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नेताओं और प्रशासन की कथित मिलीभगत से बड़वारा क्षेत्र में चल रहा अवैध रेत कारोबार

11 hrs ago
user_विकास श्रीवास्तव
विकास श्रीवास्तव
पत्रकार कटनी नगर, कटनी, मध्य प्रदेश•
11 hrs ago

नेताओं और प्रशासन की कथित मिलीभगत से बड़वारा क्षेत्र में चल रहा अवैध रेत कारोबार

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • अवैध शराब पर अंकुश की मांग, OBC महासभा ने जनसुनवाई में सौंपी शिकायत कटनी। शहर में अवैध शराब के विक्रय 💥*चिन्ना कटनी से ज्योति तिवारी*💥 और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पिलाने के आरोपों को लेकर ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष रामरतन नामदेव ने मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत सौंपी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में शराब दुकानों के बाहर ठेले लगाकर सड़क पर तथा कुछ होटलों और रेस्टोरेंट में कथित तौर पर अवैध तरीके से शराब पिलाई जा रही है। रामरतन नामदेव ने इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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    अवैध शराब पर अंकुश की मांग, OBC महासभा ने जनसुनवाई में सौंपी शिकायत

कटनी। शहर में अवैध शराब के विक्रय
💥*चिन्ना कटनी से ज्योति तिवारी*💥        और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पिलाने के आरोपों को लेकर ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष रामरतन नामदेव ने मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत सौंपी।
शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में शराब दुकानों के बाहर ठेले लगाकर सड़क पर तथा कुछ होटलों और रेस्टोरेंट में कथित तौर पर अवैध तरीके से शराब पिलाई जा रही है।
रामरतन नामदेव ने इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
    user_ज्योति तिवारी वीडियो
    ज्योति तिवारी वीडियो
    कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • डभौरा में प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऑटो प्रवेश पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
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    डभौरा में प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऑटो प्रवेश पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
    user_विकास श्रीवास्तव
    विकास श्रीवास्तव
    पत्रकार कटनी नगर, कटनी, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • बंगाल: मछुआरों ने नन्हे हाथी की ऐसे बचाई जान, मां से मिलाया पश्चिम बंगाल में मछुआरों और वन विभाग के अधिकारियों ने समय रहते तीस्ता नदी में बहकर लगभग चार किलोमीटर दूर चले गए चार दिन के हाथी के बच्चे को बचाया. मछुआरों ने एक छोटी नाव ली और बच्चे को बचाने के लिए तेजी से आगे बढ़े. थोड़ी देर में वे डूबते हुए बछड़े तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने उसे छोटी नाव में सवार होकर बचाया और नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाया. सोशल मीडिया पर इन मछुआरों की जमकर सराहना हो रही है. देखिए वीडियो -
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    बंगाल: मछुआरों ने नन्हे हाथी
की ऐसे बचाई जान, मां से मिलाया
पश्चिम बंगाल में मछुआरों और वन विभाग के अधिकारियों ने समय रहते तीस्ता नदी में बहकर लगभग चार किलोमीटर दूर चले गए चार दिन के हाथी के बच्चे को बचाया. मछुआरों ने एक छोटी नाव ली और बच्चे को बचाने के लिए तेजी से आगे बढ़े. थोड़ी देर में वे डूबते हुए बछड़े तक पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने उसे छोटी नाव में सवार होकर बचाया और नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाया. सोशल मीडिया पर इन मछुआरों की जमकर सराहना हो रही है.
देखिए वीडियो -
    user_Naresh Bajaj
    Naresh Bajaj
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • ऑनलाइन सट्टे के मनी ट्रेल पर SIT की बड़ी कार्रवाई,सट्टे के पैसों का हिसाब नहीं मिला, कम्प्यूटर्स संचालक गिरफ्तार... #कटनी
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    ऑनलाइन सट्टे के मनी ट्रेल पर SIT की बड़ी कार्रवाई,सट्टे के पैसों का हिसाब नहीं मिला, कम्प्यूटर्स संचालक गिरफ्तार... #कटनी
    user_Shivcharan Yadav
    Shivcharan Yadav
    Local News Reporter रीठी, कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • कलेक्टर ने जिला जेल का किया औचक निरीक्षण ... कैदियों से की चर्चा, ली अपराध, सजा एवं विधिक सहायता की जानकारी .... जेल के किचन में साफ-सफाई रखने के निर्देश, अपने समक्ष कराई सामग्रियों की जांच ..... शहडोल 22 सितम्बर 2026:- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल में उपलब्ध विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिला जेल के औषधालय एवं पुस्तकालय का निरीक्षण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने जेल अधीक्षक से कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवाइयों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जेल अधीक्षक ने बताया कि माह में 10 दिन डॉक्टर द्वारा जेल का भ्रमण कर कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उपचार सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि औषधालय में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम का निरीक्षण कर कैदियों की ऑनलाइन पेशी के संबंध