मध्य प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होने का खतरा मध्य प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होने का खतरा है। ये अध्यक्ष वर्ष 2022 और उसके बाद हुए चुनाव के बाद चुने गए थे और सरकार ने इनके निर्वाचन का नोटिफिकेशन नहीं किया था। रिपोर्टर सुमित सेन अब तक 2 निकाय श्योपुर और पानसेमल के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित कर दिए हैं। डबरा का मामला कोर्ट में है। हाईकोर्ट पहुंचे इन मामलों में सुनवाई के बाद कोर्ट ने ऐसे अध्यक्षों को विधिवत निर्वाचित नहीं माना है और इनके वित्तीय अधिकार सीएमओ या एसडीएम को सौंपने के आदेश दिए हैं। आगे डबरा नगर पालिका समेत प्रदेश की 98 नगर पालिका और 297 नगर परिषद अध्यक्षों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। कानून के जानकारों के मुताबिक जैसे-जैसे शिकायतें होगी, इनके अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होते जाएंगे। बता दें, प्रदेश में कुल 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार में पार्षदों से अध्यक्ष चुन लिए गए। इसलिए शून्य घोषित किए वित्तीय अधिकार दरअसल, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में निकाय चुनाव में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय और पंचायत चुनाव आनन-फानन करा दिए थे।तब नगर निगमों के चुनाव तो सीधे जनता से कराए गए थे, लेकिन नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों को जनता के बजाय पार्षदों से चुन लिया गया। खास यह है कि चुनाव के बाद नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के महापौर और पार्षद का बकायदा नोटिफिकेशन कर जीत-हार का ऐलान किया गया था। जबकि नगर पालिका और नगर परिषद के पार्षदों से चुने गए अध्यक्षों का नोटिफिकेशन राज्य सरकार के नगरीय विकास और आवास विभाग ने नहीं किया था। इंदौर जिले के पानसेमल अध्यक्ष पद से हुआ खुलासा हाईकोर्ट के अधिवक्ता ब्रह्ममूर्ति तिवारी बताते हैं कि नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य किए जाने की शुरुआत इंदौर की पानसेमल नगर परिषद के अध्यक्ष पद के विवाद से शुरू हुई। यहां के अध्यक्ष के खिलाफ विरोधी पार्षद ने जिला न्यायालय के एडीजे कोर्ट में शिकायत की थी। कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी तो सरकार सही जवाब नहीं दे पाई। इस पर एडीजे कोर्ट ने आदेश दिया कि नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शासन का नोटिफिकेशन नहीं होने से मौजूद नहीं हैं।नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शासन का नोटिफिकेशन नहीं होने से मौजूद नहीं हैं। इसके विरोध में हाईकोर्ट में अपील की गई तो वहां से भी नगरीय विकास विभाग से जवाब मांगा गया। जवाब नहीं दिया गया, क्योंकि सरकार ने नोटिफिकेशन ही नहीं किया था। इस पर एडीजे कोर्ट का आदेश सही ठहराया गया। एक-एक कर नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के खिलाफ शिकायतें हो रही हैं। जिनमें हाईकोर्ट से आदेश जारी हो रहा है। श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष को काम करने से रोका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष से जुड़े मामले में राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज करने का आदेश न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की डिवीजन बेंच ने सुनाया है। यह प्रकरण श्योपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ा है।इस पद के चुनाव को चुनौती देते हुए एक व्यक्ति सुमेर सिंह ने जिला न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने अंतरिम आदेश देते हुए नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने से रोक दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की थी। राज्य की ओर से दलील दी गई कि सिंगल जज का दिया आदेश गलत है। अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए राजपत्र (गजट) में अलग से अधिसूचना जरूरी नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि बिना गजट अधिसूचना के किसी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं किया जा सकता और ऐसे में अध्यक्ष के रूप में कार्य करना नियमों के विपरीत है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि सिविल रिवीजन में दिए गए अंतरिम आदेश के खिलाफ रिट अपील नहीं की जा सकती। इसी आधार पर राज्य सरकार की अपील को निरस्त कर दिया गया।