बस्ती जनपद के ग्रामवासी शिवाजी सोनकर ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से अमोढ़ा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की बदहाली को लेकर विनम्र अपील की है। मुख्यमंत्री जी का 10 जुलाई को हर्रैया आगमन प्रस्तावित है, जिसके मद्देनजर सोनकर ने अनुरोध किया है कि वे अमोढ़ा की ऐतिहासिक धरोहरों जैसे राजा जालिम सिंह किला, प्राचीन मंदिरों और अन्य महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का भी निरीक्षण करें। अपील में कहा गया है कि अमोढ़ा का गौरवशाली इतिहास वर्तमान में उपेक्षा का शिकार हो रहा है। ऐतिहासिक किले की स्थिति चिंताजनक है, और कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को तत्काल संरक्षण तथा विकास की आवश्यकता है। यदि इन स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, तो यह क्षेत्र पर्यटन और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से एक नई पहचान प्राप्त कर सकता है। अतः, शिवाजी सोनकर ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि वे अमोढ़ा की इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान करें।
बस्ती जनपद के ग्रामवासी शिवाजी सोनकर ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से अमोढ़ा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की बदहाली को लेकर विनम्र अपील की है। मुख्यमंत्री जी का 10 जुलाई को हर्रैया आगमन प्रस्तावित है, जिसके मद्देनजर सोनकर ने अनुरोध किया है कि वे अमोढ़ा की ऐतिहासिक धरोहरों जैसे राजा जालिम सिंह किला, प्राचीन मंदिरों और अन्य महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का भी निरीक्षण करें। अपील में कहा गया है कि अमोढ़ा का गौरवशाली इतिहास वर्तमान में उपेक्षा का शिकार हो रहा है। ऐतिहासिक किले की स्थिति चिंताजनक है, और कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को तत्काल संरक्षण तथा विकास की आवश्यकता है। यदि इन स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, तो यह क्षेत्र पर्यटन और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से एक नई पहचान प्राप्त कर सकता है। अतः, शिवाजी सोनकर ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि वे अमोढ़ा की इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान करें।
- बस्ती जनपद के ग्रामवासी शिवाजी सोनकर ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से अमोढ़ा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की बदहाली को लेकर विनम्र अपील की है। मुख्यमंत्री जी का 10 जुलाई को हर्रैया आगमन प्रस्तावित है, जिसके मद्देनजर सोनकर ने अनुरोध किया है कि वे अमोढ़ा की ऐतिहासिक धरोहरों जैसे राजा जालिम सिंह किला, प्राचीन मंदिरों और अन्य महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का भी निरीक्षण करें। अपील में कहा गया है कि अमोढ़ा का गौरवशाली इतिहास वर्तमान में उपेक्षा का शिकार हो रहा है। ऐतिहासिक किले की स्थिति चिंताजनक है, और कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को तत्काल संरक्षण तथा विकास की आवश्यकता है। यदि इन स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, तो यह क्षेत्र पर्यटन और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से एक नई पहचान प्राप्त कर सकता है। अतः, शिवाजी सोनकर ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि वे अमोढ़ा की इन ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान करें।1
- हमारे नेता जी अयोध्या पहुंचे और उन्होंने हनुमान गढ़ी मंदिर में दर्शन किए।1
- बस्ती में मंगलवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश की बस्ती इकाई द्वारा एक शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसे जिले के प्रमुख व्यापारी आयोजनों में से एक बताया गया। खचाखच भरे सभागार में जिले भर से आए व्यापारियों, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। इस पूरे आयोजन के दौरान व्यापारी एकजुटता, संगठन विस्तार और व्यापारिक हितों के संरक्षण का संकल्प प्रमुख रूप से देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि व्यापारी शिरोमणि लोकेश अग्रवाल थे, जबकि इसकी अध्यक्षता उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्ती मंडल अध्यक्ष डॉ. हरिमूर्ति सिंह 'मनोज' ने की। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. मनोज ने बस्ती शहर की वर्षों पुरानी वाहन पार्किंग समस्या और पटरी व ठेला व्यवसायियों के लिए स्थायी व्यापारिक स्थल उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रस्ताव देकर विस्तृत कार्ययोजना शासन को भेजी जा चुकी है और विशिष्ट अतिथि राणा दिनेश प्रताप सिंह से शासन स्तर पर प्रभावी पहल कर इस योजना को धरातल पर उतारने में सहयोग की अपील की। जिला अध्यक्ष राकेश सिंह ने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि संगठन हर स्तर पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करेगा। इस अवसर पर किशन सिंह ने पूर्व संगठन छोड़कर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश की सदस्यता ग्रहण की और उन्हें बस्ती मंडल का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया। विशिष्ट अतिथि राणा दिनेश प्रताप सिंह ने व्यापारियों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने