सहायिका के परिजन संभाल रहे जिम्मेदारी कोढ़ा बाहरखाल पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बाहरखाल प्रांगण में संचालित तीन आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां बच्चों के पोषण, शिक्षा और देखभाल से जुड़ी योजनाएं पूरी तरह से कागजों तक सिमटती नजर आ रही है. विद्यालय परिसर में एक ही स्थान पर तीन आंगनबाड़ी केंद्र केंद्र संख्या 242 (अनूपलाल महतो टोला), केंद्र संख्या 245 (बाहरखाल महादलित टोला) तथा एक अन्य केंद्र संचालित हो रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन केंद्रों की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल रही है. केंद्र संख्या 242 में न तो सेविका मौजूद थी और न ही सहायिका. यह केंद्र सहायिका की पुत्री के द्वारा संचालित होते मिला. केंद्र पर न बच्चे उपस्थित थे और न ही किसी प्रकार का पोषाहार उपलब्ध था. केंद्र संख्या 245 की स्थिति भी कुछ अलग नहीं दिखी. यहां सेविका अनुपस्थित मिली और केंद्र केवल सहायिका के भरोसे चल रहा था. सहायिका ने बताया कि केंद्र में बच्चों को सिर्फ बिस्कुट के सहारे रखा जाता है. सरकार की ओर से नाश्ता और भोजन की स्पष्ट व्यवस्था है. तीसरे केंद्र में सेविका अनीता देवी उपस्थित मिलीं लेकिन उन्होंने भी स्वीकार किया कि सहायिका का पद रिक्त है. संचालन प्रभावित हो रहा है. सबसे गंभीर बात यह रही कि केंद्र संख्या 242 और 245 में सुबह 10 से 11 बजे के बीच ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई, जो नियमों के विपरीत है. इन केंद्रों में न तो बच्चों को निर्धारित नाश्ता मिल रहा है और न ही भोजन, पोशाक और पोषण तत्वों का भी कोई अता-पता नहीं है. आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष तक के मासूम बच्चों के साथ इस तरह की लापरवाही उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है. सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीनी स्तर पर किस तरह दम तोड़ रही हैं.
सहायिका के परिजन संभाल रहे जिम्मेदारी कोढ़ा बाहरखाल पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बाहरखाल प्रांगण में संचालित तीन आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां बच्चों के पोषण, शिक्षा और देखभाल से जुड़ी योजनाएं पूरी तरह से कागजों तक सिमटती नजर आ रही है. विद्यालय परिसर में एक ही स्थान पर तीन आंगनबाड़ी केंद्र केंद्र संख्या 242 (अनूपलाल महतो टोला), केंद्र संख्या 245 (बाहरखाल महादलित टोला) तथा एक अन्य केंद्र संचालित हो रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन केंद्रों की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल रही है. केंद्र संख्या 242 में न तो सेविका मौजूद थी और न ही सहायिका. यह केंद्र सहायिका की पुत्री के द्वारा संचालित होते मिला. केंद्र पर न बच्चे उपस्थित थे और न ही किसी प्रकार का पोषाहार उपलब्ध था. केंद्र संख्या 245 की स्थिति भी कुछ अलग नहीं दिखी. यहां सेविका अनुपस्थित मिली और केंद्र केवल सहायिका के भरोसे चल रहा था. सहायिका ने बताया कि केंद्र में बच्चों को सिर्फ बिस्कुट के सहारे रखा जाता है. सरकार की ओर से नाश्ता और भोजन की स्पष्ट व्यवस्था है. तीसरे केंद्र में सेविका अनीता देवी उपस्थित मिलीं लेकिन उन्होंने भी स्वीकार किया कि सहायिका का पद रिक्त है. संचालन प्रभावित हो रहा है. सबसे गंभीर बात यह रही कि केंद्र संख्या 242 और 245 में सुबह 10 से 11 बजे के बीच ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई, जो नियमों के विपरीत है. इन केंद्रों में न तो बच्चों को निर्धारित नाश्ता मिल रहा है और न ही भोजन, पोशाक और पोषण तत्वों का भी कोई अता-पता नहीं है. आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष तक के मासूम बच्चों के साथ इस तरह की लापरवाही उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है. सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीनी स्तर पर किस तरह दम तोड़ रही हैं.
