इंदौर के उषा फाटक क्षेत्र में देर रात वाहन खड़ा करने को लेकर दो पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। यह कहासुनी देखते ही देखते बड़े विवाद में बदल गई और दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पत्थरबाजी के कारण इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पथराव करते स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सूचना मिलने पर एमजी रोड थाना पुलिस अन्य थानों के बल के साथ मौके पर पहुंची और बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को हिरासत में भी ले लिया है। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिसके आधार पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली गई है। एमजी रोड थाने के प्रभारी विजय सिंह सिसोदिया ने बताया है कि गाड़ी खड़ी करने को लेकर यह बवाल हुआ। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और वायरल वीडियो की मदद से मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है, और अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर के उषा फाटक क्षेत्र में देर रात वाहन खड़ा करने को लेकर दो पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। यह कहासुनी देखते ही देखते बड़े विवाद में बदल गई और दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पत्थरबाजी के कारण इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पथराव करते स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सूचना मिलने पर एमजी रोड थाना पुलिस अन्य थानों के बल के साथ मौके पर पहुंची और बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को हिरासत में भी ले लिया है। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिसके आधार पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली गई है। एमजी रोड थाने के प्रभारी विजय सिंह सिसोदिया ने बताया है कि गाड़ी खड़ी करने को लेकर यह बवाल हुआ। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और वायरल वीडियो की मदद से मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है, और अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- इंदौर में जिला जेल चौराहे से लेकर पावर हाउस गेट तक, रात और दिन भर लगातार माइक बज रहे हैं।1
- इंदौर में छत्रीपुरा पुलिस और आबकारी विभाग पर कुंभकर्णी नींद में होने और अवैध शराब के खेल से अनजान होने का नाटक करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। 'चेहकती कलम न्यूज' के अनुसार, विजय राठौर का अवैध शराब का कारोबार पुलिस स्टेशन से मात्र 150 मीटर की दूरी पर बेखौफ चल रहा है, जिस पर अधिकारियों की कथित निष्क्रियता और जानबूझकर अनदेखी पर सवाल उठाए गए हैं।1
- धार और इंदौर जिले की सीमा से लगे खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला क्षेत्र में कथित करोड़ों रुपये के मुरम घोटाले का मामला गरमा गया है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों से बाहर खनन, बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी और खनिज माफियाओं को संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतों के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई। दरअसल, एक आर्मी ऑफिसर और प्रभावित किसानों द्वारा इस मामले को उच्च स्तर तक पहुँचाने के बाद ही खनिज विभाग की टीम मौके पर जाँच के लिए पहुँची। सूत्रों के अनुसार, शिकायत में किसानों की निजी भूमि पर भारी मात्रा में अवैध उत्खनन और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का स्पष्ट उल्लेख था। ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जब तक मामला भोपाल स्तर तक नहीं पहुँचा, तब तक जिम्मेदार विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सीमित खनन की अनुमति वाले क्षेत्रों से बाहर निकलकर आसपास की निजी कृषि भूमि तक जेसीबी और भारी मशीनों से खुदाई की गई है, जिससे खेतों में गहरे गड्ढे बन गए हैं और उपजाऊ भूमि को भारी क्षति पहुँची है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि ड्रोन सर्वे और वैज्ञानिक मापन कराया जाए, तो करोड़ों रुपये की वास्तविक राजस्व चोरी का खुलासा हो सकता है। मामले की जाँच के लिए पहुँचे अधिकारियों से पत्रकारों ने अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों की सीमा के उल्लंघन, राजस्व चोरी के प्रमाण और अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका जैसे कई अहम सवाल पूछे। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जाँच दल ने किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मीडिया से दूरी बनाते हुए मौके से रवाना हो गया। अधिकारियों की इस चुप्पी ने संदेहों को और बढ़ा दिया है, जिससे ग्रामीणों का कहना है कि यदि जाँच निष्पक्ष है तो जानकारी छिपाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। प्रभावित किसानों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अपनी भूमि को हुए नुकसान के लिए निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज, संभागायुक्त, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच, साथ ही ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और वैज्ञानिक मापन कराने की मांग उठाई है। फिलहाल, क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या करोड़ों के इस कथित मुरम घोटाले की निष्पक्ष जाँच होगी, क्या किसानों को न्याय मिलेगा, और क्या खनिज माफियाओं व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह जाँच भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।1
