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भाई की कलाई से पहले मां बिरासिनी की कलाई सजी, पाली में अनोखी राखी परंपरा भाई की कलाई से पहले मां बिरासिनी की कलाई सजी, पाली में अनोखी राखी परंपरा बिरसिंहपुर पाली रक्षाबंधन के पर्व पर उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासिनी शक्तिपीठ में श्रद्धा और परंपरा का अनूठा नजारा देखने को मिला। सुबह से ही माता के दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। लोग अपने घरों में रक्षाबंधन मनाने से पहले मां बिरासिनी के मंदिर पहुंचे और माता को राखी समर्पित की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ नजर आई। श्रद्धालु पूजा की सामग्री और राखी लेकर माता के दरबार में पहुंचे। भक्तों ने मां बिरासिनी की पूजा-अर्चना की और उनके चरणों में राखी अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा की कामना की। इस दौरान मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा। माता को राखी बांधकर शुरू होता है रक्षाबंधन मंदिर से जुड़े गोपाल पंडा ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व पर मां बिरासिनी जी को राखी बांधी गई। उन्होंने बताया कि यहां लोगों की आस्था और परंपरा है कि रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले मां बिरासिनी जी को राखी समर्पित की जाती है। माता को राखी अर्पित करने के बाद श्रद्धालु अपने घर जाते हैं और वहां भाई-बहन मिलकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए मां बिरासिनी को राखी समर्पित करना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भक्त माता को अपना रक्षक मानते हुए उनके चरणों में राखी अर्पित करते हैं और परिवार पर माता की कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। सुबह से भक्तों ने लगाई मंदिर में हाजिरी रक्षाबंधन को लेकर मंदिर में विशेष उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में माता के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर आए और पूजा-अर्चना करने के बाद माता को राखी चढ़ाई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। भक्तों ने माता के दर्शन के साथ प्रसाद अर्पित किया और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की। रक्षाबंधन के दिन मां बिरासिनी के दरबार में उमड़ी भीड़ ने क्षेत्र में माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था को भी सामने रखा। घर के त्योहार से पहले माता का आशीर्वाद बिरसिंहपुर पाली की यह परंपरा रक्षाबंधन को एक अलग पहचान देती है। यहां कई श्रद्धालुओं के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले माता को राखी अर्पित करना जरूरी माना जाता है। भक्त पहले मां बिरासिनी का आशीर्वाद लेते हैं और फिर घर जाकर रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं। इस तरह रक्षाबंधन के अवसर पर मां बिरासिनी शक्तिपीठ में श्रद्धा, विश्वास और पारिवारिक परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। माता के दरबार में राखी समर्पित कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की कामना की।

3 hrs ago
user_Tapas Gupta
Tapas Gupta
पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

भाई की कलाई से पहले मां बिरासिनी की कलाई सजी, पाली में अनोखी राखी परंपरा भाई की कलाई से पहले मां बिरासिनी की कलाई सजी, पाली में अनोखी राखी परंपरा बिरसिंहपुर पाली रक्षाबंधन के पर्व पर उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासिनी शक्तिपीठ में श्रद्धा और परंपरा का अनूठा नजारा देखने को मिला। सुबह से ही माता के दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। लोग अपने घरों में रक्षाबंधन मनाने से पहले मां बिरासिनी के मंदिर पहुंचे और माता को राखी समर्पित की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ नजर आई। श्रद्धालु पूजा की सामग्री और राखी लेकर माता के दरबार में पहुंचे। भक्तों ने मां बिरासिनी की पूजा-अर्चना की और उनके चरणों में राखी अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा की कामना की। इस दौरान मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा। माता को राखी बांधकर शुरू होता है रक्षाबंधन मंदिर से जुड़े गोपाल

पंडा ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व पर मां बिरासिनी जी को राखी बांधी गई। उन्होंने बताया कि यहां लोगों की आस्था और परंपरा है कि रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले मां बिरासिनी जी को राखी समर्पित की जाती है। माता को राखी अर्पित करने के बाद श्रद्धालु अपने घर जाते हैं और वहां भाई-बहन मिलकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए मां बिरासिनी को राखी समर्पित करना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भक्त माता को अपना रक्षक मानते हुए उनके चरणों में राखी अर्पित करते हैं और परिवार पर माता की कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। सुबह से भक्तों ने लगाई मंदिर में हाजिरी रक्षाबंधन को लेकर मंदिर में विशेष उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में माता के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर आए और पूजा-अर्चना करने के बाद माता को राखी चढ़ाई। मंदिर परिसर

