आगरा के फतेहाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निबोहरा की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर नियुक्त प्रभारी चिकित्सक महीने में केवल 2 से 3 बार ही आते हैं और अधिकांश समय अस्पताल का संचालन केवल फार्मासिस्ट के भरोसे रहता है, जो मरीजों को दवाएं लिखने के साथ-साथ वितरित भी करते हैं। अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली हुई है और स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो कई महीनों से नियमित संचालन ही न हुआ हो। इस वजह से ग्रामीणों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चौधरी चरण सिंह) के जिला प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने ग्रामीणों और संगठन के तहसील अध्यक्ष (शिक्षा प्रकोष्ठ) रोहित प्रताप के साथ मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान दिमान सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने भी डॉक्टर के नियमित न आने की बात स्वीकार की। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), आगरा से फोन पर वार्ता की गई, जिस पर उन्होंने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मौके पर धीरेंद्र सिंह, होतम सिंह, पातीराम, ऊषा देवी, सोमोती देवी, पप्पू और प्रेमवती समेत कई लोग मौजूद रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र की तत्काल जांच कराकर नियमित डॉक्टर की तैनाती, साफ-सफाई और लापरवाह कर्मियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन करेंगे।
आगरा के फतेहाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निबोहरा की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर नियुक्त प्रभारी चिकित्सक महीने में केवल 2 से 3 बार ही आते हैं और अधिकांश समय अस्पताल का संचालन केवल फार्मासिस्ट के भरोसे रहता है, जो मरीजों को दवाएं लिखने के साथ-साथ वितरित भी करते हैं। अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली हुई है और स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो कई महीनों से नियमित संचालन ही न हुआ हो। इस वजह से ग्रामीणों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। इस गंभीर समस्या को लेकर
भारतीय किसान यूनियन (चौधरी चरण सिंह) के जिला प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने ग्रामीणों और संगठन के तहसील अध्यक्ष (शिक्षा प्रकोष्ठ) रोहित प्रताप के साथ मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान दिमान सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने भी डॉक्टर के नियमित न आने की बात स्वीकार की। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), आगरा से फोन पर वार्ता की गई, जिस पर उन्होंने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मौके पर धीरेंद्र सिंह, होतम सिंह, पातीराम, ऊषा देवी, सोमोती देवी, पप्पू और प्रेमवती समेत कई लोग मौजूद रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र की तत्काल जांच कराकर नियमित डॉक्टर की तैनाती, साफ-सफाई और लापरवाह कर्मियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन करेंगे।
- आगरा के फतेहाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) निबोहरा में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन चौधरी चरण सिंह के जिला प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने ग्रामीणों के साथ पीएचसी पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाया कि केंद्र पर तैनात प्रभारी चिकित्सक महीने में केवल दो-तीन बार ही आते हैं और अधिकांश समय पूरा अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे ही चलाया जाता है। मरीजों को समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श न मिलने के कारण उन्हें मजबूरन इलाज के लिए अन्य अस्पतालों की ओर भटकना पड़ रहा है। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली मिली और तमाम व्यवस्थाएं पूरी तरह अव्यवस्थित पाई गईं। ग्राम प्रधान दिमान सिंह ने भी डॉक्टर की नियमित अनुपस्थिति की बात दोहराते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान मौके पर रोहित प्रताप, धीरेंद्र सिंह, होतम सिंह, पातीराम, ऊषा देवी, सोमोती देवी, पप्पू और प्रेमवती सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। पूरे मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव को फोन पर दी गई, जिस पर उन्होंने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है। भाकियू ने चेतावनी दी है कि पीएचसी में नियमित डॉक्टर की तैनाती, साफ-सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार किया जाए, अन्यथा ग्रामीणों को एकजुट कर आंदोलन शुरू किया जाएगा।1
- आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने 21 जुलाई को फतेहाबाद स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं, ओपीडी, वार्डों और दवा वितरण का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने ओपीडी में मरीजों की स्थिति देखी और डॉक्टरों से इलाज की प्रक्रिया की जानकारी ली। इसके बाद वार्डों में भर्ती मरीजों से सुविधाओं के संबंध में पूछताछ की गई। डॉ. श्रीवास्तव ने दवा काउंटर पर पहुंचकर जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों को मरीजों के साथ शालीनता से व्यवहार करने, समय से इलाज देने और परिसर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के लिए कहा। निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में मौजूद आशा कार्यकत्रियों के साथ बैठक की। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि सभी लाभार्थियों के बैंक खाते जल्द से जल्द उपलब्ध कराए जाएं ताकि योजना की भुगतान राशि शीघ्र खातों में ट्रांसफर की जा सके। इस अवसर पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. अभिषेक चौहान समेत कई डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना शासन की मुख्य प्राथमिकता है और इस कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।2
- आगरा के फतेहाबाद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निबोहरा की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर नियुक्त प्रभारी चिकित्सक महीने में केवल 2 से 3 बार ही आते हैं और अधिकांश समय अस्पताल का संचालन केवल फार्मासिस्ट के भरोसे रहता है, जो मरीजों को दवाएं लिखने के साथ-साथ वितरित भी करते हैं। अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली हुई है और स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो कई महीनों से नियमित संचालन ही न हुआ हो। इस वजह से ग्रामीणों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चौधरी चरण सिंह) के जिला प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने ग्रामीणों और संगठन के तहसील अध्यक्ष (शिक्षा प्रकोष्ठ) रोहित प्रताप के साथ मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान दिमान सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने भी डॉक्टर के नियमित न आने की बात स्वीकार की। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), आगरा से फोन पर वार्ता की गई, जिस पर उन्होंने जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मौके पर धीरेंद्र सिंह, होतम सिंह, पातीराम, ऊषा देवी, सोमोती देवी, पप्पू और प्रेमवती समेत कई लोग मौजूद रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र की तत्काल जांच कराकर नियमित डॉक्टर की तैनाती, साफ-सफाई और लापरवाह कर्मियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन करेंगे।2
- आगरा जिले के डौकी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत कोलारा कला में जिंदा नानी को मृत बताकर जमीन हड़पने के मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।1
- सिरसागंज में सेहत की बहार देखने को मिल रही है, जहाँ आयोजित 'स्वस्थ मेला' में बेहद कम दामों पर शरीर की बड़ी जाँचें की जाएँगी। इस मेले के ज़रिए लोगों को बेहद कम खर्च में अपने शरीर की बड़ी स्वास्थ्य जाँचें कराने की सुविधा मिल रही है।1
- फिरोजाबाद में कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष रामनिवास यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यालय का घेराव करने के लिए प्रदर्शन निकाला। इस दौरान थाना रसूलपुर पुलिस ने बल्ले और रस्सी लगाकर प्रदर्शनकारी कांग्रेसियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही जमकर भाजपा विरोधी नारे लगाए।1
- जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि यह सच में छात्रों की आवाज़ है या किसी विचारधारा का समर्थन। प्रदर्शनकारियों की पहचान पर सवाल खड़े करते हुए पूछा गया है कि क्या ये वास्तव में छात्र हैं या राजनीति का नया चेहरा हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे पूरा वीडियो देखें, तथ्यों को समझें, सवाल पूछें और उसके बाद ही अपनी राय कायम करें।1
- बिना ठोस सबूत के किसी समूह पर सीधे आरोप लगाने के बजाय सामग्री को जिम्मेदार और सुरक्षित तरीके से पेश करने की बात कही गई है। "क्या ये छात्र हैं या बिके हुए लोग?" जैसे बयानों की जगह इसे "क्या ये छात्रों का आंदोलन है या राजनीतिक समर्थन?" जैसे प्रश्न या राय के रूप में रखना अधिक उचित बताया गया है। किसी भी मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने से बचने के लिए पहले सवाल उठाने, तथ्यों को गहराई से जानने और उसके बाद ही अपनी राय बनाने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही इस विषय पर पाठकों से भी उनकी राय पूछी गई है।1