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पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र कंवर ने दावा किया है कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में कुटलैहड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि बंगाणा अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा दिलाना और थानाकला अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में विकसित करना भाजपा सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा है। कंवर ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। वीरेंद्र कंवर ने जोर देकर कहा कि तत्कालीन सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था, ताकि लोगों को उपचार के लिए जिला मुख्यालयों या बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य ढांचे को योजनाबद्ध तरीके से मजबूत किया गया था और कुटलैहड़ क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई थी। केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मचारियों की पर्याप्त नियुक्तियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया था, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया। बंगाणा सिविल अस्पताल में बेहतर ऑपरेशन थियेटर (ओटी), अल्ट्रासाउंड सुविधा, कैंटीन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं सहित आधुनिक सुविधाएं स्थापित करने की योजना थी। कंवर के अनुसार, बंगाणा अस्पताल के भवनों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर लगभग आठ करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना था। उन्होंने दावा किया कि उस समय स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाती थी और जनता में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा था। वीरेंद्र कंवर ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद, भाजपा सरकार के समय जो कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे थे, वे अब कछुआ चाल से चल रहे हैं। उनके कैबिनेट मंत्री रहते हुए कुटलैहड़ क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए अनेक योजनाएं स्वीकृत हुई थीं, लेकिन वर्तमान समय में उन योजनाओं पर अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्वीकृत कार्यों के लिए धनराशि भी अभी तक पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई है, जिससे जनता को मिलने वाले लाभ में देरी हो रही है। कंवर ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा संबंध आम जनता की जिंदगी से होता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि कुटलैहड़ क्षेत्र में लंबित स्वास्थ्य परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

2 days ago
user_Abhishek Kumar Bhatia
Abhishek Kumar Bhatia
Local News Reporter बंगाना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
2 days ago

पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र कंवर ने दावा किया है कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में कुटलैहड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि बंगाणा अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा दिलाना और थानाकला अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में विकसित करना भाजपा सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा है। कंवर ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। वीरेंद्र कंवर ने जोर देकर कहा कि तत्कालीन सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था, ताकि लोगों को उपचार के लिए जिला मुख्यालयों या बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य ढांचे को योजनाबद्ध तरीके से मजबूत किया गया था और कुटलैहड़ क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई थी। केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मचारियों की पर्याप्त नियुक्तियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया था, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया। बंगाणा सिविल अस्पताल में बेहतर ऑपरेशन थियेटर (ओटी), अल्ट्रासाउंड सुविधा, कैंटीन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं सहित आधुनिक सुविधाएं स्थापित करने की योजना थी। कंवर के अनुसार, बंगाणा अस्पताल के भवनों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर लगभग आठ करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना था। उन्होंने दावा किया कि उस समय स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाती थी और जनता में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा था। वीरेंद्र कंवर ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद, भाजपा सरकार के समय जो कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे थे, वे अब कछुआ चाल से चल रहे हैं। उनके कैबिनेट मंत्री रहते हुए कुटलैहड़ क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए अनेक योजनाएं स्वीकृत हुई थीं, लेकिन वर्तमान समय में उन योजनाओं पर अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्वीकृत कार्यों के लिए धनराशि भी अभी तक पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई है, जिससे जनता को मिलने वाले लाभ में देरी हो रही है। कंवर ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा संबंध आम जनता की जिंदगी से होता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि कुटलैहड़ क्षेत्र में लंबित स्वास्थ्य परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

