर हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने होटल लालस इन पर जबरदस्त प्रदर्शन किया, जिसके चलते भारी पुलिस बल ने होटल को छावनी में बदल दिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ हिंदू नेत्री मीना दिवाकर और वरिष्ठ नेता मनीष पंडित ने किया। प्रदर्शन के पश्चात, सभी कार्यकर्ता मीरा राठौर के निवास ताजगंज पर पहुंचे, जिसकी जानकारी होते ही पुलिस प्रशासन में फिर हड़कंप मच गया और भारी पुलिस बल उनके आवास पर पहुंच गया। इस मौके पर मीरा राठौर एवं महानगर उपाध्यक्ष संगीता कुलश्रेष्ठ ने चेतावनी दी कि अगर बालिका को न्याय नहीं मिला तो 48 घंटे बाद भूख हड़ताल पर बैठकर आंदोलन किया जाएगा। हिंदू महासभा ने थाना इंस्पेक्टर मंटोला को एक मांग पत्र भी सौंपा है, जिसमें गंभीर धाराओं एवं गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। इस कार्यक्रम में मीना दिवाकर, मनीष पंडित, निशा ठाकुर, संगीता सक्सेना, श्रीमती बंटी बाबू भाई, नंदू भाई, ओमप्रकाश जी, विपिन राठौर, अवतार सिंह गिल, बबलू निषाद, मनीष कुमार, शीला देवी, प्रेम देवी, कुसुम रागिनी शर्मा और मंजू देवी सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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    उत्तर प्रदेश के आगरा में सोशल मीडिया पर एक लड़की का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने इस मामले में होटल पर कार्रवाई की मांग करते हुए एक वीडियो जारी किया, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया। यह आपत्तिजनक वीडियो मंटोला थाना क्षेत्र के दर्शन स्थित एक होटल का बताया जा रहा है, और पुलिस ने इसमें तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इस घटनाक्रम के बीच, मीरा राठौर को कल शाम से ही ताजगंज थाना और मंटोला पुलिस द्वारा उनके घर पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है। हिंदू महासभा की मांग है कि यह केवल वीडियो वायरल करने का मुकदमा नहीं है, बल्कि इसे सामूहिक बलात्कार का मामला मानते हुए कार्रवाई की जाए। संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि जिस होटल में यह घटना हुई, उसके मालिक को भी मुकदमे में शामिल किया जाए और होटल को सील करने की कार्रवाई की जाए।

इन्हीं मांगों को लेकर हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने होटल लालस इन पर जबरदस्त प्रदर्शन किया, जिसके चलते भारी पुलिस बल ने होटल को छावनी में बदल दिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ हिंदू नेत्री मीना दिवाकर और वरिष्ठ नेता मनीष पंडित ने किया। प्रदर्शन के पश्चात, सभी कार्यकर्ता मीरा राठौर के निवास ताजगंज पर पहुंचे, जिसकी जानकारी होते ही पुलिस प्रशासन में फिर हड़कंप मच गया और भारी पुलिस बल उनके आवास पर पहुंच गया। इस मौके पर मीरा राठौर एवं महानगर उपाध्यक्ष संगीता कुलश्रेष्ठ ने चेतावनी दी कि अगर बालिका को न्याय नहीं मिला तो 48 घंटे बाद भूख हड़ताल पर बैठकर आंदोलन किया जाएगा। हिंदू महासभा ने थाना इंस्पेक्टर मंटोला को एक मांग पत्र भी सौंपा है, जिसमें गंभीर धाराओं एवं गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। इस कार्यक्रम में मीना दिवाकर, मनीष पंडित, निशा ठाकुर, संगीता सक्सेना, श्रीमती बंटी बाबू भाई, नंदू भाई, ओमप्रकाश जी, विपिन राठौर, अवतार सिंह गिल, बबलू निषाद, मनीष कुमार, शीला देवी, प्रेम देवी, कुसुम रागिनी शर्मा और मंजू देवी सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_NATIONAL INDIA TV
    NATIONAL INDIA TV
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बाराबंकी के सांसद माननीय तनुज पुनिया जी के अथक प्रयास आखिरकार रंग लाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोकसभा में किसानों के हित से जुड़े उनके दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई हुई। उन्होंने मेंथा किसानों के लिए उचित दरों और खरबूजे के बीज में गड़बड़ी तथा अधिक कीमत के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन में उठाया था। सांसद पुनिया के हस्तक्षेप से इस वर्ष खरबूजा बोने वाले किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध हो सका, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई। इसी तरह, बाराबंकी जनपद की एक प्रमुख फसल मेंथा के किसानों की स्थिति भी सुधरी। पिछले 10-12 वर्षों से मेंथा का रेट 900 