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एक दिवसीय श्रम अधिकार दिवस सह ग्रामिण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
SATISH KUMAR (पत्रकार)
एक दिवसीय श्रम अधिकार दिवस सह ग्रामिण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
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- Post by SATISH KUMAR (पत्रकार)1
- आज दिनांक 27/02/2026को निवंधन सह परामर्श केंद्र गयाजी के सभाकक्षमे एक दिवसीय श्रम अधिकार दिवस सह ग्रामीण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ उप श्रमायुक्त गयाजी विनोद कुमार प्रसाद, सहायक श्रमायुक्त पूनम कुमारी एवं जिला सूचना एवं संपर्क पदाधिकारी दीपक चंद्र देव द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वल्लित एवं बिहार गाथा के साथ किया गया l कार्यक्रम मे डी आर सी सी प्रबंधक, श्रम संगठन प्रतिनिधि अरविन्द कुमार सभी प्रखंडो ke💔श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी एवं जिला के प्रत्येक पंचायत से एक -एक श्रमिक उपस्थित रहे l यह कार्यक्रम श्रमिकों को उनके अधिकारों एवं कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराने तथा ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजन किया गया l आगत अतिथियों एवं श्रमिकगन का धन्यवाद ज्ञापन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी आमस गयाजी के द्वारा किया वाया l1
- नगर निगम गयाजी द्वारा फ़ॉगर एंटी स्मोक कैनन गन से रुक्मिणी सरोवर अक्षयवट वेदी एवं विभिन्न घाटों, वेदी, धार्मिक स्थलों पर धोलाई कार्य निरंतर जारी है। अक्षयवट वेदी पर सालों भर देश विदेश से पिंडदानी अपने पूर्वजों के याद में पिंडदान करने आते है। और रुक्मिणी सरोवर में दुर्गा माता, काली माता, लक्ष्मी माता,सरस्वती माता एवं अन्य पूजा के प्रतिमा का विसर्जन होता है। एवं छठ पूजा के अवसर पर यहां पर अर्घ्य देने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं।1
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- आज महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शाहिद चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किसान मोर्चा कार्यालय गया जी में भारतीय जनता पार्टी के नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य उनके चित्र पर माला एबं पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। नमन करते हुए डॉक्टर मनीष पंकज मिश्रा ने उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। 25 वर्ष की आयु में मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, लेकिन अंग्रेजों के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। उनका प्रसिद्ध संकल्प “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे” — आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देशहित को सर्वोपरि रखते हुए ईमानदारी, परिश्रम और अनुशासन को अपने जीवन का आधार बनाएं। इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता ने चंद्रशेखर आजाद के आदर्शों को अपनाने का संकल्प ले चंद्रशेखर आजाद जैसे वीर सपूतों के बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले पा रहे हैं। अंत में दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीद को श्रद्धांजलि दी गई।1