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दरभंगा के सिंहवाड़ा में भीषण आग का तांडव! राजो पंचायत में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, मवेशी समेत चार पहिया वाहन जलकर राख
24 Dainik Bihar Gramin
दरभंगा के सिंहवाड़ा में भीषण आग का तांडव! राजो पंचायत में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, मवेशी समेत चार पहिया वाहन जलकर राख
- User4142Akbarpur, Nawada👏1 hr ago
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- Post by 24 Dainik Bihar Gramin1
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- दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय इन दिनों गंभीर विवाद और प्रशासनिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है — विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति या फिर व्यवस्था की धीमी कार्यशैली? मंगलवार को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर उस समय अभूतपूर्व स्थिति बन गई, जब दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र पासवान के नेतृत्व में कर्मचारियों और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सिंडिकेट के सदस्यों और कुलपति लक्ष्मी निवास पांडे को अंदर जाने से रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी — डॉ. संतोष पासवान को साहित्य विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया जाए कर्मचारियों के लंबित वेतन और पेंशन का जल्द भुगतान किया जाए मौके पर मौजूद बेनीपुर विधायक और सिंडिकेट सदस्य विनय कुमार चौधरी, पूर्व एमएलसी दिलीप चौधरी और सदस्य अजीत चौधरी ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि वरीयता के आधार पर नियुक्ति में देरी और कर्मचारियों के भुगतान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार सड़क पर ही सिंडिकेट की बैठक करनी पड़ी। इसी बैठक में त्वरित निर्णय लेते हुए डॉ. संतोष पासवान को साहित्य विभाग का विभागाध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति बन गई। इसके साथ ही कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का भी आश्वासन दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नगर विधायक संजय सरावगी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। वहीं दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेंद्र पासवान उर्फ गुरुजी ने इसे संघर्ष की जीत बताते हुए सभी समर्थकों का आभार जताया। इस पूरे विवाद में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती दिख रही है: समय पर निर्णय नहीं लेने और वेतन-पेंशन जैसी मूल समस्याओं को लंबित रखने का आरोप कुलपति की भूमिका नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण फैसलों में देरी और दबाव के बाद त्वरित निर्णय सड़क पर बैठक और जनदबाव के बाद फैसला — यह संस्थागत प्रक्रिया पर प्रश्न खड़ा करता है यह घटना केवल एक नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है। अगर समय रहते समस्याओं का समाधान किया जाता, तो शायद सड़क पर बैठक की नौबत नहीं आती।1
- नमस्कार दोस्तों, इस बार बिहार के आम के बगीचों में आम की भरपूर पैदावार हुई थी… पेड़ झुक गए थे फलों से लेकिन कुदरत ने खेल बदल दिया! तेज गर्मी और झुलसाने वाली धूप ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया1
- बाबा परशुराम जयंती समारोह आयोजित के माध्यम से समाजसेवी राजेश कुमार झा उर्फ मोहन झा ने संबोधन किया।1
- रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र में स्थित एक ज्वैलरी दुकान में बड़ी आपराधिक घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, दो मोटरसाइकिल पर सवार पांच अज्ञात अपराधियों ने हथियार का भय दिखाकर दुकान में डकैती की वारदात को अंजाम दिया।1
- मिथिलांचल के डॉक्टर के कार्य को ब्रिटिश पार्लियामेंट से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक सराहा, डॉ. सुमित कुमार झा को इंग्लैंड और यूनाइटेड किंगडम में तीन अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया गया मिथिलांचल के लिए उस समय अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय बना जब दरभंगा के प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक, Yours Clinic के संस्थापक एवं CEO डॉ. सुमित कुमार झा को इंग्लैंड और यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीन महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया गया है। डॉ. झा को द ब्रिटिश पार्लियामेंट, लंदन, यूनाइटेड किंगडम में द British Parliament Honour for Global Homoeopathy Award, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में Global Excellence Award in Homoeopathy तथा नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, लंदन, इंग्लैंड में The International Homoeopathic Visionary Award प्रदान किया गया। डॉ. सुमित कुमार झा की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति के सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मिथिलांचल, बिहार और देश के लिए गौरव का क्षण है। विश्व के इतने प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय होम्योपैथी अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रही है और उसके प्रति सम्मान तथा विश्वास निरंतर बढ़ रहा है। डॉ. झा ने अपने ज्ञान, समर्पण, सेवा-भाव और दूरदर्शी नेतृत्व के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष रूप से द ब्रिटिश पार्लियामेंट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, लंदन जैसे विश्वविख्यात स्थलों पर सम्मान प्राप्त करना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इन सम्मानों ने न केवल डॉ. झा के कार्यों को वैश्विक मान्यता दिलाई है, बल्कि मिथिलांचल की प्रतिभा और भारतीय होम्योपैथी की शक्ति को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया है। डॉ. झा की इस सफलता की खबर से दरभंगा सहित पूरे मिथिलांचल में खुशी की लहर है। सामाजिक, चिकित्सा और बुद्धिजीवी वर्गों में इस उपलब्धि को अत्यंत सम्मान के साथ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और यह बताएगा कि छोटे शहरों और साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी विश्व मंच पर असाधारण पहचान बनाई जा सकती है।1