चंदौली के सिलौटा गांव में 20 वर्षों से जलजमाव, नदारद सफाईकर्मी और मासूम बच्चों से कराई जा रही सफाई – ग्राउंड रिपोर्ट 20 वर्षों की समस्या: ग्राम सभा सिलौटा में पिछले 20 सालों से जलजमाव और गलियों में गंदगी की गंभीर समस्या बनी हुई है। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। केवल फोटो तक सीमित सफाई: गांव में तैनात सफाईकर्मी केवल फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं। धरातल पर कोई काम नहीं होता। मासूमों से श्रम: सफाईकर्मियों की लापरवाही के कारण छोटे-छोटे बच्चों द्वारा सफाई करने का वीडियो सामने आया है, जो बेहद चिंताजनक है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता: वर्तमान और पूर्व सरपंच/प्रधान द्वारा विकास का कोई भी कार्य पूर्ण रूप से नहीं कराया गया है, जिससे यह गांव वर्षों से पिछड़ा हुआ है।संलग्न वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि जलजमाव और गंदगी के बीच छोटे बच्चे सफाई करने को मजबूर हैं। प्रशासन और ग्राम पंचायत की यह बड़ी लापरवाही ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। अपील: निवेदन है कि इस खबर को अपने चैनल पर प्रमुखता से दिखाएं ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रशासन का ध्यान इस ओर जाए और गांव वालों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
चंदौली के सिलौटा गांव में 20 वर्षों से जलजमाव, नदारद सफाईकर्मी और मासूम बच्चों से कराई जा रही सफाई – ग्राउंड रिपोर्ट 20 वर्षों की समस्या: ग्राम सभा सिलौटा में पिछले 20 सालों से जलजमाव और गलियों में गंदगी की गंभीर समस्या बनी हुई है। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। केवल फोटो तक सीमित सफाई: गांव में तैनात सफाईकर्मी केवल फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं। धरातल पर कोई काम नहीं होता। मासूमों से श्रम: सफाईकर्मियों की लापरवाही के कारण छोटे-छोटे बच्चों द्वारा सफाई करने का वीडियो सामने आया है, जो बेहद चिंताजनक है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता: वर्तमान और पूर्व सरपंच/प्रधान द्वारा विकास का कोई भी कार्य पूर्ण रूप से नहीं कराया गया है, जिससे यह गांव वर्षों से पिछड़ा हुआ है।संलग्न वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि जलजमाव और गंदगी के बीच छोटे बच्चे सफाई करने को मजबूर हैं। प्रशासन और ग्राम पंचायत की यह बड़ी लापरवाही ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। अपील: निवेदन है कि इस खबर को अपने चैनल पर प्रमुखता से दिखाएं ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रशासन का ध्यान इस ओर जाए और गांव वालों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
- स्वर्वेद महामंदिर में रक्षाबंधन पर दिखी आस्था की अनोखी तस्वीर1
- चौबेपुर में भीषण सड़क हादसा, डिवाइडर से टकराई पल्सर; दो युवक गंभीर जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र के बनकट गांव के पास शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे रक्षाबंधन के अवसर पर कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर से दर्शन कर लौट रहे पल्सर बाइक सवार तीन युवक हादसे का शिकार हो गए। बताया जा रहा है कि बाइक डिवाइडर से टकरा गई, जिससे अजय पटेल और शिवम पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बाइक चला रहे अनुराग पटेल के भी घायल होने की सूचना है। सूचना मिलते ही चौबेपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस से नरपतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल अजय पटेल और शिवम पटेल को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। बाइक संख्या UP 65 GC 6031 बताई जा रही है। बाइक मालिक की पहचान शिवचंद्र पटेल निवासी रसूलगढ़ के रूप में हुई है।1
- चौबेपुर: पल्सर सवार तीन युवक डिवाइडर से टकराए दो गंभीर रूप से घायल न्यूज टू इंडिया से सम्पादक हाजी हफीजुल्ला वारसी की खास रिपोर्ट चौबेपुर क्षेत्र वाराणसी पल्सर बाइक सवार तीन युवक डिवाइडर से टकराने से गंभीर रूप से घायल हो गए वाराणसी क्षेत्र चौबेपुर के ग्राम सभा बनकट गांव के पास रक्षाबंधन पर कैथी मार्कंडेय महादेव मंदिर से दर्शन करके लौट रहे थे तभी बनकट गांव के पास शाम करीब 6:30 बजे हादसा हो गया पल्सर गाड़ी नंबर UP 65 GC 6031 पर अनुराग पटेल बाइक चला रहा था पीछे अजय पटेल और शिवम पटेल बैठे थे डिवाइडर से टकराने से अजय व शिवम गंभीर रूप से घायल हो गए तीन निवासी रसुलगढ वाराणसी के रहने वाले हैं सूचना मिलने पर चौबेपुर पुलिस मौके पर पहुंच कर दोनों घायलों को एंबुलेंस से नरपतपुर सामुदायिक केंद्र पर भेजा जहां से डॉक्टर ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया पल्सर बाइक मालिक शिवचंद्र पटेल निवासी रसूलगढ़ के रूप में पहचान हुई है पुलिस मामले की जांच कर रही है।1
