Holi पर सरहदी जैसलमेर में दिखता अनोखा रंग, पुरुषों की पारंपरिक गैर पर झूम उठता है पूरा इलाका देखिए इस वीडियो में क्या कहते हैं आज के युवा जैसलमेर, अनोखी Holi ,सरहदी राजस्थान में दिखता है अनोखा रंग! जैसलमेर में आज भी सदियों पुरानी लोक परंपराएं जीवित हैं। खासतौर पर होली पर यहां के गांवों में पुरुषों की पारंपरिक ‘गैर’ देखने लायक होती है। खीयां गांव सहित कई सरहदी इलाकों में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। #धोती-कुर्ता और #साफा पहने, हाथों में डांडिया लिए गैरिये ढोलक की थाप पर एक ही ताल में झूमते हैं। ✨ इस गैर की खास बातें: ▪️ केवल पुरुष ही करते हैं गैर नृत्य ▪️ बिना किसी म्यूजिक सिस्टम के, सिर्फ ढोलक की थाप पर प्रस्तुति ▪️ राजस्थानी भाषा में पारंपरिक गैर गीत ▪️ गुलाल का प्रयोग नहीं परंपरा, उत्साह और संस्कृति का ऐसा संगम ही बनाता है जैसलमेर की होली को खास।
Holi पर सरहदी जैसलमेर में दिखता अनोखा रंग, पुरुषों की पारंपरिक गैर पर झूम उठता है पूरा इलाका देखिए इस वीडियो में क्या कहते हैं आज के युवा जैसलमेर, अनोखी Holi ,सरहदी राजस्थान में दिखता है अनोखा रंग! जैसलमेर में आज भी सदियों पुरानी लोक परंपराएं जीवित हैं। खासतौर पर होली पर यहां के गांवों में पुरुषों की पारंपरिक ‘गैर’ देखने लायक होती है। खीयां गांव सहित कई सरहदी इलाकों में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। #धोती-कुर्ता और #साफा पहने, हाथों में डांडिया लिए गैरिये ढोलक की थाप पर एक ही ताल में झूमते हैं। ✨ इस गैर की खास बातें: ▪️ केवल पुरुष ही करते हैं गैर नृत्य ▪️ बिना किसी म्यूजिक सिस्टम के, सिर्फ ढोलक की थाप पर प्रस्तुति ▪️ राजस्थानी भाषा में पारंपरिक गैर गीत ▪️ गुलाल का प्रयोग नहीं परंपरा, उत्साह और संस्कृति का ऐसा संगम ही बनाता है जैसलमेर की होली को खास।
- जैसलमेर, अनोखी Holi ,सरहदी राजस्थान में दिखता है अनोखा रंग! जैसलमेर में आज भी सदियों पुरानी लोक परंपराएं जीवित हैं। खासतौर पर होली पर यहां के गांवों में पुरुषों की पारंपरिक ‘गैर’ देखने लायक होती है। खीयां गांव सहित कई सरहदी इलाकों में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। #धोती-कुर्ता और #साफा पहने, हाथों में डांडिया लिए गैरिये ढोलक की थाप पर एक ही ताल में झूमते हैं। ✨ इस गैर की खास बातें: ▪️ केवल पुरुष ही करते हैं गैर नृत्य ▪️ बिना किसी म्यूजिक सिस्टम के, सिर्फ ढोलक की थाप पर प्रस्तुति ▪️ राजस्थानी भाषा में पारंपरिक गैर गीत ▪️ गुलाल का प्रयोग नहीं परंपरा, उत्साह और संस्कृति का ऐसा संगम ही बनाता है जैसलमेर की होली को खास।1
- गांधी चौक में पूर्व राजपरिवार द्वारा होलिका दहन जैसलमेर शहर में मंगलवार अलसुबह परंपरागत आस्था और विधि-विधान के साथ होलिका दहन का आयोजन किया गया। शहर के हृदय स्थल गांधी चौक में पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने पूजा-अर्चना के बाद होलिका का विधिवत दहन किया। इस अवसर पर महावीर सिंह चंपावत, नवरत्न सिंह चंपावत, शिशुपाल सिंह, अजयपाल सिंह और युवराज सिंह सहित राजपरिवार के सदस्य मौजूद रहे। आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से कड़ा बंदोबस्त किया गया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। होलिका दहन की तैयारियां विष्णु कुमार, विजय पुरोहित और जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में पूरी की गईं। गांधी चौक में प्रज्वलित की गई पवित्र अग्नि से ही शहर के अन्य हिस्सों में भी होलिका दहन किया गया, जिससे परंपरा का निर्वहन किया गया। इस दौरान पूर्व पालिका अध्यक्ष आनंदीलाल गुचिया, पूर्व पार्षद नारायण रंगा, राजेश व्यास सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। आयोजन में शहरवासियों ने सुख-समृद्धि और आपसी भाईचारे की कामना1
- Post by Sachin vyas1
- होली के पावन पर्व पर ग्रामीण क्षेत्र में फाल्गुन के गीत गाते ग्रामीण बायतु होली के पावन पर्व पर ग्रामीण क्षेत्र में फाल्गुन के गीत स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जोरदार तरीके से गाये जा रहे हैं। वही ग्रामीणों के द्वारा चंग की थाप पर लय के साथ सुरीली आवाज में फाल्गुन के गीत गा रहे हैं।1
- Post by Pappu Ram lukha1
- बाड़मेर। अहिंसा सर्किल बाड़मेर..... होली के त्यौहार पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस के जवानों को मिठाई खिलाकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी....1
- ठिकाना. जसोल1
- जैसलमेर Holi पर सरहदी राजस्थान में दिखता है अनोखा रंग! जैसलमेर में आज भी सदियों पुरानी लोक परंपराएं जीवित हैं। खासतौर पर होली पर यहां के गांवों में पुरुषों की पारंपरिक ‘गैर’ देखने लायक होती है। खीयां गांव सहित कई सरहदी इलाकों में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। धोती-कुर्ता और साफा पहने, हाथों में डांडिया लिए गैरिये ढोलक की थाप पर एक ही ताल में झूमते हैं। ✨ इस गैर की खास बातें: ▪️ केवल पुरुष ही करते हैं गैर नृत्य ▪️ बिना किसी म्यूजिक सिस्टम के, सिर्फ ढोलक की थाप पर प्रस्तुति ▪️ राजस्थानी भाषा में पारंपरिक गैर गीत ▪️ गुलाल का प्रयोग नहीं परंपरा, उत्साह और संस्कृति का ऐसा संगम ही बनाता है जैसलमेर की होली को खास।1