में जानकारी ली। जेल अधीक्षक ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिला जेल में 7 कक्ष बनाए गए हैं। पेशी की तिथि आने पर कैदियों की ऑनलाइन न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। कलेक्टर ने जेल अधीक्षक को किचन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, जेल परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा ब्लैक स्पॉट की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल में बंद कैदियों से चर्चा की तथा उनके अपराध, सजा एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कैदियों द्वारा रखी गई सामग्रियों की अपने समक्ष जांच भी कराई। कलेक्टर ने माफी रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर एवं बंदी हिस्ट्री टिकट रजिस्टर का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने कैदियों से जेल में उपलब्ध कराए जाने वाले चाय, नाश्ता एवं भोजन के संबंध में जानकारी ली। कैदियों ने बताया कि निर्धारित मीनू के अनुसार चाय, नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही प्रत्येक रविवार को विशेष भोज भी उपलब्ध कराया जाता है। कलेक्टर ने पेयजल, शौचालय, स्नानागार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं व्यवस्थाओं को नियमित रूप से बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, जेल अधीक्षक श्री भास्कर पांडे एवं जेलर श्री सुनील कुमार बैसवाड़े उपस्थित रहे। कलेक्टर ने जिला जेल का किया औचक निरीक्षण ... कैदियों से की चर्चा, ली अपराध, सजा एवं विधिक सहायता की जानकारी .... जेल के किचन में साफ-सफाई रखने के निर्देश, अपने समक्ष कराई सामग्रियों की जांच ..... शहडोल 22 सितम्बर 2026:- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल में उपलब्ध विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिला जेल के औषधालय एवं पुस्तकालय का निरीक्षण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने जेल अधीक्षक से कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवाइयों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जेल अधीक्षक ने बताया कि माह में 10 दिन डॉक्टर द्वारा जेल का भ्रमण कर कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उपचार सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि औषधालय में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम का निरीक्षण कर कैदियों की ऑनलाइन पेशी के संबंध में जानकारी ली। जेल अधीक्षक ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिला जेल में 7 कक्ष बनाए गए हैं। पेशी की तिथि आने पर कैदियों की ऑनलाइन न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। कलेक्टर ने जेल अधीक्षक को किचन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, जेल परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा ब्लैक स्पॉट की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल में बंद कैदियों से चर्चा की तथा उनके अपराध, सजा एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कैदियों द्वारा रखी गई सामग्रियों की अपने समक्ष जांच भी कराई। कलेक्टर ने माफी रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर एवं बंदी हिस्ट्री टिकट रजिस्टर का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने कैदियों से जेल में उपलब्ध कराए जाने वाले चाय, नाश्ता एवं भोजन के संबंध में जानकारी ली। कैदियों ने बताया कि निर्धारित मीनू के अनुसार चाय, नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही प्रत्येक रविवार को विशेष भोज भी उपलब्ध कराया जाता है। कलेक्टर ने पेयजल, शौचालय, स्नानागार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं व्यवस्थाओं को नियमित रूप से बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, जेल अधीक्षक श्री भास्कर पांडे एवं जेलर श्री सुनील कुमार बैसवाड़े उपस्थित रहे।
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    कलेक्टर ने जिला जेल का किया औचक निरीक्षण
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कैदियों से की चर्चा, ली अपराध, सजा एवं विधिक सहायता की जानकारी
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जेल के किचन में साफ-सफाई रखने के निर्देश, अपने समक्ष कराई सामग्रियों की जांच
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शहडोल 22 सितम्बर 2026:-  कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल में उपलब्ध विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

कलेक्टर ने जिला जेल के औषधालय एवं पुस्तकालय का निरीक्षण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने जेल अधीक्षक से कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवाइयों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जेल अधीक्षक ने बताया कि माह में 10 दिन डॉक्टर द्वारा जेल का भ्रमण कर कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उपचार सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि औषधालय में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं।

कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम का निरीक्षण कर कैदियों की ऑनलाइन पेशी के संबंध में जानकारी ली। जेल अधीक्षक ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिला जेल में 7 कक्ष बनाए गए हैं। पेशी की तिथि आने पर कैदियों की ऑनलाइन न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है।