और व्यापारिक समस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने का भरोसा दिलाया। मुख्य अतिथि एवं प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी समाज प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और संगठन उनके सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने नवमनोनीत पदाधिकारियों – प्रदेश, मंडल, जिला, नगर, युवा, महिला और उद्योग मंच के प्रतिनिधियों को संगठन के प्रति निष्ठा और व्यापारी हितों की रक्षा की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान प्रदेश एवं बस्ती मंडल की टीम ने डॉ. हरिमूर्ति सिंह 'मनोज' के नेतृत्व में सामूहिक शपथ ली, वहीं जिला इकाई ने जिला अध्यक्ष राकेश सिंह, नगर इकाई ने नगर अध्यक्ष राणा महेंद्र प्रताप, युवा मोर्चा ने जिला युवा अध्यक्ष कुलदीप श्रीवास्तव, महिला मोर्चा ने वंदना वर्मा तथा उद्योग मंच ने कमलेश चौधरी के नेतृत्व में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। कार्यक्रम के अंत में प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन व्यापारी समाज की आवाज को और अधिक मजबूती से उठाने के लिए निरंतर सक्रिय रहेगा। जिले भर से आए व्यापारियों की भारी भागीदारी ने संगठन की एकजुटता और प्रभाव का स्पष्ट संदेश दिया।1
- बस्ती जिले के बस्ती-सदर ब्लॉक के अंतर्गत कोइलपुरा में कम्पोजिट विद्यालय स्थित है।4
- अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले के बाद चर्चा और आरोपों के घेरे में आए व्यक्ति गोपाल राव को ट्रस्ट की व्यवस्था से हटा दिया गया है। ट्रस्ट की बीते दिन हुई बैठक के बाद यह घोषणा की गई कि उन्हें ट्रस्ट के प्रबंधन से अलग कर दिया गया है। करीब चार साल पहले गोपाल राव को कर्नाटक से राम मंदिर परिसर में व्यवस्था देखने के लिए भेजा गया था, और आरोप है कि तभी से ट्रस्ट और उसकी व्यवस्था जाहिरा तौर पर छिन्न-भिन्न हुई है। ट्रस्ट से हटाए जाने के बावजूद, गोपाल राव अभी भी अयोध्या और राम मंदिर से मिलने वाली 'मलाई' का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। आरोप है कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और कार्यवाहक महासचिव अब भी गोपाल को कुछ ज्यादा और अनावश्यक तरजीह दे रहे हैं, जिसके कारण संघ और विहिप की भरपूर 'थू-थू' हो रही है।1
- गोंडा जिले से मानवता और बहादुरी की एक दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक हेड कांस्टेबल ने सरयू नहर में डूब रहे एक युवक की जान बचाकर खाकी के मानवीय चेहरे का परिचय दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई जब आसपास के लोग युवक को नहर में डूबता देख सहम गए थे। हेड कांस्टेबल ने बिना एक पल भी गंवाए और अपनी जान की परवाह किए बिना, उफनती नहर में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी बहादुरी और सूझबूझ का परिचय देते हुए, डूबते हुए युवक को सकुशल बाहर निकाल लिया। पुलिस के इस त्वरित और साहसिक कार्य की व्यापक सराहना की जा रही है, जिसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया गया है। इस जांबाज पुलिसकर्मी के जज्बे और सेवा भाव को सलाम करते हुए, यह कहा गया है कि ऐसे ही पुलिसकर्मियों की बदौलत समाज में सुरक्षा और विश्वास कायम है, और उन पर गर्व है।1
- सुलतानपुर की शाहगंज पुलिस चौकी में हुई एक घटना ने खाकी के इकबाल को तार-तार कर दिया है, जिसे लोकतंत्र में न्याय की पहली दहलीज माना जाता है। वायरल हुए एक वीडियो में भाजपा नेत्री पूजा कसौधन खुलेआम एक युवक को थप्पड़ मारती और "औकात भूल जाओगे" जैसी धमकी देती दिख रही हैं, जिसे सत्ता के उन्माद का चरम बताया गया है। इस घटना का सबसे भयावह पहलू यह है कि वर्दीधारी पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे, जिससे उनकी वर्दी के मान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संपादकीय में सवाल उठाया गया है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है या खादी वालों के लिए अलग 'कोड' है। यह इंगित किया गया है कि यदि यह कृत्य किसी आम नागरिक द्वारा किया गया होता, तो उस पर अब तक संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका होता। यह भी प्रश्न किया गया है कि क्या सत्ताधारी दल से जुड़ा होना कानून के उल्लंघन का लाइसेंस बन गया है। पुलिस की भूमिका केवल तमाशबीन की क्यों रही, और यदि चौकी के अंदर ही कानून हाथ में लिया जा रहा है, तो बाहर आम जनता की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि या तो स्थानीय पुलिस का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है या वह सत्ता के दबाव में पंगु हो चुकी है। नेत्री के धमकी देने के साहस पर भी सवाल खड़े किए गए हैं, जो यह संकेत देता है कि उन्हें प्रशासनिक तंत्र का तनिक भी भय नहीं है। बताया गया है कि यह नेत्री पहली बार विवादों के केंद्र में नहीं हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे पुलिस की साख से जुड़ा है। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा कि क्या वे 'खाकी' की गरिमा को वापस ला पाएंगे, या पुलिस चौकी भविष्य में केवल राजनीतिक अखाड़ों का केंद्र बनकर रह जाएगी। सुलतानपुर की जनता प्रशासन की 'निष्पक्षता' पर नजर रख रही है और चेतावनी दी गई है कि यदि इस घटना पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आम आदमी का व्यवस्था से भरोसा उठना तय है।1