डबरा नगर पालिका अध्यक्ष से पूछा नियुक्ति का आधार ग्वालियर जिले की डबरा नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी बाई के पद के मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच नोटिस जारी कर चुकी है। इस पूरे मामले की वजह एक सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन है। याचिकाकर्ता सत्येंद्र कुमार दुबे ने दिसंबर 2025 में प्रशासन से पूछा था कि क्या नगर पालिका अध्यक्ष के निर्वाचन या पद ग्रहण को लेकर कोई शासकीय अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) जारी की गई है। जवाब में 5 जनवरी 2026 को नगर पालिका परिषद ने लिखित में बताया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी किसी भी अधिसूचना का कोई दस्तावेज या प्रमाणित प्रति मौजूद नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी। याचिका में अध्यक्ष पद की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती दी गई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 जनवरी को याचिका मंजूर की और नोटिस जारी कर लक्ष्मीबाई से पूछा है कि उनकी नियुक्ति किन दस्तावेजों के आधार पर हुई है।अध्यक्षों के सीधे नहीं कराए चुनाव नगरीय विकास और आवास विभाग के अफसरों के अनुसार- यह स्थिति इसलिए बनी है, क्योंकि 2022 में हुए नगरीय निकाय चुनावों के दौरान नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के पद का चुनाव सीधे नहीं कराया गया। यह सभी चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुए यानी पार्षदों ने नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्षों को चुना। इसका कोई नोटिफिकेशन राज्य शासन या राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नहीं किया गया। इसकी वजह शासन का फैसला था जिसमें चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होना था। हालांकि जिन पार्षदों ने नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव किया वे सभी निर्वाचित हैं और उनका पार्षद पद का नोटिफिकेशन हुआ है। इसी के चलते कई निकायों के मामले में कोर्ट ने शिकायतों के बाद नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के निर्वाचन को नोटिफाई नहीं होने के कारण इस पद को धारण करने वालों के वित्तीय अधिकार शून्य बताए हैं। इसी के चलते कई निकायों के मामले में कोर्ट ने शिकायतों के बाद नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के निर्वाचन को नोटिफाई नहीं होने के कारण इस पद को धारण करने वालों के वित्तीय अधिकार शून्य बताए हैं। अफसरों के अनुसार अब यह गलती सुधार ली गई है और आगामी 2027 के चुनावों में फिर से नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली यानी जनता के माध्यम से होंगे और उसका नोटिफिकेशन होगा। इस बदलाव सितंबर 2025 में किया गया है। 2027 में होना है चुनाव नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषद के पार्षद, अध्यक्ष और नगर निगम महापौर पद के लिए अब आगामी चुनाव 2027 में होना है। अब जबकि करीब सवा साल से अधिक समय चुनाव के लिए बचा है तो 2022 में हुए चुनाव में जीतने वाले नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों को वित्तीय अधिकारहीन बताने के लिए विरोधी पक्ष कोर्ट की शरण तेजी से ले रहे हैं।
मध्य प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होने का खतरा मध्य प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होने का खतरा है। ये अध्यक्ष वर्ष 2022 और उसके बाद हुए चुनाव के बाद चुने गए थे और सरकार ने इनके निर्वाचन का नोटिफिकेशन नहीं किया था। रिपोर्टर सुमित सेन अब तक 2 निकाय श्योपुर और पानसेमल के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित कर दिए हैं। डबरा का मामला कोर्ट में है। हाईकोर्ट पहुंचे इन मामलों में सुनवाई के बाद कोर्ट ने ऐसे अध्यक्षों को विधिवत निर्वाचित नहीं माना है और इनके वित्तीय अधिकार सीएमओ या एसडीएम को सौंपने के आदेश दिए हैं। आगे डबरा नगर पालिका समेत प्रदेश की 98 नगर पालिका और 297 नगर परिषद अध्यक्षों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। कानून के जानकारों के मुताबिक जैसे-जैसे शिकायतें होगी, इनके अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होते जाएंगे। बता दें, प्रदेश में कुल 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार में पार्षदों से अध्यक्ष चुन लिए गए। इसलिए शून्य घोषित किए वित्तीय अधिकार दरअसल, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में निकाय चुनाव में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय और पंचायत चुनाव आनन-फानन करा दिए थे।