टीकमगढ़ जिले के जतारा और पलेरा के बीच कनेरा चौकी क्षेत्र के कुड़ियाला गांव में शराब की बिक्री और सेवन के विरोध में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने, पलेरा-जतारा मार्ग को अवरुद्ध कर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार के कारण सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव परिवारों तथा युवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। इस प्रदर्शन के कारण पलेरा-जतारा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में उनके आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
टीकमगढ़ जिले के जतारा और पलेरा के बीच कनेरा चौकी क्षेत्र के कुड़ियाला गांव में शराब की बिक्री और सेवन के विरोध में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने, पलेरा-जतारा मार्ग को अवरुद्ध कर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार के कारण सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव परिवारों तथा युवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। इस प्रदर्शन के कारण पलेरा-जतारा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में उनके आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
- चौरासी कोस धाम मथुरा-वृंदावन में इस समय मथुरा की परिक्रमा को अत्यंत पुनीत और पवित्र माना जाता है।1
- टीकमगढ़ के पलेरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जहां भीषण गर्मी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नदारद मिल रहे हैं और कुर्सियां खाली पड़ी हैं। डॉक्टरों की इस लापरवाही से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मरीजों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकारी डॉक्टर सरकार से वेतन लेने के बावजूद अस्पताल पर कम ध्यान देते हैं। वे अपनी निजी क्लिनिक और घरों से मरीजों को देखते हैं, जबकि मरीजों को मेडिकल की बाहरी दवाइयां लिखकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। अस्पताल में पहले से ही दवाओं और डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इलाज नहीं मिल पाता। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण संगठन के प्रांतीय नेतृत्व दल ने CHC पलेरा का आकस्मिक निरीक्षण किया। प्रांतीय महासचिव राम रतन दीक्षित के निरीक्षण में अस्पताल की भौतिक स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई, जिससे प्रशासनिक और नैतिक स्तर पर घोर अनियमितताएं उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि चिकित्सालय का मुख्य भवन अत्यंत प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण है; स्टाफ ने बताया कि वर्षाकाल में छत से पानी टपकता है, जिससे बहुमूल्य चिकित्सीय उपकरण नष्ट हो रहे हैं और मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। संगठन ने अस्पताल में कुछ शासकीय कर्मचारियों की 'वटवृक्ष प्रवृत्ति' पर भी प्रकाश डाला, जो 5 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और शासकीय सेवा की आड़ में अवैध धनार्जन के लिए अनैतिक जड़ें फैला चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 'हस्ताक्षर संस्कृति' का खुलासा हुआ, जहाँ कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहते हैं; वे या तो आते ही नहीं, या केवल उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर तुरंत चले जाते हैं, जिससे शासन को गुमराह कर बिना काम किए वेतन लिया जा रहा है। राम रतन दीक्षित ने इस स्थिति को शासकीय नियमों का घोर उल्लंघन और पलेरा क्षेत्र की गरीब जनता के स्वास्थ्य व मानव अधिकारों के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठन ने जनहित में CMHO टीकमगढ़ से शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में केवल हस्ताक्षर करके भागने वाले कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए अस्पताल में डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करना और समय-समय पर औचक निरीक्षण दल भेजना शामिल है।2
- पूरे देश में गेहूं खरीदने के मामले में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर रहा है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के किसानों को हार्दिक बधाई दी है।1
- टीकमगढ़ जिले की जतारा जनपद पंचायत के बछोड़ा गाँव में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में मंदिर के पास लगने वाले हाट बाजार से चारों ओर गंदगी फैल रही है, साथ ही नालियों और पूरे गाँव में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। इन समस्याओं के लिए सीधे तौर पर सरपंच और सचिव को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिन पर गाँव में साफ-सफाई नहीं करवाने का आरोप है।1
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से एक ब्रेकिंग न्यूज़ सामने आई है, जिसमें एक लाइव वीडियो के माध्यम से एक शख्स पर देशद्रोही होने का आरोप लगाया गया है। वीडियो में यह शख्स साधु के वेश में दिखाई दे रहा है और उसे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पोस्टर या बैनर पर आसन बनाकर बैठे हुए देखा जा सकता है। इस हरकत को लेकर पोस्ट में कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया है और साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति को साधु नहीं, बल्कि देशद्रोही कहा जाना चाहिए। वीडियो को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करने की अपील की गई है ताकि इस शख्स को पकड़ा जा सके और उसे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।1
- टीकमगढ़ जिले के जतारा में महिला बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अधिकारियों की अनियमित उपस्थिति को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों के नियमित रूप से मौजूद न रहने के कारण आमजन को अपने विभिन्न कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि विभागीय योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को अक्सर अधिकारियों के उपलब्ध न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है। इस स्थिति में, कार्यालय की अधिकांश व्यवस्थाएं बाबुओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती दिख रही हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। स्थानीय नागरिकों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनकी चिंता है कि जब विभागीय योजनाएं महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित हो रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके और कार्यालयीन कार्य सुचारु रूप से चल सकें।2
- केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 29 मई को अपने लोकसभा क्षेत्र टीकमगढ़ के प्रवास के दौरान जन-सेवा, सादगी और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'ईंधन बचाने' और सादगी अपनाने के राष्ट्रव्यापी संदेश को धरातल पर उतारते हुए, बिना किसी सुरक्षा पायलट और फॉलो गाड़ियों के, केवल एक सिंगल गाड़ी में बेहद साधारण तरीके से क्षेत्र का भ्रमण किया। इसी भ्रमण के दौरान, ग्राम कुर्राई में डॉ. वीरेंद्र कुमार की नजर सड़क किनारे खड़े एक दिव्यांग युवक शैलेंद्र यादव पर पड़ी, तो वे तुरंत रुक गए। उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवाकर खुद चलकर युवक के पास पहुंचे, उससे आत्मीयता से हालचाल पूछा और उसकी दिव्यांगता के उपचार के लिए मौके पर ही सक्रिय हो गए। युवक की तकलीफ को दूर करने के लिए, केंद्रीय मंत्री ने तत्काल कटक (ओडिशा) स्थित देश के प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (SVNIRTAR) के निदेशक डॉ. मोहंती से मोबाइल पर सीधे बात की। उन्होंने विशेषज्ञ डॉक्टरों के जरिए शैलेंद्र के पैर के ऑपरेशन और पूर्ण उपचार की समुचित व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री का यह त्वरित निर्णय और जनता के बीच बिना किसी तामझाम के रहने का यह तरीका साबित करता है कि वे केवल अपने विभाग के मंत्री नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के सच्चे अभिभावक हैं। उनके इस मानवीय दृष्टिकोण की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।1
- टीकमगढ़ जिले के कनेरा चौकी अंतर्गत आने वाले ग्राम कुड़ियाला में एक शराब दुकान के विरोध में ग्रामीणों का भारी गुस्सा देखा गया है। गांव की महिलाओं ने इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभालते हुए पलेरा-जतारा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है और स्थानीय युवाओं का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है। इस चक्काजाम के चलते मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। घटना स्थल पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।1