स्तनपान स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध भविष्य की आधारशिला यूनिसेफ एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं ने स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं की काउंसलिंग कर जागरूक करे जयपुर, 7 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवजात शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी और प्राकृतिक माध्यम है। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सशक्त और स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” रखी गई है।इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह–2026 के अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार ने यूनिसेफ तथा प्रदेश की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर स्तनपान संरक्षण, प्रोत्साहन और समर्थन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है । प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की उपस्थिति में शुक्रवार को शासन सचिवालय में यूनीसेफ़ और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बैठक आयोजित की गई ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार नहीं, बल्कि उसके जीवनभर के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक विकास की मजबूत नींव है। यह कुपोषण, संक्रमण और बाल मृत्यु के जोखिम को कम करने का सबसे सरल, सुरक्षित और किफायती उपाय है। इसलिए प्रत्येक परिवार, स्वास्थ्य संस्थान और समाज की जिम्मेदारी है कि हर माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण, सही परामर्श और निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सफल स्तनपान के तीन प्रमुख सूत्र है,जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ करें,जन्म से पहले छह माह तक केवल माँ का दूध दें तथा छह माह बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं को नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने के फायदे और नहीं कराने पर उन्हें नुकसान के बारे में बताए । उन्होंने बताया कि राजस्थान में संस्थागत प्रसव लगभग 95 प्रतिशत है,ऐसे में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की नियमित काउंसलिंग, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर , होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर तथा विभिन्न पोषण अभियानों के माध्यम से स्तनपान को और बढ़ावा दिया जा जाए । राज्य सरकार अस्पतालों एवं समुदाय स्तर पर स्तनपान परामर्श सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक माँ को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो सके। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि स्तनपान बच्चे के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है और माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है ।प्रत्येक माँ को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान प्रारम्भ करने और अनुशंसित अवधि तक इसे जारी रखने के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत सुनिश्चित की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को शिशु एवं बाल आहार संबंधी गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने परिवारों, समुदायों, नियोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसा सहयोगी वातावरण विकसित करें, जहाँ प्रत्येक माँ को सम्मान, सुरक्षा, सही जानकारी और निरंतर सहयोग मिल सके। इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के राज्य प्रमुख श्री एल. के. राव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोशनीवाल, स्टेट ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी, राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. लीला व्यास एवं सचिव डॉ. नूपुर लौरिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम , राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. रमेश चौधरी, आरसीएच के निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) डॉ. राकेश कुमार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल तथा यूनिसेफ राजस्थान की पोषण विशेषज्ञ श्रीमती मीनाक्षी सिंह उपस्थित थे । स्तनपान स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध भविष्य की आधारशिला यूनिसेफ एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं ने स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं की काउंसलिंग कर जागरूक करे जयपुर, 7 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवजात शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी और प्राकृतिक माध्यम है। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सशक्त और स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” रखी गई है।इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह–2026 के अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार ने यूनिसेफ तथा प्रदेश की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर स्तनपान संरक्षण, प्रोत्साहन और समर्थन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है । प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की उपस्थिति में शुक्रवार को शासन सचिवालय में यूनीसेफ़ और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बैठक आयोजित की गई ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार नहीं, बल्कि उसके जीवनभर के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक विकास की मजबूत नींव है। यह कुपोषण, संक्रमण और बाल मृत्यु के जोखिम को कम करने का सबसे सरल, सुरक्षित और किफायती उपाय है। इसलिए प्रत्येक परिवार, स्वास्थ्य संस्थान और समाज की जिम्मेदारी है कि हर माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण, सही परामर्श और निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सफल स्तनपान के तीन प्रमुख सूत्र है,जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ करें,जन्म से पहले छह माह तक केवल माँ का दूध दें तथा छह माह बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं को नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने के फायदे और नहीं कराने पर उन्हें नुकसान के बारे में बताए । उन्होंने बताया कि राजस्थान में संस्थागत प्रसव लगभग 95 प्रतिशत है,ऐसे में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की नियमित काउंसलिंग, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर , होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर तथा विभिन्न पोषण अभियानों के माध्यम से स्तनपान को और बढ़ावा दिया जा जाए । राज्य सरकार अस्पतालों एवं समुदाय स्तर पर स्तनपान परामर्श सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक माँ को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो सके। