भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए ऐतिहासिक पल: सत्येंद्र सिसोदिया बने गांव के पहले विकास अधिकारी 1960 से 2026 तक का इंतजार हुआ खत्म, पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ में पहली बार गांव के अधिकारी को मिली विकास अधिकारी पद पर नियमित पदोन्नति पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भैंसरोड़गढ़ गांव के सत्येंद्र सिसोदिया को राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा विकास अधिकारी के पद पर नियमित रूप से पदोन्नत किए जाने के बाद गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसे भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ का गठन राजस्थान पंचायती राज व्यवस्था के प्रारंभिक दौर 1959-60 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1960 से 2026 तक के लंबे सफर में भैंसरोड़गढ़ गांव से कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस पद पर नियमित रूप से विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नत नहीं हुआ था। हालांकि, इस दौरान भैंसरोड़गढ़ गांव के कुछ अधिकारियों को समय-समय पर कार्य व्यवस्थार्थ विकास अधिकारी का दायित्व सौंपा गया। स्वयं सत्येंद्र सिसोदिया भी पूर्व में कई बार कार्य व्यवस्थार्थ विकास अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, लेकिन अब उन्हें पहली बार विकास अधिकारी के पद पर नियमित पदोन्नति मिली है। सरकारी नियमों के तहत मिली पदोन्नति राजस्थान सरकार के पंचायत राज विभाग, जयपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम, 2007 के नियम 26 के अंतर्गत गठित विभागीय समिति की अभिशंषा के आधार पर राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारियों को राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला (विकास अधिकारी), पे मैट्रिक्स लेवल 14 में पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति आदेश राजस्थान सरकार पंचायत राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉक्टर जोगाराम द्वारा जारी किए गए। गांव में खुशी की लहर सत्येंद्र सिसोदिया की विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति की खबर मिलते ही भैंसरोड़गढ़ गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों ने सिसोदिया को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। ग्रामीणों का कहना है कि भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए यह केवल एक अधिकारी की पदोन्नति नहीं, बल्कि गांव के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण है। गांव के किसी अधिकारी को विकास अधिकारी के पद पर नियमित पदोन्नति मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सत्येंद्र सिसोदिया की इस उपलब्धि से भैंसरोड़गढ़ गांव का नाम पंचायत समिति स्तर पर एक बार फिर गौरवान्वित हुआ है।
भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए ऐतिहासिक पल: सत्येंद्र सिसोदिया बने गांव के पहले विकास अधिकारी 1960 से 2026 तक का इंतजार हुआ खत्म, पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ में पहली बार गांव के अधिकारी को मिली विकास अधिकारी पद पर नियमित पदोन्नति पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भैंसरोड़गढ़ गांव के सत्येंद्र सिसोदिया को राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा विकास अधिकारी के पद पर नियमित रूप से पदोन्नत किए जाने के बाद गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसे भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ का गठन राजस्थान पंचायती राज व्यवस्था के प्रारंभिक दौर 1959-60 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1960 से 2026 तक के लंबे सफर में भैंसरोड़गढ़ गांव से कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस पद पर नियमित रूप से विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नत नहीं हुआ था। हालांकि, इस दौरान भैंसरोड़गढ़ गांव के कुछ अधिकारियों को समय-समय पर कार्य व्यवस्थार्थ विकास अधिकारी का दायित्व सौंपा गया। स्वयं सत्येंद्र सिसोदिया भी पूर्व में कई बार कार्य व्यवस्थार्थ विकास अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, लेकिन अब उन्हें पहली बार विकास अधिकारी के पद पर नियमित पदोन्नति मिली है। सरकारी नियमों के तहत मिली पदोन्नति राजस्थान सरकार के पंचायत राज विभाग, जयपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम, 2007 के नियम 26 के अंतर्गत गठित विभागीय समिति की अभिशंषा के आधार पर राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारियों को राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला (विकास अधिकारी), पे मैट्रिक्स लेवल 14 में पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति आदेश राजस्थान सरकार पंचायत राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉक्टर जोगाराम द्वारा जारी किए गए। गांव में खुशी की लहर सत्येंद्र सिसोदिया की विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति की खबर मिलते ही भैंसरोड़गढ़ गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों ने सिसोदिया को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। ग्रामीणों का कहना है कि भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए यह केवल एक अधिकारी की पदोन्नति नहीं, बल्कि गांव के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण है। गांव के किसी अधिकारी को विकास अधिकारी के पद पर नियमित पदोन्नति मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सत्येंद्र सिसोदिया की इस उपलब्धि से भैंसरोड़गढ़ गांव का नाम पंचायत समिति स्तर पर एक बार फिर गौरवान्वित हुआ है।
- भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए ऐतिहासिक पल: सत्येंद्र सिसोदिया बने गांव के पहले विकास अधिकारी 1960 से 2026 तक का इंतजार हुआ खत्म, पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ में पहली बार गांव के अधिकारी को मिली विकास अधिकारी पद पर नियमित पदोन्नति पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भैंसरोड़गढ़ गांव के सत्येंद्र सिसोदिया को राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा विकास अधिकारी के पद पर नियमित रूप से पदोन्नत किए जाने के बाद गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसे भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पंचायत समिति भैंसरोड़गढ़ का गठन राजस्थान पंचायती राज व्यवस्था के प्रारंभिक दौर 1959-60 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1960 से 2026 तक के लंबे सफर में भैंसरोड़गढ़ गांव से कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस पद पर नियमित रूप से विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नत नहीं हुआ था। हालांकि, इस दौरान भैंसरोड़गढ़ गांव के कुछ अधिकारियों को समय-समय पर कार्य व्यवस्थार्थ विकास अधिकारी का दायित्व सौंपा गया। स्वयं सत्येंद्र सिसोदिया भी पूर्व में कई बार कार्य व्यवस्थार्थ विकास अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, लेकिन अब उन्हें पहली बार विकास अधिकारी के पद पर नियमित पदोन्नति मिली है। सरकारी नियमों के तहत मिली पदोन्नति राजस्थान सरकार के पंचायत राज विभाग, जयपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम, 2007 के नियम 26 के अंतर्गत गठित विभागीय समिति की अभिशंषा के आधार पर राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारियों को राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला (विकास अधिकारी), पे मैट्रिक्स लेवल 14 में पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति आदेश राजस्थान सरकार पंचायत राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉक्टर जोगाराम द्वारा जारी किए गए। गांव में खुशी की लहर सत्येंद्र सिसोदिया की विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति की खबर मिलते ही भैंसरोड़गढ़ गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों ने सिसोदिया को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। ग्रामीणों का कहना है कि भैंसरोड़गढ़ गांव के लिए यह केवल एक अधिकारी की पदोन्नति नहीं, बल्कि गांव के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण है। गांव के किसी अधिकारी को विकास अधिकारी के पद पर नियमित पदोन्नति मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सत्येंद्र सिसोदिया की इस उपलब्धि से भैंसरोड़गढ़ गांव का नाम पंचायत समिति स्तर पर एक बार फिर गौरवान्वित हुआ है।1
- रावतभाटा। । स्पेशल रिपोर्ट। ।विरोध प्रदर्शन,,, मांग,,, संवैधानिक अधिकार,हक या साजिश , फिर राजनीतिक खेल, सरकारी और निजी संपत्तियों में आगजनी, लूटपाट, तोड़फोड़, निर्दोष की जान लेना मकसद, आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता, पुलिस ,मीडियाकर्मी को टारगेट कर पत्थर बाजी, पीड़ितों को मिलता केवल दर्द, हर पहलू को उजागर करती खबर, देखिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट,, संवाददाता मनीष सुखवाल,, जुड़े रहिए इंडिया टीवी राजस्थान के साथ, हर मुद्दों पर होगी बात। रावतभाटा। । स्पेशल रिपोर्ट। ।विरोध प्रदर्शन,,, मांग,,, संवैधानिक अधिकार,हक या साजिश , फिर राजनीतिक खेल, सरकारी और निजी संपत्तियों में आगजनी, लूटपाट, तोड़फोड़, निर्दोष की जान लेना मकसद, आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता, पुलिस ,मीडियाकर्मी को टारगेट कर पत्थर बाजी, पीड़ितों को मिलता केवल दर्द, हर पहलू को उजागर करती खबर, देखिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट,, संवाददाता मनीष सुखवाल,, जुड़े रहिए इंडिया टीवी राजस्थान के साथ, हर मुद्दों पर होगी बात।1
- प्रयागराज में राहुल गांधी का छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजित उत्तरप्रदेश सरकार की तमाम तिकड़मों के बावजूद आज प्रयागराज में राहुल गांधी का छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजित हुआ: सरकार ने पहले कार्यक्रम की परमिशन दे दी, फिर ऐन टाइम पर मना कर दिया, लेकिन जेन जी की नाराज़गी से डरकर सरकार ने वापस परमिशन दे दी: इस सारी कवायद में सरकार ने अपने आपको हास्यास्पद तो बना ही लिया, इस बात को भी उजागर कर दिया कि ये सरकार अंदर से कितना डरी हुई है: कोटा और देहरादून के बाद प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को मिली जबरदस्त कामयाबी से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है कि युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है, सांप्रदायिक ऐजेंडा नहीं...1
