logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

टीकमगढ़ जिले के जतारा में महिला बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अधिकारियों की अनियमित उपस्थिति को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों के नियमित रूप से मौजूद न रहने के कारण आमजन को अपने विभिन्न कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि विभागीय योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को अक्सर अधिकारियों के उपलब्ध न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है। इस स्थिति में, कार्यालय की अधिकांश व्यवस्थाएं बाबुओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती दिख रही हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। स्थानीय नागरिकों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनकी चिंता है कि जब विभागीय योजनाएं महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित हो रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके और कार्यालयीन कार्य सुचारु रूप से चल सकें।

1 hr ago
user_Mahendra Kumar Dubey
Mahendra Kumar Dubey
Voice of people जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

टीकमगढ़ जिले के जतारा में महिला बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अधिकारियों की अनियमित उपस्थिति को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों के नियमित रूप से मौजूद न रहने के कारण आमजन को अपने विभिन्न कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि विभागीय योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को अक्सर अधिकारियों के उपलब्ध न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है। इस स्थिति में, कार्यालय की अधिकांश व्यवस्थाएं बाबुओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती दिख रही हैं।

6f720831-7690-4467-b67f-863ca60e4f32

दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। स्थानीय नागरिकों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनकी चिंता है कि जब विभागीय योजनाएं महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित हो रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके और कार्यालयीन कार्य सुचारु रूप से चल सकें।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • टीकमगढ़ जिले के जतारा में महिला बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अधिकारियों की अनियमित उपस्थिति को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों के नियमित रूप से मौजूद न रहने के कारण आमजन को अपने विभिन्न कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि विभागीय योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को अक्सर अधिकारियों के उपलब्ध न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है। इस स्थिति में, कार्यालय की अधिकांश व्यवस्थाएं बाबुओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती दिख रही हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। स्थानीय नागरिकों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनकी चिंता है कि जब विभागीय योजनाएं महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित हो रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके और कार्यालयीन कार्य सुचारु रूप से चल सकें।
    2
    टीकमगढ़ जिले के जतारा में महिला बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अधिकारियों की अनियमित उपस्थिति को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों के नियमित रूप से मौजूद न रहने के कारण आमजन को अपने विभिन्न कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया गया है कि विभागीय योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को अक्सर अधिकारियों के उपलब्ध न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है। इस स्थिति में, कार्यालय की अधिकांश व्यवस्थाएं बाबुओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती दिख रही हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।

स्थानीय नागरिकों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उनकी चिंता है कि जब विभागीय योजनाएं महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित हो रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके और कार्यालयीन कार्य सुचारु रूप से चल सकें।
    user_Mahendra Kumar Dubey
    Mahendra Kumar Dubey
    Voice of people जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • चौरासी कोस धाम मथुरा-वृंदावन में इस समय मथुरा की परिक्रमा को अत्यंत पुनीत और पवित्र माना जाता है।
    1
    चौरासी कोस धाम मथुरा-वृंदावन में इस समय मथुरा की परिक्रमा को अत्यंत पुनीत और पवित्र माना जाता है।
    user_राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़
    राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़
    Spa पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • टीकमगढ़ के पलेरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जहां भीषण गर्मी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नदारद मिल रहे हैं और कुर्सियां खाली पड़ी हैं। डॉक्टरों की इस लापरवाही से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मरीजों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकारी डॉक्टर सरकार से वेतन लेने के बावजूद अस्पताल पर कम ध्यान देते हैं। वे अपनी निजी क्लिनिक और घरों से मरीजों को देखते हैं, जबकि मरीजों को मेडिकल की बाहरी दवाइयां लिखकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। अस्पताल में पहले से ही दवाओं और डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इलाज नहीं मिल पाता। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण संगठन के प्रांतीय नेतृत्व दल ने CHC पलेरा का आकस्मिक निरीक्षण किया। प्रांतीय महासचिव राम रतन दीक्षित के निरीक्षण में अस्पताल की भौतिक स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई, जिससे प्रशासनिक और नैतिक स्तर पर घोर अनियमितताएं उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि चिकित्सालय का मुख्य भवन अत्यंत प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण है; स्टाफ ने बताया कि वर्षाकाल में छत से पानी टपकता है, जिससे बहुमूल्य चिकित्सीय उपकरण नष्ट हो रहे हैं और मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। संगठन ने अस्पताल में कुछ शासकीय कर्मचारियों की 'वटवृक्ष प्रवृत्ति' पर भी प्रकाश डाला, जो 5 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और शासकीय सेवा की आड़ में अवैध धनार्जन के लिए अनैतिक जड़ें फैला चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 'हस्ताक्षर संस्कृति' का खुलासा हुआ, जहाँ कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहते हैं; वे या तो आते ही नहीं, या केवल उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर तुरंत चले जाते हैं, जिससे शासन को गुमराह कर बिना काम किए वेतन लिया जा रहा है। राम रतन दीक्षित ने इस स्थिति को शासकीय नियमों का घोर उल्लंघन और पलेरा क्षेत्र की गरीब जनता के स्वास्थ्य व मानव अधिकारों के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठन ने जनहित में CMHO टीकमगढ़ से शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में केवल हस्ताक्षर करके भागने वाले कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए अस्पताल में डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करना और समय-समय पर औचक निरीक्षण दल भेजना शामिल है।
    2
    टीकमगढ़ के पलेरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जहां भीषण गर्मी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नदारद मिल रहे हैं और कुर्सियां खाली पड़ी हैं। डॉक्टरों की इस लापरवाही से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

