logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

तिरहुत प्रमंडल में बाल संरक्षण को लेकर प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजितसमग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026 तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने की। इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है। प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसमें बताया गया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल रेस्क्यू या प्रोडक्शन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी फॉलो-अप, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्वास योजना, सही दस्तावेजीकरण, केस ट्रैकिंग, नियमित समीक्षा और बच्चे केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी। इस अवसर पर उदयन केयर से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र पंडित ने फैमिली बेस्ड अल्टरनेटिव केयर एवं आफ्टर केयर पर महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, संस्थागत अभिसरण, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट, समयबद्ध हस्तक्षेप, वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर तथा जमीनी स्तर तक सक्रिय समन्वय अनिवार्य है।तिरहुत प्रमंडल द्वारा आयोजित यह प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम राज्य में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसे एक प्रेरक एवं अनुकरणीय मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल तिरहुत प्रमंडल बल्कि पूरे राज्य में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

2 hrs ago
user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
2 hrs ago

तिरहुत प्रमंडल में बाल संरक्षण को लेकर प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजितसमग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026 तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने की। इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं

777251a4-813f-40b6-a212-2901b67e77f5

पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है। प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसमें बताया गया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल रेस्क्यू या प्रोडक्शन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी फॉलो-अप, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्वास योजना, सही दस्तावेजीकरण, केस ट्रैकिंग, नियमित समीक्षा और बच्चे केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी। इस अवसर पर उदयन केयर से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र पंडित ने फैमिली बेस्ड अल्टरनेटिव केयर एवं आफ्टर केयर पर महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, संस्थागत अभिसरण, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट, समयबद्ध हस्तक्षेप, वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर तथा जमीनी स्तर तक सक्रिय समन्वय अनिवार्य है।तिरहुत प्रमंडल द्वारा आयोजित यह प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम राज्य में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसे एक प्रेरक एवं अनुकरणीय मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल तिरहुत प्रमंडल बल्कि पूरे राज्य में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

More news from बिहार and nearby areas
