हापुड़ के ग्राम शेखपुर में पिछले करीब 2 माह से तालाब ओवरफ्लो होने के कारण गांव की मुख्य सड़क पर गंदा पानी भरा हुआ है। 200 मीटर से अधिक हिस्से में जलभराव के कारण ग्रामीणों का आवागमन दूभर हो गया है। इस गंदे पानी से उठ रही दुर्गंध के कारण बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को कीचड़ भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, वहीं पुलिया टूटने के कारण कई लोग फिसलकर चोटिल भी हुए हैं। गांव में जल विभाग द्वारा लगाई गई पानी की टंकी भीषण गर्मी में भी केवल खानापूर्ति के लिए चलाई जा रही है। साथ ही, गांव में रात्रि में एक तरफा प्रकाश की व्यवस्था की गई थी, जिस पर पोल पर स्ट्रीट लाइटों की जांच की मांग की गई है। आज़ाद अधिकार सेना का आरोप है कि शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी मौके पर आए बिना ही फर्जी आख्या लगाकर निस्तारण दिखा देते हैं। ग्रामीणों को बीते 5 वर्षों में किसी सुविधा का लाभ नहीं मिला है, जिस पर अन्य टीम गठित कर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। इस संबंध में आज़ाद अधिकार सेना ने ज़िलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें ग्राम शेखपुर में सड़क पर भरे गंदे पानी की निकासी का स्थायी समाधान कराने और फर्जी आख्या लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।
हापुड़ के ग्राम शेखपुर में पिछले करीब 2 माह से तालाब ओवरफ्लो होने के कारण गांव की मुख्य सड़क पर गंदा पानी भरा हुआ है। 200 मीटर से अधिक हिस्से में जलभराव के कारण ग्रामीणों का आवागमन दूभर हो गया है। इस गंदे पानी से उठ रही दुर्गंध के कारण बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को कीचड़ भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, वहीं पुलिया टूटने के कारण कई लोग फिसलकर चोटिल भी हुए हैं। गांव में जल विभाग द्वारा लगाई गई पानी की टंकी भीषण गर्मी में भी केवल खानापूर्ति के लिए चलाई जा रही है। साथ ही, गांव में रात्रि में एक तरफा प्रकाश की व्यवस्था की गई थी, जिस पर पोल पर स्ट्रीट लाइटों की जांच की मांग की गई है। आज़ाद अधिकार सेना का आरोप है कि शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी मौके पर आए बिना ही फर्जी आख्या लगाकर निस्तारण दिखा देते हैं। ग्रामीणों को बीते 5 वर्षों में किसी सुविधा का लाभ नहीं मिला है, जिस पर अन्य टीम गठित कर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। इस संबंध में आज़ाद अधिकार सेना ने ज़िलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें ग्राम शेखपुर में सड़क पर भरे गंदे पानी की निकासी का स्थायी समाधान कराने और फर्जी आख्या लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।
- समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मेरठ कलेक्ट्रेट पर बढ़ती महंगाई और निरंतर हो रहे पेपर लीक के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने इन गंभीर समस्याओं के विरोध में धरना देते हुए प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा।1
- बागपत के एक गांव में ग्रामीण गंदगी और ओवरफ्लो हो रहे तालाब की समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। गांव के निवासियों का कहना है कि तालाब का गंदा पानी अब आसपास के रास्तों और आबादी वाले क्षेत्रों तक फैल गया है, जिससे वहां दुर्गंध और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों और विभागों से कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। इस लगातार बढ़ रही परेशानी के कारण लोगों में प्रशासन के प्रति काफी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान करने की पुरजोर मांग की है। अब सवाल यह उठता है कि ग्रामीणों की इन शिकायतों को आखिर कब तक अनदेखा किया जाता रहेगा, जबकि उनकी परेशानी हर दिन बढ़ती जा रही है?1
- मिली जानकारी के अनुसार, कॉलिंग कार्ड बनाने के तरीके के संबंध में एक प्रश्न उठाया गया है। यह प्रश्न इस बात पर केंद्रित है कि कॉलिंग कार्ड का निर्माण कैसे किया जाए।1
