*“आत्मनिर्भर भारत” का नया अध्याय: गैस गायब, सिगड़ी शानदार!* वाह रे “आत्मनिर्भर भारत”…!जिस रसोई में कभी गैस चूल्हे की नीली लौ जलती थी, वहां अब सिगड़ी का धुआं उठ रहा है। लगता है विकास ने यू-टर्न ले लिया है—सीधे पुराने जमाने की ओर। गैस सिलेंडर की किल्लत ने लोगों को ऐसा “आत्मनिर्भर” बनाया है कि अब हर घर खुद ही लकड़ी, कोयला और जुगाड़ तलाश रहा है। शहर हो या गांव, सिगड़ी और चूल्हा फिर से “ट्रेंड” में हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब आम आदमी की रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि हर वैश्विक संकट का बोझ आखिर आम जनता ही क्यों उठाए? कभी जिन सिगड़ियों को छोड़कर लोग आधुनिकता की ओर बढ़े थे, आज वही मजबूरी बनकर वापस आ गई हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले ये जरूरत थी, अब सिस्टम की देन है। धुआं भी है, आंसू भी हैं…और साथ में एक तगड़ा तंज भी—“विकास” की इस रफ्तार में रसोई फिर अतीत में पहुंच गई। अब सवाल ये नहीं कि गैस कब आएगी… *“आत्मनिर्भर भारत” का नया अध्याय: गैस गायब, सिगड़ी शानदार!* वाह रे “आत्मनिर्भर भारत”…!जिस रसोई में कभी गैस चूल्हे की नीली लौ जलती थी, वहां अब सिगड़ी का धुआं उठ रहा है। लगता है विकास ने यू-टर्न ले लिया है—सीधे पुराने जमाने की ओर। गैस सिलेंडर की किल्लत ने लोगों को ऐसा “आत्मनिर्भर” बनाया है कि अब हर घर खुद ही लकड़ी, कोयला और जुगाड़ तलाश रहा है। शहर हो या गांव, सिगड़ी और चूल्हा फिर से “ट्रेंड” में हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब आम आदमी की रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि हर वैश्विक संकट का बोझ आखिर आम जनता ही क्यों उठाए? कभी जिन सिगड़ियों को छोड़कर लोग आधुनिकता की ओर बढ़े थे, आज वही मजबूरी बनकर वापस आ गई हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले ये जरूरत थी, अब सिस्टम की देन है। धुआं भी है, आंसू भी हैं…और साथ में एक तगड़ा तंज भी—“विकास” की इस रफ्तार में रसोई फिर अतीत में पहुंच गई। अब सवाल ये नहीं कि गैस कब आएगी…
*“आत्मनिर्भर भारत” का नया अध्याय: गैस गायब, सिगड़ी शानदार!* वाह रे “आत्मनिर्भर भारत”…!जिस रसोई में कभी गैस चूल्हे की नीली लौ जलती थी, वहां अब सिगड़ी का धुआं उठ रहा है। लगता है विकास ने यू-टर्न ले लिया है—सीधे पुराने जमाने की ओर। गैस सिलेंडर की किल्लत ने लोगों को ऐसा “आत्मनिर्भर” बनाया है कि अब हर घर खुद ही लकड़ी, कोयला और जुगाड़ तलाश रहा है। शहर हो या गांव, सिगड़ी और चूल्हा फिर से “ट्रेंड” में हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब आम आदमी की रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि हर वैश्विक संकट का बोझ आखिर आम जनता ही क्यों उठाए? कभी जिन सिगड़ियों को छोड़कर लोग आधुनिकता की ओर बढ़े थे, आज वही मजबूरी बनकर वापस आ गई हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले ये जरूरत थी, अब सिस्टम की देन है। धुआं भी है, आंसू भी हैं…और साथ में एक तगड़ा तंज भी—“विकास” की इस रफ्तार में रसोई फिर अतीत में पहुंच गई। अब सवाल ये नहीं कि गैस कब आएगी… *“आत्मनिर्भर भारत” का नया अध्याय: गैस गायब, सिगड़ी शानदार!* वाह रे “आत्मनिर्भर भारत”…!जिस रसोई में कभी गैस चूल्हे की नीली लौ जलती थी, वहां अब सिगड़ी का धुआं उठ रहा है। लगता है विकास ने यू-टर्न ले लिया है—सीधे पुराने जमाने की ओर। गैस सिलेंडर की किल्लत ने लोगों को ऐसा “आत्मनिर्भर” बनाया है कि अब हर घर खुद ही लकड़ी, कोयला और जुगाड़ तलाश रहा है। शहर हो या गांव, सिगड़ी और चूल्हा फिर से “ट्रेंड” में हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब आम आदमी की रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि हर वैश्विक संकट का बोझ आखिर आम जनता ही क्यों उठाए? कभी जिन सिगड़ियों को छोड़कर लोग आधुनिकता की ओर बढ़े थे, आज वही मजबूरी बनकर वापस आ गई हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले ये जरूरत थी, अब सिस्टम की देन है। धुआं भी है, आंसू भी हैं…और साथ में एक तगड़ा तंज भी—“विकास” की इस रफ्तार में रसोई फिर अतीत में पहुंच गई। अब सवाल ये नहीं कि गैस कब आएगी…