में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। भक्तों ने माता के दर्शन के साथ प्रसाद अर्पित किया और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की। रक्षाबंधन के दिन मां बिरासिनी के दरबार में उमड़ी भीड़ ने क्षेत्र में माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था को भी सामने रखा। घर के त्योहार से पहले माता का आशीर्वाद बिरसिंहपुर पाली की यह परंपरा रक्षाबंधन को एक अलग पहचान देती है। यहां कई श्रद्धालुओं के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले माता को राखी अर्पित करना जरूरी माना जाता है। भक्त पहले मां बिरासिनी का आशीर्वाद लेते हैं और फिर घर जाकर रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं। इस तरह रक्षाबंधन के अवसर पर मां बिरासिनी शक्तिपीठ में श्रद्धा, विश्वास और पारिवारिक परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। माता के दरबार में राखी समर्पित कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की कामना की।

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    भाई की कलाई से पहले मां बिरासिनी की कलाई सजी, पाली में अनोखी राखी परंपरा
भाई की कलाई से पहले मां बिरासिनी की कलाई सजी, पाली में अनोखी राखी परंपरा
बिरसिंहपुर पाली
रक्षाबंधन के पर्व पर उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासिनी शक्तिपीठ में श्रद्धा और परंपरा का अनूठा नजारा देखने को मिला। सुबह से ही माता के दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। लोग अपने घरों में रक्षाबंधन मनाने से पहले मां बिरासिनी के मंदिर पहुंचे और माता को राखी समर्पित की।
मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ नजर आई। श्रद्धालु पूजा की सामग्री और राखी लेकर माता के दरबार में पहुंचे। भक्तों ने मां बिरासिनी की पूजा-अर्चना की और उनके चरणों में राखी अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा की कामना की। इस दौरान मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा।
माता को राखी बांधकर शुरू होता है रक्षाबंधन
मंदिर से जुड़े गोपाल पंडा ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व पर मां बिरासिनी जी को राखी बांधी गई। उन्होंने बताया कि यहां लोगों की आस्था और परंपरा है कि रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले मां बिरासिनी जी को राखी समर्पित की जाती है। माता को राखी अर्पित करने के बाद श्रद्धालु अपने घर जाते हैं और वहां भाई-बहन मिलकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए मां बिरासिनी को राखी समर्पित करना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भक्त माता को अपना रक्षक मानते हुए उनके चरणों में राखी अर्पित करते हैं और परिवार पर माता की कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
सुबह से भक्तों ने लगाई मंदिर में हाजिरी
रक्षाबंधन को लेकर मंदिर में विशेष उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में माता के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर आए और पूजा-अर्चना करने के बाद माता को राखी चढ़ाई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा।
भक्तों ने माता के दर्शन के साथ प्रसाद अर्पित किया और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की। रक्षाबंधन के दिन मां बिरासिनी के दरबार में उमड़ी भीड़ ने क्षेत्र में माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था को भी सामने रखा।
घर के त्योहार से पहले माता का आशीर्वाद
बिरसिंहपुर पाली की यह परंपरा रक्षाबंधन को एक अलग पहचान देती है। यहां कई श्रद्धालुओं के लिए भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले माता को राखी अर्पित करना जरूरी माना जाता है। भक्त पहले मां बिरासिनी का आशीर्वाद लेते हैं और फिर घर जाकर रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं।
इस तरह रक्षाबंधन के अवसर पर मां बिरासिनी शक्तिपीठ में श्रद्धा, विश्वास और पारिवारिक परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। माता के दरबार में राखी समर्पित कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की कामना की।
    user_Tapas Gupta
    Tapas Gupta
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली में नवनिर्मित नाली वार्ड 5 में राजेश वंशकार के नाली में गिरने से दर्दनाक मौत खुली नाली बनी मौत का कारण, बुजुर्ग की गिरने से मौत बिरसिंहपुर -- पाली नगर पालिका क्षेत्र में लापरवाही का खौफनाक नतीजा सामने आया है। वार्ड नंबर 10 निवासी राजेश बंशकार पिता सत्या वंशकार उम्र लगभग 50 वर्ष की वार्ड नंबर 5 मे खुली नाली में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश बंशकार 2 बजे किसी काम से वार्ड नंबर 5 की ओर गए थे। खुली पड़ी गहरी नाली में रपट कर उसमें गिर गए। काफी देर तक किसी को पता नहीं चला। स्थानीय लोगों ने शव देखा तो परिजनों और पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि वार्ड 5 में लंबे समय से नाली खुली पड़ी है, जिसकी शिकायत कई बार नगर पालिका से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि शव को पीएम के लिए ले जाने के लिए 100 वाहन (शव वाहन) समय पर उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे परिजनों को घंटों परेशान के बाद पिकअप में शव ले जाना पड़ा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक करण स्पष्ट नहीं हुआ