- प्रयागराज में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह सर्किट हाउस में छात्रों के साथ पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर एक बैठक कर रहे थे। इसी दौरान एडीएम सिटी और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और इस चर्चा पर आपत्ति जताते हुए इसे बंद करने का निर्देश दिया, जिसके बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस प्रशासनिक हस्तक्षेप पर सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाते हुए इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने 'धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः' के प्राचीन उद्घोष को दोहराया है, जिसका अर्थ है कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है, किंतु जो अपने स्वार्थ के लिए धर्म को नष्ट करता है, धर्म उसे नष्ट कर देता है। उन्होंने कहा कि आज यह उद्घोषणा विश्व में अक्षरशः सत्य सिद्ध होती दिखाई दे रही है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक और पूर्व कार्यालय अधीक्षक, मोदीनगर ने मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दिया। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि माँ गंगा और गौ माँ उनके सनातन धर्म अनुयाई के संस्कार में मौजूद हैं। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की डबल इंजन की सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि वे एक विकसित भारत के लिए समयबद्ध और संकल्पित हैं, विशेषकर दलितों और कमजोर वर्गों के लिए। उन्होंने भगवान महादेव से आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना की और उल्लेख किया कि संत शिरोमणी जननायक मुख्यमंत्री जी ने मित्र को परिभाषित किया है।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करने वाले मौलवियों और मौलानाओं पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज के लिए गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि पूजनीय माता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि माता और पुत्र के बीच के रिश्ते को किसी सरकारी घोषणा की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह संबंध आस्था, संस्कार और श्रद्धा से जुड़ा होता है। उन्होंने लगातार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे ऐसे लोगों को यह समझने की सलाह दी कि गाय उनके लिए पशु नहीं, बल्कि उनकी माता है।1
- हापुड़ के थाना बाबूगढ़ क्षेत्र में एक कपड़ा व्यापारी से हुई ₹16.92 लाख की लूट की घटना का पुलिस ने मात्र 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इस पूरी साजिश का मुख्य कर्ताधर्ता व्यापारी का ड्राइवर ही था। स्वाट टीम और बाबूगढ़ पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटी गई रकम में से ₹16.50 लाख, अवैध हथियार और घटना में इस्तेमाल किया गया वाहन भी बरामद कर लिया है। पुलिस इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।1
- मेरठ में आयोजित नौचंदी मेले में झूलों का आनंद लेने के लिए लोगों को भारी भीड़ के कारण लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ा। शाम होते ही झूलों के बाहर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौती बन गया था। इस भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए, झूला संचालकों ने निजी गार्डों को तैनात किया। इन गार्डों ने लाइन की व्यवस्था संभाली और लोगों को क्रमवार झूलों तक पहुंचाने का काम किया, ताकि सभी को अपनी बारी का इंतजार शांतिपूर्ण ढंग से करने का मौका मिले। बच्चों और युवाओं में झूलों को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। कई लोगों ने यह भी बताया कि लंबा इंतजार तो करना पड़ा, लेकिन झूलों का रोमांच उस प्रतीक्षा को सार्थक बना गया। मेले में लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए, आयोजकों और संचालकों ने सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।1
- राव प्रदीप द्वारा साझा किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया है: क्या होता है जब कोर्ट सज़ा सुना दे, लेकिन व्यक्ति को तुरंत जेल न जाना पड़े? इस पोस्ट में खुशी जाहिर करने वाले इमोजी के साथ, कानूनी जागरूकता से संबंधित इस विषय पर प्रकाश डाला गया है। पोस्ट में 'सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस' (सज़ा पर रोक) और 'बेल' (जमानत) जैसे कानूनी पहलुओं का उल्लेख किया गया है, जो यह समझाने में मदद करते हैं कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो सकती है। यह चर्चा कानून, अदालत, वकीलों, अदालती मामलों और आपराधिक कानून जैसे विषयों से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य यह समझाना है कि सज़ा मिलने के बाद भी कुछ विशेष परिस्थितियों में व्यक्ति को तुरंत जेल जाने से छूट मिल सकती है।1