से 1000 रुपये के बीच स्थिर था, जिससे किसानों की माली हालत खराब हो रही थी और वे इस फसल से विमुख हो रहे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान, तनुज पुनिया जी ने बाराबंकी की जनता से वादा किया था कि मौका मिलने पर वे मेंथा के लिए संसद में लड़ाई लड़ेंगे और बेहतर मूल्य दिलाने का प्रयास करेंगे। उनके निरंतर प्रयासों के बाद, सरकार झुकी, जिससे प्राकृतिक मेंथा और सिंथेटिक मेंथा के लिए अलग-अलग एचएसएन कोड निर्धारित हो सके। इस बदलाव से व्यापारी वर्ग और संबंधित मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने सिंथेटिक मेंथा के बजाय प्राकृतिक मेंथा की खरीद को प्राथमिकता दी, जिसके फलस्वरूप इसके मूल्य में वृद्धि होने लगी। इसके अतिरिक्त, सांसद जी ने इस पर लगने वाले जीएसटी पर भी सवाल उठाए थे, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक मेंथा पर 5% और सिंथेटिक मेंथा पर 18% जीएसटी लागू हुई। इस निर्णय का भी मेंथा की दरों में बढ़ोतरी पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है। किसान वर्ग सांसद पुनिया का बहुत आभारी है कि उनके छोटे से प्रयास से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। किसानों ने भविष्य में आलू किसानों के लिए भी एक ठोस योजना बनाए जाने की अपील की है, ताकि उन्हें भी घाटा न उठाना पड़े और उनकी फसल का एक निश्चित मूल्य निर्धारित हो सके। ब्यूरो चीफ रामानंद सागर के अनुसार, सांसद तनुज पुनिया के प्रयासों के कारण इस बार मेंथा किसानों को और भी अच्छे रेट मिलने की संभावना है।
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    बाराबंकी के सांसद माननीय तनुज पुनिया जी के अथक प्रयास आखिरकार रंग लाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोकसभा में किसानों के हित से जुड़े उनके दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई हुई। उन्होंने मेंथा किसानों के लिए उचित दरों और खरबूजे के बीज में गड़बड़ी तथा अधिक कीमत के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन में उठाया था।

सांसद पुनिया के हस्तक्षेप से इस वर्ष खरबूजा बोने वाले किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध हो सका, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई। इसी तरह, बाराबंकी जनपद की एक प्रमुख फसल मेंथा के किसानों की स्थिति भी सुधरी। पिछले 10-12 वर्षों से मेंथा का रेट 900 से 1000 रुपये के बीच स्थिर था, जिससे किसानों की माली हालत खराब हो रही थी और वे इस फसल से विमुख हो रहे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान, तनुज पुनिया जी ने बाराबंकी की जनता से वादा किया था कि मौका मिलने पर वे मेंथा के लिए संसद में लड़ाई लड़ेंगे और बेहतर मूल्य दिलाने का प्रयास करेंगे। उनके निरंतर प्रयासों के बाद, सरकार झुकी, जिससे प्राकृतिक मेंथा और सिंथेटिक मेंथा के लिए अलग-अलग एचएसएन कोड निर्धारित हो सके। इस बदलाव से व्यापारी वर्ग और संबंधित मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने सिंथेटिक मेंथा के बजाय प्राकृतिक मेंथा की खरीद को प्राथमिकता दी, जिसके फलस्वरूप इसके मूल्य में वृद्धि होने लगी। इसके अतिरिक्त, सांसद जी ने इस पर लगने वाले जीएसटी पर भी सवाल उठाए थे, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक मेंथा पर 5% और सिंथेटिक मेंथा पर 18% जीएसटी लागू हुई। इस निर्णय का भी मेंथा की दरों में बढ़ोतरी पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है।

किसान वर्ग सांसद पुनिया का बहुत आभारी है कि उनके छोटे से प्रयास से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। किसानों ने भविष्य में आलू किसानों के लिए भी एक ठोस योजना बनाए जाने की अपील की है, ताकि उन्हें भी घाटा न उठाना पड़े और उनकी फसल का एक निश्चित मूल्य निर्धारित हो सके। ब्यूरो चीफ रामानंद सागर के अनुसार, सांसद तनुज पुनिया के प्रयासों के कारण इस बार मेंथा किसानों को और भी अच्छे रेट मिलने की संभावना है।
    user_रामानंद सागर
    रामानंद सागर
    Librarian सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    37 min ago
  • लखनऊ में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के आवास पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुँचे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद भी वहाँ मौजूद रहे। साथ ही, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष और प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ उपस्थित थे।