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    उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली में नवनिर्मित नाली वार्ड 5 में राजेश वंशकार के नाली में गिरने से दर्दनाक मौत
खुली नाली बनी मौत का कारण, बुजुर्ग की गिरने से मौत
बिरसिंहपुर -- पाली नगर पालिका क्षेत्र में लापरवाही का खौफनाक नतीजा सामने आया है। वार्ड नंबर 10 निवासी राजेश बंशकार पिता सत्या वंशकार उम्र लगभग 50 वर्ष की वार्ड नंबर 5 मे खुली नाली में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश बंशकार 2 बजे किसी काम से वार्ड नंबर 5 की ओर गए थे। खुली पड़ी गहरी नाली में रपट कर उसमें गिर गए। काफी देर तक किसी को पता नहीं चला। स्थानीय लोगों ने शव देखा तो परिजनों और पुलिस को सूचना दी।
बताया जा रहा है कि वार्ड 5 में लंबे समय से नाली खुली पड़ी है, जिसकी शिकायत कई बार नगर पालिका से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।
सबसे शर्मनाक बात यह रही कि शव को पीएम के लिए ले जाने के लिए 100 वाहन (शव वाहन) समय पर उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे परिजनों को घंटों परेशान के बाद पिकअप में शव ले जाना पड़ा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक करण स्पष्ट नहीं हुआ
    user_Om Agrawal
    Om Agrawal
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • राजेश वंशकार पिता सत्या वंशकार वार्ड नंबर 5 खुली नाली मे रपट कर गिरने से मौत शव ले जाने के लिए नहीं मिला शव वहन निजी पिकअप से ले जाया गया शव खुली नाली बनी मौत का कारण, बुजुर्ग की गिरने से मौत बिरसिंहपुर -- पाली नगर पालिका क्षेत्र में लापरवाही का खौफनाक नतीजा सामने आया है। वार्ड नंबर 10 निवासी राजेश बंशकार पिता सत्या वंशकार उम्र लगभग 50 वर्ष की वार्ड नंबर 5 मे खुली नाली में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश बंशकार 2 बजे किसी काम से वार्ड नंबर 5 की ओर गए थे। खुली पड़ी गहरी नाली में रपट कर उसमें गिर गए। काफी देर तक किसी को पता नहीं चला। स्थानीय लोगों ने शव देखा तो परिजनों और पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि वार्ड 5 में लंबे समय से नाली खुली पड़ी है, जिसकी शिकायत कई बार नगर पालिका से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि शव को पीएम के लिए ले जाने के लिए 100 वाहन (शव वाहन) समय पर उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे परिजनों को घंटों परेशान के बाद पिकअप में शव ले जाना पड़ा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक करण स्पष्ट नहीं हुआ
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    राजेश वंशकार पिता सत्या वंशकार वार्ड नंबर 5 खुली नाली मे रपट कर गिरने से मौत शव ले जाने के लिए नहीं मिला शव वहन निजी पिकअप से ले जाया गया शव
खुली नाली बनी मौत का कारण, बुजुर्ग की गिरने से मौत
बिरसिंहपुर -- पाली नगर पालिका क्षेत्र में लापरवाही का खौफनाक नतीजा सामने आया है। वार्ड नंबर 10 निवासी राजेश बंशकार पिता सत्या वंशकार उम्र लगभग 50 वर्ष की वार्ड नंबर 5 मे खुली नाली में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश बंशकार 2 बजे किसी काम से वार्ड नंबर 5 की ओर गए थे। खुली पड़ी गहरी नाली में रपट कर उसमें गिर गए। काफी देर तक किसी को पता नहीं चला। स्थानीय लोगों ने शव देखा तो परिजनों और पुलिस को सूचना दी।
बताया जा रहा है कि वार्ड 5 में लंबे समय से नाली खुली पड़ी है, जिसकी शिकायत कई बार नगर पालिका से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।
सबसे शर्मनाक बात यह रही कि शव को पीएम के लिए ले जाने के लिए 100 वाहन (शव वाहन) समय पर उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे परिजनों को घंटों परेशान के बाद पिकअप में शव ले जाना पड़ा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक करण स्पष्ट नहीं हुआ
    user_Shambhu nath Soni
    Shambhu nath Soni
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • LIVE: उमरिया में रक्षाबंधन की धूम | जिला जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी | PTS उमरिया उमरिया। जिले में रक्षाबंधन का पावन पर्व उत्साह और भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। पीटीएस परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक श्रीमती स्वाति मुराब ने प्रशिक्षणरत नवआरक्षकों को तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधा और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। वहीं ब्रह्माकुमारी बहनों ने भी नवआरक्षकों को रक्षा सूत्र बांधकर भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास, सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश दिया। इधर जिला जेल उमरिया में भी बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई। भाइयों ने बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। जेल प्रशासन द्वारा नियमों को ध्यान में रखते हुए रक्षाबंधन के आयोजन की विशेष व्यवस्था की गई। 📍 स्थान: उमरिया, मध्य प्रदेश NEWS 24 PUBLIC TV पर देखिए उमरिया और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरें। वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share 🔄 | Subscribe 🔔 जरूर करें।
