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एक संदेश में लोगों से अपील की गई है कि यदि सरकारी स्कूलों में छात्रों को दूध नहीं मिल रहा है, तो इसकी जानकारी दी जाए। संदेश में कहा गया है कि सूचना मिलने पर वे स्वयं वीडियो बनाकर इसे पोस्ट करेंगे और इस मुद्दे पर समर्थन करेंगे। इसके साथ ही, उन सभी लोगों से पूछा गया है जो उनकी पोस्ट और वीडियो देखते हैं, कि क्या उनके बच्चों को भी स्कूलों में दूध दिया जा रहा है या नहीं।
Pooja mahwer
एक संदेश में लोगों से अपील की गई है कि यदि सरकारी स्कूलों में छात्रों को दूध नहीं मिल रहा है, तो इसकी जानकारी दी जाए। संदेश में कहा गया है कि सूचना मिलने पर वे स्वयं वीडियो बनाकर इसे पोस्ट करेंगे और इस मुद्दे पर समर्थन करेंगे। इसके साथ ही, उन सभी लोगों से पूछा गया है जो उनकी पोस्ट और वीडियो देखते हैं, कि क्या उनके बच्चों को भी स्कूलों में दूध दिया जा रहा है या नहीं।
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- दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने SIR (सिस्टेमैटिक इमेज रेक्टिफिकेशन) प्रक्रिया पर अहम फैसला सुनाया है, जिसमें इस प्रक्रिया को पूरी तरह सही ठहराया गया है। याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि SIR कराना चुनाव आयोग का काम है और आयोग ने इसे बिल्कुल ठीक तरीके से संपन्न कराया है। उपाध्याय ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को लेकर बताई गई कई कमियों को स्वीकार नहीं किया है, बल्कि यह माना है कि चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से करवाई है। हमारी याचिका में नियमित अंतराल पर SIR कराने की मांग की गई थी, जिसमें हर पांच साल में यह प्रक्रिया दोहराने की बात कही गई थी, क्योंकि वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी व्यक्ति का नाम होना चुनाव आयोग के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हमारी और चुनाव आयोग की दलीलों को स्वीकार कर लिया है, जबकि SIR के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अश्विनी उपाध्याय ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में घुसपैठियों और बांग्लादेशियों का नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी दिया है कि 2003 में हुए SIR के दौरान जिन लोगों के नाम हटा दिए गए थे, उनकी नागरिकता की स्थिति के सत्यापन के लिए उचित न्यायाधिकरणों को भेजा जाए। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान केवल नाम हटा दिया जाना अपने आप में यह निर्णायक रूप से साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति एक विदेशी नागरिक है। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय ने विचार किए गए ग्यारह दस्तावेजों को उचित और किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन न करने वाला बताया है, साथ ही चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित इन दस्तावेजों के समूह को उपयुक्त माना गया है। आधार के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है।1
- जनता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार केवल अपना फायदा सोचती है और जनता का नहीं, जबकि सरकार जनता से है, जनता सरकार से नहीं। लोगों ने सवाल उठाया कि आज तक किसी भी गरीब इंसान को सरकार ने मुफ्त में कोई फायदा नहीं पहुंचाया है। इसके बजाय, सरकारी कामों के लिए लोगों को सिर्फ इधर-उधर घुमाया जाता है और अंत में कुछ भी हासिल नहीं होता। इस बात को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई कि ये लोग (सरकार) जनता को एक-दूसरे में ही उलझाकर रखना चाहते हैं। लोगों ने जोर दिया कि सरकार को यह समझना चाहिए कि उसकी नींव जनता पर टिकी है, न कि जनता सरकार पर।1
- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास सहित राज्य भर में करीब 10 स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सीएमआरएल (Cochin Minerals and Rutile Limited) मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में की गई, जिसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं और धनशोधन की जाँच पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत की जा रही है। बुधवार सुबह, ईडी की टीम ने इस मामले में पिनाराई विजयन के आवास पर तलाशी अभियान चलाया। बताया गया कि यह कार्रवाई चल रही जांच का हिस्सा है। तिरुवनंतपुरम में विजयन के किराए के आवास समेत केरल में कुल लगभग 10 जगहों पर तलाशी ली गई। यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय को इस मामले में अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। न्यायमूर्ति टीआर रवि ने सीएमआरएल और उसके चार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें ईडी की जांच और ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) को चुनौती दी गई थी। हालांकि यह मामला सीधे तौर पर पिनाराई विजयन से जुड़ा नहीं है, लेकिन इसने तब एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था, जब आरोप लगे थे कि सीएमआरएल ने एक्सलोगिक सॉल्यूशंस को संदिग्ध भुगतान किए थे, जिसे उनकी बेटी वीणा थाइकांडियिल की कंपनी बताया जाता है।1
- साल 2025 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' देने वाले रणवीर सिंह एक बड़े विवाद में फंस गए हैं। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) ने उनके खिलाफ 'असहयोग निर्देश' जारी किया है। यह निर्देश कथित तौर पर 'डॉन 3' से उनके बाहर होने के मामले से जुड़ा है। इस घटना ने ऑनलाइन जगत में एक बड़ी बहस छेड़ दी है, जिसमें कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस निर्देश के बाद रणवीर सिंह बॉलीवुड में काम करना जारी रख पाएंगे। अब यह जानना अहम है कि FWICE की तरफ से लगाए गए इस 'बैन' का मतलब क्या है और फिल्म इंडस्ट्री में उनके काम करने पर इसका क्या असर होगा।1
- दिल्ली के ओखला जाकिर नगर क्षेत्र में एक अस्वास्थ्यकर गतिविधि सामने आई है, जहाँ बीमारी से मरे हुए भैंस का मांस बेचा जा रहा था। इस मामले को एक स्थानीय पार्षद ने पकड़ा है, जिससे इस तरह के मांस की अवैध बिक्री का खुलासा हुआ।1
- बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा है कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है और बांग्लादेशी रोहिंग्या को बांग्लादेश भेजा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि वे जेल में मुफ्त का खाएंगे, तथा इसी बात पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बांग्लादेशियों को बांग्लादेश वापस फेंकने का साफ आदेश दिया।1
- दिल्ली में लोगों ने अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि उन्हें केजरीवाल ही चाहिए। इस भावना के साथ एकजुटता व्यक्त की गई है कि "हम सब एक हैं" और इस बार मोदी नहीं, केजरीवाल के लिए समर्थन है। पोस्ट में मौजूदा स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि ये ऐसे "अच्छे दिन" नहीं थे जिनकी किसी को ज़रूरत थी, फिर ऐसा क्यों हो रहा है।1
- नेता विपक्ष राहुल गांधी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।1
- आज केजरीवाल के वे 'कारनामे' सामने आए हैं जो हिन्दू धर्म के विरोध में किए गए हैं।1