चार बच्चे पैदा करने का प्रवचन देने वाले धीरेंद्र शास्त्री और तीन बच्चे पैदा करने का ज्ञान बाँटने वाले आरएसएस के महापुरुषों के बीच, एक कलेक्टर मैडम पाँच बच्चों की माँ को “आधुनिक और सशक्त नारी” बताकर जैसे आईना दिखा रही हैं। सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, सवाल उस दर्द का है जिसे कभी महसूस ही नहीं किया गया। जिन्होंने कभी प्रसव पीड़ा नहीं सही, वे सिर्फ “जनसंख्या” को आंकड़ों में देखते हैं बीज डालो, पेड़ उगाओ… जैसे यह कोई कृषि योजना हो। पर ये शरीर कोई खेत नहीं है, और स्त्री कोई ज़मीन नहीं, जिस पर प्रयोग करके राष्ट्रभक्ति नापी जाए। भारत माता का नाम लेने वालों से एक सीधा सवाल है क्या आपने कभी उस “माता” के दर्द को समझने की कोशिश की है? या फिर राष्ट्र सिर्फ नारे में है, और स्त्री सिर्फ एक साधन? आज की पढ़ी-लिखी नारी शायद यही कह रही है मातृत्व उसका अधिकार है, कर्तव्य नहीं और संख्या उसका निर्णय है, किसी प्रवचन का परिणाम नहीं। चार बच्चे पैदा करने का प्रवचन देने वाले धीरेंद्र शास्त्री और तीन बच्चे पैदा करने का ज्ञान बाँटने वाले आरएसएस के महापुरुषों के बीच, एक कलेक्टर मैडम पाँच बच्चों की माँ को “आधुनिक और सशक्त नारी” बताकर जैसे आईना दिखा रही हैं। सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, सवाल उस दर्द का है जिसे कभी महसूस ही नहीं किया गया। जिन्होंने कभी प्रसव पीड़ा नहीं सही, वे सिर्फ “जनसंख्या” को आंकड़ों में देखते हैं बीज डालो, पेड़ उगाओ… जैसे यह कोई कृषि योजना हो। पर ये शरीर कोई खेत नहीं है, और स्त्री कोई ज़मीन नहीं, जिस पर प्रयोग करके राष्ट्रभक्ति नापी जाए। भारत माता का नाम लेने वालों से एक सीधा सवाल है क्या आपने कभी उस “माता” के दर्द को समझने की कोशिश की है? या फिर राष्ट्र सिर्फ नारे में है, और स्त्री सिर्फ एक साधन? आज की पढ़ी-लिखी नारी शायद यही कह रही है मातृत्व उसका अधिकार है, कर्तव्य नहीं और संख्या उसका निर्णय है, किसी प्रवचन का परिणाम नहीं।
चार बच्चे पैदा करने का प्रवचन देने वाले धीरेंद्र शास्त्री और तीन बच्चे पैदा करने का ज्ञान बाँटने वाले आरएसएस के महापुरुषों के बीच, एक कलेक्टर मैडम पाँच बच्चों की माँ को “आधुनिक और सशक्त नारी” बताकर जैसे आईना दिखा रही हैं। सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, सवाल उस दर्द का है जिसे कभी महसूस ही नहीं किया गया। जिन्होंने कभी प्रसव पीड़ा नहीं सही, वे सिर्फ “जनसंख्या” को आंकड़ों में देखते हैं बीज डालो, पेड़ उगाओ… जैसे यह कोई कृषि योजना हो। पर ये शरीर कोई खेत नहीं है, और स्त्री कोई ज़मीन नहीं, जिस पर प्रयोग करके राष्ट्रभक्ति नापी जाए। भारत माता का नाम लेने वालों से एक सीधा सवाल है क्या आपने कभी उस “माता” के दर्द को समझने की कोशिश की है? या फिर राष्ट्र सिर्फ नारे में है, और स्त्री सिर्फ एक साधन? आज की पढ़ी-लिखी नारी शायद यही कह रही है मातृत्व उसका अधिकार है, कर्तव्य नहीं और संख्या उसका निर्णय है, किसी प्रवचन का परिणाम नहीं। चार बच्चे पैदा करने का प्रवचन देने वाले धीरेंद्र शास्त्री और तीन बच्चे पैदा करने का ज्ञान बाँटने वाले आरएसएस के महापुरुषों के बीच, एक कलेक्टर मैडम पाँच बच्चों की माँ को “आधुनिक और सशक्त नारी” बताकर जैसे आईना दिखा रही