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कुछ लोग अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। इसके साथ ही, वे अन्य लोगों के लिए भी न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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कुछ लोग अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। इसके साथ ही, वे अन्य लोगों के लिए भी न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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- केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद अब राजस्थान में इसके आगमन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे प्रदेशवासियों को मानसून से राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यदि समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो राजस्थान में मानसून 25 से 30 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग के मानसून प्रोग्रेस चार्ट के मुताबिक, इस वर्ष मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। शुरुआती चरण में राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिनमें तेज हवाएं, बादलों की गरज, धूलभरी आंधियां और हल्की से मध्यम बारिश शामिल हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान में मानसून की पहली दस्तक दक्षिण-पूर्वी जिलों में हो सकती है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे मध्य राजस्थान और फिर पश्चिमी क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा। मानसून के सक्रिय होने से तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार भी दक्षिण-पश्चिम मानसून बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शाखाओं के माध्यम से आगे बढ़ेगा। फिलहाल, मौसम विभाग इसकी प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के अंतिम सप्ताह में राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। प्रदेश में किसान, आमजन और जल संसाधनों से जुड़े विभाग मानसून की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि अच्छी बारिश से खेती, पेयजल व्यवस्था और भूजल स्तर को लाभ मिलने की उम्मीद है।1
- कोटा में आयोजित कांग्रेस ओबीसी अधिवेशन के दौरान, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। इस अवसर पर उन्होंने भाजपा नेताओं को 'चवन्नी चोर' तक कह डाला।1
- डोटासरा ने बीजेपी के मंत्रियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'चवन्नी चोर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब काम नहीं होते तो वे गालियां देते हैं। डोटासरा ने मौजूदा व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि एक सर्कस है। उन्होंने लगातार हो रहे पेपर लीक को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की।1
- ज्येष्ठ अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है, जिसे पितृ तर्पण, पितृ शांति, दान-पुण्य और पूर्वजों के स्मरण के लिए विशेष महत्वपूर्ण दिन माना गया है। यह दिन इस विचार को रेखांकित करता है कि कहीं आपके पूर्वज आज भी आपकी प्रतीक्षा तो नहीं कर रहे हैं, कि कब उनकी पीढ़ी के वंशज उन्हें श्रद्धा से स्मरण करेंगे, तर्पण देंगे और उनके प्रति अपना ऋण चुकाने का प्रयास करेंगे। यह बताया गया है कि मनुष्य के हाथ में मोक्ष भले ही न हो, लेकिन श्रद्धा, तर्पण, दान और सत्कर्मों से पितरों की तृप्ति एवं शांति का मार्ग अवश्य प्रशस्त किया जा सकता है। पूर्वजों को महंगे स्मारक या पत्थर के चबूतरे नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा, सम्मान और तर्पण चाहिए। पितृ दोष को केवल कुंडली से ही नहीं, बल्कि घर के वास्तु में दक्षिण और नैऋत्य दिशा की स्थिति से भी समझा जाता है। कुंडली में सूर्य, नवम भाव और द्वितीय भाव को पितृ पक्ष से जुड़ा माना गया है, वहीं घर का दक्षिण और नैऋत्य क्षेत्र पूर्वजों की स्थिरता और वंश ऊर्जा से सीधा संबंध रखता है। बार-बार पूर्वजों के सपने आना, पुराने घर की याद आना या दिवंगत परिजनों का संकेत मिलना कई बार महज संयोग नहीं माना जाता। यह भी स्पष्ट किया गया है कि पितृ दोष हमेशा श्राप नहीं होता, बल्कि कई बार यह अधूरे पारिवारिक दायित्वों का सूचक भी हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक वह पुराना पैतृक घर है, जहाँ कभी परिवार की जड़ें थीं, उसे पूरी तरह बदहाल, जर्जर और उपेक्षित छोड़ देना। अक्सर व्यक्ति नए घर में सुख-सुविधाओं के साथ रहने लगता है, लेकिन पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े उस पुराने घर की देखभाल तक नहीं करता। वास्तु और परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, पैतृक धरोहर की इस उपेक्षा को भी पितृ असंतोष का एक प्रमुख कारण माना जाता है। यह भी सलाह दी जाती है कि घर में पूर्वजों की तस्वीरें कभी भी मंदिर में देवताओं के साथ नहीं रखनी चाहिए, बल्कि उनके लिए एक अलग और सम्मानजनक स्थान होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पूर्वजों का घर छोड़ने से पहले, पूर्वजों की ऊर्जाओं को भी वहां से अपने साथ नए स्थान पर स्थानांतरित करना चाहिए।1
- राज्य सरकार प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, डेयरी विकास और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसी संकल्प को साकार करते हुए, 'सरस मायरा योजना' के अंतर्गत पंजीकृत दुग्ध उत्पादकों की दो बेटियों के विवाह हेतु 'मायरा' के रूप में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है। यह योजना सामाजिक सरोकारों को पूरा करने के साथ-साथ पशुपालकों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।1
- गुरुवार शाम को हाड़ौती क्षेत्र, जिसमें कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले शामिल हैं, में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे क्षेत्र का जनजीवन प्रभावित हुआ। कोटा शहर और आसपास के इलाकों में धूलभरी आंधी के बाद हुई इस बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली। इसी तरह, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में भी तेज हवाओं के साथ अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव के कारण कई स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। तापमान में गिरावट आने से लोगों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली। मौसम विभाग ने आगामी घंटों में भी हाड़ौती क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की अपील की है।1
- कुछ लोग अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। इसके साथ ही, वे अन्य लोगों के लिए भी न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।1