मरीजों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकारी डॉक्टर सरकार से वेतन लेने के बावजूद अस्पताल पर कम ध्यान देते हैं। वे अपनी निजी क्लिनिक और घरों से मरीजों को देखते हैं, जबकि मरीजों को मेडिकल की बाहरी दवाइयां लिखकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। अस्पताल में पहले से ही दवाओं और डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इलाज नहीं मिल पाता।

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण संगठन के प्रांतीय नेतृत्व दल ने CHC पलेरा का आकस्मिक निरीक्षण किया। प्रांतीय महासचिव राम रतन दीक्षित के निरीक्षण में अस्पताल की भौतिक स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई, जिससे प्रशासनिक और नैतिक स्तर पर घोर अनियमितताएं उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि चिकित्सालय का मुख्य भवन अत्यंत प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण है; स्टाफ ने बताया कि वर्षाकाल में छत से पानी टपकता है, जिससे बहुमूल्य चिकित्सीय उपकरण नष्ट हो रहे हैं और मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। संगठन ने अस्पताल में कुछ शासकीय कर्मचारियों की 'वटवृक्ष प्रवृत्ति' पर भी प्रकाश डाला, जो 5 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और शासकीय सेवा की आड़ में अवैध धनार्जन के लिए अनैतिक जड़ें फैला चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 'हस्ताक्षर संस्कृति' का खुलासा हुआ, जहाँ कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहते हैं; वे या तो आते ही नहीं, या केवल उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर तुरंत चले जाते हैं, जिससे शासन को गुमराह कर बिना काम किए वेतन लिया जा रहा है।

राम रतन दीक्षित ने इस स्थिति को शासकीय नियमों का घोर उल्लंघन और पलेरा क्षेत्र की गरीब जनता के स्वास्थ्य व मानव अधिकारों के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठन ने जनहित में CMHO टीकमगढ़ से शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में केवल हस्ताक्षर करके भागने वाले कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए अस्पताल में डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करना और समय-समय पर औचक निरीक्षण दल भेजना शामिल है।
    user_Manish Yadav
    Manish Yadav
    पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • शुक्रवार की रात करीब 9:30 बजे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के साथ ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण तपन और उमस झेल रहे टीकमगढ़ वासियों के लिए यह बारिश बड़ी राहत बनकर आई है। नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बीच हुई इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते शहर का तापमान लुढ़ककर 27 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे वातावरण में अच्छी ठंडक घुल गई है। बारिश के दौरान लगभग 9 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं, जिसने परेशान लोगों को काफी सुकून प्रदान किया है।
    1
    शुक्रवार की रात करीब 9:30 बजे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के साथ ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण तपन और उमस झेल रहे टीकमगढ़ वासियों के लिए यह बारिश बड़ी राहत बनकर आई है। नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बीच हुई इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते शहर का तापमान लुढ़ककर 27 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे वातावरण में अच्छी ठंडक घुल गई है। बारिश के दौरान लगभग 9 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं, जिसने परेशान लोगों को काफी सुकून प्रदान किया है।
    user_बुंदेली संवाद न्यूज
    बुंदेली संवाद न्यूज
    Local News Reporter खरगापुर, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • टीकमगढ़ जिले की जतारा जनपद पंचायत के बछोड़ा गाँव में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में मंदिर के पास लगने वाले हाट बाजार से चारों ओर गंदगी फैल रही है, साथ ही नालियों और पूरे गाँव में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। इन समस्याओं के लिए सीधे तौर पर सरपंच और सचिव को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिन पर गाँव में साफ-सफाई नहीं करवाने का आरोप है।
    1
    टीकमगढ़ जिले की जतारा जनपद पंचायत के बछोड़ा गाँव में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में मंदिर के पास लगने वाले हाट बाजार से चारों ओर गंदगी फैल रही है, साथ ही नालियों और पूरे गाँव में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। इन समस्याओं के लिए सीधे तौर पर सरपंच और सचिव को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिन पर गाँव में साफ-सफाई नहीं करवाने का आरोप है।
    user_ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)
    पत्रकार टीकमगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    44 min ago
  • मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से एक ब्रेकिंग न्यूज़ सामने आई है, जिसमें एक लाइव वीडियो के माध्यम से एक शख्स पर देशद्रोही होने का आरोप लगाया गया है। वीडियो में यह शख्स साधु के वेश में दिखाई दे रहा है और उसे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पोस्टर या बैनर पर आसन बनाकर बैठे हुए देखा जा सकता है। इस हरकत को लेकर पोस्ट में कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया है और साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति को साधु नहीं, बल्कि देशद्रोही कहा जाना चाहिए। वीडियो को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करने की अपील की गई है ताकि इस शख्स को पकड़ा जा सके और उसे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
    1
    मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से एक ब्रेकिंग न्यूज़ सामने आई है, जिसमें एक लाइव वीडियो के माध्यम से एक शख्स पर देशद्रोही होने का आरोप लगाया गया है। वीडियो में यह शख्स साधु के वेश में दिखाई दे रहा है और उसे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पोस्टर या बैनर पर आसन बनाकर बैठे हुए देखा जा सकता है।

