टीकमगढ़ के पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ स्थानीय नागरिकों, मरीजों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में लंबे समय से अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है मरीजों को अस्पताल में दवा उपलब्ध होने के बावजूद बाहर से खरीदने को कहना, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही, डॉक्टरों के बीच के आपसी विवाद का असर भी मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। हाल ही में सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए निरीक्षण में मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में लंबी प्रतीक्षा अवधि, कर्मचारियों की कमी, साफ-सफाई की समस्याओं और समुचित उपचार न मिलने की शिकायतें दर्ज कराईं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अस्पताल परिसर में अनुशासन और निगरानी की कमी है, जिससे मरीजों को असुविधा होती है। इसके अतिरिक्त, कुछ चिकित्सकों की नियुक्ति और उनकी संविदा या बंधपत्र (बॉन्ड) कार्यकाल की स्थिति को लेकर भी भ्रम बना हुआ है, जिसे स्पष्ट करने की मांग की गई है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया है। उनकी प्रमुख मांगों में अस्पताल में दवाओं की नियमित उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय, अस्पताल परिसर में साफ-सफाई एवं अनुशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई शामिल है। क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासनिक जांच तथा उचित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
टीकमगढ़ के पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ स्थानीय नागरिकों, मरीजों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में लंबे समय से अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है मरीजों को अस्पताल में दवा उपलब्ध होने के बावजूद बाहर से खरीदने को कहना, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही, डॉक्टरों के बीच के आपसी विवाद का असर भी मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। हाल ही में सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए निरीक्षण में मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में लंबी प्रतीक्षा अवधि, कर्मचारियों की कमी, साफ-सफाई की समस्याओं और समुचित उपचार न मिलने की शिकायतें दर्ज कराईं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अस्पताल परिसर में अनुशासन और निगरानी की कमी है, जिससे मरीजों को असुविधा होती है। इसके अतिरिक्त, कुछ चिकित्सकों की नियुक्ति और उनकी संविदा या बंधपत्र (बॉन्ड) कार्यकाल की स्थिति को लेकर भी भ्रम बना हुआ है, जिसे स्पष्ट करने की मांग की गई है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया है। उनकी प्रमुख मांगों में अस्पताल में दवाओं की नियमित उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय, अस्पताल परिसर में साफ-सफाई एवं अनुशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई शामिल है। क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासनिक जांच तथा उचित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
- जतारा स्थित पत्रिका कार्यालय में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के महत्व, दायित्वों और वर्तमान चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम का संचालन करते हुए पत्रकार आदम कादरी ने सभी पत्रकारों से सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने, एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय निष्पक्षता और अपने विशिष्ट अंदाज में पत्रकारिता करने का आह्वान किया। इस अवसर पर, पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी ने पत्रकारिता को समाज की सशक्त आवाज बताते हुए पत्रकारों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर विशेष जोर दिया। बालकिशन प्रजापति ने पत्रकारिता के मूल गुणों और उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों पर विस्तृत प्रकाश डाला, जबकि दशरथ विश्वकर्मा ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र का एक अति महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। लाली झा ने जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता से उठाने तथा समाज के प्रति पत्रकारों की जवाबदेही पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। वहीं, आलोक भार्गव ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के इतिहास और उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी, जबकि बॉबी दुबे ने पत्रकारिता के आदर्शों, नैतिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को बनाए रखने का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में, जतारा के सभी पत्रकारों ने एकजुट होकर जनहितकारी पत्रकारिता करने का संकल्प लिया।3
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के बम्होरी कलां थाना क्षेत्र में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री के विरोध में महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं ने पलेरा-जतारा रोड पर घंटों तक जाम लगाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया, जिसके चलते सड़क पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित रहा। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र के गांव-गांव में अवैध शराब परोसी जा रही है, जिसने सरकार के 'नशा मुक्ति अभियान' को पूरी तरह मज़ाक बना दिया है। पुलिस द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद ही जाम खोला जा सका और यातायात सुचारु हो पाया। यह घटना स्थानीय स्तर पर अवैध शराब के व्यापक प्रसार और इसके खिलाफ जनता के बढ़ते असंतोष को उजागर करती है।1
- टीकमगढ़ जिले के अजनौर में गरीबों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। यहां एक राशन की दुकान को सील कर दिया गया है, जहाँ से 119 क्विंटल अनाज गायब पाया गया है। यह कार्रवाई गरीबों के लिए आए अनाज की कथित हेराफेरी को लेकर की गई है।1
- टीकमगढ़ शहर के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शहर के चहुंमुखी विकास और जनहित के कार्यों को गति देने के उद्देश्य से 34 करोड़ रुपये की एक वृहद विकास योजना प्रस्तावित की गई थी, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। इस बड़ी सौगात से टीकमगढ़ के विकास को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है। इस कदम के लिए एक पूर्व विधायक ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।1
- टीकमगढ़ जिले के पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है, जहाँ मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने इन शिकायतों के बाद अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखने के बाद सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को भी अवगत कराया। आरोप है कि डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं और सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि ऐसी स्थिति में यदि किसी मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इसके अतिरिक्त, मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी में घंटों भटकना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर टी-शर्ट और चप्पल पहने हुए थे, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था। इस पूरे मामले में डॉ. अंकित राजपूत और डॉ. महेंद्र पटेल के नाम भी चर्चा में हैं। कुछ दिनों पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में साफ-सफाई और अनुशासन की स्थिति बेहद खराब है, और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।2
- टीकमगढ़ जिले के जतारा और पलेरा के बीच कनेरा चौकी क्षेत्र के कुड़ियाला गांव में शराब की बिक्री और सेवन के विरोध में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने, पलेरा-जतारा मार्ग को अवरुद्ध कर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार के कारण सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव परिवारों तथा युवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। इस प्रदर्शन के कारण पलेरा-जतारा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में उनके आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।1