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टीकमगढ़ जिले के कनेरा चौकी अंतर्गत आने वाले ग्राम कुड़ियाला में एक शराब दुकान के विरोध में ग्रामीणों का भारी गुस्सा देखा गया है। गांव की महिलाओं ने इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभालते हुए पलेरा-जतारा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है और स्थानीय युवाओं का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है। इस चक्काजाम के चलते मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। घटना स्थल पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
टीकमगढ़ जिले के कनेरा चौकी अंतर्गत आने वाले ग्राम कुड़ियाला में एक शराब दुकान के विरोध में ग्रामीणों का भारी गुस्सा देखा गया है। गांव की महिलाओं ने इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभालते हुए पलेरा-जतारा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है और स्थानीय युवाओं का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है। इस चक्काजाम के चलते मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। घटना स्थल पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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- टीकमगढ़ जिले के अजनौर में गरीबों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। यहां एक राशन की दुकान को सील कर दिया गया है, जहाँ से 119 क्विंटल अनाज गायब पाया गया है। यह कार्रवाई गरीबों के लिए आए अनाज की कथित हेराफेरी को लेकर की गई है।1
- बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप मौसम में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति के चलते, किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की जुताई करवाएं और आगे के कृषि कार्यों को जारी रखें।1
- टीकमगढ़ के पलेरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जहां भीषण गर्मी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नदारद मिल रहे हैं और कुर्सियां खाली पड़ी हैं। डॉक्टरों की इस लापरवाही से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मरीजों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकारी डॉक्टर सरकार से वेतन लेने के बावजूद अस्पताल पर कम ध्यान देते हैं। वे अपनी निजी क्लिनिक और घरों से मरीजों को देखते हैं, जबकि मरीजों को मेडिकल की बाहरी दवाइयां लिखकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। अस्पताल में पहले से ही दवाओं और डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इलाज नहीं मिल पाता। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण संगठन के प्रांतीय नेतृत्व दल ने CHC पलेरा का आकस्मिक निरीक्षण किया। प्रांतीय महासचिव राम रतन दीक्षित के निरीक्षण में अस्पताल की भौतिक स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई, जिससे प्रशासनिक और नैतिक स्तर पर घोर अनियमितताएं उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि चिकित्सालय का मुख्य भवन अत्यंत प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण है; स्टाफ ने बताया कि वर्षाकाल में छत से पानी टपकता है, जिससे बहुमूल्य चिकित्सीय उपकरण नष्ट हो रहे हैं और मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। संगठन ने अस्पताल में कुछ शासकीय कर्मचारियों की 'वटवृक्ष प्रवृत्ति' पर भी प्रकाश डाला, जो 5 से 10 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और शासकीय सेवा की आड़ में अवैध धनार्जन के लिए अनैतिक जड़ें फैला चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 'हस्ताक्षर संस्कृति' का खुलासा हुआ, जहाँ कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद रहते हैं; वे या तो आते ही नहीं, या केवल उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर तुरंत चले जाते हैं, जिससे शासन को गुमराह कर बिना काम किए वेतन लिया जा रहा है। राम रतन दीक्षित ने इस स्थिति को शासकीय नियमों का घोर उल्लंघन और पलेरा क्षेत्र की गरीब जनता के स्वास्थ्य व मानव अधिकारों के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठन ने जनहित में CMHO टीकमगढ़ से शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में केवल हस्ताक्षर करके भागने वाले कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए अस्पताल में डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करना और समय-समय पर औचक निरीक्षण दल भेजना शामिल है।2
- शुक्रवार की रात करीब 9:30 बजे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के साथ ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण तपन और उमस झेल रहे टीकमगढ़ वासियों के लिए यह बारिश बड़ी राहत बनकर आई है। नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बीच हुई इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते शहर का तापमान लुढ़ककर 27 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे वातावरण में अच्छी ठंडक घुल गई है। बारिश के दौरान लगभग 9 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं, जिसने परेशान लोगों को काफी सुकून प्रदान किया है।1
- तृतीय दिवस की कथा के बाद लौटते समय पूज्य बागेश्वर सरकार का एक हृदयस्पर्शी और करुणामयी दृश्य देखने को मिला। आश्रम से तार वाले ब्रिज की दूसरी ओर, रिमझिम वर्षा के बीच, एक छोटे से चबूतरे पर पन्नी के नीचे नेपाल की एक छोटी बच्ची अपने पिता के साथ भुट्टे भूनकर बेच रही थी। जब बागेश्वर सरकार वहां से गुजरे तो उनकी नजर उस बच्ची और उसके पिता पर पड़ी, जिसके बाद वे तुरंत वहीं रुक गए। पूज्य सरकार ने पहले बच्ची से स्वयं के लिए एक भुट्टा खरीदा, और फिर वहां मौजूद बाकी सभी भुट्टे भी खरीद लिए। उन्होंने भुट्टों की वास्तविक कीमत से लगभग तीन गुना अधिक राशि देकर उस परिवार की सहायता की। खरीदे हुए सभी भुट्टे बागेश्वर सरकार ने वहां उपस्थित श्रद्धालुओं में वितरित करवा दिए। रिमझिम बारिश के बीच सेवा, संवेदना और करुणा का यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक कर देने वाला बन गया।1
- छतरपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों पर मारपीट के गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रभात नायक नामक व्यक्ति ने महाराजपुर थाने के दो आरक्षकों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। अपनी शिकायत लेकर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है, क्योंकि उसका आरोप है कि थाना स्तर पर उसकी बात नहीं सुनी गई थी, जिसके बाद उसे एसपी कार्यालय का रुख करना पड़ा। इस मामले पर महाराजपुर थाना प्रभारी डी.के. सिंह का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आवेदन मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब सभी की निगाहें छतरपुर के नए पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और इन आरोपों पर क्या कार्रवाई की जाती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फिलहाल ये आरोप भर हैं। मामले की जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, और सभी पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।1
- टीकमगढ़ जिले के जतारा और पलेरा के बीच कनेरा चौकी क्षेत्र के कुड़ियाला गांव में शराब की बिक्री और सेवन के विरोध में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने, पलेरा-जतारा मार्ग को अवरुद्ध कर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार के कारण सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव परिवारों तथा युवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। इस प्रदर्शन के कारण पलेरा-जतारा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में उनके आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।1