- इंदौर के सियागंज स्थित पटरल ब्रिज पर एक तेज़ रफ़्तार पानी का टैंकर अनियंत्रित होकर कई वाहनों से जा टकराया। इस दर्दनाक हादसे का सीसीटीवी फ़ुटेज भी सामने आया है, जिसमें टैंकर बेकाबू होकर सड़क पर खड़े और गुज़र रहे वाहनों को टक्कर मारते हुए साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर का पिछला टायर फटने के कारण चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा था। बताया गया है कि यह टैंकर पानी भरकर जवाहर मार्ग क्षेत्र में वितरण के लिए जा रहा था। राहत की बात यह है कि इस घटना में फिलहाल किसी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद पुलिस ने पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया।1
- धार और इंदौर जिले की सीमा पर स्थित ग्राम खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला में कथित अवैध मुरम उत्खनन एक बड़े खनिज घोटाले का रूप ले चुका है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध खनन, करोड़ों रुपये की संभावित राजस्व चोरी, स्वीकृत पट्टों की सीमाओं का उल्लंघन और प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है। मामला इतना गंभीर हो गया कि एक आर्मी अधिकारी के हस्तक्षेप और उच्च स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद खनिज विभाग जांच के लिए सक्रिय हुआ। हालांकि, जांच दल के अधिकारियों ने मीडिया के सवालों से बचते हुए कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर संदेह गहरा गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, खण्डवा में खसरा क्रमांक 162 पर अकील मोहम्मद और खसरा क्रमांक 639 पर शहनबाज खान, तथा कल्याणसी खेड़ी में खसरा क्रमांक 642 पर हरीश पटेल और अमजद खान के नाम मुरम खनन पट्टे स्वीकृत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं ने स्वीकृत खदानों की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए निजी कृषि भूमि तक खुदाई फैलाई, जिससे उपजाऊ भूमि बर्बाद हो गई और गहरे गड्ढे बन गए। आरोप है कि स्वीकृत पट्टों को केवल कानूनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया, जबकि वास्तविक उत्खनन कई गुना बड़े क्षेत्र में हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लाखों घनमीटर मुरम का अवैध उत्खनन और शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। सबसे गंभीर आरोप यह है कि किसानों की निजी भूमि से निकाली गई मुरम को स्वीकृत खदानों के नाम पर जारी ट्रांजिट पास (टीपी) के माध्यम से पीथमपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पट्टाधारी स्वयं खनन नहीं कर रहे, बल्कि संचालन का जिम्मा दूसरों को सौंपा गया है, जो खदान सीमाओं का पालन नहीं कर रहे। क्षेत्र में अवैध उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, प्रभावित भूमि से जुड़े एक आर्मी अधिकारी द्वारा दस्तावेज़, खसरा रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के साथ शासन स्तर तक शिकायत पहुंचने के बाद ही खनिज विभाग सक्रिय हुआ। इस घटनाक्रम ने ग्रामीणों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम किसानों की शिकायतों पर वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों के दल ने स्थानीय पत्रकारों के सवालों, जैसे खनन की सीमा, निजी भूमि पर उत्खनन के प्रमाण, राजस्व चोरी की आशंका और अधिकारियों की भूमिका पर, कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और बिना जानकारी दिए लौट गए। इससे प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। इस अवैध उत्खनन से प्रभावित किसानों की कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे भविष्य में खेती करना भी मुश्किल हो सकता है। प्रभावित परिवारों में वे लोग भी शामिल हैं जिनके सदस्य सेना में सेवा दे चुके हैं या वर्तमान में देश की सेवा कर रहे हैं, जिन्होंने न्याय पर सवाल उठाया है। पीड़ित किसानों ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और उत्खनन की वैज्ञानिक माप शामिल है। उनकी मांग है कि राजस्व नुकसान का आकलन किया जाए और दोषी अधिकारियों एवं खनन माफियाओं पर कठोर कार्रवाई हो। क्षेत्र की जनता अब केवल जांच रिपोर्ट का नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है, क्योंकि इसी से प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता साबित होगी।1
- इंदौर में जिला जेल चौराहे से लेकर पावर हाउस गेट तक दिन-रात लगातार माइक बजते रहते हैं। इस पूरे क्षेत्र में ऑटो रिक्शा और फल विक्रेताओं की आवाजाही भी बनी रहती है, जिसके कारण चौबीसों घंटे शोरगुल का माहौल रहता है। यह बताया गया है कि यह स्थिति लगातार 24 घंटे 'ध्वनि मंत्री की सेवा पर' बनी हुई है।1
- इंदौर के एमजी रोड थाना क्षेत्र में चिमनबाग मैदान पर चल रहे एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। प्रतियोगिता से एक टीम को बाहर किए जाने से नाराज कुछ युवकों ने आयोजन समिति से जुड़े एक युवक के साथ जमकर अभद्रता और मारपीट की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। फरियादी यश टिकलिया ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है कि वे अपने साथियों अनिकेत बांगर और ऋषभ मेहरा के साथ चिमनबाग मैदान के कबड्डी ग्राउंड पर मौजूद थे। इसी दौरान मयंक गौड़ और रोहन मेहरा वहां पहुंचे और संस्था वैष्णवी की टीम को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने का कारण पूछने लगे। इसी बात को लेकर दोनों युवकों ने यश के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जब यश ने इसका विरोध किया, तो आरोपी और आक्रोशित हो गए और उन्होंने यश के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट शुरू कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर विवाद को शांत कराया। घटना के बाद पीड़ित यश टिकलिया ने एमजी रोड थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पुलिस ने मयंक गौड़ और रोहन मेहरा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1