- कलम की तेज धार से अयोध्या जिला अस्पताल में मानवता शर्मसार: मौत के बाद भी नहीं मिला शव वाहन, ठेले पर शव ले जाने को मजबूर हुए परिजन अयोध्या। कहते हैं सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों खर्च कर रही है, बड़े-बड़े दावे हैं। लेकिन अयोध्या जिला चिकित्सालय की हकीकत ने इन दावों की पोल खोल दी। यहां एक मरीज की मौत के बाद सिस्टम इतना लाचार निकला कि उसके परिजनों को शव को कंधा तो दूर, ठेले पर लादकर ले जाना पड़ा। घंटों तड़पते रहे परिजन, स्टाफ बोला - ड्राइवर का नंबर ही नहीं है! इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया। टूटे हुए परिजनों ने अस्पताल स्टाफ से हाथ जोड़कर एक शव वाहन की मांग की। आरोप है कि उन्हें घंटों इधर से उधर दौड़ाया गया। जब थक-हारकर वार्ड की महिला स्टाफ से पूछा तो गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला - "ड्राइवर का नंबर उपलब्ध नहीं है।" सोचिए, जिला अस्पताल जैसा बड़ा संस्थान, जहां हर रोज मौतें होती हैं, वहां शव वाहन के ड्राइवर का नंबर तक मौजूद नहीं! यह लापरवाही नहीं तो और क्या है? सवाल तो बनता है साहब... 1. प्राइवेट एंबुलेंस का धंधा परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल में शव वाहन होते हुए भी नहीं दिया जाता ताकि बाहर खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस वालों का धंधा चलता रहे। क्या अस्पताल परिसर में शुल्क लेकर चल रही निजी एंबुलेंस सेवा और स्टाफ की मिलीभगत है? 2. कहां गई संवेदनशीलता? क्या जिला अस्पताल प्रशासन इतना संवेदनहीन हो गया है कि एक लाश को भी सम्मान नहीं दे सकता? 3. जांच कौन करेगा? अगर जिला अस्पताल में ही यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों की क्या दुर्दशा होगी? यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर तमाचा है। जब शासन-प्रशासन बड़े-बड़े आयोजन और वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त है, तब आम आदमी को ठेले पर अपने अपनों की लाश ढोनी पड़ रही है। कलम की धार मांग करती है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषी स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई हो और शव वाहन की व्यवस्था को 24x7 सुनिश्चित किया जाए। वरना यह मान लिया जाए कि अयोध्या का जिला अस्पताल सिर्फ बिल्डिंग है, व्यवस्था नहीं।3
- रक्षाबंधन का त्योहार केवल रेशम के धागे और उपहारों का लेन-देन नहीं है। सनातन परंपरा में इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक, रक्षाबंधन का त्योहार केवल रेशम के धागे और उपहारों का लेन-देन नहीं है। सनातन परंपरा में इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं।जब हम इन पौराणिक कथाओं की परतों को खोलते हैं, तो हमें जीवन जीने के अनमोल सूत्र मिलते हैं।पौराणिक ग्रंथों (जैसे भविष्य पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण) में रक्षाबंधन की शुरुआत से जुड़ी ऐसी कथाएं मिलती हैं, जो इस त्योहार को केवल इंसानों का नहीं, बल्कि देवताओं, दानवों और स्वयं त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का त्योहार बनाती हैं।उत्तर प्रदेश के सुराना, बेनीपुर चक और भीखमपुर जगत पुरवा गांवों में रक्षाबंधन न मनाने के पीछे सदियों पुरानी ऐतिहासिक और दर्दनाक कहानियां छिपी हैं। इन गांवों के लोग आज भी रक्षाबंधन को उत्सव के बजाय एक शोक या खौफनाक दिन के रूप में देखते हैं।1
- लखनऊ: रक्षाबंधन के मौके पर CM योगी आदित्यनाथ को स्कूली बच्चियों ने बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने दिया उपहार न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट लखनऊ। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर उत्सव का माहौल रहा। स्कूली बच्चियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राखी बांधी। इस दौरान बच्चियों ने मुख्यमंत्री को तिलक लगाकर आरती उतारी और कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री योगी ने भी बच्चियों को स्नेह दिया और उन्हें चॉकलेट, गिफ्ट और मिठाई देकर आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। सरकार बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मौके पर मुख्यमंत्री आवास पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चियां और अधिकारी मौजूद रहे। बच्चियों ने मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं, वहीं मुख्यमंत्री ने भी सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई दी।1
- सकलडीहा के लेहरा मनेहार मे ड्रेन टूटने से धान की फसल बर्बाद, किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी1
- चौबेपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, बाइक सवार युवक की मौत, दो गंभीर1
- दलित बस्ती का मुख्य मार्ग जलमग्न, घुटनेभर पानी में ग्रामीणों का प्रदर्शन जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली चहनिया। चहनिया विकास खंड के अंतर्गत आने वाले पूरा गणेश गांव की दलित बस्ती में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। मुख्य पिच मार्ग से बस्ती के अंदर जाने वाला रास्ता बारिश के पानी से घुटने तक जलमग्न हो गया है। समस्या से परेशान ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और जल्द समाधान की मांग उठाई। ग्रामीणों के अनुसार बस्ती का मुख्य मार्ग काफी निचले इलाके में है, जिसके कारण बारिश होते ही सड़क पर पानी भर जाता है। आरोप है कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के चलते पानी लंबे समय तक जमा रहता है, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर गहरा पानी जमा होने के कारण बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बना रहता है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क पर मिट्टी डालकर उसे ऊंचा किया जाए और जलनिकासी की व्यवस्था के साथ पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण और जलभराव की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे। प्रदर्शन में बहादुर राम, शुभम, विनोद राम, बंशनारायण, कैलाश, व्यास, चंदन, रुस्तम, ललिता देवी, मालती देवी, राधिका देवी समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।1