- वैश्य समाज द्वारा निकाली गई बाइक रैली 👆1
- अमरपाटन - स्थापना के लिए लाई गई माँ काली प्रतिमा में लगी आग,धू-धू कर जली काली जी की प्रतिमा, ऊपर से गुजर रही बिजली की तार से हुए शॉर्ट सर्किट होने से लगी प्रतिमा में आग,आग लगने के दौरान मची अफरा-तफरी का माहौल, चैत्र नवरात्री में स्थापना के जबलपुर से अमरपाटन के आजाद चौक ले जाई जा रही थी विराजमान करने के लिए प्रतिमा, समय रहते लोगो ने पाया आग पर काबू , बड़ा हादसा टला,अमरपाटन के गांधी चौक की घटना1
- पुलिस आरक्षक को दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि! सतना जिले के थाना रामपुर बाघेलान में बेला चौकी के अंतर्गत 112 डायल वाहन में तैनात आरक्षक विकास चतुर्वेदी की सड़क दुर्घटना में हुई मौत,जिनका पार्थिव शरीर रीवा जिले के उनके गृह ग्राम पथरी पहुंचा, जिनका अंतिम संस्कार आज उनके गृह ग्राम पथरी में किया गया, पुलिस आरक्षक के अंतिम संस्कार में रामपुर थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी एवं बेला चौकी प्रभारी इन्द्रबली सिंह सहित रामपुर पुलिस कर्मचारी ने उनके गृह ग्राम पथरी पहुंच कर भावपूर्ण श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि अर्पित किया! विनम्र श्रद्धांजलि1
- Post by Deepak Tiwari (Sonu)1
- सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले की एक अदालत ने पारिवारिक विवाद में अपनी ही बहन पर जानलेवा हमला करने वाले कलयुगी भाई को कड़े कारावास की सजा सुनाई है। माननीय न्यायाधीश मानवेन्द्र प्रताप सिंह की अदालत ने आरोपी विनीत पांडेय को दोषी करार देते हुए 7 साल के कठोर कारावास और 6 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। क्या था मामला? अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना उस समय हुई थी जब आरोपी विनीत पांडेय ने विवाद के दौरान अपनी सगी बहन पर हंसिया (दरांती) से हमला कर दिया था। इस हमले में पीड़िता का हाथ कट गया था और उसे गंभीर चोटें आई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और धारा 452 (घर में जबरन घुसना) के तहत मामला दर्ज किया था। न्यायालय का फैसला मामले की सुनवाई के दौरान एजीपी उमेश शर्मा ने सरकार की ओर से पैरवी की। गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने जानबूझकर हत्या के इरादे से अपनी बहन पर हमला किया था। अदालत ने आरोपी विनीत पांडेय को दोषी पाते हुए उसे 7 साल जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया। मध्य भारत न्यूज़ के लिए सतना से विशेष रिपोर्ट।1
- Post by Unchehra news1
- मैहर मे चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आज प्रथम दिन मां शारदा देवी मंदिर के पट विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खोल दिए गए। मंदिर खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे मंदिर परिसर में जय माता दी के जयकारे गूंज उठे। सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने मां शारदा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नवरात्रि के पहले दिन विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। नवरात्रि के इस शुभारंभ के साथ ही पूरे मैहर में भक्तिमय माहौल छा गया है और आने वाले नौ दिनों तक मां शारदा के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहने की संभावना है।3
- अमरपाटन - मौसम विभाग के अलर्ट के बाद अचानक बदला मौसम का मिजाज , तेज हवा के बाद अचानक बदला मौसम होने लगी अमरपाटन सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में तेज बारिश2