  • (मनीष साह अनुमंडल ब्यूरो चीफ सन ऑफ इंडिया दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार शाखा मोतिहारी पूर्वी चंपारण) मोतिहारी 11 मार्च 2026 मोतिहारी:-जितेन्द्र तिवारी नेता आपन माटी आपन पार्टी स्थानः सुगौली ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया है कि पूर्वी चंपारण जिले में कार्यरत पुलिस अधीक्षक पूर्वी चंपारण मोतिहारी एवं जिला अधिकारी मोतिहारी के कुछ कारनामे मीडिया के माध्यम से जनता के बीच रखने का कार्य किया है। जितेंद्र तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए लिखा है कि स्वर्ण प्रभात Vs दागी अफसर और एक रहस्यमयी डील।बिहार में शीर्ष अधिकारियों (SP और DM) का महाघोटालाःजनता के पैसों की लूट और सरकारी सिस्टम का खुला दुरुपयोग बिहार में तैनात दो शीर्ष अधिकारियों-IPS स्वर्ण प्रभात (वर्तमान SP, पूर्वी चंपारण) और IAS प्रतिभा रानी (वर्तमान DM, शिवहर)-से जुड़े एक बेहद गंभीर और ₹2.35 करोड़ से अधिक के संदिग्ध वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। यह मामला सिर्फ एक विभागीय भ्रष्टाचार का नहीं है,बल्कि इसका सीधा असर आम जनता के पैसों, बैंकिंग सिस्टम और न्याय व्यवस्था पर पड़ता है।जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:फर्जी भू-माफिया लिस्ट के नाम पर करोड़ों की वसूलीः वर्दी की आड़ में वसूली का नया धंधा चल रहा है। पहले लोगों को फर्जी 'भू-माफिया' लिस्ट में डालकर डराया जाता है, और फिर करोड़ों की काली कमाई (लूट) करने के बाद रातों-रात उनका नाम उस लिस्ट से काट दिया जाता है। 'आपन माटी आपन पार्टी' सीधा सवाल पूछती है- अगर वो लोग भू-माफिया नहीं थे, तो उनका नाम लिस्ट में जोड़ा क्यों गया? और अगर वे सच में माफिया थे, तो किस 'रहस्यमयी डील' के तहत उनका नाम काट दिया गया।तमगे की भूख और भ्रामक पीआर (PR) का खेलः अपनी नाकामी और काले कारनामों को छिपाने के लिए छोटी-छोटी घटनाओं को भी पीआर स्टंट के जरिए बड़ा और भ्रामक बनाकर पेश करने का इन्हें चस्का लगा हुआ है। सिर्फ सरकार से तमगा (Medal) बटोरने और मीडिया में अपनी झूठी छवि चमकाने के लिए ये रोज़ जनता की आँखों में धूल झोंक रहे हैं।ज़मीन की नाप और कीमत में बड़ा फर्जीवाड़ा (3) क‌ट्ठा बनाम 3000 Sq Ft): जिस ज़मीन (फतुहा प्लॉट) को दागी अफसर आदित्य कुमार अपने संपत्ति विवरण (IPR) में 4,084 Sq Ft (लगभग 3 कट्ठा) बता रहे थे, उसी जमीन को 'साहब' (IPS स्वर्ण प्रभात) ने अपने । PR में रातों-रात 3,000 Sq Ft का कर दिया। बीच का 1,084 Sq Ft कहाँ गायब हो गया? इतना ही नहीं, बिना किसी भौतिक विकास के उस ज़मीन की कीमत को दोगुना (₹20 लाख की रियल वैल्यू से ₹40 लाख) दिखाकर 27 जुलाई 2022 को आदित्य कुमार को रहस्यमयी तरीके से पेमेंट किया गया। यह साफ तौर पर ब्लैक मनी को व्हाइट करने (Money Laundering) का खुला खेल है। ज़मीन की रसीद और पोर्टल पर मालिकाना हक का बड़ा फर्जीवाड़ाः बिहार भूमि पोर्टल (जमाबंदी पंजी) के अनुसार, फतुहा वाले विवादित प्लॉट (खाता 73, खेसरा 456) का मालिकाना हक 'आइ सी एस को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसिसिटी लिमिटेड पटना (पिता-संजय कुमार) के नाम पर दर्ज है। दूसरी तरफ दागी IPS आदित्य कुमार ने अपने संपत्ति विवरण (IPR) में इसे अपना बताया था, और अब IPS स्वर्ण प्रभात इसे अपनी संपत्ति बता रहे हैं। एक ही ज़मीन के 3 अलग-अलग मालिक कैसे हो सकते हैं? आम जनता अपनी ज़मीन के कागज़ात ठीक कराने में पिस जाती है, लेकिन यहाँ शीर्ष अधिकारी बिना कोऑपरेटिव बोर्ड की अनुमति के सोसाइटी की ज़मीन का अवैध ट्रांसफर कर रहे हैं।सार्वजनिक धन (Public Money) का बैंक फ्रॉडः IPS स्वर्ण प्रभात ने फतुहा में इसी 'काल्पनिक प्लॉट पर किसी बैंक से ₹36 लाख का लोन लिया है, लोन देने वाले का कोई विवरण नहीं दिया गया और ये पैसा आदित्य कुमार के SBI Ac-20068455190 में ट्रांसफर किया गया जिसका बिहार भूमि पोर्टल पर कुल रकबा (Area) शून्य (0) है। बिना रजिस्ट्रेशन और जीरो एरिया वाली संपत्ति पर लोन मिलना RBI के नियमों का सीधा उल्लंघन है और यह आम जनता के बैंकिंग सिस्टम के साथ एक बड़ा धोखा है।