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अमन कुमार ने अपनी पत्नी गुंजन को पढ़ाने के लिए दिन-रात अथक मेहनत की, मजदूरी की और यहाँ तक कि अपनी जमीन तक बेच दी। आरोप है कि उनकी पत्नी गुंजन, BPSC शिक्षक बनते ही अपने पति के प्रति बेवफा हो गई।
RAJA KUMAR
अमन कुमार ने अपनी पत्नी गुंजन को पढ़ाने के लिए दिन-रात अथक मेहनत की, मजदूरी की और यहाँ तक कि अपनी जमीन तक बेच दी। आरोप है कि उनकी पत्नी गुंजन, BPSC शिक्षक बनते ही अपने पति के प्रति बेवफा हो गई।
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- पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में स्थित वृद्धाश्रम को बंद कर दिया गया है। इस घटना के लिए सीधे तौर पर जन समाज कल्याण विभाग को ग़ैर जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।1
- स्थानीय जानकारी के अनुसार, एक महत्वपूर्ण सड़क पर सालों साल से लगातार पानी जमा रहता है। इस दीर्घकालिक जलजमाव के कारण यह मार्ग एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- अमन कुमार ने अपनी पत्नी गुंजन को शिक्षा दिलाने के लिए दिन-रात अथक परिश्रम किया। उन्होंने मजदूरी की और अपनी जमीन तक लगा दी ताकि गुंजन पढ़ाई कर सके। लेकिन, जैसे ही गुंजन BPSC टीचर बनी, वह अमन के प्रति बेवफा हो गई।1
- मोतिहारी में हुई भारी बारिश के कारण छतौनी सब्जी मंडी पूरी तरह से पानी में डूब गई है, जिससे वहां बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। मंडी के साथ-साथ आस-पास की सड़कों पर भी पूरा पानी भर गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।1
- सिरहा नारायणी नदी तट किनारे स्थित आदि शक्ति मंदिर परिसर में शिक्षक अमरेंद्र कुमार कुशवाहा और सुमन देवी द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय भागवत कथा कार्यक्रम का पाँचवाँ दिन संपन्न हुआ। इस अवसर पर संत सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए पूतना वध की कथा श्रवण कराई। संत सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल्यावस्था में ही राक्षसी पूतना का वध किया था। पूतना को कंस ने भेजा था, क्योंकि कंस को यह भविष्यवाणी मिली थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा। इस भय से कंस ने अपने आस-पास के सभी नवजात शिशुओं को मारने का आदेश दिया था और इसी उद्देश्य से पूतना को गोकुल भेजा गया था। पूतना एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर गोकुल पहुँची और यशोदा से श्रीकृष्ण को गोद में लेने की इच्छा जताई। उसने अपने स्तनों पर विष लगाया हुआ था, किंतु जब उसने श्रीकृष्ण को स्तनपान कराया, तो भगवान ने उसके स्तनों से विष और उसके प्राण दोनों खींच लिए। पूतना अपने असली राक्षसी रूप में लौटते हुए प्राण त्याग दिए। कथाओं के अनुसार, पूतना अपने पूर्व जन्म में राजा बली की पुत्री रत्नमाला थी। जब वामन भगवान राजा बली से भिक्षा मांगने आए थे, तब रत्नमाला ने वामन रूप में भगवान को देखकर उनसे पुत्र के रूप में स्नेह करने की इच्छा की थी। परंतु, बाद में जब वामन भगवान ने अपने विराट रूप में बली से तीन पग भूमि मांगी और सब कुछ ले लिया, तो रत्नमाला ने क्रोधवश उन्हें मारने की इच्छा जताई। भगवान ने उसके दोनों भावों को स्वीकार किया, जिसके कारण अगले जन्म में उसे पूतना के रूप में जन्म मिला और भगवान श्रीकृष्ण को स्तनपान कराने का अवसर प्राप्त हुआ। श्रीकृष्ण द्वारा वध होने पर उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। पूतना के वध के बाद, गोकुलवासी उसके विशाल राक्षसी रूप को देखकर भय और आश्चर्य से भर गए। उन्होंने पूतना के शरीर को जलाने का निर्णय लिया, और इस दौरान एक अद्भुत घटना घटी—उसके शरीर से एक दिव्य सुगंध फैलने लगी। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के स्पर्श से पूतना को मोक्ष प्राप्त हुआ था और उसका शरीर पवित्र हो गया था। इसलिए, जब उसका अंतिम संस्कार किया गया, तो वह सुगंधित धुआँ में परिवर्तित हो गया, जो देवताओं की कृपा का प्रतीक था। गोकुलवासियों ने इस घटना को भगवान श्रीकृष्ण की लीला और उनकी दिव्यता का प्रमाण माना और भगवान की जय-जयकार की। उन्होंने श्रीकृष्ण को भगवान के रूप में मानना शुरू कर दिया और उनके प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति और अधिक बढ़ गई। पूतना, जो भगवान श्रीकृष्ण के हाथों मारी गई थी, अंत में गोलोक धाम को प्राप्त हुई। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान किसी भी व्यक्ति की भावना को महत्व देते हैं, चाहे वह कैसी भी हो। पूतना ने भगवान श्रीकृष्ण को माँ के रूप में स्तनपान कराने का प्रयास किया था, भले ही उसका उद्देश्य बुरा था, किंतु श्रीकृष्ण ने उसकी इस सेवा को माँ के समान माना। इस प्रकार, श्रीकृष्ण ने पूतना को मातृत्व का दर्जा दिया और उसे मोक्ष प्रदान किया, जिससे वह अपनी मृत्यु के बाद गोलोक धाम चली गई, जहाँ उसे भगवान श्रीकृष्ण के साथ रहने का सौभाग्य मिला। यह भगवान की करुणा और अनुग्रह का प्रतीक है कि उन्होंने अपने शत्रु को भी मोक्ष प्रदान कर दिया। आज के भागवत कथा कार्यक्रम में अमरेंद्र कुमार कुशवाहा अपनी अर्धांगिनी श्रीमती सुमन देवी, श्री जगलाल प्रसाद कुशवाहा अपनी अर्धांगिनी श्रीमती देवी, बहु सह शिक्षिका श्रीमती शर्मिला सिन्हा, श्रीमती मीना देवी, श्रीमती चंदा देवी, उपेंद्र प्रसाद कुशवाहा, श्री गोवर्धन प्रसाद कुशवाहा अपनी श्रीमती अर्धांगिनी के साथ, एवं श्री यादों लाल सहनी अपनी पत्नी श्रीमती अर्धांगिनी के साथ उपस्थित रहे। दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक श्री रवि कुमार भार्गव भी अपनी अर्धांगिनी श्रीमती प्रियंका भार्गव और छोटे पुत्र राजकुमार हार्षित कुमार भार्गव के साथ, साथ ही इटवा के श्री गजाधर पासवान सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।1
- पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली में जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान करीब डेढ़ दर्जन मामलों की सुनवाई की गई।1
- किसानों ने अपनी मांग रखी है।1
- नालंदा जिले के बढ़ौना में शराबबंदी कानून की सच्चाई सामने आ गई है। 'सूरज अस्त नालंदा के बढ़ौना मस्त' की स्थिति से यह स्पष्ट है कि जनता ने शराबबंदी की पोल खोल दी है।1