फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, जो कि एक ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक, पूर्व कार्यालय अधीक्षक नगर पालिका परिषद मोदीनगर और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण समाज एनसीआर के मीडिया प्रभारी हैं, ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उनके अनुसार, बचपन में जिन हाथों ने सहारा दिया, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब थकना उनका हक है। पंडित जी के इन वचनों को 'बिल्कुल सत्य' बताते हुए, सनातन धर्म के सार पर प्रकाश डाला गया कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'पितरः प्रथमे देवता:', यानी पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान मानी गई है। यह भी रेखांकित किया गया कि पंडित जी मोदीनगर से अखिल भारतवर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कार्य को सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया। पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ का यह संदेश उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने 'अपना आंगन' बड़ा करने की चाह में 'पिता का आंगन' छोटा कर दिया। इस प्रेरणादायी संदेश के साथ 'पितृदेवो भवः' का भाव व्यक्त किया गया और पंडित जी के सेवा भाव के सदा अक्षुण्ण रहने की कामना की गई।
फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, जो कि एक ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक, पूर्व कार्यालय अधीक्षक नगर पालिका परिषद मोदीनगर और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण समाज एनसीआर के मीडिया प्रभारी हैं, ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उनके अनुसार, बचपन में जिन हाथों ने सहारा दिया, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब थकना उनका हक है। पंडित जी के इन वचनों को 'बिल्कुल सत्य' बताते हुए, सनातन धर्म के सार पर प्रकाश डाला गया कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'पितरः प्रथमे देवता:', यानी पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान मानी गई है। यह भी रेखांकित किया गया कि पंडित जी मोदीनगर से अखिल भारतवर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कार्य को सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया। पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ का यह संदेश उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने 'अपना आंगन' बड़ा करने की चाह में 'पिता का आंगन' छोटा कर दिया। इस प्रेरणादायी संदेश के साथ 'पितृदेवो भवः' का भाव व्यक्त किया गया और पंडित जी के सेवा भाव के सदा अक्षुण्ण रहने की कामना की गई।
- एक सकारात्मक संदेश में बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति को बहुत कम समय में तेजी से प्रगति हासिल होगी। इस संदेश में त्वरित उन्नति और सफलता की बात कही गई है।1
- फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, जो कि एक ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक, पूर्व कार्यालय अधीक्षक नगर पालिका परिषद मोदीनगर और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण समाज एनसीआर के मीडिया प्रभारी हैं, ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उनके अनुसार, बचपन में जिन हाथों ने सहारा दिया, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब थकना उनका हक है। पंडित जी के इन वचनों को 'बिल्कुल सत्य' बताते हुए, सनातन धर्म के सार पर प्रकाश डाला गया कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'पितरः प्रथमे देवता:', यानी पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान मानी गई है। यह भी रेखांकित किया गया कि पंडित जी मोदीनगर से अखिल भारतवर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कार्य को सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया। पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ का यह संदेश उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने 'अपना आंगन' बड़ा करने की चाह में 'पिता का आंगन' छोटा कर दिया। इस प्रेरणादायी संदेश के साथ 'पितृदेवो भवः' का भाव व्यक्त किया गया और पंडित जी के सेवा भाव के सदा अक्षुण्ण रहने की कामना की गई।1
- भारत देश से अंधविश्वास की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आते रहते हैं। इसी कड़ी में अंधविश्वास से जुड़ा एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी सटीक जगह पता नहीं चल पाई है। इस वीडियो को लेकर बताया जा रहा है कि आज के समय में भी देश में अंधविश्वास अपने चरम पर है। लोग ढोंगी बाबाओं के चक्कर में फंसकर बर्बाद हो चुके हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। यह वायरल वीडियो देश में अंधविश्वास की इस बढ़ती प्रवृत्ति को एक बार फिर उजागर करता है, जिस पर लोगों से अपनी राय मांगी गई है।1
- मेरठ के बुढ़ाना गेट क्षेत्र में मोहर्रम की पाँचवीं तारीख के अवसर पर एक पारंपरिक जुलूस पूरी अकीदत और अनुशासन के साथ निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल हुए, जिन्होंने नोहाख्वानी और मातम के ज़रिए हज़रत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस के पूरे मार्ग पर एक गमगीन माहौल बना रहा, जिसके बीच अमन, इंसाफ और इंसानियत का संदेश लगातार गूंजता रहा। इस धार्मिक आयोजन के दौरान सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। हिंदू समाज के लोगों ने विभिन्न स्थानों पर अज़ादारों और राहगीरों के लिए रूह अफ़ज़ा और शरबत का वितरण कर उनकी सेवा की। इस पहल को स्थानीय लोगों ने खूब सराहा, जिसने गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक बेहतरीन तस्वीर पेश की। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में हिंदू, सिख और सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की। कई उपस्थित लोगों ने जुलजिनाह (ज़ुलजनाह) के साथ तस्वीरें खिंचवाकर आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उपस्थित लोगों ने इस अवसर पर कहा कि मोहर्रम की सीख हमें इंसाफ, त्याग और मानवता के उच्च मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है। बुढ़ाना गेट से निकला यह जुलूस धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का भी एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।1
- हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर में, भारतीय किसान यूनियन (लोकहित) के राष्ट्रीय प्रवक्ता, लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता और 'किसान संसद' के राष्ट्रीय संयोजक हरीश हूण ने किसानों के अधिकारों, कानून व्यवस्था, क्षेत्रीय सम्मान तथा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गढ़मुक्तेश्वर का नेतृत्व स्थानीय बेटा-बेटी के हाथों में ही होना चाहिए। हरीश हूण ने दोहराया कि उनका जीवन किसानों की लड़ाई को समर्पित है। वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दिलाने, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के बछलोता गाँव में एक वर्षों पुराने मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान 24 जून 2026 को पंडितों द्वारा संपन्न होगा। इस कार्यक्रम में समस्त ग्रामीण और सभी श्रद्धालु मिलकर सहयोग प्रदान करेंगे। यह समारोह वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार होगा, जिसमें मंदिर में प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा (आवाहन) वैदिक मंत्रों और अनुष्ठानों के साथ की जाएगी। प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर होगा।1
- गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी थाना पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसके फरार चल रहे आरोपी नदीम खान को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 2000 रुपये के नकली नोट, दो नवजात बच्चों के फोटोग्राफ और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में मई महीने में एक 11 दिन की नवजात बच्ची के अपहरण और बिक्री की साजिश का खुलासा हुआ था, जिसके बाद से नदीम खान फरार था। इस घटना में पहले ही 12 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और अपहृत बच्ची को भी सुरक्षित बरामद कर लिया गया था। पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने बताया कि उनका गिरोह नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करता था और बच्चों को खरीदने के लिए नकली नोटों का इस्तेमाल करता था। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। फिलहाल, इस मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है और आगे की जांच-पड़ताल की जा रही है।1
- फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ जी ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बचपन में जिन हाथों ने संभाला, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि थकना अब उनका हक है। इस संदेश को बिल्कुल सत्य वचन बताते हुए, इसमें सनातन धर्म का सार बताया गया है कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण होता है। मनुस्मृति के कथन 'पितरः प्रथमे देवता:' का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से दे देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान है। अखिल भारत वर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ जी मोदीनगर से आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया है। उनका यह संदेश विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्होंने अपना आंगन बड़ा करने की होड़ में पिता का आंगन छोटा कर दिया है। इस संदेश का मूल भाव 'पितृदेवो भवः' है और यह कामना की गई है कि सेवा भाव सदा अक्षुण्ण बना रहे।1