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#katniss #viral #viralvideos #crime कटनी जिले की रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खरखरी नंबर-2 में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। शासकीय भूमि पर मकान निर्माण के आरोप, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल कटनी/रीठी। कटनी जिले की रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खरखरी नंबर-2 में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि पर पौधारोपण के लिए गड्ढे किए गए थे, लेकिन आरोप है कि उन्हीं गड्ढों के बीच कब्जा कर मकान का निर्माण कराया जा रहा है। मामले में स्थानीय स्तर पर पटवारी और ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य की जानकारी होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मामले को लेकर सरपंच से संपर्क किया गया तो उनके पुत्र की ओर से बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की गई है। शिकायत की प्रति मांगे जाने पर वह प्रस्तुत नहीं की गई। वहीं, ग्राम पंचायत सचिव से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे सप्ताह में सोमवार को पंचायत में आते हैं और उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। सचिव ने मामले को पटवारी के कार्यक्षेत्र से संबंधित बताया। अब सवाल यह है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है तो उस पर निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मामले में राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

4 hrs ago
user_Shivcharan Yadav
Shivcharan Yadav
Local News Reporter रीठी, कटनी, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago

#katniss #viral #viralvideos #crime कटनी जिले की रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खरखरी नंबर-2 में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। शासकीय भूमि पर मकान निर्माण के आरोप, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल कटनी/रीठी। कटनी जिले की रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खरखरी नंबर-2 में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि पर पौधारोपण के लिए गड्ढे किए गए थे, लेकिन आरोप है कि उन्हीं गड्ढों के बीच कब्जा कर मकान का निर्माण कराया जा रहा है। मामले में स्थानीय स्तर पर पटवारी और ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य की जानकारी होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मामले को लेकर सरपंच से संपर्क किया गया तो उनके पुत्र की ओर से बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की गई है। शिकायत की प्रति मांगे जाने पर वह प्रस्तुत नहीं की गई। वहीं, ग्राम पंचायत सचिव से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे सप्ताह में सोमवार को पंचायत में आते हैं और उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। सचिव ने मामले को पटवारी के कार्यक्षेत्र से संबंधित बताया। अब सवाल यह है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय है तो उस पर निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मामले में राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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  • कटनी नगर//- कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कभी भी हो सकता है हादसा ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी। सुरक्षित भवन में संचालन की मांग ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
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    कटनी नगर//-
कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है।

ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

कभी भी हो सकता है हादसा

ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी।

सुरक्षित भवन में संचालन की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।


कटनी। एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर एकीकृत बाल विकास परियोजना मुड़वारा के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी बाल संस्कार केंद्र पौसरा क्रमांक-58 के जर्जर भवन में संचालित होने की बात सामने आई है। भवन की स्थिति को लेकर यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है।
ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन काफी समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई हिस्सों में दीवारें क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों को बैठाकर आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
कभी भी हो सकता है हादसा
ग्रामीणों का कहना है कि भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है। दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी।
सुरक्षित भवन में संचालन की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मामले का तत्काल निरीक्षण कराकर भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत कार्य पूरा होने तक आंगनबाड़ी केंद्र को किसी सुरक्षित वैकल्पिक भवन में संचालित करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
    user_AIMAMEDIA-24×7-जन जनकीआवाज़
    AIMAMEDIA-24×7-जन जनकीआवाज़
    Classified ads newspaper publisher कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • अवैध शराब पर अंकुश की मांग, OBC महासभा ने जनसुनवाई में सौंपी शिकायत कटनी। शहर में अवैध शराब के विक्रय 💥*चिन्ना कटनी से ज्योति तिवारी*💥 और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पिलाने के आरोपों को लेकर ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष रामरतन नामदेव ने मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत सौंपी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में शराब दुकानों के बाहर ठेले लगाकर सड़क पर तथा कुछ होटलों और रेस्टोरेंट में कथित तौर पर अवैध तरीके से शराब पिलाई जा रही है। रामरतन नामदेव ने इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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    अवैध शराब पर अंकुश की मांग, OBC महासभा ने जनसुनवाई में सौंपी शिकायत

