दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने SIR (सिस्टेमैटिक इमेज रेक्टिफिकेशन) प्रक्रिया पर अहम फैसला सुनाया है, जिसमें इस प्रक्रिया को पूरी तरह सही ठहराया गया है। याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि SIR कराना चुनाव आयोग का काम है और आयोग ने इसे बिल्कुल ठीक तरीके से संपन्न कराया है। उपाध्याय ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को लेकर बताई गई कई कमियों को स्वीकार नहीं किया है, बल्कि यह माना है कि चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से करवाई है। हमारी याचिका में नियमित अंतराल पर SIR कराने की मांग की गई थी, जिसमें हर पांच साल में यह प्रक्रिया दोहराने की बात कही गई थी, क्योंकि वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी व्यक्ति का नाम होना चुनाव आयोग के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हमारी और चुनाव आयोग की दलीलों को स्वीकार कर लिया है, जबकि SIR के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अश्विनी उपाध्याय ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में घुसपैठियों और बांग्लादेशियों का नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी दिया है कि 2003 में हुए SIR के दौरान जिन लोगों के नाम हटा दिए गए थे, उनकी नागरिकता की स्थिति के सत्यापन के लिए उचित न्यायाधिकरणों को भेजा जाए। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान केवल नाम हटा दिया जाना अपने आप में यह निर्णायक रूप से साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति एक विदेशी नागरिक है। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय ने विचार किए गए ग्यारह दस्तावेजों को उचित और किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन न करने वाला बताया है, साथ ही चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित इन दस्तावेजों के समूह को उपयुक्त माना गया है। आधार के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है।
दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने SIR (सिस्टेमैटिक इमेज रेक्टिफिकेशन) प्रक्रिया पर अहम फैसला सुनाया है, जिसमें इस प्रक्रिया को पूरी तरह सही ठहराया गया है। याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि SIR कराना चुनाव आयोग का काम है और आयोग ने इसे बिल्कुल ठीक तरीके से संपन्न कराया है। उपाध्याय ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को लेकर बताई गई कई कमियों को स्वीकार नहीं किया है, बल्कि यह माना है कि चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से करवाई है। हमारी याचिका में नियमित अंतराल पर SIR कराने की मांग की गई थी, जिसमें हर पांच साल में यह प्रक्रिया दोहराने की बात कही गई थी, क्योंकि वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी व्यक्ति का नाम होना चुनाव आयोग के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हमारी और चुनाव आयोग की दलीलों को स्वीकार कर लिया है, जबकि SIR के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अश्विनी उपाध्याय ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में घुसपैठियों और बांग्लादेशियों का नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी दिया है कि 2003 में हुए SIR के दौरान जिन लोगों के नाम हटा दिए गए थे, उनकी नागरिकता की स्थिति के सत्यापन के लिए उचित न्यायाधिकरणों को भेजा जाए। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान केवल नाम हटा दिया जाना अपने आप में यह निर्णायक रूप से साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति एक विदेशी नागरिक है। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय ने विचार किए गए ग्यारह दस्तावेजों को उचित और किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन न करने वाला बताया है, साथ ही चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित इन दस्तावेजों के समूह को उपयुक्त माना गया है। आधार के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है।
- दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे मामले में मिसाल कायम की है जहाँ मोबाइल छीनने वाले अपराधी को मात्र 12 दिनों के भीतर सजा मिल गई। घटना मोबाइल छीनने और भागने की थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी टेक्नोलॉजी वाली जांच का इस्तेमाल किया। इस तेज़ और प्रभावी कार्रवाई के परिणामस्वरूप, पुलिस की यह जांच प्रणाली एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है।1
- एक संदेश में लोगों से अपील की गई है कि यदि सरकारी स्कूलों में छात्रों को दूध नहीं मिल रहा है, तो इसकी जानकारी दी जाए। संदेश में कहा गया है कि सूचना मिलने पर वे स्वयं वीडियो बनाकर इसे पोस्ट करेंगे और इस मुद्दे पर समर्थन करेंगे। इसके साथ ही, उन सभी लोगों से पूछा गया है जो उनकी पोस्ट और वीडियो देखते हैं, कि क्या उनके बच्चों को भी स्कूलों में दूध दिया जा रहा है या नहीं।1
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा हर महीने 80 करोड़ लोगों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था को और सुचारु बनाने के लिए कैबिनेट ने 'SARTHAK PDS' योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत गरीब परिवारों को लाभ पहुँचाने वाले तीन प्रमुख सुधार किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन व्यवस्था को और अधिक मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बनाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹25,530 करोड़ का केंद्रीय आवंटन भी स्वीकृत किया है। योजना के तहत तीन खास बदलाव करने की बात कही गई है। इन सुधारों में सबसे पहले राज्यों को राशन की ढुलाई में मदद करना शामिल है, जिसके तहत सरकार खाद्यान्न को गोदामों से दुकानों तक पहुँचाने के लिए राज्य एजेंसियों को आर्थिक सहायता देगी। इससे परिवहन लागत कम होगी और दूरदराज के इलाकों सहित सभी गरीबों तक राशन समय पर पहुँच सकेगा। दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव राशन की 'फेयर प्राइस शॉप' को समर्थन देना है, जिससे राशन डीलरों को डिजिटल उपकरण, बेहतर भंडारण और संचालन के लिए सहायता मिलेगी। यह कदम दुकानों के कार्यप्रणाली को मजबूत करेगा, वितरण में गड़बड़ी को कम करेगा और राशन दुकानदारों को आर्थिक राहत भी प्रदान कर सकता है। तीसरा बड़ा सुधार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का आधुनिकीकरण है, जिसमें ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन निगरानी, स्मार्ट डिवाइस और पारदर्शिता उपकरण जैसी तकनीक आधारित प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। इससे राशन की चोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा, जिससे जरूरतमंदों को सीधा लाभ मिल पाएगा। सरकार का लक्ष्य 'वन नेशन-वन राशन कार्ड' जैसी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाना भी है, ताकि देशभर में राशन वितरण निर्बाध और पारदर्शी हो सके, जिससे करोड़ों लाभार्थियों को इसका सीधा फायदा मिल सके।1
- दिल्ली का प्रसिद्ध लोदी कॉलोनी मार्केट आज खाली दिखाई दे रहा है। इस स्थिति का मुख्य कारण गर्मी और गैस की महंगाई को बताया गया है, जिसके चलते बाजार में लोगों की चहल-पहल कम है।1
- गृह मंत्रालय (MHA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 500 रुपये के नोटों को लेकर एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी के अनुसार, बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोटों की भारी खेप का खुलासा हुआ है। ये जाली नोट देखने में बिल्कुल असली जैसे ही दिखाई देते हैं, जिसके कारण इन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है। इसी को देखते हुए, MHA और RBI ने आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन करते समय 500 रुपये के नोटों के सुरक्षा फीचर्स की अच्छी तरह जांच कर लें।1