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  • 17 जून बुधवार को ऊना जिले के अखबारों की प्रमुख सुर्खियां प्रकाशित हुईं। इन सुर्खियों में बंगाना, मैहतपुर और चिंतपूर्णी जैसे क्षेत्रों से जुड़ी खबरें शामिल थीं, साथ ही एक वीडियो के वायरल होने का मामला भी प्रमुखता से रहा।
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    17 जून बुधवार को ऊना जिले के अखबारों की प्रमुख सुर्खियां प्रकाशित हुईं। इन सुर्खियों में बंगाना, मैहतपुर और चिंतपूर्णी जैसे क्षेत्रों से जुड़ी खबरें शामिल थीं, साथ ही एक वीडियो के वायरल होने का मामला भी प्रमुखता से रहा।
    user_247 superfast ks
    247 superfast ks
    ऊना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा ने घोषणा की है कि हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के नाल्टी क्षेत्र की सात पंचायतों को नाबार्ड के माध्यम से 19 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, जिसका उपयोग विकासात्मक कार्यों के लिए किया जाएगा। उन्होंने इस स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है, जिससे इन पंचायतों में विकास की नई राह खुलेगी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान, विधायक आशीष शर्मा ने आयुष एवं खेल मंत्री यादविंदर गोमा के बयानों पर भी पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल में शॉल और टोपी पहनाना यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है। विधायक ने कहा कि यदि भाजपा जीते हुए प्रधानों को शॉल और टोपी भेंट कर रही है, तो यह उन्हें सम्मान देने का एक तरीका है। उन्होंने मंत्री के इस संबंध में दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। आशीष शर्मा ने हमीरपुर जिला परिषद चुनावों के परिणामों का भी उल्लेख किया, जिसमें कुल 19 वार्डों में से भाजपा के 15 उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की है। इसके अतिरिक्त, तीन निर्दलीय विजेता भी भाजपा की विचारधारा का समर्थन करते हैं। वहीं, कांग्रेस को हमीरपुर जिला में केवल एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा। विधायक शर्मा ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री के गृह जिला हमीरपुर में कांग्रेस की यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य जिलों में उसकी क्या हालत होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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    हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा ने घोषणा की है कि हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के नाल्टी क्षेत्र की सात पंचायतों को नाबार्ड के माध्यम से 19 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, जिसका उपयोग विकासात्मक कार्यों के लिए किया जाएगा। उन्होंने इस स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है, जिससे इन पंचायतों में विकास की नई राह खुलेगी।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान, विधायक आशीष शर्मा ने आयुष एवं खेल मंत्री यादविंदर गोमा के बयानों पर भी पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल में शॉल और टोपी पहनाना यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है। विधायक ने कहा कि यदि भाजपा जीते हुए प्रधानों को शॉल और टोपी भेंट कर रही है, तो यह उन्हें सम्मान देने का एक तरीका है। उन्होंने मंत्री के इस संबंध में दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

