भिवानी में आशा वर्कर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि 2018 में सरकार के साथ एक समझौता हुआ था, जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा लागू ₹1,500 की राशि का भुगतान किया जाना था। बार-बार हड़ताल और प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार इस समझौते पर कोई सुनवाई नहीं कर रही है। प्रदर्शनकारी वर्करों ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दिया जाता है, जबकि दूसरी तरफ बेटियों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें ₹26,000 का फिक्स वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यूनियन भविष्य की रणनीति के लिए CITU द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार है।
भिवानी में आशा वर्कर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि 2018 में सरकार के साथ एक समझौता हुआ था, जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा लागू ₹1,500 की राशि का भुगतान किया जाना था। बार-बार हड़ताल और प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार इस समझौते पर कोई सुनवाई नहीं कर रही है। प्रदर्शनकारी वर्करों ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दिया जाता है, जबकि दूसरी तरफ बेटियों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें ₹26,000 का फिक्स वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यूनियन भविष्य की रणनीति के लिए CITU द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार है।
- किसान नेता राकेश टिकैत ने मेरठ की एक घटना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मेरठ के एसएसपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। राकेश टिकैत ने इस घटना के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए एसएसपी को 'उठाईगीरा' कहा है। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की हरकत केवल कोई उठाईगीरा ही कर सकता है।1
- हरियाणा के भिवानी में अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान संगठन से जुड़े विषयों और गतिविधियों पर चर्चा की गई।1
- हरियाणा के भिवानी में एक शहीद की पत्नी का दर्द उस समय छलक पड़ा, जब उनकी 18 महीने की मासूम बेटी ने 'पापा-पापा' कहकर पुकारना शुरू किया। यह भावुक क्षण तब सामने आया जब शहीद की पत्नी ने अपनी छोटी बच्ची की यह पुकार सुनी। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया है।1
- भिवानी के चौधरी बंसीलाल सामान्य अस्पताल स्थित रक्तकोष में जरूरतमंदों की मदद के लिए रक्तदान का आह्वान किया गया है। थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के जीवन को बचाने के लिए लोगों से निस्वार्थ भाव से आगे आने की अपील की गई है। इस अभियान में अधिक से अधिक लोगों को पहुँचकर रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, क्योंकि रक्तदान ही महादान है।1
- सीआईए स्टाफ प्रथम भिवानी ने पैरोल तोड़कर फरार होने की फिराक में एक आरोपी को उसके साथी के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक भिवानी श्री सुमित कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई, जिसमें पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई गाड़ी भी बरामद कर ली है। घटना की शुरुआत तब हुई जब तिगड़ाना गांव के निवासी दीपक ने थाना सिविल लाइन भिवानी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को एक युवक ने उनके मेडिकल स्टोर पर मोबाइल चार्ज करने के बहाने दुकान से कार की चाबी चुराई और गाड़ी लेकर फरार हो गया। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य सिपाही बिजेंद्र के नेतृत्व में सीआईए स्टाफ ने दिल्ली से मुख्य आरोपी कपिल उर्फ राहुल और उसके साथी ललित को गिरफ्तार कर लिया। दोनों ही आरोपी तिगड़ाना, जिला भिवानी के निवासी हैं। जांच में खुलासा हुआ कि कपिल 28 अप्रैल 2026 को जिला कारागार से पैरोल पर बाहर आया था। पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद उसे 8 जुलाई 2026 को वापस जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वह जेल जाने के बजाय वाहन चोरी कर फरार होने की योजना बना रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी कपिल पर जिला भिवानी में पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह स्नेचिंग के एक मामले में सजा काट रहा था। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया है।1
- भिवानी में आशा वर्कर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि 2018 में सरकार के साथ एक समझौता हुआ था, जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा लागू ₹1,500 की राशि का भुगतान किया जाना था। बार-बार हड़ताल और प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार इस समझौते पर कोई सुनवाई नहीं कर रही है। प्रदर्शनकारी वर्करों ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दिया जाता है, जबकि दूसरी तरफ बेटियों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें ₹26,000 का फिक्स वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यूनियन भविष्य की रणनीति के लिए CITU द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार है।1
- भिवानी में किसानों के हक की लड़ाई रंग लाई है। कामरेड ओमप्रकाश ने जानकारी दी है कि किसानों को अब बीमा क्लेम मिलने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। यह लंबे समय से जारी संघर्ष का नतीजा है, जिसके बाद अब किसानों के लिए राहत की स्थिति बनी है।1
- भिवानी में एक अमर शहीद वीर बलिदानी की अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान पूरा गांव शोक में डूब गया और शहीद को अंतिम विदाई देते हुए हर किसी की आंखें नम हो गईं।1