कलेक्टर ने जेल अधीक्षक को किचन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, जेल परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा ब्लैक स्पॉट की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल में बंद कैदियों से चर्चा की तथा उनके अपराध, सजा एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कैदियों द्वारा रखी गई सामग्रियों की अपने समक्ष जांच भी कराई। कलेक्टर ने माफी रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर एवं बंदी हिस्ट्री टिकट रजिस्टर का भी अवलोकन किया।

कलेक्टर ने कैदियों से जेल में उपलब्ध कराए जाने वाले चाय, नाश्ता एवं भोजन के संबंध में जानकारी ली। कैदियों ने बताया कि निर्धारित मीनू के अनुसार चाय, नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही प्रत्येक रविवार को विशेष भोज भी उपलब्ध कराया जाता है। कलेक्टर ने पेयजल, शौचालय, स्नानागार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं व्यवस्थाओं को नियमित रूप से बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, जेल अधीक्षक श्री भास्कर पांडे एवं जेलर श्री सुनील कुमार बैसवाड़े उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने जिला जेल का किया औचक निरीक्षण
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कैदियों से की चर्चा, ली अपराध, सजा एवं विधिक सहायता की जानकारी
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जेल के किचन में साफ-सफाई रखने के निर्देश, अपने समक्ष कराई सामग्रियों की जांच
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शहडोल 22 सितम्बर 2026:-  कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल में उपलब्ध विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
कलेक्टर ने जिला जेल के औषधालय एवं पुस्तकालय का निरीक्षण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने जेल अधीक्षक से कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवाइयों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जेल अधीक्षक ने बताया कि माह में 10 दिन डॉक्टर द्वारा जेल का भ्रमण कर कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उपचार सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि औषधालय में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं।
कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम का निरीक्षण कर कैदियों की ऑनलाइन पेशी के संबंध में जानकारी ली। जेल अधीक्षक ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिला जेल में 7 कक्ष बनाए गए हैं। पेशी की तिथि आने पर कैदियों की ऑनलाइन न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है।
कलेक्टर ने जेल अधीक्षक को किचन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, जेल परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा ब्लैक स्पॉट की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल में बंद कैदियों से चर्चा की तथा उनके अपराध, सजा एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कैदियों द्वारा रखी गई सामग्रियों की अपने समक्ष जांच भी कराई। कलेक्टर ने माफी रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर एवं बंदी हिस्ट्री टिकट रजिस्टर का भी अवलोकन किया।
कलेक्टर ने कैदियों से जेल में उपलब्ध कराए जाने वाले चाय, नाश्ता एवं भोजन के संबंध में जानकारी ली। कैदियों ने बताया कि निर्धारित मीनू के अनुसार चाय, नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही प्रत्येक रविवार को विशेष भोज भी उपलब्ध कराया जाता है। कलेक्टर ने पेयजल, शौचालय, स्नानागार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं व्यवस्थाओं को नियमित रूप से बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह, जेल अधीक्षक श्री भास्कर पांडे एवं जेलर श्री सुनील कुमार बैसवाड़े उपस्थित रहे।
    user_POORAN LAL DUBEY
    POORAN LAL DUBEY
    Local News Reporter विजयराघवगढ़, कटनी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल कटनी। ग्राम पंचायत खरखरी, तहसील रीठी, जिला कटनी में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शासकीय भूमि पर कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे की कार्रवाई के बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में जब सरपंच से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर के समक्ष शिकायत की गई है। हालांकि, शिकायत किए जाने का कोई प्रमाण अथवा शिकायत की प्रति सामने नहीं आने से मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने शासकीय भूमि की सीमांकन एवं मौके की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में जांच कर शासकीय भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करता है अथवा नहीं।
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    शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल
कटनी। ग्राम पंचायत खरखरी, तहसील रीठी, जिला कटनी में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शासकीय भूमि पर कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जे की कार्रवाई के बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में जब सरपंच से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि इस संबंध में कलेक्टर के समक्ष शिकायत की गई है। हालांकि, शिकायत किए जाने का कोई प्रमाण अथवा शिकायत की प्रति सामने नहीं आने से मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने शासकीय भूमि की सीमांकन एवं मौके की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में जांच कर शासकीय भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करता है अथवा नहीं।
    user_गोकुल पटेल
    गोकुल पटेल
    Local News Reporter बहोरीबंद, कटनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • कटनी नगर//- 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में। 📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है। पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं। गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
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    कटनी नगर//-
📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत

श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज

गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं

कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।

पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है।

पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता

गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं।

गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।

अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना

गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
📰 पंचक में गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मत
श्री गणेश विसर्जन को लेकर पंचक का दोष बाधक नहीं: बुलट महाराज
गणेशजी विघ्न-विनाशक ही नहीं, सिद्धि एवं समृद्धि प्रदाता भी माने गए हैं
कटनी। भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गणेशजी का स्मरण कर प्रारंभ किया गया कार्य विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।
पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ ने भारत दिनभर को बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के साथ-साथ सिद्धि एवं समृद्धि प्रदान करने वाला देवता बताया गया है। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान अथवा शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। गणेशजी की उपासना से संबंधित गणेश पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप, नाम, महिमा और पूजन विधि का उल्लेख मिलता है।
पंचक में विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यता
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में पंचक संबंधी सवाल रहते हैं। पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के बताए धार्मिक मत के अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन में पंचक दोष को बाधक नहीं माना जाता। धार्मिक परंपराओं में पंचक से जुड़े नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं और देवकार्य के संदर्भ में भी मत भिन्न हो सकते हैं।
गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को धार्मिक रूप से अनंत चतुर्दशी से जोड़ा जाता है। इससे भगवान गणेश और महर्षि वेदव्यास से संबंधित एक धार्मिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत के लेखन के दौरान भगवान गणेश ने लगातार दस दिनों तक लेखन कार्य किया। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए पवित्र जल में स्नान कराया गया। इसी प्रसंग से गणेश प्रतिमा विसर्जन की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना
गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्री गणेश से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा को विदाई देते हैं तथा परिवार और समाज के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेशजी के चरणों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर गणेश उत्सव का समापन मंगलकामनाओं के साथ करते हैं।नोट: पंचक और विसर्जन से जुड़ा मत यहां पंडित बालमुकुंद त्रिपाठी ‘बुलट महाराज’ के धार्मिक मत के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।
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    11 hrs ago
  • गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था? क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था? क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे? और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं। TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है। जांच से तय होगी जिम्मेदारी घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है। नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
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    गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग

शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे?

क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था?
क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था?
क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे?
और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं।

TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात

प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी।

मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं

बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

जांच से तय होगी जिम्मेदारी

घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है।

अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है।

नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
गोपालपुर हादसा: लकड़ी कटाई के दौरान मजदूर की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बिरला माइंस क्षेत्र में पेड़ कटाई के दौरान ऊपर गिरी लकड़ी की चपेट में आया अधेड़ मजदूर; वन विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की मांग
शहडोल/बुढ़ार। बुढ़ार क्षेत्र के गोपालपुर जंगल में लकड़ी कटाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक अधेड़ मजदूर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने के दौरान अचानक लकड़ी ऊपर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से केशव साहू, निवासी शाहपुर की मौके पर मौत हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केशव साहू चेतन साहू के कांट्रेक्ट के तहत मजदूरी का कार्य कर रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची। बुढ़ार तहसीलदार के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
सुरक्षा इंतजामों पर सबसे बड़ा सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे?
क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था?
क्या कटाई से पहले खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था?
क्या मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक मौजूद थे?
और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
स्थानीय स्तर पर डिप्टी रेंजर की निगरानी और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था अथवा नहीं।
TMC बिरला माइंस को लकड़ी हैंडओवर किए जाने की बात
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जंगल से काटी जा रही लकड़ी को TMC बिरला माइंस को हैंडओवर किया जाना था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि लकड़ी कटाई का काम किस अनुमति, प्रक्रिया और ठेके के तहत कराया जा रहा था तथा मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी।
मुआवजे की बात, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं
बताया जा रहा है कि वन विभाग की ओर से मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
जांच से तय होगी जिम्मेदारी
घटना ने वन क्षेत्र में कराए जा रहे कटाई कार्यों की निगरानी और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और मजदूरों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है।
अब देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन की जांच में हादसे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और मृतक मजदूर की मौत के लिए यदि किसी की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाती है।
नोट: डिप्टी रेंजर की “शह” या सीधे तौर पर जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
    user_POORAN LAL DUBEY
    POORAN LAL DUBEY
    Local News Reporter विजयराघवगढ़, कटनी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • सिहोरा। ग्राम गुरुजी टोला की सैकड़ों महिलाओं ने बुधवार को गांव में कथित अवैध पैकारी, कच्ची एवं जहरीली शराब की बिक्री के विरोध में मोर्चा खोल दिया। महिलाएं सिहोरा थाना पहुंचीं और शराब के अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग करते हुए पुलिस, आबकारी विभाग और सिहोरा एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। महिलाओं का कहना है कि गांव में कथित रूप से खुलेआम कच्ची शराब बिक रही है, जिसके कारण कई परिवारों का माहौल बिगड़ रहा है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके पति और घर के अन्य पुरुष सदस्य रात-दिन शराब पीते हैं और शराब खरीदने के लिए उनसे पैसे मांगते हैं। पैसे नहीं देने पर मारपीट तक की जाती है। एक महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए आरोप लगाया कि शराब के लिए पैसे नहीं देने पर उसके पति ने हथौड़ी से उसके कंधे पर चोट पहुंचाई। महिलाओं ने कहा कि शराब के कारण उनके परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहे हैं। नाम बताने का दावा, कार्रवाई की मांग महिलाओं ने कथित रूप से अवैध शराब बेचने वालों के नाम पुलिस और अधिकारियों के सामने रखने का दावा किया। उन्होंने मांग की कि शिकायत में बताए गए लोगों की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कभी-कभार कार्रवाई होने के बाद भी अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के दोबारा सक्रिय होने की स्थिति बन जाती है। महिलाओं ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कथित मिलीभगत के आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसडीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा महिलाओं ने सिहोरा एसडीएम ज्योति परस्ते से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। एसडीएम ज्योति परस्ते के अनुसार उनके संज्ञान में अवैध शराब बिक्री और पैकारी सहित आबकारी विभाग के अधिकारी के मुख्यालय से अनुपस्थित रहने तथा शराब दुकानों और बार के संचालन से जुड़े मामले आए हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे। एसडीएम ने नेशनल हाईवे स्थित शराब दुकान, वी.डी. हाईस्कूल के पास स्थित शराब दुकान तथा नेशनल हाईवे और मुस्लिम धार्मिक स्थल के समीप संचालित बताए जा रहे बार-रेस्टोरेंट के संबंध में भी जानकारी लेकर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर गांव में शराब के कथित अवैध कारोबार की जमीनी जांच की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और शराब के कारण घरेलू हिंसा झेल रहे परिवारों को राहत मिले।
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    सिहोरा। ग्राम गुरुजी टोला की सैकड़ों महिलाओं ने बुधवार को गांव में कथित अवैध पैकारी, कच्ची एवं जहरीली शराब की बिक्री के विरोध में मोर्चा खोल दिया। महिलाएं सिहोरा थाना पहुंचीं और शराब के अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग करते हुए पुलिस, आबकारी विभाग और सिहोरा एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। महिलाओं का कहना है कि गांव में कथित रूप से खुलेआम कच्ची शराब बिक रही है, जिसके कारण कई परिवारों का माहौल बिगड़ रहा है।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके पति और घर के अन्य पुरुष सदस्य रात-दिन शराब पीते हैं और शराब खरीदने के लिए उनसे पैसे मांगते हैं। पैसे नहीं देने पर मारपीट तक की जाती है। एक महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए आरोप लगाया कि शराब के लिए पैसे नहीं देने पर उसके पति ने हथौड़ी से उसके कंधे पर चोट पहुंचाई। महिलाओं ने कहा कि शराब के कारण उनके परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहे हैं।
नाम बताने का दावा, कार्रवाई की मांग
महिलाओं ने कथित रूप से अवैध शराब बेचने वालों के नाम पुलिस और अधिकारियों के सामने रखने का दावा किया। उन्होंने मांग की कि शिकायत में बताए गए लोगों की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कभी-कभार कार्रवाई होने के बाद भी अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के दोबारा सक्रिय होने की स्थिति बन जाती है।
महिलाओं ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कथित मिलीभगत के आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एसडीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा
महिलाओं ने सिहोरा एसडीएम ज्योति परस्ते से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
एसडीएम ज्योति परस्ते के अनुसार उनके संज्ञान में अवैध शराब बिक्री और पैकारी सहित आबकारी विभाग के अधिकारी के मुख्यालय से अनुपस्थित रहने तथा शराब दुकानों और बार के संचालन से जुड़े मामले आए हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे।
एसडीएम ने नेशनल हाईवे स्थित शराब दुकान, वी.डी. हाईस्कूल के पास स्थित शराब दुकान तथा नेशनल हाईवे और मुस्लिम धार्मिक स्थल के समीप संचालित बताए जा रहे बार-रेस्टोरेंट के संबंध में भी जानकारी लेकर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही।
महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर गांव में शराब के कथित अवैध कारोबार की जमीनी जांच की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और शराब के कारण घरेलू हिंसा झेल रहे परिवारों को राहत मिले।
    user_मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    सिहोरा, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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