तब नगर निगमों के चुनाव तो सीधे जनता से कराए गए थे, लेकिन नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों को जनता के बजाय पार्षदों से चुन लिया गया। खास यह है कि चुनाव के बाद नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के महापौर और पार्षद का बकायदा नोटिफिकेशन कर जीत-हार का ऐलान किया गया था। जबकि नगर पालिका और नगर परिषद के पार्षदों से चुने गए अध्यक्षों का नोटिफिकेशन राज्य सरकार के नगरीय विकास और आवास विभाग ने नहीं किया था। इंदौर जिले के पानसेमल अध्यक्ष पद से हुआ खुलासा हाईकोर्ट के अधिवक्ता ब्रह्ममूर्ति तिवारी बताते हैं कि नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य किए जाने की शुरुआत इंदौर की पानसेमल नगर परिषद के अध्यक्ष पद के विवाद से शुरू हुई। यहां के अध्यक्ष के खिलाफ विरोधी पार्षद ने जिला न्यायालय के एडीजे कोर्ट में शिकायत की थी। कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी तो सरकार सही जवाब नहीं दे पाई। इस पर एडीजे कोर्ट ने आदेश दिया कि नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शासन का नोटिफिकेशन नहीं होने से मौजूद नहीं हैं।नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शासन का नोटिफिकेशन नहीं होने से मौजूद नहीं हैं। इसके विरोध में हाईकोर्ट में अपील की गई तो वहां से भी नगरीय विकास विभाग से जवाब मांगा गया। जवाब नहीं दिया गया, क्योंकि सरकार ने नोटिफिकेशन ही नहीं किया था। इस पर एडीजे कोर्ट का आदेश सही ठहराया गया। एक-एक कर नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के खिलाफ शिकायतें हो रही हैं। जिनमें हाईकोर्ट से आदेश जारी हो रहा है। श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष को काम करने से रोका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष से जुड़े मामले में राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज करने का आदेश न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की डिवीजन बेंच ने सुनाया है। यह प्रकरण श्योपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ा है।इस पद के चुनाव को चुनौती देते हुए एक व्यक्ति सुमेर सिंह ने जिला न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने अंतरिम आदेश देते हुए नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने से रोक दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की थी। राज्य की ओर से दलील दी गई कि सिंगल जज का दिया आदेश गलत है। अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए राजपत्र (गजट) में अलग से अधिसूचना जरूरी नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि बिना गजट अधिसूचना के किसी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं किया जा सकता और ऐसे में अध्यक्ष के रूप में कार्य करना नियमों के विपरीत है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि सिविल रिवीजन में दिए गए अंतरिम आदेश के खिलाफ रिट अपील नहीं की जा सकती। इसी आधार पर राज्य सरकार की अपील को निरस्त कर दिया गया।डबरा नगर पालिका अध्यक्ष से पूछा नियुक्ति का आधार ग्वालियर जिले की डबरा नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी बाई के पद के मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच नोटिस जारी कर चुकी है। इस पूरे मामले की वजह एक सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन है। याचिकाकर्ता सत्येंद्र कुमार दुबे ने दिसंबर 2025 में प्रशासन से पूछा था कि क्या नगर पालिका अध्यक्ष के निर्वाचन या पद ग्रहण को लेकर कोई शासकीय अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) जारी की गई है। जवाब में 5 जनवरी 2026 को नगर पालिका परिषद ने लिखित में बताया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी किसी भी अधिसूचना का कोई दस्तावेज या प्रमाणित प्रति मौजूद नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी। याचिका में अध्यक्ष पद की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती दी गई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 जनवरी को याचिका मंजूर की और नोटिस जारी कर लक्ष्मीबाई से पूछा है कि उनकी नियुक्ति किन दस्तावेजों के आधार पर हुई है।