आशीष शर्मा ने हमीरपुर जिला परिषद चुनावों के परिणामों का भी उल्लेख किया, जिसमें कुल 19 वार्डों में से भाजपा के 15 उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की है। इसके अतिरिक्त, तीन निर्दलीय विजेता भी भाजपा की विचारधारा का समर्थन करते हैं। वहीं, कांग्रेस को हमीरपुर जिला में केवल एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा। विधायक शर्मा ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री के गृह जिला हमीरपुर में कांग्रेस की यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य जिलों में उसकी क्या हालत होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    21 hrs ago
  • हमीरपुर से जारी एक बयान में, प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय विधायक और लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राणा ने दावा किया कि राजनीतिक दबाव में नियमों की अनदेखी कर किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है और सड़क बनाई जा रही है, साथ ही सरकारी धन का भी दुरुपयोग किया गया है। राजेंद्र राणा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020-21 में विधायक प्राथमिकता के तहत 'पुआड़ से टिक्करी वाया दरली' सड़क को स्वीकृत करवाया था, जिसकी मूल स्वीकृत लंबाई 2 किलोमीटर 55 मीटर थी और इसके लिए नाबार्ड से लगभग ढाई करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विधायक ने सड़क का प्रारंभिक बिंदु बदलकर इसे चिन्हित स्थल की बजाय किसी और जगह से शुरू करवा दिया, जिससे सड़क की वास्तविक लंबाई बढ़कर करीब 4 किलोमीटर हो गई। राणा ने कागजों में स्वीकृत लंबाई और धरातल पर निर्मित सड़क की लंबाई में बड़े अंतर की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि यदि नाबार्ड की डीपीआर 2 किलोमीटर 55 मीटर की थी, तो सड़क 4 किलोमीटर कैसे बन गई और इसकी अनुमति किस स्तर पर ली गई। पूर्व विधायक ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि आर.के. शर्मा और उनके परिवार की लगभग 3 कनाल 4 मरले भूमि को बिना गिफ्ट डीड, बिना सहमति और बिना किसी मुआवजे के सड़क निर्माण में शामिल कर लिया गया, जिसे उन्होंने किसानों के अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में लोग स्टे ले आए हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी हुई है। राणा ने जोर दिया कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों की जमीन हड़पने का प्रयास किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता और यदि भूमि की आवश्यकता है तो नियमानुसार सहमति और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। राणा ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि सुजानपुर मंडल में कनिष्ठ अभियंता का पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण निर्माण कार्यों की निगरानी और तकनीकी परीक्षण किसके माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से इस बात की जांच बिठाने की मांग की कि अधिकारियों ने किसके दबाव में आकर ऐसी अनियमितता की और सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। राणा ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों ने दबाव में ऐसी अनियमितता की है, उनकी सैलरी से इसकी वसूली होनी चाहिए। राजेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि भाजपा विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है और प्रत्येक गांव व घर तक सड़क पहुंचना आवश्यक है, लेकिन विकास की आड़ में किसानों को उजाड़ना और कानूनों को ताक पर रखना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने और जांच में किसी भी विधायक, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने प्रभावित किसानों की भूमि और सरकारी धन के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की भी मांग की। राणा ने विश्वास जताया कि सुजानपुर की जनता सब कुछ देख रही है और लोकतंत्र में अंततः सत्य सामने आकर रहेगा, तथा सरकार निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी।
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    हमीरपुर से जारी एक बयान में, प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय विधायक और लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राणा ने दावा किया कि राजनीतिक दबाव में नियमों की अनदेखी कर किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है और सड़क बनाई जा रही है, साथ ही सरकारी धन का भी दुरुपयोग किया गया है।

राजेंद्र राणा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020-21 में विधायक प्राथमिकता के तहत 'पुआड़ से टिक्करी वाया दरली' सड़क को स्वीकृत करवाया था, जिसकी मूल स्वीकृत लंबाई 2 किलोमीटर 55 मीटर थी और इसके लिए नाबार्ड से लगभग ढाई करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विधायक ने सड़क का प्रारंभिक बिंदु बदलकर इसे चिन्हित स्थल की बजाय किसी और जगह से शुरू करवा दिया, जिससे सड़क की वास्तविक लंबाई बढ़कर करीब 4 किलोमीटर हो गई। राणा ने कागजों में स्वीकृत लंबाई और धरातल पर निर्मित सड़क की लंबाई में बड़े अंतर की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि यदि नाबार्ड की डीपीआर 2 किलोमीटर 55 मीटर की थी, तो सड़क 4 किलोमीटर कैसे बन गई और इसकी अनुमति किस स्तर पर ली गई।

पूर्व विधायक ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि आर.के. शर्मा और उनके परिवार की लगभग 3 कनाल 4 मरले भूमि को बिना गिफ्ट डीड, बिना सहमति और बिना किसी मुआवजे के सड़क निर्माण में शामिल कर लिया गया, जिसे उन्होंने किसानों के अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में लोग स्टे ले आए हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी हुई है। राणा ने जोर दिया कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों की जमीन हड़पने का प्रयास किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता और यदि भूमि की आवश्यकता है तो नियमानुसार सहमति और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

राणा ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि सुजानपुर मंडल में कनिष्ठ अभियंता का पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण निर्माण कार्यों की निगरानी और तकनीकी परीक्षण किसके माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से इस बात की जांच बिठाने की मांग की कि अधिकारियों ने किसके दबाव में आकर ऐसी अनियमितता की और सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। राणा ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों ने दबाव में ऐसी अनियमितता की है, उनकी सैलरी से इसकी वसूली होनी चाहिए।

राजेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि भाजपा विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है और प्रत्येक गांव व घर तक सड़क पहुंचना आवश्यक है, लेकिन विकास की आड़ में किसानों को उजाड़ना और कानूनों को ताक पर रखना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने और जांच में किसी भी विधायक, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने प्रभावित किसानों की भूमि और सरकारी धन के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की भी मांग की। राणा ने विश्वास जताया कि सुजानपुर की जनता सब कुछ देख रही है और लोकतंत्र में अंततः सत्य सामने आकर रहेगा, तथा सरकार निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी।
    user_हमीरपुरी पत्रकार
    हमीरपुरी पत्रकार
    लम्बलू, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    19 hrs ago
  • प्रो राम कुमार जी ने ऊना बल्क ड्रग पार्क के मुद्दे पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की।
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    प्रो राम कुमार जी ने ऊना बल्क ड्रग पार्क के मुद्दे पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की।
    user_Himachal Punjab News
    Himachal Punjab News
    Local News Reporter मेहटपुर, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    23 hrs ago
  • वन विभाग ने जांगला के पास एक आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अभ्यास के माध्यम से विभाग ने किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।
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    वन विभाग ने जांगला के पास एक आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अभ्यास के माध्यम से विभाग ने किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।
    user_North India bulletin
    North India bulletin
    Jhanduta, Bilaspur•
    16 hrs ago
  • हिमाचल प्रदेश के बल्ह क्षेत्र में दूध उत्पादक किसानों को पिछले पाँच महीने से उनके दूध का भुगतान नहीं मिला है। किसानों ने आरोप लगाया है कि गाय के दूध के लिए 80 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 100 रुपये प्रति लीटर देने का जो वादा किया गया था, वह पूरा नहीं किया गया है। इस गंभीर समस्या के खिलाफ, बल्ह के किसानों ने सरकार के विरुद्ध अपना विरोध जताया है। किसानों के हक में खड़े होते हुए, विधायक इंद्र सिंह गांधी ने राज्यपाल को इस संबंध में एक ज्ञापन भी भेजा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दूध उत्पादकों को जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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    हिमाचल प्रदेश के बल्ह क्षेत्र में दूध उत्पादक किसानों को पिछले पाँच महीने से उनके दूध का भुगतान नहीं मिला है। किसानों ने आरोप लगाया है कि गाय के दूध के लिए 80 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 100 रुपये प्रति लीटर देने का जो वादा किया गया था, वह पूरा नहीं किया गया है।

इस गंभीर समस्या के खिलाफ, बल्ह के किसानों ने सरकार के विरुद्ध अपना विरोध जताया है। किसानों के हक में खड़े होते हुए, विधायक इंद्र सिंह गांधी ने राज्यपाल को इस संबंध में एक ज्ञापन भी भेजा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दूध उत्पादकों को जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
    user_BHK News Himachal
    BHK News Himachal
    Local News Reporter Rewalsar, Mandi•
    18 hrs ago
  • 15 जून, 2026 को आयोजित हुए कमरुनाग मेले की एक झलक सामने आई है, जिसमें भारी संख्या में भक्तजन पहुँचे। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने 'जय देव कमरुनाग जी' का जयघोष किया।
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    15 जून, 2026 को आयोजित हुए कमरुनाग मेले की एक झलक सामने आई है, जिसमें भारी संख्या में भक्तजन पहुँचे। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने 'जय देव कमरुनाग जी' का जयघोष किया।
    user_Hem Singh Chauhan
    Hem Singh Chauhan
    Engineer Balh, Mandi•
    14 hrs ago
  • जिला ऊना में वर्ष 2027 की जनगणना के प्रथम चरण का कार्य शुरू हो गया है।
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    जिला ऊना में वर्ष 2027 की जनगणना के प्रथम चरण का कार्य शुरू हो गया है।
    user_247 superfast ks
    247 superfast ks
    ऊना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    19 hrs ago
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