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    LIVE: उमरिया में रक्षाबंधन की धूम | जिला जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी | PTS उमरिया
उमरिया। जिले में रक्षाबंधन का पावन पर्व उत्साह और भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। पीटीएस परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक श्रीमती स्वाति मुराब ने प्रशिक्षणरत नवआरक्षकों को तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधा और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
वहीं ब्रह्माकुमारी बहनों ने भी नवआरक्षकों को रक्षा सूत्र बांधकर भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास, सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
इधर जिला जेल उमरिया में भी बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई। भाइयों ने बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। जेल प्रशासन द्वारा नियमों को ध्यान में रखते हुए रक्षाबंधन के आयोजन की विशेष व्यवस्था की गई।
📍 स्थान: उमरिया, मध्य प्रदेश
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    NEWS 24 PUBLIC TV
    Media company बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • ऐतिहासिक हनुमान मंदिर की विवाद को लेकर आंदोलन की चेतावनी *💥उमरिया से बड़ी खबर* ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के विवाद को लेकर आंदोलन की चेतावनी मध्य प्रदेश उमरिया जिले की चंदिया तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बांका स्थित ऐतिहासिक धौरखोह हनुमान मंदिर के मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपते हुए समस्या के शीघ्र निराकरण की मांग की है। आवेदन में बताया गया है कि मंदिर अत्यंत प्राचीन है और आसपास के करीब 100 गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां प्रत्येक मंगलवार को विशाल मेला लगता है, जिसमें कई प्रांतों से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आवेदकों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व द्वारा मंदिर क्षेत्र में अनाधिकृत कब्जा करने और मंदिर के जीर्णोद्धार व निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की धमकी दी जा रही है। आवेदन के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के विवादित रवैये के चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनती रहती है। साथ ही दावा किया गया है कि मंदिर राजस्व भूमि पर स्थित है, जिसका खसरा नंबर 584/1 और 585/1 है तथा लगभग 16 एकड़ भूमि मंदिर क्षेत्र से संबंधित बताई गई है। आवेदकों ने राजस्व एवं वन विभाग की उच्चस्तरीय समिति बनाकर मामले का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर उचित समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र की जनता व्यापक आंदोलन करेगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। **आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और क्षेत्रीय विधायक को भी भेजी गई है।**
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    ऐतिहासिक हनुमान मंदिर की विवाद को लेकर आंदोलन की चेतावनी
*💥उमरिया से बड़ी खबर*
ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के विवाद को लेकर आंदोलन की चेतावनी
मध्य प्रदेश 
उमरिया जिले की चंदिया तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बांका स्थित ऐतिहासिक धौरखोह हनुमान मंदिर के मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपते हुए समस्या के शीघ्र निराकरण की मांग की है।
आवेदन में बताया गया है कि मंदिर अत्यंत प्राचीन है और आसपास के करीब 100 गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां प्रत्येक मंगलवार को विशाल मेला लगता है, जिसमें कई प्रांतों से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आवेदकों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व द्वारा मंदिर क्षेत्र में अनाधिकृत कब्जा करने और मंदिर के जीर्णोद्धार व निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की धमकी दी जा रही है।
आवेदन के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के विवादित रवैये के चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनती रहती है। साथ ही दावा किया गया है कि मंदिर राजस्व भूमि पर स्थित है, जिसका खसरा नंबर 584/1 और 585/1 है तथा लगभग 16 एकड़ भूमि मंदिर क्षेत्र से संबंधित बताई गई है।
आवेदकों ने राजस्व एवं वन विभाग की उच्चस्तरीय समिति बनाकर मामले का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर उचित समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र की जनता व्यापक आंदोलन करेगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
**आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और क्षेत्रीय विधायक को भी भेजी गई है।**
    user_ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन, हाथ ठेले पर शक्कर-गैस सिलेंडर रख जताया विरोध। महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन, हाथ ठेले पर शक्कर-गैस सिलेंडर रख जताया विरोध आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर बढ़ती महंगाई के खिलाफ गुरुवार को प्रदेशभर में आयोजित प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के तहत मानपुर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथ ठेले पर शक्कर, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल सहित महंगाई से जुड़ी वस्तुएं रखकर मुख्य बाजार से बस स्टैंड तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “भाजपा मुर्दाबाद”, “शक्कर के दाम कम करो”, “गैस के दाम कम करो”, “बिजली के दाम कम करो” और “E-20 पेट्रोल बंद करो” जैसे नारों से बाजार गूंज उठा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस द्वारा शक्कर, E-20 पेट्रोल, बिजली बिल और गैस सिलेंडर को प्रतीकात्मक विरोध का माध्यम बनाकर “महंगाई के खिलाफ जनता की आवाज” बुलंद करने का आह्वान किया गया था। इसी क्रम में मानपुर में हाथ ठेले पर आवश्यक वस्तुएं रखकर प्रदर्शन किया गया। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष उमाशंकर पटेल ने कहा कि महंगाई का सीधा असर आम परिवार की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है। कांग्रेस जनता की इसी परेशानी को लेकर सड़क पर उतरी है। उन्होंने कहा कि जब तक आम आदमी को महंगाई से राहत नहीं मिलती, कांग्रेस जनहित के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। प्रदर्शन में पूर्व जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी शारदा प्रसाद गौतम, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी तिलक राज सिंह, राम गोपाल दहिया, ज्ञान प्रकाश पटेल, राम निवास चतुर्वेदी, युवा नेता विजय गौतम, रोशनी सिंह, रवि सेन, ऋतिक प्यासी, रामनरेश सिंह, रामलाल कोल, विष्णु तिवारी, पंकज गौतम, जवाहर केवट, धर्मदास गुप्ता, श्याम कल्याण पटेल, प्रदीप पटेल, नरेंद्र पटेल, मूरत राम केवट, रामचंद्र पाल, आशुतोष पटेल, रवि पटेल, महेंद्र पटेल, सचिन पटेल, सुरेश पटेल, सुंदर केवट, विकेश केवट, कमल केवट, अशोक पटेल, राम सुशील पटेल सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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    महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन, हाथ ठेले पर शक्कर-गैस सिलेंडर रख जताया विरोध।

महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन, हाथ ठेले पर शक्कर-गैस सिलेंडर रख जताया विरोध
आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर बढ़ती महंगाई के खिलाफ गुरुवार को प्रदेशभर में आयोजित प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के तहत मानपुर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथ ठेले पर शक्कर, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल सहित महंगाई से जुड़ी वस्तुएं रखकर मुख्य बाजार से बस स्टैंड तक विरोध मार्च निकाला।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “भाजपा मुर्दाबाद”, “शक्कर के दाम कम करो”, “गैस के दाम कम करो”, “बिजली के दाम कम करो” और “E-20 पेट्रोल बंद करो” जैसे नारों से बाजार गूंज उठा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस द्वारा शक्कर, E-20 पेट्रोल, बिजली बिल और गैस सिलेंडर को प्रतीकात्मक विरोध का माध्यम बनाकर “महंगाई के खिलाफ जनता की आवाज” बुलंद करने का आह्वान किया गया था। इसी क्रम में मानपुर में हाथ ठेले पर आवश्यक वस्तुएं रखकर प्रदर्शन किया गया।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष उमाशंकर पटेल ने कहा कि महंगाई का सीधा असर आम परिवार की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है। कांग्रेस जनता की इसी परेशानी को लेकर सड़क पर उतरी है। उन्होंने कहा कि जब तक आम आदमी को महंगाई से राहत नहीं मिलती, कांग्रेस जनहित के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
प्रदर्शन में पूर्व जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी शारदा प्रसाद गौतम, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी तिलक राज सिंह, राम गोपाल दहिया, ज्ञान प्रकाश पटेल, राम निवास चतुर्वेदी, युवा नेता विजय गौतम, रोशनी सिंह, रवि सेन, ऋतिक प्यासी, रामनरेश सिंह, रामलाल कोल, विष्णु तिवारी, पंकज गौतम, जवाहर केवट, धर्मदास गुप्ता, श्याम कल्याण पटेल, प्रदीप पटेल, नरेंद्र पटेल, मूरत राम केवट, रामचंद्र पाल, आशुतोष पटेल, रवि पटेल, महेंद्र पटेल, सचिन पटेल, सुरेश पटेल, सुंदर केवट, विकेश केवट, कमल केवट, अशोक पटेल, राम सुशील पटेल सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, एंकर नेपाल में हुई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की दो बेटियां फंस गई थीं। कोतमा के मंजू माझी की बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी जो की ग्वालियर में रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रहे थे जो की छुट्टी के अवसर पर नेपाल घूमने गई हुई थी वह नेपाल के जल त्रासदी में फस गई थी, नेपाल में फंसने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई थी। दो दिनों से पलक और पल्लवी से कोई संपर्क नहीं हो रहा था, जिसके कारण परिजन काफी परेशान थे और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे थे। हालांकि अब दोनों बेटियां सुरक्षित हैं। सरकार की मदद से दोनों को सुरक्षित निकालकर नेपाल के पोखरा पहुंचाया गया है। दोनों के कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होने