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि स्तनपान बच्चे के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है और माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है ।प्रत्येक माँ को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान प्रारम्भ करने और अनुशंसित अवधि तक इसे जारी रखने के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत सुनिश्चित की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को शिशु एवं बाल आहार संबंधी गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने परिवारों, समुदायों, नियोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसा सहयोगी वातावरण विकसित करें, जहाँ प्रत्येक माँ को सम्मान, सुरक्षा, सही जानकारी और निरंतर सहयोग मिल सके। इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के राज्य प्रमुख श्री एल. के. राव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोशनीवाल, स्टेट ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी, राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. लीला व्यास एवं सचिव डॉ. नूपुर लौरिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम , राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. रमेश चौधरी, आरसीएच के निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) डॉ. राकेश कुमार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल तथा यूनिसेफ राजस्थान की पोषण विशेषज्ञ श्रीमती मीनाक्षी सिंह उपस्थित थे ।
स्तनपान स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध भविष्य की आधारशिला यूनिसेफ एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं ने स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं की काउंसलिंग कर जागरूक करे जयपुर, 7 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवजात शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी और प्राकृतिक माध्यम है। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सशक्त और स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” रखी गई है।इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह–2026 के अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार ने यूनिसेफ तथा प्रदेश की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर स्तनपान संरक्षण, प्रोत्साहन और समर्थन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है । प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की उपस्थिति में शुक्रवार को शासन सचिवालय में यूनीसेफ़ और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बैठक आयोजित की गई ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार नहीं, बल्कि उसके जीवनभर के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक विकास की मजबूत नींव है। यह कुपोषण, संक्रमण और बाल मृत्यु के जोखिम को कम करने का सबसे सरल, सुरक्षित और किफायती उपाय है। इसलिए प्रत्येक परिवार, स्वास्थ्य संस्थान और समाज की जिम्मेदारी है कि हर माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण, सही परामर्श और निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सफल स्तनपान के तीन प्रमुख सूत्र है,जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ करें,जन्म से पहले छह माह तक केवल माँ का दूध दें तथा छह माह बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं को नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने के फायदे और नहीं कराने पर उन्हें नुकसान के बारे में बताए । उन्होंने बताया कि राजस्थान में संस्थागत प्रसव लगभग 95 प्रतिशत है,ऐसे में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की नियमित काउंसलिंग, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर , होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर तथा विभिन्न पोषण अभियानों के माध्यम से स्तनपान को और बढ़ावा दिया जा जाए । राज्य सरकार अस्पतालों एवं समुदाय स्तर पर स्तनपान परामर्श सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक माँ को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो सके। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि स्तनपान बच्चे के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है और माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है ।प्रत्येक माँ को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान प्रारम्भ करने और अनुशंसित अवधि तक इसे जारी रखने के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत सुनिश्चित की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को शिशु एवं बाल आहार संबंधी गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने परिवारों, समुदायों, नियोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसा सहयोगी वातावरण विकसित करें, जहाँ प्रत्येक माँ को सम्मान, सुरक्षा, सही जानकारी और निरंतर सहयोग मिल सके। इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के राज्य प्रमुख श्री एल. के. राव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोशनीवाल, स्टेट ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी, राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. लीला व्यास एवं सचिव डॉ. नूपुर लौरिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम , राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. रमेश चौधरी, आरसीएच के निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) डॉ. राकेश कुमार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल तथा यूनिसेफ राजस्थान की पोषण विशेषज्ञ श्रीमती मीनाक्षी सिंह उपस्थित थे । स्तनपान स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध भविष्य की आधारशिला यूनिसेफ एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं ने स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं की काउंसलिंग कर जागरूक करे जयपुर, 7 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवजात शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी और प्राकृतिक माध्यम है। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सशक्त और स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” रखी गई है।इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह–2026 के अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार ने यूनिसेफ तथा प्रदेश की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर स्तनपान संरक्षण, प्रोत्साहन और समर्थन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है । प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की उपस्थिति में शुक्रवार को शासन सचिवालय में यूनीसेफ़ और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बैठक आयोजित की गई ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार नहीं, बल्कि उसके जीवनभर के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक विकास की मजबूत नींव है। यह कुपोषण, संक्रमण और बाल मृत्यु के जोखिम को कम करने का सबसे सरल, सुरक्षित और किफायती उपाय है। इसलिए प्रत्येक परिवार, स्वास्थ्य संस्थान और समाज की जिम्मेदारी है कि हर माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण, सही परामर्श और निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सफल स्तनपान के तीन प्रमुख सूत्र है,जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ करें,जन्म से पहले छह माह तक केवल माँ का दूध दें तथा छह माह बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं को नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने के फायदे और नहीं कराने पर उन्हें नुकसान के बारे में बताए । उन्होंने बताया कि राजस्थान में संस्थागत प्रसव लगभग 95 प्रतिशत है,ऐसे में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की नियमित काउंसलिंग, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर , होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर तथा विभिन्न पोषण अभियानों के माध्यम से स्तनपान को और बढ़ावा दिया जा जाए । राज्य सरकार अस्पतालों एवं समुदाय स्तर पर स्तनपान परामर्श सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक माँ को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो सके। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि स्तनपान बच्चे के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है और माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है ।प्रत्येक माँ को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान प्रारम्भ करने और अनुशंसित अवधि तक इसे जारी रखने के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत सुनिश्चित की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को शिशु एवं बाल आहार संबंधी गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने परिवारों, समुदायों, नियोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसा सहयोगी वातावरण विकसित करें, जहाँ प्रत्येक माँ को सम्मान, सुरक्षा, सही जानकारी और निरंतर सहयोग मिल सके। इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के राज्य प्रमुख श्री एल. के. राव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोशनीवाल, स्टेट ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी, राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. लीला व्यास एवं सचिव डॉ. नूपुर लौरिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम , राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. रमेश चौधरी, आरसीएच के निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) डॉ. राकेश कुमार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल तथा यूनिसेफ राजस्थान की पोषण विशेषज्ञ श्रीमती मीनाक्षी सिंह उपस्थित थे ।
- 169 करोड़ के नशे का खात्मा, श्रीगंगानगर पुलिस ने जलाकर नष्ट की हेरोइन, पोस्त और गांजा की बड़ी खेप1
- स्तनपान स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध भविष्य की आधारशिला यूनिसेफ एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं ने स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं की काउंसलिंग कर जागरूक करे जयपुर, 7 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवजात शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी और प्राकृतिक माध्यम है। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सशक्त और स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” रखी गई है।इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह–2026 के अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार ने यूनिसेफ तथा प्रदेश की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर स्तनपान संरक्षण, प्रोत्साहन और समर्थन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है । प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की उपस्थिति में शुक्रवार को शासन सचिवालय में यूनीसेफ़ और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बैठक आयोजित की गई ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार नहीं, बल्कि उसके जीवनभर के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक विकास की मजबूत नींव है। यह कुपोषण, संक्रमण और बाल मृत्यु के जोखिम को कम करने का सबसे सरल, सुरक्षित और किफायती उपाय है। इसलिए प्रत्येक परिवार, स्वास्थ्य संस्थान और समाज की जिम्मेदारी है कि हर माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण, सही परामर्श और निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सफल स्तनपान के तीन प्रमुख सूत्र है,जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ करें,जन्म से पहले छह माह तक केवल माँ का दूध दें तथा छह माह बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं को नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने के फायदे और नहीं कराने पर उन्हें नुकसान के बारे में बताए । उन्होंने बताया कि राजस्थान में संस्थागत प्रसव लगभग 95 प्रतिशत है,ऐसे में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की नियमित काउंसलिंग, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर , होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर तथा विभिन्न पोषण अभियानों के माध्यम से स्तनपान को और बढ़ावा दिया जा जाए । राज्य सरकार अस्पतालों एवं समुदाय स्तर पर स्तनपान परामर्श सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक माँ को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो सके। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि स्तनपान बच्चे के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है और माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है ।