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    लखनऊ में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के आवास पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुँचे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद भी वहाँ मौजूद रहे। साथ ही, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष और प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ उपस्थित थे।
    user_Anurag Kashyap
    Anurag Kashyap
    Local News Reporter Sadar, Lucknow•
    1 hr ago
  • बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील में उपजिलाधिकारी के विरुद्ध अधिवक्ताओं का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को बीकेटी बार एसोसिएशन के बैनर तले वकीलों ने सामूहिक अवकाश लेकर काला फीता बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण की मांग को फिर से दोहराया। बार एसोसिएशन का आरोप है कि उपजिलाधिकारी के न्यायालय में बड़ी संख्या में पत्रावलियाँ लंबे समय से लंबित हैं, जिनका समय पर निस्तारण नहीं किया जा रहा है। अधिवक्ताओं के अनुसार, आदेशों और टिप्पणियों को लेकर भी आपत्ति है, और अनावश्यक टिप्पणियां लिखकर मामलों को लंबित रखा जा रहा है, जिससे वादकारियों को काफी परेशानी हो रही है। आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण सहित अन्य राजस्व मामलों का भी समय पर समाधान नहीं हो रहा है, और आम लोगों से मिलने में भी उपजिलाधिकारी द्वारा उदासीनता बरती जा रही है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष कुमार सिंह ने बताया कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आमसभा में लिए गए निर्णय के तहत अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी के न्यायालय का बहिष्कार शुरू कर दिया है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपजिलाधिकारी साहिल कुमार का बख्शी का तालाब तहसील से स्थानांतरण नहीं किया जाता, तब तक अधिवक्ता सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और न्यायालय का कार्य नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर वे उच्च अधिकारियों से मिलकर दोबारा ज्ञापन सौंपेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
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    बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील में उपजिलाधिकारी के विरुद्ध अधिवक्ताओं का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को बीकेटी बार एसोसिएशन के बैनर तले वकीलों ने सामूहिक अवकाश लेकर काला फीता बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण की मांग को फिर से दोहराया।

बार एसोसिएशन का आरोप है कि उपजिलाधिकारी के न्यायालय में बड़ी संख्या में पत्रावलियाँ लंबे समय से लंबित हैं, जिनका समय पर निस्तारण नहीं किया जा रहा है। अधिवक्ताओं के अनुसार, आदेशों और टिप्पणियों को लेकर भी आपत्ति है, और अनावश्यक टिप्पणियां लिखकर मामलों को लंबित रखा जा रहा है, जिससे वादकारियों को काफी परेशानी हो रही है। आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण सहित अन्य राजस्व मामलों का भी समय पर समाधान नहीं हो रहा है, और आम लोगों से मिलने में भी उपजिलाधिकारी द्वारा उदासीनता बरती जा रही है।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष कुमार सिंह ने बताया कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आमसभा में लिए गए निर्णय के तहत अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी के न्यायालय का बहिष्कार शुरू कर दिया है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपजिलाधिकारी साहिल कुमार का बख्शी का तालाब तहसील से स्थानांतरण नहीं किया जाता, तब तक अधिवक्ता सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और न्यायालय का कार्य नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर वे उच्च अधिकारियों से मिलकर दोबारा ज्ञापन सौंपेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
    user_Vishal singh
    Vishal singh
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
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