की उम्मीद है। बेटियों के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली है। नेपाल में आई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की रहने वाली मंजू माझी की दो बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी भी फंस गई थीं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार में चिंता का माहौल था। हालांकि प्रशासन और सरकार के प्रयासों के बाद दोनों बेटियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। फिलहाल दोनों नेपाल के पोखरा में सुरक्षित हैं। परिजनों के मुताबिक, दोनों बेटियां अब सुरक्षित हैं और कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होंगी। पिता ने फोन पर दोनों बेटियों से बात की है। बेटियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। नेपाल में फंसी अनूपपुर की दोनों बेटियों को सुरक्षित निकालने में सरकार की मदद से परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब परिवार को दोनों के सकुशल घर लौटने का इंतजार है। बाइट रत्नांबर शुक्ला थाना प्रभारी कोतमा। बाईट: मंजू माझी, बच्चियों के पिता। @⁨News Nation Input Sachin Ji⁩ रिपोर्ट, आदर्श दुबे अनूपपुर
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    नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, 
नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, 
एंकर नेपाल में हुई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की दो बेटियां फंस गई थीं। कोतमा के मंजू माझी की बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी जो की ग्वालियर में रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रहे थे जो की छुट्टी के अवसर पर नेपाल घूमने गई हुई थी वह नेपाल के जल त्रासदी में फस गई थी, नेपाल में फंसने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई थी। दो दिनों से पलक और पल्लवी से कोई संपर्क नहीं हो रहा था, जिसके कारण परिजन काफी परेशान थे और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे थे। हालांकि अब दोनों बेटियां सुरक्षित हैं। सरकार की मदद से दोनों को सुरक्षित निकालकर नेपाल के पोखरा पहुंचाया गया है। दोनों के कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होने की उम्मीद है। बेटियों के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली है।
नेपाल में आई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की रहने वाली मंजू माझी की दो बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी भी फंस गई थीं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार में चिंता का माहौल था।
हालांकि प्रशासन और सरकार के प्रयासों के बाद दोनों बेटियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। फिलहाल दोनों नेपाल के पोखरा में सुरक्षित हैं। परिजनों के मुताबिक, दोनों बेटियां अब सुरक्षित हैं और कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होंगी। पिता ने फोन पर दोनों बेटियों से बात की है। बेटियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। नेपाल में फंसी अनूपपुर की दोनों बेटियों को सुरक्षित निकालने में सरकार की मदद से परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब परिवार को दोनों के सकुशल घर लौटने का इंतजार है।
बाइट रत्नांबर शुक्ला थाना प्रभारी कोतमा।
बाईट: मंजू माझी, बच्चियों के पिता।
@⁨News Nation Input Sachin Ji⁩ 
रिपोर्ट, आदर्श दुबे अनूपपुर
    user_आदर्श दुबे
    आदर्श दुबे
    Yoga instructor अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अमरकंटक में मनाया गया श्रावणी पर्व पुरोहितों-ब्राह्मणों ने मां नर्मदा के रामघाट में लगाई पुण्य की डुबकी शास्त्रोक्त विधि से किया श्रावणी कर्म अनूपपूर/अमरकंटक - प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रावण मास की पूर्णाहुति के अवसर पर शुक्रवार, 28 अगस्त 26 को श्रावण पूर्णिमा एवं शतभिषा नक्षत्र के पावन संयोग में श्रावणी पर्व श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पुरोहितों, ब्राह्मणों, पंडितों एवं विप्रजनों ने पतित पावनी पुण्य सलिला मां नर्मदा के रामघाट तट पर विधि-विधानपूर्वक श्रावणी कर्म संपन्न किया। भारतीय सनातन परंपरा में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह दिवस वैदिक संस्कारों, ऋषि परंपरा, स्वाध्याय, संकल्प और आत्मशुद्धि से जुड़ा हुआ है। ब्राह्मण समाज द्वारा इस अवसर पर श्रावणी कर्म एवं उपाकर्म की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। वैदिक परंपरा में श्रावण पूर्णिमा को ऋषियों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने, वेदाध्ययन की पुनर्स्मृति तथा आत्मिक शुद्धि का पावन अवसर माना गया है। मां नर्मदा के पावन तट पर वैदिक परंपरा का निर्वहन श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रातःकाल से ही रामघाट पर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। मां नर्मदा के तट पर पहुंचे पुरोहितों एवं ब्राह्मणों ने सर्वप्रथम पुण्य सलिला नर्मदा का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक स्नान किया। नर्मदा की पवित्र जलधारा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद शास्त्रोक्त विधि से श्रावणी कर्म प्रारंभ किया