जब SUV टीम ने रेड डाली तब इसी प्लॉट का नाम खुला ये एक बेनामी संपत्ति थीं और इसकी जांच में साहब का नाम तक नहीं आया? क्यों?भ्रष्ट पुलिस सिंडिकेटः यह ₹36 लाख का लोन सीधे दागी अफसर आदित्य कुमार के बैंक खाते में गया था। आदित्य कुमार वही IPS अधिकारी हैं जिन पर शराब माफियाओं को बचाने के आरोप में FIR (33/2022) दर्ज हुई थी। FIR दर्ज होने से मात्र 79 दिन पहले दोगुने दाम (₹40 लाख) में यह लेन-देन हुआ था।सरकारी डेटा और पोर्टल से खिलवाडः आम जनता को जमीन के एक छोटे से म्यूटेशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि शीर्ष अधिकारियों ने लगातार 4 साल (2022 से 2026) से एक संपत्ति को अपने संपत्ति विवरण (IPR) में 'Under Process' दिखा रखा है। इस संपत्ति की कोई सेल डीड या म्यूटेशन बिहार भूमि पोर्टल पर मौजूद नहीं है।अघोषित वित्तीय निवेश और ₹1.55 करोड़ का गायब होनाः नियम के अनुसार ₹50,000 से ऊपर का हर निवेश IPR में घोषित करना अनिवार्य है। स्वर्ण प्रभात सार्वजनिक तौर पर 'Smallcap Investor' होने का दावा करते हैं और शेयर बाजार (जैसे Burger King/JTLIND) में ₹155 प्रति शेयर के हिसाब से निवेश की बातें स्वीकार करते हैं, लेकिन IPR में यह जानकारी पूरी तरह से गायब है। इसके अलावा, वर्ष 2021 के IPR में घोषित ₹1.55 करोड़ की संपत्तियां 2022 के IPR से अचानक बिना किसी हिसाब के गायब हो गई।सिस्टम का दोहरा मापदंड (Hypocrisy): शिवहर की मौजूदा DM IAS प्रतिभा रानी ने जनवरी 2026 में एक राजस्व अधिकारी को जमीन के म्यूटेशन में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड किया। दूसरी ओर, वह खुद पिछले 5 वर्षों (2020-2024) से अपने IPR में अपने वेतन (Pay) का कॉलम खाली छोड़ रही हैं और 6 साल से अपनी ₹50 लाख की संपत्ति (गुंटूर, AP) से शून्य (NIL) आय दिखा रही हैं।यह दस्तावेजी साक्ष्य साबित करते हैं कि भ्रष्ट अधिकारी 'Dual Jurisdiction' (बिहार और आंध्र प्रदेश कैडर) की आड में अपने रसूख का इस्तेमाल कर व्यवस्था को धोखा दे रहे हैं। 'आपन माटी आपन पार्टी' इस मामले की तुरंत ED, CBI और SVU दद्वारा निष्पक्ष जांच की मांग करती है।
    2
    (मनीष साह अनुमंडल ब्यूरो चीफ सन ऑफ इंडिया दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार शाखा मोतिहारी पूर्वी चंपारण)
मोतिहारी 11 मार्च 2026
मोतिहारी:-जितेन्द्र तिवारी नेता आपन माटी आपन पार्टी स्थानः सुगौली ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया है कि पूर्वी चंपारण जिले में कार्यरत पुलिस अधीक्षक पूर्वी चंपारण मोतिहारी एवं जिला अधिकारी मोतिहारी के कुछ कारनामे मीडिया के माध्यम से जनता के बीच रखने का कार्य किया है।
जितेंद्र तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए लिखा है कि स्वर्ण प्रभात Vs दागी अफसर और एक रहस्यमयी डील।बिहार में शीर्ष अधिकारियों (SP और DM) का महाघोटालाःजनता के पैसों की लूट और सरकारी सिस्टम का खुला दुरुपयोग बिहार में तैनात दो शीर्ष अधिकारियों-IPS स्वर्ण प्रभात (वर्तमान SP, पूर्वी चंपारण) और IAS प्रतिभा रानी (वर्तमान DM, शिवहर)-से जुड़े एक बेहद गंभीर और ₹2.35 करोड़ से अधिक के संदिग्ध वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। यह मामला सिर्फ एक विभागीय भ्रष्टाचार का नहीं है,बल्कि इसका सीधा असर आम जनता के पैसों, बैंकिंग सिस्टम और न्याय व्यवस्था पर पड़ता है।जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:फर्जी भू-माफिया लिस्ट के नाम पर करोड़ों की वसूलीः वर्दी की आड़ में वसूली का नया धंधा चल रहा है। पहले लोगों को फर्जी 'भू-माफिया' लिस्ट में डालकर डराया जाता है, और फिर करोड़ों की काली कमाई (लूट) करने के बाद रातों-रात उनका नाम उस लिस्ट से काट दिया जाता है। 'आपन माटी आपन पार्टी' सीधा सवाल पूछती है- अगर वो लोग भू-माफिया नहीं थे, तो उनका नाम लिस्ट में जोड़ा क्यों गया? और अगर वे सच में माफिया थे, तो किस 'रहस्यमयी डील' के तहत उनका नाम काट दिया गया।