- यहां बच्चों के पोषण, शिक्षा और देखभाल से जुड़ी योजनाएं पूरी तरह से कागजों तक सिमटती नजर आ रही है. विद्यालय परिसर में एक ही स्थान पर तीन आंगनबाड़ी केंद्र केंद्र संख्या 242 (अनूपलाल महतो टोला), केंद्र संख्या 245 (बाहरखाल महादलित टोला) तथा एक अन्य केंद्र संचालित हो रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन केंद्रों की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल रही है. केंद्र संख्या 242 में न तो सेविका मौजूद थी और न ही सहायिका. यह केंद्र सहायिका की पुत्री के द्वारा संचालित होते मिला. केंद्र पर न बच्चे उपस्थित थे और न ही किसी प्रकार का पोषाहार उपलब्ध था. केंद्र संख्या 245 की स्थिति भी कुछ अलग नहीं दिखी. यहां सेविका अनुपस्थित मिली और केंद्र केवल सहायिका के भरोसे चल रहा था. सहायिका ने बताया कि केंद्र में बच्चों को सिर्फ बिस्कुट के सहारे रखा जाता है. सरकार की ओर से नाश्ता और भोजन की स्पष्ट व्यवस्था है. तीसरे केंद्र में सेविका अनीता देवी उपस्थित मिलीं लेकिन उन्होंने भी स्वीकार किया कि सहायिका का पद रिक्त है. संचालन प्रभावित हो रहा है. सबसे गंभीर बात यह रही कि केंद्र संख्या 242 और 245 में सुबह 10 से 11 बजे के बीच ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई, जो नियमों के विपरीत है. इन केंद्रों में न तो बच्चों को निर्धारित नाश्ता मिल रहा है और न ही भोजन, पोशाक और पोषण तत्वों का भी कोई अता-पता नहीं है. आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष तक के मासूम बच्चों के साथ इस तरह की लापरवाही उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है. सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीनी स्तर पर किस तरह दम तोड़ रही हैं.1
- किशनगंज में बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी की हाईलेवल मीटिंग1
- सिक्किम से देवघर तक विश्व शांति की पदयात्रा: 15 दिनों से पैदल चल रहे शाहिल कार्की का समेली में भव्य स्वागत। कटिहार के डूमर चौक पर युवाओं ने किया स्वागत, राहगीरों से मिल रहा भरपूर सहयोग़ कटिहार जिला के राष्ट्रीय राजमार्ग 31 डूमर चौक पर विश्व शांति और मानव कल्याण का संदेश लेकर सिक्किम से पैदल यात्रा पर निकले युवक शाहिल कार्की इन दिनों बिहार के विभिन्न क्षेत्रों से गुजर रहे हैं। 7 अप्रैल को सिक्किम से अपनी यात्रा शुरू करने वाले शाहिल पिछले 15 दिनों से लगातार पैदल चल रहे हैं और उनका लक्ष्य झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचना है। शाहिल कार्की, जो नेपाली मूल के हैं, अपनी इस पदयात्रा के माध्यम से विश्व शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। वे प्रतिदिन कई किलोमीटर की दूरी तय करते हुए लोगों को आपसी भाईचारा, प्रेम और सद्भाव का संदेश दे रहे हैं। बिहार में प्रवेश करने के बाद उनकी यात्रा को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। राह चलते लोग उन्हें पानी, भोजन और अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इसी क्रम में कटिहार जिले के समेली प्रखंड अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-31 स्थित डूमर चौक पर स्थानीय युवाओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान युवाओं ने माला पहनाकर उनका सम्मान किया और उनकी यात्रा की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है और लोगों को एकजुट करने का काम करती है। शाहिल कार्की की यह पदयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और विश्व शांति का भी प्रेरणादायक उदाहरण बनती जा रही है। शाहिल ने बताया कि उनका उद्देश्य किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए शांति और सद्भावना का संदेश लेकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि रास्ते में मिल रहे लोगों का प्यार और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।4
- रवि चौहान जिस समय नबी हुसैन पर हमला किया था उस समय वहां पर इंसानों की भीड़ लगी हुई थी लेकिन किसी ने बचाने का प्रयास नहीं किया अगर उस दिन रवि चौहान को रोकने मैं कामयाब हो जाता तो रवि चौहान भी जिंदा रहता और नबी हुसैन को भी कुछ नहीं होता1
- deputy puranda ward number 1 ka pul Tut chuka hai puranaka wala pul 100 Baras se tha usko todkar love ka wala pul banaya ja raha hai chauda aur Lamba pahle wala pul se jyada number hoga pahle Chhota wala pul tha bada wala Banega Kitna matoda hua yahan per dekh rahe hain aap log1
- लखनऊ का विकास नगर का घटना है आप लोगों से ज्यादा ज्यादा शेयर करें लाइक करें कमेंट करके बताएं भाई1
- Post by Dilkhush Kumar1
- कटिहार से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक की संदिग्ध परिस्थिति में फंदे से लटकी हुई लाश मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। मामला मनसाही थाना क्षेत्र के कुरेठा गांव का है। जानकारी के अनुसार, कुरेठा स्थित काली स्थान के समीप एक युवक का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। बताया जा रहा है कि युवक घर में अकेला रहता था और उसके माता-पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, युवक की बहन की भी कुछ समय पहले इसी तरह संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई थी, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि युवक का पैर जमीन से सटा हुआ था, जो कई सवाल खड़े करता है। घटना की सूचना मिलते ही मनसाही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कटिहार सदर अस्पताल भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। यह आत्महत्या है या फिर हत्या, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। लेकिन इस घटना के बाद पूरे गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।3