कटनी। शहर में अवैध शराब के विक्रय
💥*चिन्ना कटनी से ज्योति तिवारी*💥        और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पिलाने के आरोपों को लेकर ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष रामरतन नामदेव ने मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत सौंपी।
शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में शराब दुकानों के बाहर ठेले लगाकर सड़क पर तथा कुछ होटलों और रेस्टोरेंट में कथित तौर पर अवैध तरीके से शराब पिलाई जा रही है।
रामरतन नामदेव ने इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
    user_ज्योति तिवारी वीडियो
    ज्योति तिवारी वीडियो
    कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल कटनी। ग्राम पंचायत खरखरी, तहसील रीठी, जिला कटनी में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शासकीय भूमि पर कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे की कार्रवाई के बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में जब सरपंच से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर के समक्ष शिकायत की गई है। हालांकि, शिकायत किए जाने का कोई प्रमाण अथवा शिकायत की प्रति सामने नहीं आने से मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने शासकीय भूमि की सीमांकन एवं मौके की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में जांच कर शासकीय भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करता है अथवा नहीं।
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    शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल
कटनी। ग्राम पंचायत खरखरी, तहसील रीठी, जिला कटनी में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शासकीय भूमि पर कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे की कार्रवाई के बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में जब सरपंच से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर के समक्ष शिकायत की गई है। हालांकि, शिकायत किए जाने का कोई प्रमाण अथवा शिकायत की प्रति सामने नहीं आने से मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने शासकीय भूमि की सीमांकन एवं मौके की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में जांच कर शासकीय भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करता है अथवा नहीं।
    user_गोकुल पटेल
    गोकुल पटेल
    Local News Reporter बहोरीबंद, कटनी, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • डभौरा में प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऑटो प्रवेश पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
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    डभौरा में प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऑटो प्रवेश पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
    user_विकास श्रीवास्तव
    विकास श्रीवास्तव
    पत्रकार कटनी नगर, कटनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • बंगाल: मछुआरों ने नन्हे हाथी की ऐसे बचाई जान, मां से मिलाया पश्चिम बंगाल में मछुआरों और वन विभाग के अधिकारियों ने समय रहते तीस्ता नदी में बहकर लगभग चार किलोमीटर दूर चले गए चार दिन के हाथी के बच्चे को बचाया. मछुआरों ने एक छोटी नाव ली और बच्चे को बचाने के लिए तेजी से आगे बढ़े. थोड़ी देर में वे डूबते हुए बछड़े तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने उसे छोटी नाव में सवार होकर बचाया और नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाया. सोशल मीडिया पर इन मछुआरों की जमकर सराहना हो रही है. देखिए वीडियो -
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    बंगाल: मछुआरों ने नन्हे हाथी
की ऐसे बचाई जान, मां से मिलाया
पश्चिम बंगाल में मछुआरों और वन विभाग के अधिकारियों ने समय रहते तीस्ता नदी में बहकर लगभग चार किलोमीटर दूर चले गए चार दिन के हाथी के बच्चे को बचाया. मछुआरों ने एक छोटी नाव ली और बच्चे को बचाने के लिए तेजी से आगे बढ़े. थोड़ी देर में वे डूबते हुए बछड़े तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने उसे छोटी नाव में सवार होकर बचाया और नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाया. सोशल मीडिया पर इन मछुआरों की जमकर सराहना हो रही है.
देखिए वीडियो -
    user_Naresh Bajaj
    Naresh Bajaj
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • दमोह / थाना पटेरा पुलिस ने 6 लाख 50 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात की चोरी के मामले का खुलासा करते हुए फरियादी के बेटे को गिरफ्तार किया है।
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    दमोह / थाना पटेरा पुलिस ने 6 लाख 50 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात की चोरी के मामले का खुलासा करते हुए फरियादी के बेटे को गिरफ्तार किया है।
    user_सचिन सिंह राजपूत  प्रदेश समय
    सचिन सिंह राजपूत प्रदेश समय
    Court reporter पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • कटनी नगर//- 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में। 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
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    कटनी नगर//-
📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत

श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज

गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं

कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।

पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है।

पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता

गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं।

गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।

अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना

गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत
श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज
गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं
कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।
पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है।
पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं।
गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना
गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
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    Reeport 100
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