लिखित आदेश पर भारी पड़ा मौखिक निर्देश? पोड़ी उपरोड़ा शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा (सुघर गांव)। शिक्षा विभाग में नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय ने 15 जुलाई 2026 को सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की संलग्नता समाप्त कर उन्हें एक सप्ताह के भीतर मूल पदस्थापना पर लौटने के निर्देश दिए थे। इसके विपरीत, पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 28 और 29 जुलाई को तीन नए संलग्नीकरण आदेश जारी कर दिए गए। आदेशों में कार्यालय में कर्मचारियों की कमी, निलंबन, मातृत्व अवकाश और अन्य कार्यालय में पदस्थापना को आधार बनाया गया है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी के मौखिक निर्देश का भी उल्लेख किया गया है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या मौखिक निर्देश, संचालनालय के लिखित आदेश से ऊपर माने जा सकते हैं। शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि संचालनालय के निर्देश प्रभावी थे तो नए संलग्नीकरण की प्रशासनिक और कानूनी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। मामले में यह भी चर्चा है कि यदि भविष्य में किसी कर्मचारी पर नियम उल्लंघन की कार्रवाई होती है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी। फिलहाल संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन और लोक शिक्षण संचालनालय के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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