तमगे की भूख और भ्रामक पीआर (PR) का खेलः अपनी नाकामी और काले कारनामों को छिपाने के लिए छोटी-छोटी घटनाओं को भी पीआर स्टंट के जरिए बड़ा और भ्रामक बनाकर पेश करने का इन्हें चस्का लगा हुआ है। सिर्फ सरकार से तमगा (Medal) बटोरने और मीडिया में अपनी झूठी छवि चमकाने के लिए ये रोज़ जनता की आँखों में धूल झोंक रहे हैं।ज़मीन की नाप और कीमत में बड़ा फर्जीवाड़ा (3) क‌ट्ठा बनाम 3000 Sq Ft): जिस ज़मीन (फतुहा प्लॉट) को दागी अफसर आदित्य कुमार अपने संपत्ति विवरण (IPR) में 4,084 Sq Ft (लगभग 3 कट्ठा) बता रहे थे, उसी जमीन को 'साहब' (IPS स्वर्ण प्रभात) ने अपने । PR में रातों-रात 3,000 Sq Ft का कर दिया। बीच का 1,084 Sq Ft कहाँ गायब हो गया? इतना ही नहीं, बिना किसी भौतिक विकास के उस ज़मीन की कीमत को दोगुना (₹20 लाख की रियल वैल्यू से ₹40 लाख) दिखाकर 27 जुलाई 2022 को आदित्य कुमार को रहस्यमयी तरीके से पेमेंट किया गया। यह साफ तौर पर ब्लैक मनी को व्हाइट करने (Money Laundering) का खुला खेल है।
ज़मीन की रसीद और पोर्टल पर मालिकाना हक का बड़ा फर्जीवाड़ाः बिहार भूमि पोर्टल (जमाबंदी पंजी) के अनुसार, फतुहा वाले विवादित प्लॉट (खाता 73, खेसरा 456) का मालिकाना हक 'आइ सी एस को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसिसिटी लिमिटेड पटना (पिता-संजय कुमार) के नाम पर दर्ज है। दूसरी तरफ दागी IPS आदित्य कुमार ने अपने संपत्ति विवरण (IPR) में इसे अपना बताया था, और अब IPS स्वर्ण प्रभात इसे अपनी संपत्ति बता रहे हैं। एक ही ज़मीन के 3 अलग-अलग मालिक कैसे हो सकते हैं? आम जनता अपनी ज़मीन के कागज़ात ठीक कराने में पिस जाती है, लेकिन यहाँ शीर्ष अधिकारी बिना कोऑपरेटिव बोर्ड की अनुमति के सोसाइटी की ज़मीन का अवैध ट्रांसफर कर रहे हैं।सार्वजनिक धन (Public Money) का बैंक फ्रॉडः IPS स्वर्ण प्रभात ने फतुहा में इसी 'काल्पनिक प्लॉट पर किसी बैंक से ₹36 लाख का लोन लिया है, लोन देने वाले का कोई विवरण नहीं दिया गया और ये पैसा आदित्य कुमार के SBI Ac-20068455190 में ट्रांसफर किया गया जिसका बिहार भूमि पोर्टल पर कुल रकबा (Area) शून्य (0) है। बिना रजिस्ट्रेशन और जीरो एरिया वाली संपत्ति पर लोन मिलना RBI के नियमों का सीधा उल्लंघन है और यह आम जनता के बैंकिंग सिस्टम के साथ एक बड़ा धोखा है।जब SUV टीम ने रेड डाली तब इसी प्लॉट का नाम खुला ये एक बेनामी संपत्ति थीं और इसकी जांच में साहब का नाम तक नहीं आया? क्यों?भ्रष्ट पुलिस सिंडिकेटः यह ₹36 लाख का लोन सीधे दागी अफसर आदित्य कुमार के बैंक खाते में गया था। आदित्य कुमार वही IPS अधिकारी हैं जिन पर शराब माफियाओं को बचाने के आरोप में FIR (33/2022) दर्ज हुई थी। FIR दर्ज होने से मात्र 79 दिन पहले दोगुने दाम (₹40 लाख) में यह लेन-देन हुआ था।सरकारी डेटा और पोर्टल से खिलवाडः आम जनता को जमीन के एक छोटे से म्यूटेशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि शीर्ष अधिकारियों ने लगातार 4 साल (2022 से 2026) से एक संपत्ति को अपने संपत्ति विवरण (IPR) में 'Under Process' दिखा रखा है। इस संपत्ति की कोई सेल डीड या म्यूटेशन बिहार भूमि पोर्टल पर मौजूद नहीं है।अघोषित वित्तीय निवेश और ₹1.55 करोड़ का गायब होनाः नियम के अनुसार ₹50,000 से ऊपर का हर निवेश IPR में घोषित करना अनिवार्य है। स्वर्ण प्रभात सार्वजनिक तौर पर 'Smallcap Investor' होने का दावा करते हैं और शेयर बाजार (जैसे Burger King/JTLIND) में ₹155 प्रति शेयर के हिसाब से निवेश की बातें स्वीकार करते हैं, लेकिन IPR में यह जानकारी पूरी तरह से गायब है। इसके अलावा, वर्ष 2021 के IPR में घोषित ₹1.55 करोड़ की संपत्तियां 2022 के IPR से अचानक बिना किसी हिसाब के गायब हो गई।