तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद जिला। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शशासन-प्रशासन को चार-बार ज्ञापन एवं निबेदन दिए जाने के बावजूद कोई तीस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर चनांचल क्षेत्रों में बनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्सस लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है। प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार बनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है। खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक दा असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि पदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद जिला। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शशासन-प्रशासन को चार-बार ज्ञापन एवं निबेदन दिए जाने के बावजूद कोई तीस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर चनांचल क्षेत्रों में बनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्सस लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है। प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार बनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है। खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक दा असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि पदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद जिला। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शशासन-प्रशासन को चार-बार ज्ञापन एवं निबेदन दिए जाने के बावजूद कोई तीस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर चनांचल क्षेत्रों में बनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्सस लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है। प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार बनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है। खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक दा असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि पदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद जिला। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शशासन-प्रशासन को चार-बार ज्ञापन एवं निबेदन दिए जाने के बावजूद कोई तीस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर चनांचल क्षेत्रों में बनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्सस लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है। प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार बनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है। खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक दा असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि पदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
- गरियाबंद जिला। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शशासन-प्रशासन को चार-बार ज्ञापन एवं निबेदन दिए जाने के बावजूद कोई तीस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर चनांचल क्षेत्रों में बनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्सस लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है। प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार बनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है। खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक दा असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि पदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। तेंदूपत्ता प्रबंधक गरियाबंद जिला। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शशासन-प्रशासन को चार-बार ज्ञापन एवं निबेदन दिए जाने के बावजूद कोई तीस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर चनांचल क्षेत्रों में बनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्सस लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है। प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार बनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है। खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक दा असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि पदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।1
- कवर्धा। पुलिस महानिदेशक, नया रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा जारी वर्ष 2025 की पदोन्नति योग्यता सूची के अनुसार जिला पुलिस कबीरधाम में पदोन्नति संबंधी कार्यवाही संपादित की गई। उक्त आदेश के परिपालन में सहायक उप निरीक्षक रूपराम पट्टावी को उप निरीक्षक (Sub-Inspector) के पद पर पदोन्नत किया गया। आज दिनांक 29 अप्रैल 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कबीरधाम में आयोजित एक सादगीपूर्ण एवं गरिमामय समारोह में पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह (भा.पु.से.) एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल द्वारा पदोन्नत अधिकारी को स्टार अलंकरण कर उप निरीक्षक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने पदोन्नत अधिकारी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पदोन्नति उनके उत्कृष्ट कार्य, कर्तव्यनिष्ठा एवं अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वे नवीन दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं दक्षता के साथ करते हुए विभाग की गरिमा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। इसके पश्चात पारंपरिक रूप से मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। इस अवसर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल, उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) आशीष शुक्ला, उप पुलिस अधीक्षक अंजू कुमारी, निरीक्षक (एम) वीरेंद्र तारम, उप निरीक्षक त्रिलोक प्रधान, सहायक उप निरीक्षक (एम) सुनील राव सहित कार्यालयीन अधिकारी-कर्मचारीगण एवं पदोन्नत अधिकारी के परिजन उपस्थित रहे। उपस्थित समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पदोन्नत अधिकारी को पुष्पगुच्छ भेंट कर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।4
- ओडिशा के क्योंझर ओडिशा के क्योंझर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. बैंक के पैसे देने से इनकार करने पर जीतू मुंडा ने कब्र से खोदकर बहन का कंकाल निकाला पैसों के लिए कब्र खोदी: बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई1
- aur video 📸 ka dance 🪩 hai 😂 ka dance 😱 hai 😁 ka dance hai 😂 ka dance 🪩1
- Advance Booking Open Now #Raj #Talkies #Raipur1
- दावड़ा इंटरनेशनल स्कूल राजिम को सीबीएसई से मिली मान्यता, संस्था में ख़ुशी की लहर राजिम का पहला सीबीएसई स्कूल बना, ,नवापारा-राजिम: राजिम अंचल क्षेत्र के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। जहाँ राजिम स्थित दावड़ा इंटरनेशनल स्कूल को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई से आधिकारिक संबद्धता एफिलेशन प्राप्त हो गई है। इससे अब विद्यालय में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय का संबद्धता क्रमांक 3330571 है और यह छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित है। उक्त विद्यालय की स्थापना वर्ष 2019 में हुई थी और वर्तमान में यह माध्यमिक स्तर तक संचालित होगा । स्कूल का संचालन मानव रचना एजुकेशन सोसायटी द्वारा किया जा रहा है।सीबीएसई द्वारा यह संबद्धता 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए प्रदान की गई है। संस्था के प्रेसिडेंट प्रकाश दावड़ा व चेयरपर्सन प्रगति दावड़ा मिरानी ने कहाकि सीबीएसई मान्यता प्राप्ति हम सभी के लिए यह अत्यंत गर्व और खुशी का विषय है. यह उपलब्धि केवल विद्यालय के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस सफलता के पीछे हमारे समर्पित सेंटर हेड, प्राचार्य, शिक्षकों, कर्मठ स्टाफ, विद्यार्थियों और अभिभावकों का सहयोग एवं विश्वास निहित है। हम सभी ने मिलकर शिक्षा के उच्च मानकों को प्राप्त करने का जो संकल्प लिया था, आज वह साकार होता दिखाई दे रहा है। हमारा उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास—नैतिक, बौद्धिक एवं सामाजिक उन्नति—पर विशेष ध्यान देना है। सीबीएसई से मिली यह मान्यता हमें और अधिक जिम्मेदारी के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित करेगी।उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी और अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहाकि हमारा विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा। विद्यालय के सेंटर हेड कविता शर्मा व प्राचार्य प्रशांत कुमार दीप ने भी मान्यता प्राप्ति पर ख़ुशी जाहिर करते हुए सीबीएसइ प्रशासन का आभार जताया. वही मान्यता से राजिम अंचल में भी ख़ुशी की लहर हैँ.4
- 74 साल का बुजुर्ग अनशन पर मजबूर! 4 साल से नहीं मिला न्याय | Simga Hathbandh Case | CG News संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735 सिमगा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत हथबंद में 74 वर्षीय बुजुर्ग रामजी पाठक न्याय के लिए 4 वर्षों से भटक रहे हैं। अवैध कब्जा हटाने और रास्ता दिलाने की मांग को लेकर उन्होंने पटवारी, आरआई, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर से लेकर मंत्री तक शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब मजबूर होकर बुजुर्ग ने कलेक्टर कार्यालय बलौदाबाजार के सामने अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है। तहसीलदार अनुराग भट्ट के अनुसार, मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की गई है। 👉 क्या प्रशासन समय रहते न्याय देगा? 👉 या एक बुजुर्ग को अनशन पर बैठना पड़ेगा? 📢 जय जोहार सीजी न्यूज़ — खबर सच की जड़ तक 👍 Like | 🔁 Share | 💬 Comment | 🔔 Subscribe1
- गरीबी और सिस्टम के बीच पिसता परिवार: पत्नी को बाइक पर ढोने को मजबूर पति कवर्धा में दर्दनाक तस्वीर: एम्बुलेंस नहीं मिली तो बाइक बनी सहारा1