- चलती ट्रेन में समोसे बेचने वाले एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने रेलवे में खाने-पीने की चीजों की स्वच्छता और अनधिकृत वेंडरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को ट्रेन के दरवाजे के पास फर्श पर बैठे फोन पर बात करते हुए देखा जा सकता है, जिसके पैरों के नीचे समोसे रखे हुए हैं। ये समोसे कथित तौर पर यात्रियों को बेचने के लिए थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई यूजर्स ने इसे 'बेहद अस्वच्छ' करार देते हुए रेलवे में बिकने वाले खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसे यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है। मामले ने तूल पकड़ा तो रेलवे ने इसकी जांच कराई और एक आधिकारिक बयान जारी किया। रेलवे के अनुसार, 20 मई से 22 मई 2026 के बीच ट्रेन नंबर 12809-10 में की गई जांच में प्रथम दृष्टया ऐसा कोई अधिकृत स्टाफ तैनात नहीं पाया गया, जैसा कि वीडियो में दिख रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति रेलवे का अधिकृत कर्मचारी नहीं था। रेलवे ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई शुरू करने की भी बात कही है। एक्शन टेकन रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित लाइसेंस वालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ट्रेनों में किसी भी अनधिकृत फेरीवाले या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत रेलवे कंट्रोल रूम को दें। इस घटना ने एक बार फिर ट्रेनों में अवैध रूप से सामान बेचने वाले फेरीवालों की समस्या को उजागर कर दिया है, जिसकी शिकायत यात्री लंबे समय से करते रहे हैं कि बिना अनुमति वाले वेंडर स्वच्छता मानकों का पालन नहीं करते। वायरल वीडियो के बाद अब ट्रेनों में खाद्य सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और यात्रियों की सेहत को लेकर सख्त नियम लागू करने की मांग तेज हो गई है।1
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- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने और इज़रायल को मान्यता देने का प्रस्ताव दिए जाने के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों में खामोशी और विवाद का माहौल है। पाकिस्तान की आधिकारिक नीति, जो उसके पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से अंकित है कि यह इज़रायल को छोड़कर सभी देशों के लिए वैध है, इस प्रस्ताव के ठीक उलट है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जहाँ पाकिस्तान के फाइव स्टार जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चुप्पी साधे हुए हैं और मुंह चुरा रहे हैं, वहीं देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुलकर इसका विरोध किया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ट्रंप के प्रस्ताव का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसे किसी भी समझौते में शामिल होने के खिलाफ हैं जहाँ इज़रायल को मान्यता मिलती हो। उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी समझौते में शामिल नहीं होना चाहिए जो उनके बुनियादी सिद्धांतों के साथ टकराव पैदा करे और उन्हें उन लोगों पर यकीन नहीं है। आसिफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान के पासपोर्ट में इज़रायल का नाम भी शामिल नहीं है। ख्वाजा आसिफ, जिन्हें पाकिस्तान की राजनीति में 'बयान बहादुर' माना जाता है, ने एक अलग बहस के दौरान यह भी कहा था कि पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं और आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे, जबकि उनके खुद के पूर्वज हिंदू थे। हालांकि, ख्वाजा आसिफ के इजरायल को मान्यता न देने के रुख के विपरीत, पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय कह रहा है कि तीन महान धर्मों के सह-अस्तित्व को स्वीकार किया जा सकता है। पाकिस्तान के इस कथित 'दोगले चरित्र' को लेकर इस्लामाबाद से वाशिंगटन तक बौखलाहट देखी जा रही है। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने तो पाकिस्तानी हुकूमत को ही सीधे तौर पर धमकी दे डाली है। कसूरी ने कहा है कि जो कोई भी इज़रायल को कबूल करेगा, चाहे वह कोई भी शासक या बादशाह हो, वह हलाक हो जाएगा, तबाह हो जाएगा और बर्बाद हो जाएगा। इसी बीच, ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि उन्हें पहले से ही लग रहा था कि पाकिस्तान में कुछ गड़बड़ है और उसकी इज़रायल से दुश्मनी है, साथ ही आरोप लगाया कि ईरानी विमान पाकिस्तान में छिपाए जा रहे हैं और उसके रक्षा मंत्री इज़रायल विरोधी बयान दे रहे हैं। ग्राहम ने पाकिस्तान से स्पष्ट करने की मांग की है कि ट्रंप की अब्राहम अकॉर्ड वाली अपील पर उसका क्या कहना है। अब सभी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार है, जिसके बाद देखना होगा कि 'ईरान वॉर' में कूटनीति का कथित मास्टरस्ट्रोक चलने वाला पाकिस्तान अपने 'आकाओं' को क्या जवाब देता है।1