Shuru
Apke Nagar Ki App…
औरैया के थाना अयाना और जालौन के थाना कुठौंद क्षेत्र में 1 जुलाई से लागू प्रतिबंध के बावजूद यमुना नदी में भारी मात्रा में अवैध रूप से मछलियों का शिकार किया जा रहा है। मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए प्रशासन की ओर से नदी में मत्स्य आखेट पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद नदी में लगातार जाल डालकर धड़ल्ले से मछलियां पकड़ी जा रही हैं। प्रभावी कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है और मत्स्य विभाग तथा पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रजनन काल के दौरान हो रहा यह अवैध मत्स्य आखेट नदी की जैव विविधता और मत्स्य संपदा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि औरैया व जालौन पुलिस और मत्स्य विभाग मामले में सख्त कदम उठाते हैं या शिकायतों पर मौन साधे रखते हैं।
Kuldeep Diwakar
औरैया के थाना अयाना और जालौन के थाना कुठौंद क्षेत्र में 1 जुलाई से लागू प्रतिबंध के बावजूद यमुना नदी में भारी मात्रा में अवैध रूप से मछलियों का शिकार किया जा रहा है। मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए प्रशासन की ओर से नदी में मत्स्य आखेट पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद नदी में लगातार जाल डालकर धड़ल्ले से मछलियां पकड़ी जा रही हैं। प्रभावी कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है और मत्स्य विभाग तथा पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रजनन काल के दौरान हो रहा यह अवैध मत्स्य आखेट नदी की जैव विविधता और मत्स्य संपदा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि औरैया व जालौन पुलिस और मत्स्य विभाग मामले में सख्त कदम उठाते हैं या शिकायतों पर मौन साधे रखते हैं।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- औरैया में श्रावण मास, कांवड़ यात्रा और आगामी त्योहारों के दृष्टिगत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बुधवार को देवकली मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात, पार्किंग और साफ-सफाई समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मंदिर के पुजारियों व कर्मचारियों के साथ एक बैठक की गई। इस बैठक में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।2
- अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में औरैया के सदर तहसील परिसर में सैकड़ों सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान स्थिति को संभालने के लिए एसडीएम सदर ब्रह्मानंद सिंह कठेरिया ने प्रदर्शनकारी सपा नेताओं से वार्ता की। प्रदर्शन के बीच ही समाजवादी पार्टी ने 'एक्स' पर पोस्ट जारी कर बताया कि दिल्ली पुलिस ने अखिलेश यादव को रिहा कर दिया है। अखिलेश यादव की रिहाई की खबर मिलने के बाद पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं से धरना-प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की, हालांकि सपा ने ऐलान किया है कि छात्रों के हक की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।1
- श्रावण मास, कांवड़ यात्रा और आगामी त्योहारों के मद्देनजर औरैया के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने देवकली मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग और साफ-सफाई समेत अन्य सभी जरूरी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। स्थलीय निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों, मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए संबंधित लोगों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।4
- श्रावण मास, कांवड़ यात्रा और आगामी त्योहारों के दृष्टिगत 22 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी औरैया एवं पुलिस अधीक्षक औरैया ने देवकली मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। स्थलीय निरीक्षण के उपरांत पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मंदिर के पुजारियों व कर्मचारियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।4
- दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के विरोध में औरैया में सपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। मंगलवार शाम को जिला मुख्यालय पर पदाधिकारियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए अपना विरोध जताया। सदर तहसील में जिलाध्यक्ष सर्वेश बाबू गौतम के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया, जिसमें लालजी शुक्ला, प्रभाकर पांडेय, रश्मि यादव सहित दर्जनों नेता मौजूद रहे। इसके अलावा खानपुर चौराहे पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद इरशाद के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ, जिसमें पूर्व अध्यक्ष राजवीर यादव, पल्लवी पाल, शोभित यादव सहित कई कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष सर्वेश बाबू गौतम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जिस प्रकार छात्रों पर अत्याचार कर रही है, वह चिंताजनक होने के साथ ही छात्र हितों को दबाने का प्रयास भी है। वहीं एसडीएम सदर ब्रह्मानंद ने बताया कि सपा द्वारा प्रदर्शन किया गया था, लेकिन जैसे ही राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रिहाई की सूचना मिली, कार्यकर्ताओं का धरना तुरंत समाप्त हो गया।1
- उत्तर प्रदेश के औरैया स्थित सदर तहसील में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देर रात धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन अखिलेश यादव की कथित गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित किया गया था, जहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष सर्वेश बाबू गौतम, श्री लाल जी शुक्ला और दिबियापुर के पूर्व विधायक सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। विरोध जताने के बाद कार्यकर्ताओं ने एसडीएम सदर को अपनी दरखास्त सौंपी। इसके बाद सभी कार्यकर्ता शांतिपूर्वक मौके से रवाना हो गए।1
- ब्रजभूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी और वामपंथी लोगों पर छात्रों के पवित्र आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के इस पवित्र आंदोलन को लेफ्ट-राइट वालों ने फिर से हाईजैक कर लिया है और यह छात्रों के साथ धोखा हुआ है। ब्रजभूषण शरण सिंह के अनुसार, राहुल गांधी और वामपंथियों ने मिलकर छात्रों के इस आंदोलन को अपने कब्जे में ले लिया है।1
- ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के साथ अभद्रता और अराजकता के कई वीडियो कल से वायरल हो रहे हैं। इस दौरान कई महिला पत्रकारों के साथ जमकर बदसलूकी की गई है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, उनके कपड़े फाड़ दिए गए, मोबाइल छीन लिए गए और कैमरे तक तोड़ दिए गए हैं। इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि जब लोकतंत्र में अहिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा जायज नहीं है, तो सड़क पर काम कर रहे निहत्थे पत्रकारों के खिलाफ हिंसा को कैसे जायज ठहराया जा सकता है। यदि किसी को किसी न्यूज प्लेटफॉर्म, न्यूज प्रेजेंटर या उसके एडिटोरियल से कोई समस्या है, तो उसके खिलाफ विरोध दर्ज कराने के कई लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानून सम्मत तरीके उपलब्ध हैं। इस प्रकार की मारपीट, हिंसा और गुंडागर्दी से आंदोलन पवित्र होने के बजाय प्रदूषित होता है और इसे किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।1