गया। मान्यता है कि नदियां भारतीय संस्कृति में केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की आधारभूमि रही हैं। वहीं अमरकंटक में मां नर्मदा का उद्गम होने के कारण नर्मदा तट का धार्मिक महत्व और भी विशिष्ट हो जाता है। यहां मां नर्मदा के तट पर किया गया स्नान, पूजन, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है। रामघाट पर मंत्रोच्चार के साथ श्रावणी कर्म का आयोजन हुआ। वैदिक ऋचाओं एवं मंत्रों की गूंज से नर्मदा तट का वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्राचीन ऋषि परंपरा और वैदिक संस्कृति स्वयं मां नर्मदा के तट पर साकार हो उठी हो। लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने लिया हिस्सा स्थानीय मृत्युंजय आश्रम के पुरोहितों एवं ब्राह्मणों सहित नगर के बड़ी संख्या में विप्रजन इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने श्रावणी कर्म में सहभागिता की। शांति कुटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज, मृत्युंजय आश्रम के पंडित योगेश दुबे, बिहारी लाल तिवारी, पंडित संदीप उपाध्याय सहित अनेक पुरोहित एवं विप्रजन उपस्थित रहे। रामघाट में श्रावणी कर्म का आयोजन पंडित रवि महाराज द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उपस्थित ब्राह्मणों ने परंपरागत विधि से संकल्प लेकर श्रावणी कर्म किया। नर्मदा उद्गम कुंड में भी गूंजे वैदिक मंत्र श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा के उद्गम स्थल परिसर स्थित पवित्र नर्मदा कुंड में भी श्रावणी कर्म का आयोजन किया गया। नर्मदा मंदिर के पुजारी कामता प्रसाद द्विवेदी (नीलू महाराज) की उपस्थिति एवं नेतृत्व में ब्राह्मणों ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया। इस अवसर पर उमेश द्विवेदी (बंटी महाराज), राजेश द्विवेदी (बल्लू महाराज), कमलेश द्विवेदी, जीतेंद्र द्विवेदी धर्मेंद्र द्विवेदी हर्ष द्विवेदी रूपेश द्विवेदी उत्तम द्विवेदी सहित अन्य विप्रजन उपस्थित रहे। नर्मदा उद्गम कुंड में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन एवं धार्मिक कर्मकांड के साथ श्रावणी पर्व की परंपरा निभाई गई। ऋषि परंपरा और वेद संस्कृति से जुड़ा है श्रावणी पर्व श्रावणी पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु, ऋषि और वेद परंपरा के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी माना जाता है। प्राचीन काल में इसी समय ऋषि-मुनियों के आश्रमों में वेदाध्ययन एवं स्वाध्याय की परंपराओं को विशेष रूप से महत्व दिया जाता था। ब्राह्मणों के लिए यह आत्मसंस्कार, स्वाध्याय, संयम और अपने धार्मिक दायित्वों के पुनः स्मरण का अवसर रहा है। श्रावणी कर्म के माध्यम से सनातन परंपरा में यह भाव व्यक्त किया जाता है कि ज्ञान की परंपरा निरंतर चलती रहे, वेदों की वाणी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहे और समाज में धर्म, संस्कार एवं सदाचार की भावना बनी रहे। इसी वैदिक भावभूमि के कारण श्रावणी पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ऋषि-स्मरण, वेद-संरक्षण, आत्मशुद्धि और सनातन संस्कारों के पुनर्स्मरण का अवसर मानी जाती है। अमरकंटक में जीवंत हुई सनातन संस्कृति श्रावण मास के अंतिम दिवस अमरकंटक में रामघाट से लेकर नर्मदा उद्गम कुंड तक धार्मिक आस्था और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। एक ओर मां नर्मदा की कल-कल बहती पावन धारा, दूसरी ओर वैदिक मंत्रों की गूंज और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान—पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना रहे थे। पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के बीच श्रावणी पर्व का यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत का प्रतीक बना। ब्राह्मणों एवं पुरोहितों द्वारा परंपरागत रूप से किए गए श्रावणी कर्म ने नई पीढ़ी को भी वैदिक संस्कारों और ऋषि परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया। मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धा और वैदिक मंत्रों के मध्य संपन्न श्रावणी पर्व के साथ ही श्रावण मास का धार्मिक अनुष्ठानिक क्रम भी पूर्ण हुआ। पूरे आयोजन में धर्म, वेद, संस्कार, प्रकृति और मां नर्मदा के प्रति आस्था का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
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    वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अमरकंटक में मनाया गया श्रावणी पर्व


पुरोहितों-ब्राह्मणों ने मां नर्मदा के रामघाट में लगाई पुण्य की डुबकी शास्त्रोक्त विधि से किया श्रावणी कर्म
अनूपपूर/अमरकंटक  -  
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रावण मास की पूर्णाहुति के अवसर पर शुक्रवार, 28 अगस्त 26 को श्रावण पूर्णिमा एवं शतभिषा नक्षत्र के पावन संयोग में श्रावणी पर्व श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पुरोहितों, ब्राह्मणों, पंडितों एवं विप्रजनों ने पतित पावनी पुण्य सलिला मां नर्मदा के रामघाट तट पर विधि-विधानपूर्वक श्रावणी कर्म संपन्न किया।