इस हरकत को लेकर पोस्ट में कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया है और साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति को साधु नहीं, बल्कि देशद्रोही कहा जाना चाहिए। वीडियो को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करने की अपील की गई है ताकि इस शख्स को पकड़ा जा सके और उसे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
    user_मध्य प्रदेश एक्सप्रेस न्यूज़
    मध्य प्रदेश एक्सप्रेस न्यूज़
    TV News Anchor टीकमगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की बड़ागांव तहसील के अजनौर में एक बड़ा राशन घोटाला सामने आया है। ग्रामीणों को पिछले दो महीने से राशन नहीं मिल पाया था, जिसके बाद यह मामला उजागर हुआ। खाद्य अधिकारी द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई के तहत, जब दुकान पर छापा मारा गया, तो उसमें से 119 क्विंटल गेहूं और चावल गायब पाए गए। इस गंभीर अनियमितता के चलते संबंधित राशन दुकान को सील कर दिया गया है।
    1
    मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की बड़ागांव तहसील के अजनौर में एक बड़ा राशन घोटाला सामने आया है। ग्रामीणों को पिछले दो महीने से राशन नहीं मिल पाया था, जिसके बाद यह मामला उजागर हुआ। खाद्य अधिकारी द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई के तहत, जब दुकान पर छापा मारा गया, तो उसमें से 119 क्विंटल गेहूं और चावल गायब पाए गए। इस गंभीर अनियमितता के चलते संबंधित राशन दुकान को सील कर दिया गया है।
    user_Jamil khan
    Jamil khan
    टीकमगढ़, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • जतारा जनपद में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सरकारी खर्चों में कटौती तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण अधिकारियों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है, जिससे न केवल ईंधन की खपत बढ़ रही है, बल्कि कार्यालयीन कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कई अधिकारी अपने मूल पदस्थापना स्थल से 100 से 170 किलोमीटर तक का अप-डाउन कर रहे हैं, जिसके चलते जनपद कार्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति नहीं बन पा रही है। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें आवश्यक कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति से विकास कार्यों की निगरानी, शिकायतों का निराकरण और विभिन्न योजनाओं का संचालन बाधित हो रहा है। यह स्थिति शासन की खर्चों में कमी लाने की मंशा के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि इसमें अतिरिक्त ईंधन और समय की बर्बादी हो रही है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि जिन अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उनके स्थान पर नियमित पदस्थापना की जाए। उनकी यह मांग है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके और जनता को समय पर सभी आवश्यक सेवाएं मिल सकें।
    3
    जतारा जनपद में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सरकारी खर्चों में कटौती तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण अधिकारियों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है, जिससे न केवल ईंधन की खपत बढ़ रही है, बल्कि कार्यालयीन कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

कई अधिकारी अपने मूल पदस्थापना स्थल से 100 से 170 किलोमीटर तक का अप-डाउन कर रहे हैं, जिसके चलते जनपद कार्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति नहीं बन पा रही है। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें आवश्यक कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति से विकास कार्यों की निगरानी, शिकायतों का निराकरण और विभिन्न योजनाओं का संचालन बाधित हो रहा है। यह स्थिति शासन की खर्चों में कमी लाने की मंशा के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि इसमें अतिरिक्त ईंधन और समय की बर्बादी हो रही है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि जिन अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उनके स्थान पर नियमित पदस्थापना की जाए। उनकी यह मांग है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके और जनता को समय पर सभी आवश्यक सेवाएं मिल सकें।
    user_Mahendra Kumar Dubey
    Mahendra Kumar Dubey
    Voice of people जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.