तीन दिन में जनपद सीईओ को निलंबित करो,भीम आर्मी एवं गोंडवाना संगठन ने चक्काजाम कर जताया विरोध, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन कटनी/बहोरीबंद। जनपद पंचायत से जुड़े मुद्दों को लेकर बुधवार को भीम आर्मी एवं गोंडवाना संगठन ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के जिला अध्यक्ष संदीप चौधरी एवं संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान बौद्ध के तत्वावधान में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जनपद सीईओ को तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने आरोपों और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि तीन दिन के भीतर जनपद सीईओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। संगठन की ओर से अपनी मांगों का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी चक्काजाम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संबंधित मामले में प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने तीन दिन की समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि तय समयावधि में मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। चक्काजाम के चलते कुछ समय के लिए मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति संभालने का प्रयास किया।
तीन दिन में जनपद सीईओ को निलंबित करो,भीम आर्मी एवं गोंडवाना संगठन ने चक्काजाम कर जताया विरोध, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन कटनी/बहोरीबंद। जनपद पंचायत से जुड़े मुद्दों को लेकर बुधवार को भीम आर्मी एवं गोंडवाना संगठन ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के जिला अध्यक्ष संदीप चौधरी एवं संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान बौद्ध के तत्वावधान में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जनपद सीईओ को तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने आरोपों और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि तीन दिन के भीतर जनपद सीईओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। संगठन की ओर से अपनी मांगों का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी चक्काजाम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संबंधित मामले में प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने तीन दिन की समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि तय समयावधि में मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। चक्काजाम के चलते कुछ समय के लिए मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति संभालने का प्रयास किया।
- ऑनलाइन सट्टे के मनी ट्रेल पर SIT की बड़ी कार्रवाई,सट्टे के पैसों का हिसाब नहीं मिला, कम्प्यूटर्स संचालक गिरफ्तार... #कटनी1
- पिता को सर्प ने डसा, कुछ घंटों बाद बेटी की मौत से गांव में मातम किशोरी के अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच पहुंची पुलिस, शव पीएम के लिए भेजा सिहोरा। सिहोरा थाना क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा में एक ही परिवार में लगातार दो मौतों से मातम पसरा है। रविवार देर रात घर में सो रहे 40 वर्षीय बसंत कोल को सर्प ने डस लिया। उपचार के दौरान सोमवार दोपहर जबलपुर जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इसके कुछ ही समय बाद उनकी 15 वर्षीय बेटी की भी मौत हो गई। किशोरी की मौत के कारणों को लेकर पुलिस ने अंतिम संस्कार रुकवाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। जानकारी के अनुसार ग्राम बरखेड़ा निवासी बसंत कोल, पिता भद्दी कोल, को रविवार देर रात घर में सोते समय सर्प ने डस लिया था। परिजन उन्हें उपचार के लिए जबलपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां सोमवार दोपहर करीब 1 बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार जिस सर्प ने बसंत को डसा था, उसे मार दिया गया था और वह घर में ही पड़ा मिला। सोमवार को बसंत कोल का शव गांव पहुंचा और अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान उनकी 15 वर्षीय बेटी की भी मौत हो गई। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे परिजन किशोरी के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच सूचना मिलने पर सिहोरा पुलिस मौके पर पहुंची और किशोरी की मौत को संदिग्ध परिस्थितियों में मानते हुए अंतिम संस्कार रुकवा दिया। पुलिस ने श्मशान घाट से किशोरी का शव अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल सिहोरा की मर्चुरी पहुंचाया। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही किशोरी की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। एक के बाद एक दो मौतों से टूटा परिवार पिता की सर्पदंश से मौत और उसके बाद बेटी की मौत की खबर से बरखेड़ा गांव में शोक की लहर है। एक ही परिवार में लगातार हुई दो मौतों ने ग्रामीणों को भी झकझोर दिया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं किशोरी के अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच पुलिस द्वारा शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के बाद घटना को लेकर ग्रामीणों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि किशोरी की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। इनका कहना "पीएम रिपोर्ट आने के बाद बेटी की मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।" प्रतीक्षा मार्को, थाना प्रभारी, सिहोरा1
- कटनी नगर//- कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।1
- अवैध शराब पर अंकुश की मांग, OBC महासभा ने जनसुनवाई में सौंपी शिकायत कटनी। शहर में अवैध शराब के विक्रय 💥*चिन्ना कटनी से ज्योति तिवारी*💥 और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पिलाने के आरोपों को लेकर ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष रामरतन नामदेव ने मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत सौंपी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में शराब दुकानों के बाहर ठेले लगाकर सड़क पर तथा कुछ होटलों और रेस्टोरेंट में कथित तौर पर अवैध तरीके से शराब पिलाई जा रही है। रामरतन नामदेव ने इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।2
- *ओडिशा तट पर मिला गैस का कुआं* ओएनजीसी ने ओडिशा तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में एक गहरे पानी वाले कुएं में गैस की खोज की है। ONGC ने 'समुद्र मंथन' पहल के तहत यह कुआं खोजा है। MN-DW18-1-H-D कुएं में 1,441–1,452 मीटर की गहराई पर गैस मिली है। इस कुएं को 1,623 मीटर की तय गहराई तक खोदा गया था।1
- डभौरा में प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऑटो प्रवेश पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग1
- कटनी नगर//- 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में। 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।1
- बंगाल: मछुआरों ने नन्हे हाथी की ऐसे बचाई जान, मां से मिलाया पश्चिम बंगाल में मछुआरों और वन विभाग के अधिकारियों ने समय रहते तीस्ता नदी में बहकर लगभग चार किलोमीटर दूर चले गए चार दिन के हाथी के बच्चे को बचाया. मछुआरों ने एक छोटी नाव ली और बच्चे को बचाने के लिए तेजी से आगे बढ़े. थोड़ी देर में वे डूबते हुए बछड़े तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने उसे छोटी नाव में सवार होकर बचाया और नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाया. सोशल मीडिया पर इन मछुआरों की जमकर सराहना हो रही है. देखिए वीडियो -1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | बरेला मंडला-जबलपुर मार्ग पर बोलेरो में लगी आग, मचा हड़कंप! मंडला-जबलपुर मार्ग NH-30 पर बरेला बायपास के पास नरसिंह बाबा दरबार के समीप महिंद्रा बोलेरो वाहन में अचानक आग लग गई। आग लगते ही मौके पर हड़कंप मच गया। 🔥 आग लगने के कारण और नुकसान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। 📍 खबर अपडेट हो रही है... #BreakingNews #बरेला #जबलपुर #NH30 #मंडला #आग #Bolero #AawazNews2471