अध्यक्षों के सीधे नहीं कराए चुनाव नगरीय विकास और आवास विभाग के अफसरों के अनुसार- यह स्थिति इसलिए बनी है, क्योंकि 2022 में हुए नगरीय निकाय चुनावों के दौरान नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के पद का चुनाव सीधे नहीं कराया गया। यह सभी चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुए यानी पार्षदों ने नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्षों को चुना। इसका कोई नोटिफिकेशन राज्य शासन या राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नहीं किया गया। इसकी वजह शासन का फैसला था जिसमें चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होना था। हालांकि जिन पार्षदों ने नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव किया वे सभी निर्वाचित हैं और उनका पार्षद पद का नोटिफिकेशन हुआ है। इसी के चलते कई निकायों के मामले में कोर्ट ने शिकायतों के बाद नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के निर्वाचन को नोटिफाई नहीं होने के कारण इस पद को धारण करने वालों के वित्तीय अधिकार शून्य बताए हैं। इसी के चलते कई निकायों के मामले में कोर्ट ने शिकायतों के बाद नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के निर्वाचन को नोटिफाई नहीं होने के कारण इस पद को धारण करने वालों के वित्तीय अधिकार शून्य बताए हैं। अफसरों के अनुसार अब यह गलती सुधार ली गई है और आगामी 2027 के चुनावों में फिर से नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली यानी जनता के माध्यम से होंगे और उसका नोटिफिकेशन होगा। इस बदलाव सितंबर 2025 में किया गया है। 2027 में होना है चुनाव नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषद के पार्षद, अध्यक्ष और नगर निगम महापौर पद के लिए अब आगामी चुनाव 2027 में होना है। अब जबकि करीब सवा साल से अधिक समय चुनाव के लिए बचा है तो 2022 में हुए चुनाव में जीतने वाले नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों को वित्तीय अधिकारहीन बताने के लिए विरोधी पक्ष कोर्ट की शरण तेजी से ले रहे हैं।
- मोहन बड़ोदिया रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए किसान पंजीयन का कार्य 7 फरवरी 2026 से 07 मार्च 2026 तक निर्धारित किया गया था। शासन निर्देशानुसार रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए किसान पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी सुश्री अंजु मरावी ने जिले के समस्त किसानो से अनुरोध किया हैं कि नियत अवधि में अपनी फसल को समर्थन मूल्य पर विक्रय करने एवं असुविधा से बचने के लिए अपनी भूमि के निकटतम पंजीयन केन्द्र एवं एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर, लोक सेवा केन्द्र एवं किसान अपना पंजीयन अनिवार्य1
- मोहन बड़ोदिया। शाजापुर जिले के मोहन बड़ौदिया जनपद की ग्राम पंचायत तिंगजपुर में पेयजल संकट को लेकर जन संघर्ष समिति द्वारा जनपद पंचायत मोहन बड़ौदिया परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार मोहन बड़ौदिया को ज्ञापन सौंपकर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की। जन संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के नेतृत्व में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत तिनंगजपुर में लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। धरना-प्रदर्शन के दौरान जन संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि जल्द ही ग्राम पंचायत तिनंगजपुर में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो समिति द्वारा ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गांव में स्थायी रूप से पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। इसके पश्चात समिति के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार मोहन बड़ौदिया को सौंपा और समस्या के निराकरण के लिए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन के दौरान जन संघर्ष समिति के पदाधिकारी राजा भैय्या,अविनाश सिंह, राम सिंह मालवीय, डॉ शिव मालवीय, संतोष , संदीप सिसोदिया,गोकुल ,एवं ग्राम पंचायत तिनंगजपुर के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।1
- दतिया में भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष के खिलाफ अहिरवार समाज उतरा सड़कों पर दतिया। 9 मार्च सोमवार सुबह दतिया पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर भीम आर्मी जिला अध्यक्ष के खिलाफ अहिरवार समाज सड़कों पर उतर गया कुछ दिन पूर्व दतिया के जिगना गांव में 4 मार्च होली उत्सव में अहिरवार समाज के दो पक्षों में सामाजिक ध्वनि यंत्र नगड़िया फोड़ने को लेकर झड़प हो गई थी भीम आर्मी अध्यक्ष सुरेन्द्र सुनेरिया ने अहिरवार समाज को गाली देते हुए बोला कि चले जाओ कर आओ रिपोर्ट मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता मेरे भाई ने नगड़िया फोड़ी है इसी बीच जिगना से 150 लोगों से ज्यादा दतिया पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर भीम आर्मी जिला अध्यक्ष के आतंक के खिलाफ दतिया एडिशनल एसपी को ज्ञापन सौंपा गया इस मौके पर रामनिवास अहिरवार दीपू अहिरवार कौशल अहिरवार सहित अहिरवार समाज की महिलाएं बुजुर्ग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।3