- कोटा, राजस्थान से बड़ी खबर कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत निर्माण और विकास के नए दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में देश को आर्किटेक्ट्स के अनुभव, कौशल और रचनात्मक सोच की आवश्यकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वास्तुकला के लिए चुनौती के साथ बड़ा अवसर भी है, लेकिन तकनीक के साथ मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं का समावेश जरूरी है, जिसे आर्किटेक्ट अपने अनुभव और विचारों से प्रभावी बना सकते हैं। बिरला शनिवार को दो दिवसीय ‘नेक्ससंगम-2026’ के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 200-300 वर्ष पुराने भारतीय शहर और भवन आज भी उत्कृष्ट वास्तुकला और सुनियोजित नगर निर्माण के उदाहरण हैं। जल निकासी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इनकी संरचना से आधुनिक आर्किटेक्चर को सीखना चाहिए। उन्होंने बताया कि 2027 में संसद के पुराने भवन के निर्माण के 100 वर्ष पूरे होंगे। सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर्स और डिजाइनर्स ने भाग लिया। निरुत्तम सिंह राठौड़, पीयूष लाहोटी, मनीष जैन, जे.के. शर्मा, सौरभ शर्मा, नरेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. अर्चना राठौड़, कपिल सेठिया, राजेश गुप्ता, ब्रजेश मुक्तावत, राजीव खन्ना, सवीना खन्ना, मनीषा मुक्तावत, पराग जैन, राजविंदर कौर, सचिन शर्मा, दीपिका शक्तावत, श्रद्धा लाहोटी, संदीप दंडवते, रीमा गुप्ता, कपिल तिवारी, विकास जैन, पीयूष पारेता, शनवाज खान, अजीज बोहरा, मनीषा शिवनानी, तौसीफ अंसारी और अंशिका गोयल सहित विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में विचार रखे। इस अवसर पर गौरव एवं सौरभ गर्ग द्वारा निर्मित 8×5 इंच का 250 ग्राम कोटा स्टोन स्मृति चिह्न, जिस पर जगमंदिर की छवि अंकित थी, लोकसभा अध्यक्ष को भेंट किया गया। कुशल लाहोटी, राजेश गुप्ता, संदीप, भुवनेश लाहोटी और जे.के. शर्मा सहित अन्य लोगों ने स्मृति चिह्न भेंट किया।1
- वेतन विसंगति की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पर आशा सहयोगिनियों का धरना, छलका दर्द कोटा, 8 अगस्त। वेतन विसंगति सहित विभिन्न मांगों को लेकर आशा सहयोगिनी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय, कोटा पर धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंची आशा सहयोगिनियों ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मांगों के समाधान की आवाज बुलंद की। धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां पूरी ईमानदारी से निभा रही हैं, लेकिन उनकी मेहनत के अनुरूप मानदेय और आर्थिक सम्मान नहीं मिल पा रहा है। कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है और लगातार बढ़ती महंगाई ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। प्रदर्शन के दौरान कई आशा सहयोगिनियों का दर्द भी सामने आया। उन्होंने कहा कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के स्वास्थ्य, टीकाकरण और विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आशा सहयोगिनियों ने सरकार से वेतन विसंगति दूर करने, मानदेय में उचित वृद्धि करने तथा उनकी अन्य लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की। प्रदर्शन के दौरान आशा सहयोगिनियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग की जमीनी कड़ी हैं, इसलिए सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सम्मानजनक मानदेय और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। Media House Rajasthan1
- स्पीकर ओम बिरला ने बूंदी में एक करोड़ के लगभग विकास के कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया1
- कोटा में कमजोर मानसून : गड़े भैरूजी की पूजा कर बरसात की कामना, नगर निगम ने करवाई विधि-विधान से पूजा कोटा: पूरे हाड़ौती संभाग में इस बार मानसून कमजोर रहा है और औसत से काफी कम बारिश हुई है. अब तक कोटा में केवल 200 मिलीमीटर के आसपास वर्षा दर्ज की गई है. ऐसे में कोटा में गड़े भैरूजी की पूजा की मांग उठने लगी थी. इसी को देखते हुए नगर निगम ने बुधवार को पाटनपोल स्थित गड़े भैरूजी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करवाई. भाजपा नेता एवं पूर्व पार्षद महेश गौतम (दिल्ली) ने कहा कि अच्छी बरसात की कामना के लिए यह पूजा आयोजित की गई. इसके लिए मंगलवार को खुदाई करके भैरूजी को बाहर निकाला गया और मंदिर की साफ-सफाई करवाई गई. बैरिकेड लगाकर सुरक्षा व्यवस्था भी की गई. इसके बाद हाड़ौती में अच्छी बरसात नहीं होने से परेशान किसानों व आमजन1
- कॉमनवेल्थ की गोल्डन गर्ल दो दिन बाद पहुंचीं कोटा, मां को मेडल पहनाकर भावुक हो गईं, जयपुर से लेकर कोटा तक हुआ भव्य स्वागत कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश और कोटा का नाम रोशन करने वाली अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज अरुंधति चौधरी का गुरुवार को गृहनगर कोटा पहुंची। जयपुर एयरपोर्ट से कोटा तक करीब 250 किलोमीटर के सफर में उन्हें पहुंचने में दो दिन लग गए।1