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करौली में पांचना बांध के पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। इस विरोध प्रदर्शन के तहत किसानों ने हिंडौन-करौली मार्ग पर कटकड़ मोड़ और टोडूपूरा मोड़ पर जाम लगा दिया। सड़क बाधित होने के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
Hanis Sheikh
करौली में पांचना बांध के पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। इस विरोध प्रदर्शन के तहत किसानों ने हिंडौन-करौली मार्ग पर कटकड़ मोड़ और टोडूपूरा मोड़ पर जाम लगा दिया। सड़क बाधित होने के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
- Geeta BeniwalHindaun, Karauli😡1 hr ago
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- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बितांग अदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया' से सम्मानित किया गया है। यह प्रधानमंत्री के लिए 35वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जिसे समस्त भारतीयों के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का विषय बताया गया है। वैश्विक मंच पर मिला यह 35वां सम्मान भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा, प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और विश्व समुदाय के बढ़ते विश्वास का एक सशक्त प्रतीक माना जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी राजस्थान वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस सम्मान पर हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के यशस्वी नेतृत्व में भारत निरंतर नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहा है और विश्व पटल पर सम्मान, विश्वास तथा नेतृत्व का एक नया इतिहास रच रहा है।1
- करौली के पांचना बांध से सोमवार को नहरों में पानी छोड़े जाने के बावजूद कुसाय क्षेत्र तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंचने से ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह हिंडौन-गंगापुर-सपोटरा सड़क मार्ग स्थित कुडगांव पर जाम लगा दिया, जिसके कारण आवागमन बाधित हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने गंभीर नदी और गुडला लिफ्ट में पानी छोड़ा, लेकिन कमांड एरिया में कम पानी छोड़कर क्षेत्र के किसानों के साथ धोखा किया गया है। किसानों के अनुसार, इसी वजह से कमांड एरिया की नहरें अभी भी सूखी पड़ी हुई हैं और उन्हें सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। किसानों ने पांचना बांध पर कार्यरत कर्मचारियों की कथित लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्रशासन ने दावा किया है कि नहरों में पानी खोल दिया गया है, लेकिन कुसाय में धरना दे रहे लोगों का कहना है कि पानी अभी तक नहरों में नहीं पहुंचा है। स्थिति को देखते हुए, पुलिस प्रशासन लगातार धरने पर बैठे किसानों से समझाइश का प्रयास कर रहा है।1
- गंगापुर सिटी क्षेत्र के अरनिया बिनेगा गांव में नहरों में पानी नहीं पहुँचने से नाराज किसानों ने गंगापुर-हिंडौन मार्ग को जाम कर दिया। किसानों का आरोप है कि नहरों में लंबे समय से पानी नहीं छोड़ा गया है, जिसके कारण उनकी फसलें सूखने की कगार पर हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग की। सड़क जाम होने से मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे तथा किसानों से बातचीत कर जाम खुलवाने का प्रयास किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे।1
- करौली जिले के प्रसिद्ध पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने के बावजूद कुसाय क्षेत्र तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंचने से ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने पहले कुंसाय के बाद और फिर हिण्डौन-करौली सड़क मार्ग पर जाम लगा दिया। सोमवार शाम 6 बजे लगाए गए इस जाम से सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बाद में ग्रामीणों ने टोडुपरा मोड़ पर भी जाम लगाया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने गंभीर नदी और गुडला लिफ्ट में पानी छोड़ा, लेकिन कमांड क्षेत्र के लोगों के साथ "धोखा" किया गया, क्योंकि नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया जिससे क्षेत्र की नहरें सूखी पड़ी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 20 साल से पांचना बांध के गेट नहरों के लिए नहीं खोले गए थे, जिसके कारण उनमें जंग लग गई और तकनीकी खराबी आ गई। इस वजह से गेट पूरी तरह नहीं खुले और नहरों में कम मात्रा में पानी पहुंच पाया है। इस तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए बांध पर दूर-दराज से आए राजमिस्त्री गेटों की मरम्मत करने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी मौके पर तैनात रहा।1
- बयाना क्षेत्र में लगातार हुई बारिश के बाद, यहाँ का प्रसिद्ध इमलिया कुंड झरना एक बार फिर पूरे वेग से बहने लगा है। इस झरने के फिर से शुरू होने के साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य का एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है, जिसे देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं।1
- स्थानीय क्षेत्र में भारी बरसात होने की संभावना जताई जा रही है, जिसे लेकर सभी किसान भाई उम्मीद लगाए बैठे हैं और बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं।1
- कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जी ने कटकड़ टोडूपुरा मोड़ पर स्थित धरनास्थल पर किसानों को संबोधित किया।1
- मंगलवार को हिंडौन सिटी के फुलवाड़ा गांव में भागवत कथा के उपलक्ष्य में एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लिया। बैंड-बाजों के साथ आयोजित इस यात्रा में महिलाएं भक्तिभाव से नृत्य करती हुई चल रही थीं। अयोध्या की बड़ी छावनी के संत बृजमोहन त्यागी महाराज के नेतृत्व में आयोजित हो रही इस भागवत कथा में विट्ठल आश्रम के राजेश्वर महाराज कथा वाचन कर रहे हैं। कलश यात्रा का शुभारंभ मुख्य ध्वज और प्रधान कलश के पूजन के साथ हुआ, जिसमें स्वयं कथावाचक भी शामिल हुए। ग्रामीणों के सहयोग से यह भागवत कथा गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल के पास आयोजित की जा रही है, और इस कलश यात्रा से पूरे गांव में एक धार्मिक माहौल बन गया।3
- राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध से 6 जुलाई को गंभीर नदी में पानी छोड़ा गया, जिसने 20 साल पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया। सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत और जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बांध के तीन गेट खोले, जिससे यह प्रक्रिया संभव हो सकी। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत ने दो नवीन लिफ्ट परियोजनाओं (पीडीएन सिस्टम आधारित) और गुडला लिफ्ट परियोजना की पीडीएन सिस्टम में रीमॉडलिंग के कार्य का भूमि पूजन और शिलान्यास भी किया। सरकार के हस्तक्षेप और किसानों की सहमति के बाद, अब बांध से निकलने वाला पानी कमांड एरिया के 35 गांवों, बांध के डूब क्षेत्र के 39 गांवों और गंभीर नदी के तट पर बसे गांवों को सिंचाई के लिए उपलब्ध हो सकेगा। बांध से गंभीर नदी में पानी छोड़ने के दौरान, गृह राज्य मंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने मुख्यमंत्री और क्षेत्र के किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह उल्लेखनीय है कि सरकार के हस्तक्षेप के बाद 30 जून को किसानों के बीच इस विषय पर सहमति बन पाई थी।1