- शाजापुर: शहर में आज शीतला सप्तमी का पर्व परंपरागत श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अलसुबह से ही शहर के विभिन्न शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ी और विशेष पूजन-अर्चना के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। शहर के प्रमुख मंदिरों में हुआ विशेष पूजन आज शहर के लगभग एक दर्जन शीतला माता मंदिरों में उत्साह का माहौल रहा। पर्व को लेकर मंदिरों में पहले ही साफ-सफाई और आकर्षक सजावट कर ली गई थी। प्रमुख रूप से इन स्थानों पर माता का विशेष पूजन किया गया: लाल खिड़की, वजीरपुर तालाब की पाल, नई सड़क हनुमान मंदिर, ज्योतिनगर गणेश मंदिर, आदित्य नगर राजराजेश्वरी माता मंदिर, कसाईवाड़ा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निभाई गई 'बसौड़ा' (बासी भोजन) की अनोखी परंपरा शीतला सप्तमी के अवसर पर शहर में 'बसौड़ा' की प्राचीन परंपरा का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया गया। धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए आज किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलाया गया और न ही कोई गर्म भोजन पकाया गया। महिलाओं ने एक दिन पूर्व ही पूड़ी, सब्जी, मीठे पकवान और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाकर रख लिए थे। आज सुबह माता की पूजा-अर्चना के बाद पूरे परिवार ने उसी ठंडे (बासी) भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर इस अनोखी परंपरा को निभाया। सुख-समृद्धि और आरोग्य की हुई कामना इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करने और बसौड़ा की परंपरा निभाने से परिवार को भयंकर रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, माता के आशीर्वाद से घर-परिवार में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। महिलाओं ने आज माता से अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और मंगल की कामना की।8
- शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र के ग्राम धतरावदा जोड़ के समीप एक अल्टो कार सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई, जिसमे कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई , कार में सवार कार चालक अल्पेश पठान की मौत हो गई, जबकि एक 21 वर्षीय युवक ऋषभ सिंह परिहार घायल हो गया, सूचना पर मोहन बड़ोदिया थाने से 112 से पायलेट संतोष मालवीय और आरक्षक सोनू यादव और मोहन बड़ोदिया पुलिस टीम की मदद से मोहन बड़ोदिया सीएचसी लाया गया, बताया जा रहा कि अल्टो कार से दोनों युवक ग्वालियर से जावरा जा रहे थे इसी दौरान हादसा धतरावदा जोड़ के समीप हुआ, मृतक अल्पेश का शव पोस्टमार्टम के लिए रखा है, कल सुबह शव का पीएम करवाकर शव परिजन को सौंपा जाएगा1
- हर साल की तरह भी इस साल भी शांति और और आनंद के साथ रंग पंचमी का त्यौहार मनाया गया जिसमें गांव के बच्चे पुरुष महिलाएं भी शामिल हुई पाटीदार धर्मशाला में कार्यक्रम का आयोजन रखा गया था जिसमें सभी गांव वासियों को नाश्ता कराया गया जिसमें पोया जलेबी सभी को खिलाएं गये और शांतिपूर्वक कार्यक्रम को सफल बनाया गया1
- शुजालपुर सिटी थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई करते हुए बाइक चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में अन्य वारदातों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।1
- शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र के ग्राम धतरावदा जोड़ के समीप एक अल्टो कार सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई, जिसमे कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई , कार में सवार कार चालक अल्पेश पठान की मौत हो गई, जबकि एक 21 वर्षीय युवक ऋषभ सिंह परिहार घायल हो गया, सूचना पर मोहन बड़ोदिया थाने से 112 से पायलेट संतोष मालवीय और आरक्षक सोनू यादव और मोहन बड़ोदिया पुलिस टीम की मदद से मोहन बड़ोदिया सीएचसी लाया गया, बताया जा रहा कि अल्टो कार से दोनों युवक ग्वालियर से जावरा जा रहे थे इसी दौरान हादसा धतरावदा जोड़ के समीप हुआ, मृतक अल्पेश का शव पोस्टमार्टम के लिए रखा है, कल सुबह शव का पीएम करवाकर शव परिजन को सौंपा जाएगा2