भारतीय सनातन परंपरा में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह दिवस वैदिक संस्कारों, ऋषि परंपरा, स्वाध्याय, संकल्प और आत्मशुद्धि से जुड़ा हुआ है। ब्राह्मण समाज द्वारा इस अवसर पर श्रावणी कर्म एवं उपाकर्म की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। वैदिक परंपरा में श्रावण पूर्णिमा को ऋषियों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने, वेदाध्ययन की पुनर्स्मृति तथा आत्मिक शुद्धि का पावन अवसर माना गया है।
मां नर्मदा के पावन तट पर वैदिक परंपरा का निर्वहन श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रातःकाल से ही रामघाट पर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। मां नर्मदा के तट पर पहुंचे पुरोहितों एवं ब्राह्मणों ने सर्वप्रथम पुण्य सलिला नर्मदा का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक स्नान किया। नर्मदा की पवित्र जलधारा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद शास्त्रोक्त विधि से श्रावणी कर्म प्रारंभ किया गया।
मान्यता है कि नदियां भारतीय संस्कृति में केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की आधारभूमि रही हैं। वहीं अमरकंटक में मां नर्मदा का उद्गम होने के कारण नर्मदा तट का धार्मिक महत्व और भी विशिष्ट हो जाता है। यहां मां नर्मदा के तट पर किया गया स्नान, पूजन, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
रामघाट पर मंत्रोच्चार के साथ श्रावणी कर्म का आयोजन हुआ। वैदिक ऋचाओं एवं मंत्रों की गूंज से नर्मदा तट का वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्राचीन ऋषि परंपरा और वैदिक संस्कृति स्वयं मां नर्मदा के तट पर साकार हो उठी हो।
लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने लिया हिस्सा
स्थानीय मृत्युंजय आश्रम के पुरोहितों एवं ब्राह्मणों सहित नगर के बड़ी संख्या में विप्रजन इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने श्रावणी कर्म में सहभागिता की।
शांति कुटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज, मृत्युंजय आश्रम के पंडित योगेश दुबे, बिहारी लाल तिवारी, पंडित संदीप उपाध्याय सहित अनेक पुरोहित एवं विप्रजन उपस्थित रहे।
रामघाट में श्रावणी कर्म का आयोजन पंडित रवि महाराज द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उपस्थित ब्राह्मणों ने परंपरागत विधि से संकल्प लेकर श्रावणी कर्म किया।
नर्मदा उद्गम कुंड में भी गूंजे वैदिक मंत्र
श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा के उद्गम स्थल परिसर स्थित पवित्र नर्मदा कुंड में भी श्रावणी कर्म का आयोजन किया गया। नर्मदा मंदिर के पुजारी कामता प्रसाद द्विवेदी (नीलू महाराज) की उपस्थिति एवं नेतृत्व में ब्राह्मणों ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया।
इस अवसर पर उमेश द्विवेदी (बंटी महाराज), राजेश द्विवेदी (बल्लू महाराज), कमलेश द्विवेदी, जीतेंद्र द्विवेदी धर्मेंद्र द्विवेदी हर्ष द्विवेदी रूपेश द्विवेदी उत्तम द्विवेदी सहित अन्य विप्रजन उपस्थित रहे। नर्मदा उद्गम कुंड में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन एवं धार्मिक कर्मकांड के साथ श्रावणी पर्व की परंपरा निभाई गई।
ऋषि परंपरा और वेद संस्कृति से जुड़ा है श्रावणी पर्व
श्रावणी पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु, ऋषि और वेद परंपरा के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी माना जाता है। प्राचीन काल में इसी समय ऋषि-मुनियों के आश्रमों में वेदाध्ययन एवं स्वाध्याय की परंपराओं को विशेष रूप से महत्व दिया जाता था। ब्राह्मणों के लिए यह आत्मसंस्कार, स्वाध्याय, संयम और अपने धार्मिक दायित्वों के पुनः स्मरण का अवसर रहा है।
श्रावणी कर्म के माध्यम से सनातन परंपरा में यह भाव व्यक्त किया जाता है कि ज्ञान की परंपरा निरंतर चलती रहे, वेदों की वाणी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहे और समाज में धर्म, संस्कार एवं सदाचार की भावना बनी रहे।
इसी वैदिक भावभूमि के कारण श्रावणी पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ऋषि-स्मरण, वेद-संरक्षण, आत्मशुद्धि और सनातन संस्कारों के पुनर्स्मरण का अवसर मानी जाती है।
अमरकंटक में जीवंत हुई सनातन संस्कृति
श्रावण मास के अंतिम दिवस अमरकंटक में रामघाट से लेकर नर्मदा उद्गम कुंड तक धार्मिक आस्था और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। एक ओर मां नर्मदा की कल-कल बहती पावन धारा, दूसरी ओर वैदिक मंत्रों की गूंज और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान—पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना रहे थे।
पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के बीच श्रावणी पर्व का यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत का प्रतीक बना। ब्राह्मणों एवं पुरोहितों द्वारा परंपरागत रूप से किए गए श्रावणी कर्म ने नई पीढ़ी को भी वैदिक संस्कारों और ऋषि परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया।
मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धा और वैदिक मंत्रों के मध्य संपन्न श्रावणी पर्व के साथ ही श्रावण मास का धार्मिक अनुष्ठानिक क्रम भी पूर्ण हुआ। पूरे आयोजन में धर्म, वेद, संस्कार, प्रकृति और मां नर्मदा के प्रति आस्था का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
    user_Anupam Singh patrkar
    Anupam Singh patrkar
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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