सिस्टम का दोहरा मापदंड (Hypocrisy): शिवहर की मौजूदा DM IAS प्रतिभा रानी ने जनवरी 2026 में एक राजस्व अधिकारी को जमीन के म्यूटेशन में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड किया। दूसरी ओर, वह खुद पिछले 5 वर्षों (2020-2024) से अपने IPR में अपने वेतन (Pay) का कॉलम खाली छोड़ रही हैं और 6 साल से अपनी ₹50 लाख की संपत्ति (गुंटूर, AP) से शून्य (NIL) आय दिखा रही हैं।यह दस्तावेजी साक्ष्य साबित करते हैं कि भ्रष्ट अधिकारी 'Dual Jurisdiction' (बिहार और आंध्र प्रदेश कैडर) की आड में अपने रसूख का इस्तेमाल कर व्यवस्था को धोखा दे रहे हैं। 'आपन माटी आपन पार्टी' इस मामले की तुरंत ED, CBI और SVU दद्वारा निष्पक्ष जांच की मांग करती है।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समृद्धि यात्रा के तहत अररिया पहुंचे, इस दौरान उन्होंने अररिया जिले को बड़ी विकास योजनाओं की सौगात दी,
    1
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समृद्धि यात्रा के तहत अररिया पहुंचे, इस दौरान उन्होंने अररिया जिले को बड़ी विकास योजनाओं की सौगात दी,
    user_News Granth
    News Granth
    चकिया (पिपरा), पूर्वी चंपारण, बिहार•
    9 hrs ago
  • चकिया के गांधी मैदान में हो रही महात्मा गांधी ऑल इंडिया टूर्नामेंट्स सीजन 2 2026 का आज चौथे दिन है बिहार में टीम कोलकाता और उत्तराखंड के बीच दोनों पक्ष मैदान में उतरे।
    1
    चकिया के गांधी मैदान में हो रही महात्मा गांधी ऑल इंडिया टूर्नामेंट्स सीजन 2 2026 का आज चौथे दिन है बिहार में टीम कोलकाता और उत्तराखंड के बीच दोनों पक्ष मैदान में उतरे।
    user_Prabhat Ranjan Ranjan
    Prabhat Ranjan Ranjan
    मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    9 hrs ago
  • Post by Talk On Chair
    1
    Post by Talk On Chair
    user_Talk On Chair
    Talk On Chair
    Media company मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    12 hrs ago
  • Post by Vishwanath Sahni
    1
    Post by Vishwanath Sahni
    user_Vishwanath Sahni
    Vishwanath Sahni
    Nurse Madhuban, Purbi Champaran•
    18 hrs ago
  • यह घटना हरसिद्धि थाने का है जहां पर पुलिस थाने में जाकर आवेदन देते समय वीडियो बनाने के जून में ऊपर केस करके #vmjlivenews #breakingnews #news #vmjlivenews #breakingnews
    1
    यह घटना हरसिद्धि थाने का है जहां पर पुलिस थाने में जाकर आवेदन देते समय वीडियो बनाने के जून में ऊपर केस करके
#vmjlivenews #breakingnews #news #vmjlivenews #breakingnews
    user_RAJA KUMAR
    RAJA KUMAR
    पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    17 hrs ago
  • Post by Santosh kumar
    1
    Post by Santosh kumar
    user_Santosh kumar
    Santosh kumar
    Farmer मीनापुर, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    18 hrs ago
  • (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026 तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने की। इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है। प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसमें बताया गया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल रेस्क्यू या प्रोडक्शन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी फॉलो-अप, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्वास योजना, सही दस्तावेजीकरण, केस ट्रैकिंग, नियमित समीक्षा और बच्चे केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी। इस अवसर पर उदयन केयर से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र पंडित ने फैमिली बेस्ड अल्टरनेटिव केयर एवं आफ्टर केयर पर महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, संस्थागत अभिसरण, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट, समयबद्ध हस्तक्षेप, वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर तथा जमीनी स्तर तक सक्रिय समन्वय अनिवार्य है।तिरहुत प्रमंडल द्वारा आयोजित यह प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम राज्य में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसे एक प्रेरक एवं अनुकरणीय मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल तिरहुत प्रमंडल बल्कि पूरे राज्य में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
