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पिछले कई वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुसार इस वर्ष भी 7 दिवसीय रामधुन के अंतिम दिन आनंद उत्साह उमंग के साथ आरती का आयोजन
Lakhan Sahu
पिछले कई वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुसार इस वर्ष भी 7 दिवसीय रामधुन के अंतिम दिन आनंद उत्साह उमंग के साथ आरती का आयोजन
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- शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल कटनी। ग्राम पंचायत खरखरी, तहसील रीठी, जिला कटनी में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शासकीय भूमि पर कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे की कार्रवाई के बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में जब सरपंच से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर के समक्ष शिकायत की गई है। हालांकि, शिकायत किए जाने का कोई प्रमाण अथवा शिकायत की प्रति सामने नहीं आने से मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने शासकीय भूमि की सीमांकन एवं मौके की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में जांच कर शासकीय भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करता है अथवा नहीं।1
- राजधानी भोपाल में दोपहर से शुरू हुआ वकीलों का चक्का जाम अभी भी जारी है2
- पुत्र ही निकला चोर, पुलिस ने किया खुलासा पटेरा थाना में 17 सितंबर को प्रार्थी भागचंद पुत्र ही निकला चोर, पुलिस ने किया खुलासा अमर सेन की रीपोर्ट पटेरा थाना में 17 सितंबर को प्रार्थी भागचंद बर्मन पिता सरमत बर्मन उम्र 49 वर्ष निवासी पटेरा जिनके द्वारा 16 सितंबर को अज्ञात चोरों द्वारा घर में घुसकर ताला तोड़कर सोने चांदी के जेवरात कीमत करीब 650000 चोरी होने पर पटेरा थाने में अपराध क्रमांक 274/26 धारा 331(4),305 बीएस कायम किया गया था जो पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की निर्देशन में एसडीओपी हटा की मार्गदर्शन में टीम गठित कर थाना पटेरा निरीक्षक रचना मिश्रा के नेतृत्व में आरोपी माल मुलाजिम की तलाश पतासाजी हेतु प्रयास किया गया और फरियादी के लड़के पर संदेह होने पर लव कुश बर्मन पिता भागचंद बर्मन निवासी पटेरा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई लवकुश वर्मन पिता भागचंद के द्वारा घटना की स्वयं को घर के ताले तोड़कर जैवरात चोरी करना बताया गया एवं आरोपी लवकुश बर्मन से चोरी किया गया संपूर्ण मसरूका सोने चांदी की जेवरात कीमत करीब 6 लाख 50000 ₹2000 नगर बरामद किए गए आरोपी लवकुश बर्मन जिसे अपना पुराना कर्ज लेनदेन चुकाने के लिए अपने ही घर मे अज्ञात चोरों द्वारा चोरी करने की झूठी कहानी बनाकर घर में चोरी का माल मशरूका का बेचने की फ्रॉक में छुपा कर रखा कहानी बनाकर आरोपी लव कुश को गिरफ्तार किया गया जिसे माननीय न्यायालय में पेश किया गया सराहनीय कार्य मे थाना प्रभारी रचना मिश्रा उपनिरीक्षक धर्मेंद्र गुर्जर ,संतोष सिंह, प्रधान आरक्षक रूप लाल रजक प्रधान आरक्षक सुरेश प्रधान आरक्षक सुमन यादव आरक्षित बलमा कुंड नितेश सिलावट की विशेष भूमिका रही3
- बेटा ही निकला चोरी की घटना का आरोपी,पटेरा पुलिस ने जप्त किए साढ़े 6 लाख रुपए कीमत के सोने चांदी के जेवरात.... एंकर/- दमोह जिले के पटेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हुई चोरी की घटना का बुधवार शाम पुलिस के द्वारा खुलासा कर दिया गया है। इस मामले में पीड़ित का बेटा ही चोरी का आरोपी निकला है। जिसके पास से करीब 6 लाख रुपए के सोने, चांदी के जेवरात बरामद किए गए हैं और आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया है।1
- पटेरा पुलिस ने चोरी की वारदात का किया खुलासा, लाखों का माल बरामद पटेरा। पटेरा थाना क्षेत्र में भागचंद बर्मन के घर हुई चोरी की वारदात का पुलिस ने खुलासा करते हुए चोरी का सामान बरामद कर लिया है। पुलिस के अनुसार, घर से करीब 6 से 7 लाख रुपये कीमत का सामान चोरी होने की शिकायत सामने आई थी। मामले की सूचना मिलने के बाद पटेरा पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्धों से पूछताछ के साथ चोरी गए सामान की तलाश की। पुलिस कार्रवाई के दौरान चोरी का माल बरामद कर उसे जब्त कर लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई से चोरी की घटना का खुलासा होने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। मामले में पुलिस द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की तत्परता से चोरी की वारदात का खुलासा होने पर क्षेत्र में पुलिस की कार्रवाई की चर्चा है।1
- कटनी नगर//- कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।1
- दमोह-सागर स्टेट हाईवे के भूमि अधिग्रहण में अनियमितता का आरोप, संयुक्त टीम से पुनः नाप कराने की मांग1
- खेत में दिखा विशाल मगरमच्छ, ग्रामीणों ने सड़क किनारे किया सुरक्षित नोहटा थाना क्षेत्र के ग्राम हिनौती खेत सिंह में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने खेत में एक विशाल मगरमच्छ देखा। मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने सतर्कता बरतते हुए मगरमच्छ को खेत से बाहर निकालकर सड़क किनारे कर दिया। समय रहते मगरमच्छ के दिखाई देने से बड़ी अनहोनी टल गई।1
- कटनी नगर//- 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में। 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।1