कटनी नगर//- 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में। 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
कटनी नगर//- 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में। 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
- कटनी नगर//- कटनी में आजाद चौक पर कार्यक्रम के लिए स्टेज बनाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई। वन-साइड रोड के कारण मिशन चौक से बस स्टैंड तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। त्योहारी सीजन में बढ़े ट्रैफिक के बीच राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने यातायात व्यवस्था सुचारु कराने की मांग की है। कटनी में आजाद चौक पर कार्यक्रम के लिए स्टेज बनाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई। वन-साइड रोड के कारण मिशन चौक से बस स्टैंड तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। त्योहारी सीजन में बढ़े ट्रैफिक के बीच राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने यातायात व्यवस्था सुचारु कराने की मांग की है।1
- 💥*जिला कटनी से ज्योति तिवारी*💥 //////8103728933/////6267641443/////👈 समिति के निर्देशानुसार जिले में चलाए जा रहे सघन जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को इंद्रा नगर स्थित जन आरोग्य केंद्र में सहारा मंच एवं जिला चिकित्सालय के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य लोगों को एचआईवी एवं हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच एवं आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराना रहा। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। शिविर के दौरान 80 लोगों की एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी की जांच की गई। इसके साथ ही उपस्थित लोगों से सेल्फ रिस्क असेसमेंट भी कराया गया तथा स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी एवं जागरूकता सामग्री (IEC) का वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन CMHO डॉ. राज सिंह ठाकुर, जिला नोडल अधिकारी डॉ. समीर सिंघई एवं परियोजना प्रबंधक श्री फ्रेडी चार्ली के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में काउंसलर श्री मनोज सिंह द्वारा लोगों की काउंसलिंग एवं टेस्टिंग की गई। इस दौरान प्रोग्राम मैनेजर श्री फ्रेडी चार्ली, काउंसलर श्री मनोज सिंह, डॉ. देवेंद्र गुप्ता, ORW श्री रामकृपाल, ORW श्री आशीष यादव, श्रीमती रानू चक्रवर्ती एवं श्री मनोज बरसाकर ने अपनी सेवाएं प्रदान करते हुए शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।4
- नेताओं और प्रशासन की कथित मिलीभगत से बड़वारा क्षेत्र में चल रहा अवैध रेत कारोबार1
- *ओडिशा तट पर मिला गैस का कुआं* ओएनजीसी ने ओडिशा तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में एक गहरे पानी वाले कुएं में गैस की खोज की है। ONGC ने 'समुद्र मंथन' पहल के तहत यह कुआं खोजा है। MN-DW18-1-H-D कुएं में 1,441–1,452 मीटर की गहराई पर गैस मिली है। इस कुएं को 1,623 मीटर की तय गहराई तक खोदा गया था।1
- #katniss #viral #viralvideos #crime कटनी जिले की रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खरखरी नंबर-2 में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। शासकीय भूमि पर मकान निर्माण के आरोप, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल कटनी/रीठी। कटनी जिले की रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खरखरी नंबर-2 में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि पर पौधारोपण के लिए गड्ढे किए गए थे, लेकिन आरोप है कि उन्हीं गड्ढों के बीच कब्जा कर मकान का निर्माण कराया जा रहा है। मामले में स्थानीय स्तर पर पटवारी और ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य की जानकारी होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मामले को लेकर सरपंच से संपर्क किया गया तो उनके पुत्र की ओर से बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की गई है। शिकायत की प्रति मांगे जाने पर वह प्रस्तुत नहीं की गई। वहीं, ग्राम पंचायत सचिव से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे सप्ताह में सोमवार को पंचायत में आते हैं और उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। सचिव ने मामले को पटवारी के कार्यक्षेत्र से संबंधित बताया। अब सवाल यह है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है तो उस पर निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मामले में राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1
- कटनी। कुठला समेत कई गांवों से सैकड़ों महिलाएं हाथों में डंडे लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय कटनी पहुँच गईं। > > महिलाओं का आरोप है कि गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जिससे उनके परिवार बर्बाद हो रहे हैं। शराबी पति आए दिन मारपीट करते हैं, बच्चे भूखे रह जाते हैं। > > इसी से तंग आकर महिलाओं ने SP दफ्तर का घेराव किया, जोरदार नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपकर अवैध शराब पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। > *1. पोस्टर No. 1 - Vertical (WhatsApp / Instagram Reel Cover)* पहला वाला SP Office वाला - जो पहले बनाया था *2. पोस्टर No. 2 - Horizontal (YouTube Thumbnail)* *3. पूरी न्यूज़ रिपोर्ट:* > *कटनी में शराब के खिलाफ महिलाओं का फूटा गुस्सा!* > > कटनी। कुठला समेत कई गांवों से सैकड़ों महिलाएं हाथों में डंडे लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय कटनी पहुँच गईं। > > महिलाओं का आरोप है कि गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जिससे उनके परिवार बर्बाद हो रहे हैं। शराबी पति आए दिन मारपीट करते हैं, बच्चे भूखे रह जाते हैं। > > इसी से तंग आकर महिलाओं ने SP दफ्तर का घेराव किया, जोरदार नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपकर अवैध शराब पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। > > *महिलाओं की 3 बड़ी मांगें:* > 1. कुठला समेत सभी गांवों में अवैध शराब बिक्री बंद हो > 2. शराब माफियाओं पर सख्त कार्रवाई हो > 3. गांवों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए > > SP ने आश्वासन दिया है कि जल्द कार्रवाई की जाएगी। > > *रिपोर्ट: पूरनलाल, AIMA MEDIA कटनी* *4. वीडियो:* आपका वीडियो भी बनाया था जी, लेकिन थोड़ी तकनीकी गड़बड़ी से धुंधला आया।1
- तीन दिन में जनपद सीईओ को निलंबित करो,भीम आर्मी एवं गोंडवाना संगठन ने चक्काजाम कर जताया विरोध, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन कटनी/बहोरीबंद। जनपद पंचायत से जुड़े मुद्दों को लेकर बुधवार को भीम आर्मी एवं गोंडवाना संगठन ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के जिला अध्यक्ष संदीप चौधरी एवं संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान बौद्ध के तत्वावधान में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जनपद सीईओ को तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने आरोपों और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि तीन दिन के भीतर जनपद सीईओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। संगठन की ओर से अपनी मांगों का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी चक्काजाम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संबंधित मामले में प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने तीन दिन की समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि तय समयावधि में मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। चक्काजाम के चलते कुछ समय के लिए मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति संभालने का प्रयास किया।1
- कटनी नगर//- कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।1