हैं। सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, सवाल उस दर्द का है जिसे कभी महसूस ही नहीं किया गया। जिन्होंने कभी प्रसव पीड़ा नहीं सही, वे सिर्फ “जनसंख्या” को आंकड़ों में देखते हैं बीज डालो, पेड़ उगाओ… जैसे यह कोई कृषि योजना हो। पर ये शरीर कोई खेत नहीं है, और स्त्री कोई ज़मीन नहीं, जिस पर प्रयोग करके राष्ट्रभक्ति नापी जाए। भारत माता का नाम लेने वालों से एक सीधा सवाल है क्या आपने कभी उस “माता” के दर्द को समझने की कोशिश की है? या फिर राष्ट्र सिर्फ नारे में है, और स्त्री सिर्फ एक साधन? आज की पढ़ी-लिखी नारी शायद यही कह रही है मातृत्व उसका अधिकार है, कर्तव्य नहीं और संख्या उसका निर्णय है, किसी प्रवचन का परिणाम नहीं।
- Post by D K G Pradesh Prasar4
- Councilor Laika Rafiq Qureshi left from Bhopal Railway Station for the holy journey of Haj 2026. मुकद्दस सफर हज 2026 के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन से रवाना हुए पार्षद लईका ऱफ़िक़ कुरेशी1
- चार बच्चे पैदा करने का प्रवचन देने वाले धीरेंद्र शास्त्री और तीन बच्चे पैदा करने का ज्ञान बाँटने वाले आरएसएस के महापुरुषों के बीच, एक कलेक्टर मैडम पाँच बच्चों की माँ को “आधुनिक और सशक्त नारी” बताकर जैसे आईना दिखा रही हैं। सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, सवाल उस दर्द का है जिसे कभी महसूस ही नहीं किया गया। जिन्होंने कभी प्रसव पीड़ा नहीं सही, वे सिर्फ “जनसंख्या” को आंकड़ों में देखते हैं बीज डालो, पेड़ उगाओ… जैसे यह कोई कृषि योजना हो। पर ये शरीर कोई खेत नहीं है, और स्त्री कोई ज़मीन नहीं, जिस पर प्रयोग करके राष्ट्रभक्ति नापी जाए। भारत माता का नाम लेने वालों से एक सीधा सवाल है क्या आपने कभी उस “माता” के दर्द को समझने की कोशिश की है? या फिर राष्ट्र सिर्फ नारे में है, और स्त्री सिर्फ एक साधन? आज की पढ़ी-लिखी नारी शायद यही कह रही है मातृत्व उसका अधिकार है, कर्तव्य नहीं और संख्या उसका निर्णय है, किसी प्रवचन का परिणाम नहीं।1
- Post by Naved khan1
- *भोपाल में 28 अप्रैल को शौर्य यात्रा, क्रांतिवीरों को दी जाएगी श्रद्धांजलि* एंकर राजधानी भोपाल में 28 अप्रैल को नर्मदा टाईगर हिरदेशाह लोधी के बलिदान दिवस पर भव्य शौर्य यात्रा का आयोजन होने जा रहा है। जम्बूरी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि मंत्री प्रहलाद पटेल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। अखिल भारतीय लोधी, लोधा, लोध क्षत्रिय महासभा, नर्मदा टाईगर हिरदेशाह शोध संस्था और गौड महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शौर्य यात्रा में उन क्रांतिवीर राजाओं और जनजातीय योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई लेकिन इतिहास में उन्हें पर्याप्त पहचान नहीं मिल सकी। कार्यक्रम में प्रदेशभर के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल होंगे। इस दौरान वीरों के बलिदान को याद करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया जाएगा। बाइट___ जालम सिंह पटेल पूर्व मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष लोधी लोधा क्षत्रिय समाज1
- Post by Faizan Khan1
- Post by शाहिद खान रिपोर्टर1
- Post by D K G Pradesh Prasar7