महान क्रांतिकारी श्री विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। स्वातंत्र्यवीर सावरकर को मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रहकर क्रांतिकारी विचारधारा को मजबूत किया और अनेक युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई। अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उनके विचार, उनकी लेखनी और संगठन क्षमता ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की थी। कठोर कारावास और प्रताड़नाओं के बावजूद, सावरकर जी ने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित और स्वाधीनता के संकल्प को सर्वोपरि रखा। उनके जीवन को त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का एक अद्वितीय उदाहरण बताया गया, जिनका चिंतन भारत की एकता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना के प्रति आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।
महान क्रांतिकारी श्री विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। स्वातंत्र्यवीर सावरकर को मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रहकर क्रांतिकारी विचारधारा को मजबूत किया और अनेक युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई। अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उनके विचार, उनकी लेखनी और संगठन क्षमता ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की थी। कठोर कारावास और प्रताड़नाओं के बावजूद, सावरकर जी ने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित और स्वाधीनता के संकल्प को सर्वोपरि रखा। उनके जीवन को त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का एक अद्वितीय उदाहरण बताया गया, जिनका चिंतन भारत की एकता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना के प्रति आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।
- महान क्रांतिकारी श्री विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। स्वातंत्र्यवीर सावरकर को मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रहकर क्रांतिकारी विचारधारा को मजबूत किया और अनेक युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई। अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उनके विचार, उनकी लेखनी और संगठन क्षमता ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की थी। कठोर कारावास और प्रताड़नाओं के बावजूद, सावरकर जी ने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित और स्वाधीनता के संकल्प को सर्वोपरि रखा। उनके जीवन को त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का एक अद्वितीय उदाहरण बताया गया, जिनका चिंतन भारत की एकता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना के प्रति आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।1
- बोराड़ा हत्याकांड से जुड़ा एक चौंकाने वाला 'इनसाइडर सच' सामने आया है। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों को मौके से हटाए जाने के तुरंत बाद, पहली पत्नी ने एक 'खूनी खेल' को अंजाम दिया। उसने एक ट्रैक्टर से डीजल निकाला और फिर अपने ही परिवार के सदस्यों को एक स्कॉर्पियो गाड़ी में जिंदा जला दिया।1
- अजमेर जिले के बोराड़ा थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के चार लोगों की स्कॉर्पियो में जिंदा जलकर हुई मौत के मामले में पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जांच में इस घटना को एक हादसा माना जा रहा था, लेकिन अब पुलिस की पड़ताल में यह मामला हत्या और साजिश का बन गया है।1
- राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार रखने और अंतरिम जमानत रद्द करने के फैसले के बाद आसाराम जोधपुर पहुंच गया है। एयरपोर्ट पर उसके समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्हें आसाराम ने गाड़ी से ही आशीर्वाद दिया। फिलहाल, आसाराम पाल गांव स्थित अपने आश्रम पहुंचने के बाद एम्स में भर्ती हो गया है और गुरुवार शाम पाँच बजे से पहले जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर सकता है। दरअसल, बुधवार को हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद आसाराम बुधवार देर शाम ही हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था। आसाराम समर्थकों का दावा है कि हरिद्वार से सड़क मार्ग से सफर के कारण तबीयत बिगड़ने की वजह से वह पहले दिल्ली एम्स में भर्ती हुआ था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, आसाराम पक्ष की शुरुआती कोशिश थी कि मेडिकल ग्राउंड का बहाना बनाकर सरेंडर से बचा जाए और सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाए, लेकिन कानूनी सलाह के बाद यह विचार त्याग दिया गया। हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने अपने फैसले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद (प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल में रहने) की सजा को पूरी तरह से बरकरार रखा। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'आरोपी की कैद की तो दीवारें हैं लेकिन पीड़िता को जो मानसिक आघात और आजीवन पीड़ा दी गई है, उसकी कोई दीवार नहीं है।' इसी आदेश के तहत कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे। इसी मामले में हाईकोर्ट ने दो अन्य सह-आरोपियों, हॉस्टल वार्डन शिल्पी और गुरुकुल के निदेशक शरत चंद्र को सभी आरोपों से बरी करते हुए राहत दी। अदालत ने माना कि इन दोनों के खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। गौरतलब है कि अगस्त 2013 में जोधपुर के मनई आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था, जिसमें निचली अदालत ने अप्रैल 2018 में दोषियों को सजा सुनाई थी। अब सरेंडर के बाद आसाराम को दोबारा जेल भेज दिया गया है।1
- हजरत ख़्वाज़ा गरीब नवाज की दरगाह में ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई, जहाँ राजस्थान सहित देश के विभिन्न शहरों से आए हजारों जायरीन शामिल हुए। ये सभी जायरीन ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में ईद उल अजहा की नमाज अदा करने पहुँचे थे। इस अवसर पर शाहजानी मस्जिद में मौलाना अब्दुल गफूर सहाब ने ईद उल अजहा की नमाज अदा कराई। जायरीन हजरत ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में ईद की नमाज अदा करने को अपनी खुशनसीबी मानते हैं।1
- श्री राम सेवा हिंदुस्तान द्वारा आज ग्यारस के शुभ अवसर पर टीवी हॉस्पिटल, अंबे भाटी में एक समाज सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत मरीजों, अस्पताल स्टाफ और जरूरतमंद लोगों के बीच लगभग 90 किलो आम वितरित किए गए। युवा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवी लाल सोनी ने इस सेवा अभियान का नेतृत्व किया। कार्यक्रम के दौरान खाटू श्याम बाबा को भोग लगाकर सभी की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की गई। इस अवसर पर सूरत तंबोली और जिला संयोजक बसंतर नायक सहित संस्था के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। श्री राम सेवा हिंदुस्तान ने बताया कि उनके द्वारा लगातार समाज सेवा के कार्य किए जा रहे हैं और भविष्य में भी इसी तरह जरूरतमंद लोगों की सेवा जारी रहेगी।1
- राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि सत्ता उनके लिए सुख का साधन नहीं, बल्कि जनता-जनार्दन की सेवा का माध्यम है। यह प्रतिबद्धता आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए है, जिसके तहत सरकार जन-जन के कल्याण के लिए समर्पित है और जनता के बीच रहकर उनके सुख-दुख साझा करने की नीति में विश्वास रखती है। इस मूलमंत्र के तहत, राजस्थान सरकार 'ग्राम चौपालों' के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता की समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो सके और विकास की योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचें। सरकार का एकमात्र संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की खुशहाली सुनिश्चित करना है।1
- अजमेर जिले के बोराडा क्षेत्र में सामने आया कार में आग लगने का मामला अब एक सनसनीखेज हत्याकांड में बदल गया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस वारदात में पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी, पूर्व सरपंच पूसी देवी, निवर्तमान जिला परिषद सदस्य सुरज्ञान चौधरी और उनकी गोद ली हुई बेटी महिमा की निर्मम मौत हुई है। प्रारंभिक जांच में परिवार के ही कुछ सदस्यों पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है, जिसके चलते पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला स्वयं मौके पर मौजूद रहकर जांच की निगरानी कर रहे हैं, जबकि एफएसएल टीम और पुलिस सभी पहलुओं से साक्ष्य जुटाने में जुटी है। घटनास्थल और घर से मिले सुरागों के आधार पर जांच को तेज कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में जल्द ही एक बड़ा खुलासा होने की संभावना है।1