    2
    (जयचंद्र कुमार राज्य सचिव बिहार दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) 
मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026
तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समग्र एवं हॉलिस्टिक चाइल्ड प्रोटेक्शन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने की। इस अवसर पर तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण—के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।यह कार्यक्रम विशेष रूप से मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य विधिक एवं नीतिगत प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच साझा समझ विकसित करना, उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना, समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय—सभी की साझा जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार का प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और तिरहुत प्रमंडल राज्य का पहला प्रमंडल है जिसने समग्र बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की पहल की है। उन्होंने इसे एक अनुकरणीय प्रयास बताते हुए कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बाल संरक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने उपस्थित सभी जिलों के अधिकारियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है।
प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनमें बचाव (रेस्क्यू), प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर डीआईजी तिरहुत रेंज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
कार्यक्रम में यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ अजय कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।कार्यशाला के दौरान पुनर्वास प्रक्रिया तथा गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट पर भी महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसमें बताया गया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल रेस्क्यू या प्रोडक्शन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी फॉलो-अप, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्वास योजना, सही दस्तावेजीकरण, केस ट्रैकिंग, नियमित समीक्षा और बच्चे केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी।
इस अवसर पर उदयन केयर से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र पंडित ने फैमिली बेस्ड अल्टरनेटिव केयर एवं आफ्टर केयर पर महत्वपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, संस्थागत अभिसरण, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट, समयबद्ध हस्तक्षेप, वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर तथा जमीनी स्तर तक सक्रिय समन्वय अनिवार्य है।तिरहुत प्रमंडल द्वारा आयोजित यह प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम राज्य में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसे एक प्रेरक एवं अनुकरणीय मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से न केवल तिरहुत प्रमंडल बल्कि पूरे राज्य में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    2 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.