प्रत्येक माँ को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान प्रारम्भ करने और अनुशंसित अवधि तक इसे जारी रखने के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत सुनिश्चित की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को शिशु एवं बाल आहार संबंधी गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने परिवारों, समुदायों, नियोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसा सहयोगी वातावरण विकसित करें, जहाँ प्रत्येक माँ को सम्मान, सुरक्षा, सही जानकारी और निरंतर सहयोग मिल सके। इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के राज्य प्रमुख श्री एल. के. राव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोशनीवाल, स्टेट ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी, राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. लीला व्यास एवं सचिव डॉ. नूपुर लौरिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम , राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. रमेश चौधरी, आरसीएच के निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) डॉ. राकेश कुमार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल तथा यूनिसेफ राजस्थान की पोषण विशेषज्ञ श्रीमती मीनाक्षी सिंह उपस्थित थे । स्तनपान स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध भविष्य की आधारशिला यूनिसेफ एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं ने स्तनपान को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं की काउंसलिंग कर जागरूक करे जयपुर, 7 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवजात शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी और प्राकृतिक माध्यम है। इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सशक्त और स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” रखी गई है।इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह–2026 के अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार ने यूनिसेफ तथा प्रदेश की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर स्तनपान संरक्षण, प्रोत्साहन और समर्थन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की है । प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की उपस्थिति में शुक्रवार को शासन सचिवालय में यूनीसेफ़ और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बैठक आयोजित की गई ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु का पहला आहार नहीं, बल्कि उसके जीवनभर के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मानसिक विकास की मजबूत नींव है। यह कुपोषण, संक्रमण और बाल मृत्यु के जोखिम को कम करने का सबसे सरल, सुरक्षित और किफायती उपाय है। इसलिए प्रत्येक परिवार, स्वास्थ्य संस्थान और समाज की जिम्मेदारी है कि हर माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण, सही परामर्श और निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सफल स्तनपान के तीन प्रमुख सूत्र है,जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारम्भ करें,जन्म से पहले छह माह तक केवल माँ का दूध दें तथा छह माह बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखें।उन्होंने निर्देश दिए कि हेल्थ वर्कर और डॉक्टर्स नव प्रसूताओं को नवजात शिशुओं को स्तनपान कराने के फायदे और नहीं कराने पर उन्हें नुकसान के बारे में बताए । उन्होंने बताया कि राजस्थान में संस्थागत प्रसव लगभग 95 प्रतिशत है,ऐसे में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की नियमित काउंसलिंग, होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर , होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर तथा विभिन्न पोषण अभियानों के माध्यम से स्तनपान को और बढ़ावा दिया जा जाए । राज्य सरकार अस्पतालों एवं समुदाय स्तर पर स्तनपान परामर्श सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक माँ को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो सके। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि स्तनपान बच्चे के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है और माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है ।प्रत्येक माँ को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान प्रारम्भ करने और अनुशंसित अवधि तक इसे जारी रखने के लिए परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत सुनिश्चित की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को शिशु एवं बाल आहार संबंधी गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने परिवारों, समुदायों, नियोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसा सहयोगी वातावरण विकसित करें, जहाँ प्रत्येक माँ को सम्मान, सुरक्षा, सही जानकारी और निरंतर सहयोग मिल सके। इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के राज्य प्रमुख श्री एल. के. राव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोशनीवाल, स्टेट ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी, राजस्थान की अध्यक्ष डॉ. लीला व्यास एवं सचिव डॉ. नूपुर लौरिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम , राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. रमेश चौधरी, आरसीएच के निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) डॉ. राकेश कुमार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल तथा यूनिसेफ राजस्थान की पोषण विशेषज्ञ श्रीमती मीनाक्षी सिंह उपस्थित थे ।1
