मां शारदा देवी प्रबंध समिति की व्यवस्थाएं बेपटरी, सफाई प्रभारी बदलते ही जगह-जगह लगे कचरे के ढेर सतना। धर्मनगरी मैहर में मां शारदा देवी प्रबंध समिति की स्वच्छता व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। जैसे ही सफाई विभाग की कमान नए प्रभारी अजय सनाढ्य के हाथों में सौंपी गई है, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी का अंबार नजर आने लगा है। व्यवस्थाओं पर उठे सवाल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मैहर में स्वच्छता को लेकर हमेशा विशेष जोर दिया जाता रहा है, लेकिन हालिया बदलाव के बाद तस्वीर इसके उलट दिख रही है। स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों का कहना है कि: नियमित सफाई का अभाव: डस्टबिन समय पर खाली नहीं किए जा रहे हैं। दुर्गंध से परेशानी: कचरे के ढेर जमा होने के कारण श्रद्धालुओं को मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन की लापरवाही: नए प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं कि आखिर जिम्मेदारी संभालते ही व्यवस्थाएं इतनी खराब कैसे हो गईं। भक्तों में आक्रोश दूर-दराज से आने वाले भक्तों का कहना है कि मां के दरबार में ऐसी गंदगी देखकर मन आहत होता है। प्रबंध समिति द्वारा लाखों रुपये सफाई पर खर्च किए जाते हैं, फिर भी धरातल पर परिणाम शून्य नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि सफाई विभाग के नए नेतृत्व और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा मंदिर की छवि को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रबंध समिति के उच्च अधिकारी इस बदहाली पर क्या संज्ञान लेते हैं।
मां शारदा देवी प्रबंध समिति की व्यवस्थाएं बेपटरी, सफाई प्रभारी बदलते ही जगह-जगह लगे कचरे के ढेर सतना। धर्मनगरी मैहर में मां शारदा देवी प्रबंध समिति की स्वच्छता व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। जैसे ही सफाई विभाग की कमान नए प्रभारी अजय सनाढ्य के हाथों में सौंपी गई है, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी का अंबार नजर आने लगा है। व्यवस्थाओं पर उठे सवाल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मैहर में स्वच्छता को लेकर हमेशा विशेष जोर दिया जाता रहा है, लेकिन हालिया बदलाव के बाद तस्वीर इसके उलट दिख रही है। स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों का कहना है कि: नियमित सफाई का अभाव: डस्टबिन समय पर खाली नहीं किए जा रहे हैं। दुर्गंध से परेशानी: कचरे के ढेर जमा होने के कारण श्रद्धालुओं को मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन की लापरवाही: नए प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं कि आखिर जिम्मेदारी संभालते ही व्यवस्थाएं इतनी खराब कैसे हो गईं। भक्तों में आक्रोश दूर-दराज से आने वाले भक्तों का कहना है कि मां के दरबार में ऐसी गंदगी देखकर मन आहत होता है। प्रबंध समिति द्वारा लाखों रुपये सफाई पर खर्च किए जाते हैं, फिर भी धरातल पर परिणाम शून्य नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि सफाई विभाग के नए नेतृत्व और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा मंदिर की छवि को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रबंध समिति के उच्च अधिकारी इस बदहाली पर क्या संज्ञान लेते हैं।
- सतना। धर्मनगरी मैहर में मां शारदा देवी प्रबंध समिति की स्वच्छता व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। जैसे ही सफाई विभाग की कमान नए प्रभारी अजय सनाढ्य के हाथों में सौंपी गई है, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी का अंबार नजर आने लगा है। व्यवस्थाओं पर उठे सवाल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मैहर में स्वच्छता को लेकर हमेशा विशेष जोर दिया जाता रहा है, लेकिन हालिया बदलाव के बाद तस्वीर इसके उलट दिख रही है। स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों का कहना है कि: नियमित सफाई का अभाव: डस्टबिन समय पर खाली नहीं किए जा रहे हैं। दुर्गंध से परेशानी: कचरे के ढेर जमा होने के कारण श्रद्धालुओं को मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन की लापरवाही: नए प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं कि आखिर जिम्मेदारी संभालते ही व्यवस्थाएं इतनी खराब कैसे हो गईं। भक्तों में आक्रोश दूर-दराज से आने वाले भक्तों का कहना है कि मां के दरबार में ऐसी गंदगी देखकर मन आहत होता है। प्रबंध समिति द्वारा लाखों रुपये सफाई पर खर्च किए जाते हैं, फिर भी धरातल पर परिणाम शून्य नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि सफाई विभाग के नए नेतृत्व और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा मंदिर की छवि को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रबंध समिति के उच्च अधिकारी इस बदहाली पर क्या संज्ञान लेते हैं।1
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- मैहर। मैहर–बरही रोड की बदहाल और गड्ढों से भरी सड़क के बावजूद सोनवारी टोल प्लाजा पर धड़ल्ले से टोल वसूली जारी है। सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है, लेकिन इसके बावजूद टोल की पूरी दर से वसूली की जा रही है। टोल प्लाजा पर अव्यवस्थाओं के कारण आए दिन लंबा जाम लग रहा है। यहां अभी भी पुरानी व्यवस्था के तहत केवल दो ही लाइनें संचालित हो रही हैं, जिससे बाइक, चार पहिया और भारी वाहन एक ही कतार में लगने को मजबूर हैं। टोल पर खड़े बड़े वाहनों की वजह से छोटे चार पहिया वाहन घंटों जाम में फंसे रहते हैं और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि टोल ठेकेदार द्वारा केवल वसूली को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि सड़क की मरम्मत और यातायात व्यवस्था सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टोल प्लाजा के पास किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। यहां तक कि मौके पर एम्बुलेंस की भी व्यवस्था नहीं बताई जा रही है। टोल में कार्यरत कर्मचारियों के पास भी कोई सुरक्षा किट या आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जो मानक तय किए गए हैं, उनके अनुरूप भी यहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इसके बावजूद टोल संचालन में मनमानी जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक रसूख के दम पर यह टोल प्लाजा मनमाने तरीके से संचालित किया जा रहा है और मेंटेनेंस के नाम पर केवल वसूली का खेल चल रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, टोल प्लाजा की व्यवस्थाओं की जांच हो और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।1