- परिवार ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत : द्वारका जालान न्यू लाइट ज्वैलर्स सभागार में हुआ स्वागत समारोह, जीवन प्रबंधन पर साझा किए प्रेरक विचार श्रीगंगानगर। पुणे से आये प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर एवं समाजसेवी द्वारका जालान का न्यू लाइट ज्वेलर्स सभागार में स्वागत एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने उनका स्वागत-अभिनंदन किया तथा उनके प्रेरणादायी विचारों का लाभ लिया। इस अवसर पर द्वारका जालान ने कहा कि जीवन में जो शेष है, वही सबसे विशेष है। बीते हुए समय को लेकर चिंता और तनाव में रहने के बजाय वर्तमान को स्वीकार करते हुए भविष्य की ओर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने वाला व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सफल, संतुलित और आनंदमय बना सकता है। उन्होंने जीवन के छह महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि परिवार, संस्कार, व्यवहार, व्यापार, स्वास्थ्य और आभार को यदि जीवन में उचित स्थान दिया जाए तो व्यक्ति न केवल सफलता प्राप्त करता है, बल्कि एक स्वस्थ, सुखी और संतुलित जीवन भी जीता है। द्वारका जालान ने वर्तमान समय में बिखरते पारिवारिक मूल्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस संसार में व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत उसका परिवार है। भौतिक उपलब्धियों से ऊपर उठकर परिवार प्रबंधन, आपसी संवाद और रिश्तों को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अच्छे संस्कार अपनाने तथा गुड पेरेंटिंग के माध्यम से परिवारों को सशक्त बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सरदार दिलदार सिंह बीर एवं सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ जैन ने द्वारका जालान का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर बनवारी लाल गोयल, वीरेंद्र वैद्य, नरेंद्र चांगिया, राजकुमार जैन, विजय भोला, राजकुमार सोनी, विनोद बिहानी, जगीर फार्मा, बलबीर सिंह, संजीव नारंग, प्रीति बीर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1
- भांभू बुक डिपो क्लोज हो रहा है स्टेशनरी सामान अब बहुत सस्ते दामों पर2
- उकलाना ढाणी गोपाल मे कांवड़ियों के लिए लगाया गया राहत शिविर उकलाना,,,ढाणी गोपाल मे कांवड़ियों का आना शुरू हो गया है यहां पर कांवड़ियों की सेवा के लिए भोजन रहने की व्यवस्था दवाईयां सहित गांव वाले कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं ताकि कांवड़ियों को किसी तरह की दिक्कत ना हो और अपने गंतव्य तक पहूंच कर भोले नाथ को शिवरात्रि पर जल चढा सकें1
- बिजली तंत्र सुदृढ़ीकरण को लेकर सांसद कस्वां एक्शन मोड में: कलेक्टर और डिस्कॉम अधिकारियों संग ली मैराथन बैठक, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल भी रहे मौजूद चूरू / सुजानगढ़। क्षेत्र में सुचारू बिजली आपूर्ति और विद्युत ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से सांसद राहुल कस्वां की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत आयोजित इस बैठक में जिला कलेक्टर सहित जोधपुर डिस्कॉम के तमाम उच्चाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने भी शिरकत की और क्षेत्रीय बिजली समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। बैठक के दौरान सांसद राहुल कस्वां ने RDSS योजना के अंतर्गत जिले में चल रहे और स्वीकृत विकास कार्यों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजना के तहत मंजूर किए गए सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में और पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को इसका शीघ्र लाभ मिल सके। सांसद कस्वां ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कम वोल्टेज और बार-बार हो रही बिजली कटौती की समस्या पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को इसका स्थायी समाधान निकालने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पुराने और जर्जर तारों व पोलों को बदलने, नए जीएसएस (GSS) के निर्माण और फीडर सेपरेशन के कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया गया ताकि भविष्य में विद्युत तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। किसान और आम उपभोक्ताओं की समस्याओं को रेखांकित करते हुए सांसद ने कृषि कनेक्शन जारी करने में हो रही देरी को तुरंत दूर करने तथा आमजन की विद्युत संबंधी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए। वहीं बैठक में मौजूद सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने सुजानगढ़ क्षेत्र में ढीले तारों, कृषि कनेक्शनों के लंबित मामलों और आपूर्ति से जुड़ी जनसमस्याओं को प्रमुखता से रखा, जिस पर डिस्कॉम अधिकारियों ने शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया। अंत में सांसद कस्वां ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिजली व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारी धरातल पर उतरकर समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित करें।1
- पत्रकारों की अनदेखी पर श्रीगंगानगर में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त1
- छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर एबीवीपी का हंगामाखेज प्रदर्शन छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर एबीवीपी का हंगामाखेज प्रदर्शन पुलिस से नोकझोंक, कुलपति कार्यालय के गेट पर चढ़े रास्ताजाम किया जोधपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान परिषद कार्यकर्ताओं ने छात्रसंघ चुनाव शीघ्र कराने की मांग उठाते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ता और छात्र कार्यालय के प्रवेश द्वार पर चढ़ गए। उन्होंने वहां रास्ताजाम भी किया। इसके बाद आक्रोशित कार्यकर्ता जबरन परिसर के अंदर दाखिल हो गए और काफी देर तक नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर दिया, जिससे कार्यालय के अंदर मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और अन्य लोग बाहर नहीं जा पाए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने जब गेट खुलवाने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों और छात्रों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। धक्का-मुक्की के बाद एबीवीपी कार्यकर्ता वहीं मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए और विश्वविद्यालय के कुलपति (कुलगुरु) को मौके पर बुलाकर उनसे ही बातचीत करने की मांग पर अड़ गए। इस दौरान जब विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार छात्रों से समझाइश और बातचीत करने के लिए पहुंचे, तो प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने उनसे बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कार्यालय के बाहर रास्ताजाम भी किया। यह है प्रमुख मांगें एबीवीपी की प्रमुख मांग छात्रसंघ चुनावों की शीघ्र बहाली की है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में समान अकादमिक कैलेंडर लागू कर प्रवेश, शिक्षण, परीक्षा, मूल एवं परिणाम निर्धारित समयसीमा में सम्पन्न करने, विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों पर नियमित नियुक्तियां करने, प्रदेश के समस्त राजकीय महाविद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति करने और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के स्वतंत्र विभाग स्थापित कर विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियमित नियुक्ति करने की भी मांग है।1